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नीलोत्पल मृणाल

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

लॉकडाउन: अगर सच में कुछ जानना या पढ़ना है तो यह किताब बंद कर देने का समय है

इस लॉकडाउन को इतने भर के लिए दर्ज नहीं किया जा सकता कि लोगों ने किचन में क्या नया बनाना सीखा, कौन-सी नई फिल्म-वेब सीरीज़ देखीं या कितनी किताबें पढ़ीं. यह दौर भारतीय समाज के कई छिलके उतारकर दिखा रहा है, ज़रूरत है कि आपकी नज़र कहां है?

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मेरा झारखंड बनना अब भी बाकी है

कई बार पत्र-पत्रिकाओं के लेख आपको बता सकते हैं कि हमारे सपनों का झारखंड सपने से भी आगे जा चुका है पर इस सपने की सच्चाई देखनी हो तो गांव की पगडंडी पर आइये.

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वेद प्रकाश शर्मा ने न साहित्य के सामंतों के लिए लिखा, न उनके प्रमाण पत्र की ज़रूरत समझी

लाखों प्रतियों में बिकने वाले वेद प्रकाश ही तो हमारे रोल मॉडल हैं जो यकीं दिलाते हैं कि हिंदी में लिख के भी पेट और पॉकेट दोनों भरा जा सकता है.

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‘ये लेखन की परिपक्व उम्र नहीं, अभी थोड़ा और पकिए’

किस दिन, किस मुहूर्त में लेखक बना, याद नहीं न इसका जरा भी भान हुआ. बस याद रही इस यात्रा की वो सारी बातें जो खुद में एक उपन्यास है.