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रवीश कुमार

Narendra Modi Rafale PTI

मोदी सरकार की नौ फीसदी सस्ते दर पर रफाल खरीदने की बात असल में झांसा है

2007 में 126 विमानों को भारत के हिसाब से तैयार करने के लिए अलग से 1.4 बिलियन यूरो देने थे. 2016 में 36 विमानों को तैयार करने लिए 1.3 बिलियन यूरो दिए जाने का फ़ैसला होता है. आप गणित में फेल भी होंगे तब भी इस अंतर को समझ सकते हैं कि खेल कहां हुआ है.

रेल मंत्री पीयूष गोयल (फोटो साभार: piyushgoyal.in)

रेल मंत्री अगर ठीक से काम करते, तो ट्विटर पर दिन भर अपना प्रचार नहीं करना पड़ता

कैग ने 2014-15 से लेकर 2016-17 के बीच दिए गए 463 कांट्रैक्ट में काम करने वाले ठेके के मज़दूरों के हालात की समीक्षा की है. रिपोर्ट देखेंगे तो पता चलेगा कि रेलवे बग़ैर किसी मंत्री के चल रहा है. राम भरोसे कहना ठीक नहीं क्योंकि राम भरोसे तो सारा देश चलता है.

अजित डोभाल के बेटे विवेक डोभाल (बाएं) और शौर्य डोभाल (दाएं). (फोटो साभार: ​कारवां पत्रिका)

कारवां का खुलासा: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटे की कंपनी टैक्स हेवन में

डी-कंपनी नाम से अब तक दाऊद का गैंग ही होता था. भारत में एक और डी कंपनी आ गई है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और उनके बेटे विवेक और शौर्य के कारनामों को उजागर करने वाली कारवां पत्रिका की रिपोर्ट में यही शीर्षक दिया गया है.

New Delhi: BJP National President Amit Shah addresses on the first day of BJP National Executive Meet, at Ramlila Maidan in New Delhi, Friday, Jan 11, 2019. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI1_11_2019_000121B)

कहीं अमित शाह अपने गुनाहों के इतने ग़ुलाम तो नहीं हो चुके कि हार से डर लगने लगा?

संस्थाएं ग़ुलाम हो चुकी हैं. मीडिया बाकायदा गोदी मीडिया हो चुका है, सब कुछ आपकी आंखों के सामने मैनेज होता दिख रहा है, फिर भी अमित शाह को क्यों डर लगता है कि 2019 में हार गए तो ग़ुलाम हो जाएंगे? क्या वे भाजपा के कार्यकर्ताओं को डरा रहे हैं? जीत के प्रति जोश भरने का यह कौन-सा तरीक़ा हुआ कि हार जाएंगे तो ग़ुलाम हो जाएंगे?

Savitribai Phule Wikipedia

सावित्री बाई फुले: जिन्होंने औरतों को ही नहीं, मर्दों को भी उनकी जड़ता और मूर्खता से आज़ाद किया

दुनिया में लगातार विकसित और मुखर हो रही नारीवादी सोच की ठोस बुनियाद सावित्रीबाई और उनके पति ज्योतिबा ने मिलकर डाली. दोनों ने समाज की कुप्रथाओं को पहचाना, विरोध किया और उनका समाधान पेश किया.

India Economy GST PTI

जेटली को कैसे समझ आ गया एक जीएसटी रेट, क्या आप समझ पाए?

जीएसटी रेट एक टैक्स से शुरू होता है और बाद में कई टैक्स आ जाते हैं या बढ़ने लगते हैं. या फिर कई टैक्स से शुरू होकर एक टैक्स की ओर जाता है. इसका मतलब है कि एक टैक्स को लेकर कोई ठोस समझ नहीं है. शायद जनता का मूड देखकर टैक्स के प्रति समझदारी आती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली (फोटो: पीटीआई)

किसानों की क़र्ज़ माफ़ी पर हंगामा, बैंकों को एक लाख करोड़ देने पर चुप्पी

सरकार सरकारी बैंकों में एक लाख करोड़ रुपये क्यों डाल रही है? किसान का लोन माफ़ करने पर कहा जाता है कि फिर कोई लोन नहीं चुकाएगा. यही बात उद्योगपतियों के लिए क्यों नहीं कही जाती?

Make in india Modi Reuters

प्रधानमंत्री जी! मोबाइल कंपनियां 120 हो गई हैं तो रोज़गार कितनों को मिला?

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया है कि 2014 के पहले देश में मोबाइल बनाने वाली सिर्फ 2 कंपनियां थीं, आज मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की संख्या 120 हो गई है. सवाल है कि कंपनियों की संख्या 2 से 120 हो जाने पर कितने लोगों को रोज़गार मिला?

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and BJP President Amit Shah during BJP Election committee meeting at BJP Headquarters in New Delhi on Sunday. PTI Photo by Vijay Verma (PTI4_8_2018_000160B)

अगर 35 लाख लोगों की नौकरी गई है तो मोदी-शाह किन्हें रोज़गार देने की बात कर रहे हैं

उन 35 लाख लोगों को प्रधानमंत्री सपने में आते होंगे, जिनके एक सनक भरे फैसले के कारण नौकरियां चली गईं. नोटबंदी से दर-ब-दर हुए इन लोगों तक सपनों की सप्लाई कम न हो इसलिए विज्ञापनों में हज़ारों करोड़ फूंके जा रहे हैं. मोदी सरकार ने साढ़े चार साल में करीब 5000 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट के विज्ञापनों पर ख़र्च किए हैं.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

चौरासी के दंगों पर दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला महान भारत के नागरिकों की निर्ममता के ख़िलाफ़ आया है

2002 की बात को कमज़ोर करने के लिए 1984 की बात का ज़िक्र होता है, अब 1984 की बात चली है तो अदालत ने 2013 तक के मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों तक का ज़िक्र कर दिया है.

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह. (फोटो: पीटीआई)

सुबोध कुमार सिंह उस राजनीति का शिकार हुए, जो अपने फायदे के लिए ज़हर पैदा करती है

एक ऐसी भीड़ है, जिसे नफ़रत की बातों से प्रोगाम किया जा चुका है. ये हर तरफ खड़ी है, ज़रा सी अफ़वाह की चिंगारी से एक्शन में आ जाती है. किसी को घेर लेती है, मार देती है और इससे हिंसा की जवाबदेही किसी नेता पर नहीं आती.

Mohd Aziz Photo Pinterest

एक उदास और ख़ाली दौर में अज़ीज़ की आवाज़ सावन की तरह थी

मोहम्मद अज़ीज़ के कई गानों में अमीरी और ग़रीबी का अंतर दिखेगा. हम समझते हैं कि गायक को गाने संयोग से ही मिलते हैं फिर भी अज़ीज़ उनके गायक बन गए जिन्हें कहना नहीं आया, जिन्हें लोगों ने नहीं सुना.

Sohrabuddin Amit Shah Judge Loya

अमित शाह का पीछा करती फ़र्ज़ी एनकाउंटर की ख़बरें और ख़बरों से भागता मीडिया

क्या अमित शाह कभी सोचते होंगे कि हरेन पांड्या की हत्या और सोहराबुद्दीन-कौसर बी-तुलसीराम एनकाउंटर की ख़बर ज़िंदा कैसे हो जाती है? अमित शाह जब प्रेस के सामने आते होंगे तो इस ख़बर से कौन भागता होगा? अमित शाह या प्रेस?

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो: ट्विटर/भाजपा)

पत्रकार रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए भाषण लिखा है, क्या वे इसे पढ़ सकते हैं?

भाजपा की सरकार ने उच्च शिक्षा पर उच्चतम पैसे बचाए हैं. हमारा युवा ख़ुद ही प्रोफेसर है. वो तो बड़े-बड़े को पढ़ा देता है जी, उसे कौन पढ़ाएगा. मध्य प्रदेश का पौने छह लाख युवा कॉलेजों में बिना प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक के ही पढ़ रहा है. हमारा युवा देश मांगता है, कॉलेज और कॉलेज में टीचर नहीं मांगता है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या भारत कैंसर से लड़ने को तैयार है?

भारत में कैंसर को लेकर कोई ज़िद किसी नेता में नज़र नहीं आती. कैंसर होते ही मरीज़ के साथ पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है. कई संस्थाएं कैंसर के मरीज़ों के लिए काम करती हैं मगर इसे लेकर रिसर्च कहां है, जागरूकता कहां है, तैयारी क्या है?

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

किसी दिन ये नेता सुप्रीम कोर्ट से कह देंगे कि जनादेश हमारे पास है, फैसला हम करेंगे

सरकार के पास अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराने का ढांचा और इरादा नहीं है तो फिर सुप्रीम कोर्ट को ही सरकार से पूछ लेना चाहिए कि हम आदेश देना चाहते हैं पहले आप बता दें कि आप लागू करा पाएंगे या नहीं.

Lalkrishna Advani

अकेलेपन का अंडमान भोगते आडवाणी

बेस्ट ऑफ 2018: लालकृष्ण आडवाणी ने अपने निवास में प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बाकायदा एक हॉल बनवाया था. तब अपनी प्रासंगिकता को लेकर कितने आश्वस्त रहे होंगे. कहीं ऐसा तो नहीं कि वे दिन में एक बार उस हॉल में लौटते होंगे. कैमरे और सवालों के शोर को सुनते होंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली (फोटो: पीटीआई)

क्या रिज़र्व बैंक के रिज़र्व पर सरकार की नज़र है?

एनडीटीवी की वेबसाइट पर मिहिर शर्मा ने लिखा है कि रिजर्व बैंक अपने मुनाफे से हर साल सरकार को 50 से 60 हज़ार करोड़ रुपये देती है. उसके पास साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिज़र्व है. सरकार चाहती है कि इस रिज़र्व से पैसा दे ताकि वह चुनावों में जनता के बीच गुलछर्रे उड़ा सके.

Modi CBI IB Officials PTI copy

रोशनी प्रधानमंत्री से आ रही है, इसलिए पुलिस आईबी को पीट रही है

हर किसी को हर किसी पर शक है. घर-घर शक है. दफ़्तरों में शक है. अधिकारियों में शक है. दिल्ली में रहते हैं तो बिना कॉलर वाली कमीज़ पहनकर चलें, वर्ना किस अफ़सर का आदमी किस आदमी को अफ़सर समझकर कॉलर पकड़ ले.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at a function to commemorate the 75th anniversary formation of the Azad Hind Government, at Red Fort, Delhi on October 21, 2018.

मोदी को प्रधान सेवक के साथ भारत का प्रधान इतिहासकार भी घोषित कर देना चाहिए

प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं क्योंकि वे इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक मनोहर पोथी लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम मोदी-मनोहर पोथी हो.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व अध्यक्ष अरुंधति भट्टाचार्य (फोटो: पीटीआई)

क्या लोकपाल सर्च कमेटी की सदस्य अरुंधति भट्टाचार्य रिलायंस समूह की स्वतंत्र निदेशक बन सकती हैं?

क्या लोकपाल सर्च कमेटी की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को उन्हें कमेटी से हटा नहीं देना चाहिए या अरुंधति भट्टाचार्य को ख़ुद से इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए?

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

स्कूलों की कक्षा भी बंट जाए हिंदू-मुसलमान में तो क्या बचेगा हिंदुस्तान में

राजनीति हमें लगातार बांट रही है. वह धर्म के नाम एकजुटता का हुंकार भरती है मगर उसका मक़सद वोट जुटाना होता है. एक किस्म की असुरक्षा पैदा करने के लिए यह सब किया जा रहा है. आप धर्म के नाम पर जब एकजुट होते हैं तो आप ख़ुद को संविधान से मिले अधिकारों से अलग करते हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: ट्विटर/@Gurpree46492633)

गुजरात की भीड़ से भागते यूपी-बिहार के लोग, यूपी-बिहार की भीड़ से कहां-कहां भागे लोग

गुजरात में मासूम से बलात्कार की घटना के बाद वहां के लोग यूपी-बिहार के लोगों के ख़िलाफ़ गोलबंद हो गए हैं. इसमें उनकी गलती नहीं. हाल के दिनों में बलात्कार को राजनीतिक रूप देने के लिए धार्मिक पृष्ठभूमि को उभारा गया है ताकि उसके बहाने एक समुदाय विशेष पर टूट पड़ें.

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत. (फोटो: पीटीआई)

क्या चुनाव आयोग भाजपा का चुनाव प्रभारी बन गया है?

चुनाव आयोग लगातार अपनी विश्वसनीयता से खिलवाड़ कर रही है. गुजरात विधानसभा की तारीख़ तय करने के मामले में यही हुआ. यूपी के कैराना में उपचुनाव हो रहे थे, आचार संहिता लागू थी और आयोग ने प्रधानमंत्री को रोड शो करने की अनुमति दी.

Narendra Modi at Amul Plant Twitter namo featured

रुपया 73 पर, बेरोज़गारी आसमान पर और प्रधानमंत्री इवेंट पर

अनिल अंबानी समूह पर 45,000 करोड़ रुपये का कर्जा है. अगर आप किसान होते और पांच लाख का कर्जा होता तो सिस्टम आपको फांसी का फंदा पकड़ा देता. अनिल अंबानी राष्ट्रीय धरोहर हैं. ये लोग हमारी जीडीपी के ध्वजवाहक हैं. भारत की उद्यमिता की प्राणवायु हैं.

Narendra Modi Gita Gopinath PTI Twitter

जब हार्वर्ड की गीता हार्डवर्क वाले मोदी से मिलेंगी, तो बैकग्राउंड में नोटबंदी के भाषण बजेंगे!

नरेंद्र मोदी ने कम से कम एक ऐसा आर्थिक समाज तो बना दिया है जो नतीजे से नहीं नीयत से मूल्यांकन करता है. मूर्खता की ऐसी आर्थिक जीत कब देखी गई है? गीता गोपीनाथ जैसी अर्थशास्त्री को नीयत का डेटा लेकर अपना नया शोध करना चाहिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली (फोटो: पीटीआई )

मोदी राज की मेहरबानी- अमीरों के 3 लाख करोड़ लोन माफ़ हुए, मंत्री ने ट्वीट तक नहीं किया

मोदी सरकार के चार सालों में 21 सरकारी बैंको ने 3 लाख 16 हज़ार करोड़ के लोन माफ़ किए हैं. यह भारत के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के कुल बजट का दोगुना है. सख़्त और ईमानदार होने का दावा करने वाली मोदी सरकार में तो लोन वसूली ज़्यादा होनी चाहिए थी, मगर हुआ उल्टा. एक तरफ एनपीए बढ़ता गया और दूसरी तरफ लोन वसूली घटती गई.

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अगर सरकार को अंबानी के लिए ही काम करना है तो अगली बार नारा दे, अबकी बार अंबानी सरकार

सितंबर 2016 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और फ्रांस के रक्षा मंत्री के बीच राफेल क़रार पर दस्तख़त हुए थे, उसके ठीक पहले रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने राफेल लड़ाकू विमानों की कीमतों को लेकर सवाल उठाए थे और इसे फाइल में दर्ज किया था.

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90 हज़ार करोड़ की डिफाल्टर आईएल एंड एफएस कंपनी डूबी तो आप भी डूबेंगे

बेस्ट ऑफ 2018: इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी सरकारी क्षेत्र की कंपनी आईएल एंड एफएस अपने क़र्ज़ों की किस्त नहीं चुका पा रही है. इसके चलते न केवल कई बड़े बैंक संकट में पड़ गए हैं बल्कि प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड में पैसा लगाने वाले आम लोगों की मेहनत की कमाई भी दांव पर लगी है.

People watch television sets displaying India's Finance Minister Arun Jaitley presenting the budget in parliament, at an electronic shop in the northern Indian city of Chandigarh February 28, 2015. Jaitley on Saturday announced a budget aimed at high growth, saying the pace of cutting the fiscal deficit would slow as he seeks to boost investment and ensure that ordinary people benefit. REUTERS/Ajay Verma (INDIA - Tags: BUSINESS)

न्यूज़ चैनल अब जनता के नहीं, सरकार के हथियार हैं

2019 का चुनाव जनता के अस्तित्व का चुनाव है. उसे अपने अस्तित्व के लिए लड़ना है. जिस तरह से मीडिया ने इन पांच सालों में जनता को बेदख़ल किया है, उसकी आवाज़ को कुचला है, उसे देखकर कोई भी समझ जाएगा कि 2019 का चुनाव मीडिया से जनता की बेदख़ली का आख़िरी धक्का होगा.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the ceremony to mark the release of two books on Indian Constitution, at Parliament House Annexe, in New Delhi on November 25, 2016.

भारत को लूटो-भारत से भागो, नई योजना आई है क्या प्रधानमंत्री जी!

अमित शाह ने दिल्ली में कहा है कि सौ करोड़ घुसपैठिये घुस गए हैं. जल्दी ही अमित शाह हर किसी को घुसपैठिया बता देंगे. जनता पूछेगी भी नहीं कि अमित भाई, बांग्लादेशी भगा रहे हैं या गुजरात को बदनाम करने वाले जतिन मेहता, नितिन संदेसरा, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को.

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राफेल डील: मोदी सरकार को अब कुतर्क छोड़कर सवालों के जवाब देने चाहिए

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद कि अंबानी का नाम भारत सरकार की तरफ से आया था, राफेल विवाद में संदेह की सूई निर्णायक रूप से नरेंद्र मोदी की तरफ़ मुड़ गई है.

New Delhi: Union Minister for Defence Nirmala Sitharaman waits to receive her Tajikistan counterpart Lieutenant General Sherali Mirzo at South Block in New Delhi on Thursday. PTI Photo by Manvender Vashist (PTI2_8_2018_000113B)

निर्मला जी को कोई याद दिलाए कि वे जेएनयू की नहीं, देश की रक्षा मंत्री हैं

अगर रक्षा मंत्री को विश्वविद्यालयों में इतनी ही दिलचस्पी है तो जियो इंस्टिट्यूट पर ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दें. बहुत सी यूनिवर्सिटी में शिक्षक नहीं हैं. जो अस्थायी शिक्षक हैं उनका वेतन बहुत कम हैं. इन सब पर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करें.

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क्या जनता के रूप में आपने बिल्कुल सोचना बंद कर दिया है?

एक केंद्रीय मंत्री जिसे इस वक़्त पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों को कम करने के लिए प्रयासरत होना चाहिए था तो वह विरोधी पक्ष के एक नेता के ज़मानत के दिन गिन रहा है. उनकी भाषा ट्रोल की तरह हो गई है.

New Delhi: A file photo of liquor baron Vijay Mallya. MEA (Ministry of External Affairs) revoked Mallya's passport under S.10(3)(c) & (h) of Passports Act," foreign ministry spokesman Vikas Swarup tweeted on Sunday.   PTI Photo  (PTI4_24_2016_000134B) *** Local Caption ***

माल्या को ‘माल्या’ किसने बनाया?

विजय माल्या ने हर दल की मदद से खुद को राज्यसभा में पहुंचाकर भारत की संसदीय परंपरा को उपकृत किया. मैं माल्या के इस योगदान का सम्मान करता हूं. इस मामले में प्रो-माल्या हूं. क्या माल्या बहुत बड़े राजनीतिक विचारक थे? जिन-जिन लोगों ने उन्हें संसद में पहुंचाया वो सामने आकर बोले तों. वन सेंटेंस में!

Modi Mllaya Jaitley Collage PTI Reuters

जनता एनपीए विवाद में उसी तरह उल्लू बन रही है जैसे हिंदू-मुस्लिम डिबेट में बनती है

अगर यह राजनीतिक विवाद किसी भी तरह से आर्थिक अपराध का है तो दस लाख करोड़ रुपये लेकर फरार अपराधियों के नाम लिए जाने चाहिए. किसके राज मे लोन दिया गया यह विवाद है, किसे लोन दिया गया इसका नाम ही नहीं है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and former prime minister Manmohan Singh during a release of the book titled "Moving On...Moving Forward: A Year in Office" published on experiences of M Venkaiah Naidu during his first year as Vice President of India and Chairman of Rajya Sabha, in New Delhi on Sunday, Sept 2, 2018. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI9_2_2018_000057B)

एनपीए को लेकर यूपीए और एनडीए की नीतियां और नीयत एक जैसी है

कुछ अमीर उद्योगपति और अमीर होते रहें, जनता हिंदू-मुस्लिम करती रहे, इसलिए कांग्रेस भी नहीं बताती है कि वह जब सत्ता में आएगी तो उसकी अलग आर्थिक नीति क्या होगी. भाजपा भी यह सब नहीं करती है जबकि वह सत्ता में है.

Modi Petrol Ad

सरकार ने पिछले चार साल में तेल के ज़रिये आपका ‘तेल’ निकाल दिया है

यूपीए ने 2005-06 से 2013-14 के बीच जितना पेट्रोल-डीज़ल की एक्साइज़ ड्यूटी से नहीं वसूला उससे करीब तीन लाख करोड़ रुपये ज़्यादा उत्पाद शुल्क एनडीए ने चार साल में वसूला है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi looks on during the launch of India Post Payments Bank (IPPB), in New Delhi on Saturday, Sept 1, 2018. (PTI Photo/Subhav Shukla) (PTI9 1 2018 000073B)

भाषणों के मास्टर मोदी पेट्रोल से लेकर रुपये पर क्यों नहीं बोल रहे हैं?

सरकार में हर कोई दूसरा टॉपिक खोजने में लगा है जिस पर बोल सकें ताकि रुपये और पेट्रोल पर बोलने की नौबत न आए. जनता भी चुप है. यह चुप्पी डरी हुई जनता का प्रमाण है.

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यूनीफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा भी बोगस निकला

यूनीफॉर्म सिविल कोड के नाम पर चैनलों और अखबारों में कितनी बहस चलाई गई और मुसलमानों के प्रति नफ़रत का वट वृक्ष खड़ा किया जाता रहा. इस डिबेट में पहले भी कुछ नहीं था, अब भी कुछ नहीं है.