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शाह आलम ख़ान

Migrants, who were found at sea on a boat, collect rainwater during a heavy rain fall at a temporary refugee camp near Kanyin Chaung jetty, outside Maungdaw township, northern Rakhine state, Myanmar June 4, 2015. REUTERS/Soe Zeya Tun

क्या रोहिंग्याओं के लिए उम्मीद नाम का कोई कोना बचा हुआ है?

दुनिया ने रोहिंग्याओं के ख़िलाफ़ सहानुभूति में इतनी कंजूसी दिखाई है कि सहानुभूति की कोई भी अपील ईश्वर की आवाज़ की तरह सुनाई देती है.