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रीतू तोमर

Chandigarh: Migrants from various districts of Uttar Pradesh ride bicycles to reach their native places, during the ongoing COVID-19 lockdown, in the outskirts of Chandigarh, Saturday, May 16, 2020. (PTI Photo)(PTI16-05-2020 000071B)

‘वे जल्द से जल्द लौटना चाहते थे कि बच्चों को देख सकें, पर ऐसे आएंगे ये नहीं सोचा था’

बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के एक गांव के रहने वाले सगीर अंसारी दिल्ली में सिलाई का काम करते थे. लॉकडाउन के दौरान काम न होने और जमापूंजी ख़त्म हो जाने के बाद वे अपने भाई और कुछ साथियों के साथ साइकिल से घर की ओर निकले थे, जब लखनऊ में एक गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.

सफूरा जरगर. (फोटो साभार: फेसबुक/safoorazargar)

सफूरा जरगर के ख़िलाफ़ छिड़ा चरित्र हनन अभियान क्या बताता है

सच्चाई यह है कि साल 2018 में सफूरा की शादी एक कश्मीरी युवक से हुई थी. सफूरा और उनका परिवार पहले से ही उनकी गर्भावस्था से वाकिफ था और यही वजह थी कि उनके वकील ने सफूरा की गर्भावस्था को ध्यान में रखते हुए अप्रैल में ही उनकी जमानत की गुहार लगाई थी.

Twelve-year-old prostitute Mukti applies makeup before serving a customer inside her small room at a brothel in Faridpur, located in central Bangladesh February 22, 2012. REUTERS/Andrew Biraj

लॉकडाउन: सरकारी मदद के अभाव में बढ़ीं सेक्स वर्कर्स की मुश्किलें

कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र हुए लॉकडाउन ने हज़ारों कामगारों पर आजीविका का संकट ला दिया है, जिससे उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी चलनी मुश्किल हो गई है. इन कामगारों में सेक्स वर्कर्स भी शामिल हैं.

Men remove debris in a riot affected area following clashes between people demonstrating for and against a new citizenship law in New Delhi, February 27, 2020. REUTERS/Rupak De Chowdhuri

दिल्ली हिंसा के दौरान यौन उत्पीड़न का शिकार हुई महिलाओं की आपबीती

दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान जान-माल के नुकसान के अलावा बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ बदसलूकी की घटनाएं हुई हैं, लेकिन ये ख़ौफ़ज़दा पीड़ित पुलिस में शिकायत दर्ज कराना तो दूर इसके बारे में बात करने से भी कतरा रही हैं.

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दंगे में हिम्मत न हारने वाली महिलाओं की कहानी

वीडियोः अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन महिलाओं की कहानी, जो दिल्ली दंगों का दंश झेल चुकी हैं पर अभी भी डटकर खड़ी हैं और असल मायनों में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी हुईं हैं. रीतू तोमर की रिपोर्ट.

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दिल्ली दंगा: मार्केट जल गया, अब हम अपना क़र्ज़ कैसे उतारें?

वीडियोः पिछले सप्ताह उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में गोकलपुर का टायर मार्केट भी जलकर खाक हो गया था. मार्केट के पास ही पुलिस थाना होने के बावजूद न तो दंगाइयों में डर था न ही पुलिस ने दंगाइयों को रोकने की कोशिश की. अब यहां के दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट है, कर्ज के बोझ से दबे ये लोग सरकार से मार्केट को फिर से खोलने की गुहार लगा रहे हैं. इसी पर रीतू तोमर की रिपोर्ट.

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‘युद्ध में भी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं लेकिन दिल्ली दंगे में ऐसा नहीं हुआ’

वीडियो: दिल्ली दंगों पर जन स्वास्थ्य अभियान नाम की संस्था की ओर से एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें इस दौरान उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाया गया है. सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर भी रिपोर्ट बनाने वाली टीम का हिस्सा थे और उनका कहना है कि जिस समय दिल्ली दंगों में जल रही थी, सरकारें जनता के बीच न होकर सोशल मीडिया पर सक्रिय थीं. उनसे रीतू तोमर की बातचीत.

बीएसएफ जवान मोहम्मद अनीस का घर (फोटोः द वायर)

दिल्ली हिंसाः दंगों की आंच में बीएसएफ जवान का घर जलकर ख़ाक, सेना मदद को आगे आई

उत्तर पूर्वी दिल्ली की हालिया हिंसा में खजूरी खास इलाके में रहने वाले बीएसएफ जवान मोहम्मद अनीस का घर भी उपद्रवियों ने जला दिया था. ओडिशा में पोस्टिड मोहम्मद अनीस के घर के पुनर्निर्माण में अब बीएसएफ मदद करेगी.

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दिल्ली हिंसा के दौरान सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का था बुरा हाल, सरकार मूकदर्शक बनी रही: रिपोर्ट

जन स्वास्थ्य अभियान नाम की संस्था की ओर से जारी एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हिंसा के दौरान सरकार पीड़ितों को समुचित इलाज मुहैया कराने में असमर्थ रही और कई जगह मरीज़ों को भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा.

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शाहीन बाग: चौबीस घंटे धरना दे रहीं महिलाएं घर कैसे संभाल रहीं हैं?

वीडियोः बीते दो से अधिक महीनों से नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में शाहीन बाग में धरना दे रहीं महिलाएं अपना घर-बार कैसे संभाल रहीं हैं और शाहीन बाग से प्रदर्शन स्थल को कहीं और शिफ्ट करने के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर ये महिलाएं क्या सोचती हैं। इन्हीं मुद्दों पर रीतू तोमर की इन महिलाओं से बातचीत।

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शाहीन बाग़ में सड़क किनारे बना किताबों का संसार

वीडियो: दिल्ली के शाहीन बाग बीते दो महीने से नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर हो रहे प्रदर्शन के बीच किताबों की एक दुनिया भी बन गई है. यहां के एक बस स्टॉप पर फातिमा शेख़ सावित्री बाई फुले लाइब्रेरी चल रही है, जो यहां आने वालों का ध्यान खींच रही है. रीतू तोमर की रिपोर्ट.

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पंजाब से शाहीन बाग पहुंचे किसानों ने कहा, धर्म के आधार पर दूसरा बंटवारा नहीं होने देंगे

वीडियोः नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में बीते लगभग दो महीने से दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहे लोगों को समर्थन देने के लिए पंजाब के एक किसान संगठन से लगभग 350 किसान शाहीन बाग पहुंचे, जिनमें 15 महिला किसान भी हैं. इन किसानों से रीतू तोमर की बातचीत.

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दिल्ली के सरकारी स्कूल पर अरविंद केजरीवाल के दावों पर क्या बोले लोग?

वीडियो: 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल सरकार ने सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने का वादा किया था. बीते पांच साल में सरकारी स्कूल और शिक्षा कितनी बदली, इस पर बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों से रीतू तोमर की बातचीत.

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दिल्ली विधानसभा चुनावः क्या मंगोलपुरी सीट से भाजपा खाता खोल पाएगी?

वीडियो: दिल्ली की मंगोलपुरी विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी की ओर से एक बार फिर राखी बिड़लान चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस से राजेश लिलोटिया और भाजपा से कर्म सिंह कर्मा को टिकट दिया गया है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट से भाजपा एक बार भी खाता नहीं खोल पाई है. इलाके के तमाम मुद्दों पर स्थानीय लोगों से रीतू तोमर की बातचीत.

लाल क़िला. (फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमंस)

दिल्ली विधानसभा चुनावः चांदनी चौक के चुनावी मैदान में पुराने चेहरे नए दल के साथ उतरे

देश का व्यापारिक केंद्र कहे जाने वाले चांदनी चौक विधानसभा क्षेत्र में 1998 से 2013 तक लगातर चार बार कांग्रेस जीती है, लेकिन 2015 में आम आदमी पार्टी की अलका लांबा ने इस सीट से जीत दर्ज की. 1993 में पहली और आखिरी बार भाजपा इस सीट से जीती थी.