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संतोष मेहरोत्रा

भारत सरकार की संशोधित वैक्सीन नीति अब भी राष्ट्रीय हित का उल्लंघन है

कोविड-19 टीकाकरण में निजी क्षेत्र की विफलता दिखाती है कि केंद्र सरकार को टीकों की सौ फीसदी ख़रीद करनी चाहिए और समान मूल्य निर्धारण नीति अपनानी चाहिए.

विकास की धीमी रफ़्तार और बढ़ता नौकरियों का संकट

सांख्यिकी मंत्रालय के राष्ट्रीय सर्वेक्षण संगठन ने 2017-18 में वार्षिक श्रम बल सर्वेक्षण करना शुरू किया, जो अब तक केवल हर पांच वर्षों पर होता था. हाल में एनएसओ ने अपना तीसरा वार्षिक सर्वेक्षण 2019-20 जारी किया, जिसके आंकड़ों से पता चलता है कि श्रम बल भागीदारी की स्थिति अब भी दुरुस्त नहीं है.

केंद्र को कोविड टीकाकरण के लिए समान मूल्य निर्धारण की नीति अपनानी चाहिए

एकाधिक मूल्य निर्धारण, यानी केंद्र के लिए एक मूल्य और निजी अस्पतालों के लिए अलग मूल्य – किसी भी तर्क के विपरीत है. राष्ट्रीय आपातकाल के समय में ऐसा करना निर्माताओं को अधिक लाभ अर्जित करने की अनुमति देना है और सौदे पर बातचीत करने वाले दोनों पक्षों की ओर से संदिग्ध उद्देश्यों की बू आती है.

नया सामाजिक सुरक्षा क़ानून मज़दूरों के हक़ में कितना हितकारी होगा

सितंबर 2020 में भारत सरकार द्वारा मज़दूरों के हित का दावा करते हुए लाए गए सामाजिक सुरक्षा क़ानून में असंगठित मज़दूरों के लिए बहुत कुछ नहीं है, जबकि देश के कार्यबल में उनकी 91 प्रतिशत भागीदारी है.