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ओम थानवी

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जब चार्ली चैप्लिन मिलने पहुंचे गांधी से

महात्मा गांधी से मिलने के बाद चार्ली चैप्लिन के शब्द थे, ‘अंततः जब वे (गांधी) पहुंचे और अपने पहनावे की तहें संभालते हुए टैक्सी से उतरे तो स्वागत में जयकारे गूंज उठे. उस छोटी तंग गरीब बस्ती में क्या अजब दृश्य था जब एक बाहरी शख़्स एक छोटे-से घर में जन-समुदाय के जयघोष के बीच दाख़िल हो रहा था.’

Bonn Climate Conference copy Reuters

बॉन यूएन क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस: जलवायु कूटनीति के बदलते समीकरण

जलवायु परिवर्तन के प्रकोपों को गुटों की कूटनीति में बंट कर नहीं, बल्कि मानवता का सामूहिक संकट समझ कर ही जूझा जा सकता है.

Vinod Verma2

राजस्थान के बाद अब छत्तीसगढ़, मीडिया पर टंगा फंदा

राजस्थान ने पत्रकारों पर क़ानून के दस्ताने पहनकर हाथ डाला. छत्तीसगढ़ और यूपी की पुलिस ने एक प्रतिष्ठित पत्रकार के घर में मुंह-अंधेरे घुसकर बेशर्मी का परिचय दिया.

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पाकिस्तान सिर्फ ‘टेररिस्तान’ नहीं है

पाकिस्तान सिर्फ़ एक स्टेट नहीं है; वहां लोग बसते हैं. नाकाबिल, संकीर्ण और फ़िरक़ापरस्त सरपरस्तों के ख़िलाफ़ वहां लोग बोलते हैं, जेल जाते हैं, जान देते हैं. वहां भी समाज है, नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे जुझारू युवक हैं, अच्छे दिनों की आस में बड़े हो रहे बच्चे है, लेखक और कलाकार हैं.

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मुक्तिबोध जन्मशती आयोजन का बहिष्कार मार्क्सवादी क्यों करने लगे?

लेखक संघों को अब पुराने ढर्रे की अपनी उस राजनीति पर फिर से सोचना चाहिए, जो लेखकों के विवेक पर भरोसा नहीं करती.

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क्या ‘वंदे मातरम्’ गीत राष्ट्रवा​द की भेंट चढ़ गया?

राष्ट्रगीत के थोपे जाने का विरोध करते-करते लोग गीत में ही खोट ढूंढने लगे हैं. मानो भूल रहे हों कि ‘वंदे मातरम’ कविता पहले है, राष्ट्रगीत बाद में. लगता है कविता राष्ट्रवाद की बहस में भेंट चढ़ गई है.

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‘भाजपा की जीत राष्ट्रवाद और मुस्लिम घृणा के पैरोकारों में नया जोश पैदा करेगी’

हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा ऐसे माहौल में समाज में सांप्रदायिक भय खड़ा करता है. हिंसा का भय 1984 के चुनाव में राजीव गांधी के रणनीतिकारों ने भी खड़ा किया था. तब राजीव गांधी ने भी जीत का कीर्तिमान बनाया था. यह कीर्तिमान अब मोदी-शाह ने बनाया है.

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नाज़ और लाज का इतना सरलीकरण भी न कीजिए, राजनाथजी!

भोपाल में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी के लिए काम करने वाले 11 भाजपा कार्यकर्ता पकड़े गए हैं. उन आरोपियों के माता-पिताओं ने उनसे अपना नाता तोड़ लिया है? अगर नहीं, तो वे माता-पिता, भारतीय होने के नाते, क्या अब नाज़ करने के क़ाबिल नहीं रहे, क्योंकि उनकी संतानें ‘ग़द्दार’ निकलीं?

फोटो : पीआईबी

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और फिर उसे चुप कराओ!

अच्छा होता केंद्र सरकार शैक्षिक परिसरों में खुलापन क़ायम करने का प्रयास करती. गुंडा तत्वों, उत्पात मचाने वालों और गुरमेहर को हत्या व रेप आदि की धमकी देने वालों की मुस्तैदी से धरपकड़ की जाती.

Narendra Modi Vadodhara Rally PTI

किसी भी प्रधानमंत्री ने मोदी जैसी स्तरहीन भाषा का प्रयोग नहीं किया

सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी भाषिक संयम के लिए नहीं जाने जाते हैं. मोदी की पकड़ भाषा और उसके नाटकीय इस्तेमाल पर कहीं ज़्यादा गहरी है.