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संतोषी मरकाम

Mohalla Clinic Delhi The Wire

दिल्ली की आम जनता की उम्मीदों पर कितने खरे उतरे मोहल्ला क्लीनिक?

ग्राउंड रिपोर्ट: स्वास्थ्य सेवाओं को जन सुलभ बनाने के उद्देश्य से 2016 में दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत की थी. सरकार का वादा एक हज़ार क्लीनिक खोलने का था, लेकिन फिलहाल दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे 210 क्लीनिक काम कर रहे हैं.

Mohalla Clinic Delhi The Wire

​ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक की ज़मीनी हक़ीक़त

वीडियो: दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने 2016 में मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत की थी. सरकार का वादा पूरे दिल्ली में हज़ार मोहल्ला क्लीनिक खोलने का था, लेकिन वर्तमान में दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में 210 मोहल्ला क्लीनिक काम कर रहे हैं. द वायर की संतोषी मरकाम ने ऐसे ही कुछ मोहल्ला क्लीनिक का दौरा किया और उनकी स्थिति जानी.

सरदार सरोवर बांध के विस्थापितों के उचित पुनर्वास की मांग को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर मध्य प्रदेश में बड़वानी ज़िले के छोटा बड़दा गांव में सत्याग्रह कर रही हैं. (फोटो साभार: नर्मदा बचाओ आंदोलन)

सरदार सरोवर बांध: लोगों का पुनर्वास करने की जगह उन्हें डुबाने पर क्यों अमादा है सरकार?

सरदार सरोवर बांध में बारिश का पानी भरने से मध्य प्रदेश में नर्मदा घाटी में बसे 192 गांव और एक कस्बे के डूबने का ख़तरा है. इससे लगभग 32 हज़ार लोग प्रभावित होंगे. सुप्रीम कोर्ट के तमाम आदेशों के बावजूद यहां रहने वाले लोग आज भी पुनर्वास का बाट जोह रहे हैं.

Narmada Protest Delhi The Wire

सरदार सरोवर: बढ़ता जलस्तर, ख़तरे में ज़िंदगियां

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर सरदार सरोवर बांध का जलस्तर घटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने आए मध्य प्रदेश के ग्रामीणों और नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं से संतोषी मरकाम की बातचीत.

गौतम बुद्धनगर जिला का दादरी (फोटो: संतोषी मरकाम)

पाकिस्तानी वाली गली: दादरी के इस मोहल्ले में रहने वाले लोग परेशान क्यों?

ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर ज़िले के दादरी स्थित गौतमपुरी इलाके की एक गली का नाम ‘पाकिस्तानी वाली गली’ होने वजह से यहां रह रहे लोगों को परेशानी और अपमान का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को कहना है कि इस नाम की वजह से उन्हें जल्दी कहीं काम नहीं मिलता और स्कूल बच्चों को दाख़िला देने में भी आनाकानी करते हैं.

संजय कॉलोनी (फोटो: मोहम्मद मेहरोज/द वायर)

‘सरकार हमें पानी-गंदगी की समस्याओं से आगे बढ़ने दे तो शिक्षा या दूसरी चीज़ों के बारे में सोचें’

ग्राउंड रिपोर्ट: लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मीडिया के मुद्दे भले ही हिंदू-मुस्लिम, पाकिस्तान, राष्ट्रवाद आदि के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी में दक्षिणी दिल्ली की संजय कॉलोनी के रहवासी रोज़ाना पानी की जद्दोजहद, सीवर व्यवस्था और बस्ती में साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए ही लड़ रहे हैं.

धर्म कोड के लिए धरना दे रहे आदिवासी प्रतिनिधि
(फोटो संतोषी)

क्यों अलग धर्म की मांग कर रहे हैं आदिवासी?

आदिवासियों की मांग है कि उनके धर्म को मान्यता दी जानी चाहिए और धर्म के कॉलम में उन्हें ट्राइबल या अबॉरिजिनल रिलीजन चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए.

दिल्ली के मोतीनगर में स्थित डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स (फोटो: संतोषी मरकाम/द वायर)

डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स: ‘उन्हें सीवर में जबरन उतारा गया, हादसे के बाद किसी ने ख़बर तक नहीं दी’

ग्राउंड रिपोर्ट: पश्चिम दिल्ली के मोती नगर इलाके में स्थित डीएलएफ कॉम्प्लेक्स में सीवेज टैंक साफ करते समय दम घुटने की वजह से पांच लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों के परिजनों का आरोप है कि हाउसकीपिंग के लिए रखे गए कर्मचारियों को टैंकों की सफाई के लिए मजबूर किया गया था.

Mirchpur Anoo Bhuyan the Wire

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या मिर्चपुर का ज़ख़्म कभी भर सकेगा?

21 अप्रैल 2010 को हरियाणा के हिसार ज़िले के मिर्चपुर गांव में जाट समुदाय के लोगों ने दलितों के दर्जनों घरों में आग लगा दी थी और दो लोगों को ज़िंदा जला दिया था. हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने 33 लोगों को दोषी ठहराया और 12 लोगों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.