Author Archives

रवीश कुमार

jay-modi-amit-shah-bjp

मानहानि-मानहानि, घोघो रानी, कितना पानी

क्या अंग्रेज़ी अख़बारों में छपी ख़बरों का हिंदी में अनुवाद करने पर भी मानहानि हो जाती है? अनुवाद की ख़बरों या पोस्ट से मानहानि का रेट कैसे तय होता है, शेयर करने वालों या शेयर किए गए पोस्ट पर लाइक करने वालों पर मानहानि का रेट कैसे तय होता है?

Ravish Kumar Narendra Modi PTI Youtube

प्रधानमंत्री जी! क्या मेरी जान को ख़तरा है: रवीश कुमार

पीएम को लिखे पत्र में रवीश ने कहा, ‘दुख की बात है कि अभद्र भाषा और धमकी देने वाले कुछ लोगों को आप ट्विटर पर फॉलो करते हैं. मुझे पूरी उम्मीद है कि धमकाने, गाली देने और घोर सांप्रदायिक बातें करने को आप फॉलो करने की योग्यता नहीं मानते होंगे.’

BHU Girls Protest

वाइस चांसलरों का भरोसा पुलिस और तोप पर बढ़ता जा रहा है…

बीएचयू में लाठीचार्ज शर्मनाक है. क्या वीसी ये बताना चाहते हैं कि लड़कियों का कोई हक़ नहीं इस लोकतंत्र में? लड़कियों से कहा गया कि तुम रेप कराने के लिए रात में बाहर जाती हो.

GST Protest PTI

जीएसटी की मार से व्यापारी बेहाल

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार बता रहे हैं कि टैक्स वसूलने को लेकर सरकार और व्यापारियों के बीच एक तरह की जंग चल रही है. व्यापारी डर के मारे बोल नहीं पा रहे हैं. कैमरा आॅन होता है तो तारीफ करने लगते हैं.

Make in india Modi Reuters

अबकी बार, इवेंट सरकार

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार लिखते हैं,‘ये इवेंट सरकार है. आपको इवेंट चाहिए इवेंट मिलेगा. किसी भी चीज़ को मेक इन इंडिया से जोड़ देने का फन सबमें आ गया जबकि मेक इन इंडिया के बाद भी मैन्यूफैक्चरिंग का अब तक का सबसे ख़राब रिकॉर्ड है.’ ​​​​​​​​

Ravish Kumar

मैंने प्रधानमंत्री को गुंडा नहीं बोला: रवीश कुमार

मैंने आॅनलाइन जगत के एक हिस्से को गुंडा और हत्यारा ज़रूर कहा है. प्रधानमंत्री के लिए कभी ऐसे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है.

pti modi

मोदी सरकार प्रेस रिलीज़ और विज्ञापन की सरकार है

मंत्रिमंडल के विस्तार को दंत कथाओं में मत बदलिए. ये सिर्फ राजनीतिक जुगाड़ का विस्तार है. मंत्री फेल नहीं हुए हैं, सरकार फेल हुई है, वो आइडिया फेल हुआ है जिसमें ज़बरन हवा भरी जा रही थी.

गुरमीत रामरहीम (फोटो: पीटीआई)

हमारा राजनीतिक वर्ग अंधविश्वास का सबसे बड़ा संरक्षक है

नेता कई तरह की गुप्त पूजा कराते हैं जिसका ख़र्च बीस-बीस लाख आता है. क्रिकेटर से लेकर सार्वजनिक जीवन का हर संभ्रांत प्रतीक अंधविश्वास का संरक्षक है, इसलिए सिरसा के डेरा समर्थकों को गंवारों की फौज न कहें.

Housing1280Reuters

मीडिया बादशाह की जूती हो चुकी है

क्या आम्रपाली और जेपी समूह के सताए फ्लैट ओनर पुलिस की गोली से मारे जा रहे किसानों को लेकर व्यथित हुए होंगे, क्या जंतर मंतर पर होने वाले धरनों से सहानुभूति रखते होंगे? क्या कभी नर्मदा के विस्थापितों के लिए अनशन कर रहीं मेधा पाटकर के लिए कुछ सोचा होगा?

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 71st Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2017.

प्रधानमंत्री से कौन पूछेगा कि पनामा पेपर मामले में क्या प्रगति हुई है?

अगर दो लाख शेल कंपनियां बंद हुई हैं, जो ब्लैक मनी को व्हाइट कर रही थीं तो क्या प्रधानमंत्री बता सकते हैं कि कितने लाख लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हुए है?

republic

ये टीवी ग़रीब विरोधी तो है ही, लोकतंत्र विरोधी भी हो गया है

टीवी ने लोकतंत्र का मतलब ही बदल दिया है. जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए नहीं. नेता का, नेता के द्वारा और नेता के लिए हो गया है.

Arvind Panagadhiya PTI

लगा था कि पनगढ़िया दो रोटी कम खा लेंगे लेकिन राष्ट्र निर्माण में लगे मोदी को छोड़कर नहीं जाएंगे

जल्दी रिटायर करने और पेंशन ख़त्म करने की नीतियों के समर्थक पनगढ़िया जी 65 साल की उम्र में स्थायी नौकरी की तलाश करते रहे.

PTI7_17_2017_000347B

‘सबसे बड़ा झूठ यह कहना है कि भारत का कोई दल भ्रष्टाचार से लड़ रहा है’

अगर सारे दल बीजेपी में शामिल हो जाएं तो हो सकता है कि प्रधानमंत्री टीवी पर ऐलान कर दें कि भारत से राजनीतिक भ्रष्टाचार ख़त्म हो गया है क्योंकि सब मेरे साथ आ गए हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi at Kisan Kalyan Mela, in Sehore, Madhya Pradesh on February 18, 2016.
	The Chief Minister of Madhya Pradesh, Shri Shivraj Singh Chouhan, the Union Ministers and other dignitaries are also seen.

क्या किसानों के नाम पर सरकार बीमा कंपनियों पर मेहरबान है?

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि फसल बीमा योजना के तहत प्राइवेट बीमा कंपनियों को भारी भरकम फंड देने के बाद भी, उनके खातों की ऑडिट जांच के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा गया है.

The Reserve Bank of India (RBI) seal is pictured on a gate outside the RBI headquarters in Mumbai July 30, 2013. India's central bank left interest rates unchanged on Tuesday as it supports a battered rupee but said it will roll back recent liquidity tightening measures when stability returns to the currency market, enabling it to resume supporting growth.  REUTERS/Vivek Prakash (INDIA - Tags: BUSINESS LOGO) - RTX124GY

एनपीए एकमात्र ऐसा घोटाला है जिसका कोई खलनायक नहीं है

10 बड़े बिजनेस समूहों पर 5 लाख करोड़ का कर्ज़ बक़ाया है. इन पांच लाख करोड़ के लोन डिफॉल्टर वालों के यहां मंत्री से लेकर मीडिया तक सब हाजिरी लगाते हैं.

boycott-chinese-products-in-india

क्या चाइनीज़ सामान का विरोध करने वाले चीनी निवेश का विरोध करेंगे?

चीन के साथ कारोबारी रिश्तों को सरकार और अर्थव्यवस्था की कामयाबी के रूप में पेश किया जाता है लेकिन जब कभी दोनों देशों में विवाद होता है तब लड़ियों-फुलझड़ियों का विरोध शुरू हो जाता है.

फोटो: पीटीआई

क्या भारत की राजनीति आयकर विभाग और सीबीआई तय करेंगे?

आयकर विभाग और सीबीआई भारत की राजनीति तय कर रहे हैं. भ्रष्टाचार तो मिटा नहीं, राजनीति तय कर देना भी कम बड़ा योगदान नहीं है.

gst12

‘तुझको तेरी जेटली की कसम, ओ प्यारे मोदी ये ज़ुल्म न कर’

धार्मिक भावना से लैस राजनीति और नेता में धार्मिक प्रवृत्ति, जनता के बड़े समूह का चरित्र किस तरह से बदल देती है, सूरत का आंदोलन उसकी मिसाल पेश कर रहा है.

mamata-banerjee-unrest-gjm.jpg.image.975.568

ममता बनर्जी से पूछा जाना चाहिए कि सांप्रदायिकता से निपटने का आपका बेंचमार्क क्या है?

ममता न तो अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोपों-अफवाहों पर लगाम कस पा रही हैं और न ही बहुसंख्यक उग्रता पर. आखिर सांप्रदायिकता को रोकने में बहुसंख्यक वोटों की सरकारों की तरह अल्पसंख्यक वोटों की सरकारें भी क्यों लाचार नज़र आती हैं?

l20170705110640

प्रोपेगैंडा तय करता है कि ख़ून का दाग़ भीड़ पर लगे और नेता निर्दोष नज़र आएं

भारत में सब हत्या करने वाली भीड़ को ही दोष दे रहे हैं. कोई नहीं जांच करता कि बिना आदेश के जो भीड़ बन जाती है उसमें शामिल लोगों का दिमाग़ किस ज़हर से भरा हुआ है.

1111--621x414

क्या अब भी कोई आडवाणी से मिलने जाता है!

लालकृष्ण आडवाणी ने अपने निवास में प्रेस कांफ्रेंस के लिए बाकायदा एक हॉल बनवाया था. तब अपनी प्रासंगिकता को लेकर कितने आश्वस्त रहे होंगे. कहीं ऐसा तो नहीं कि वे दिन में एक बार उस हॉल में लौटते होंगे. कैमरे और सवालों के शोर को सुनते होंगे.

Ravish Kumar Youtube

कौन हैं जो देवता होने की योग्यता रखते हैं, जिनके लिए पत्रकार नारद बन जाएं: रवीश कुमार

मुसलमान को मारने के लिए आपको तैयार नहीं किया जा रहा है. एक दिन किसी को भी मारने के लिए आपका इस्तेमाल किया जाएगा.

Ravish Kumar 1

‘एंटी रोमियो दस्ते के लोगों को किसी से प्रेम हो गया तो क्या होगा’

एंटी रोमियो दस्ते के किसी को प्रेम हो जाए तो प्रेम की तड़प में वे किसी पुराने कुर्ते की तरह चराचरा कर फट जाएंगे. दुआ करूंगा कि इस दस्ते को कभी किसी से प्यार न हो. प्रार्थना करूंगा कि उन्हें कम से कम किशोर कुमार के गाने सुनने की सहनशक्ति मिले.