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विशाल जायसवाल

पत्रकार तरुण सिसोदिया. (फोटो साभार: फेसबुक)

दिल्ली: क्या कोरोना संक्रमित पत्रकार तरुण सिसोदिया ने वाकई आत्महत्या की?

दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में कोविड-19 का इलाज करा रहे दैनिक भास्कर में कार्यरत पत्रकार तरुण सिसोदिया की बीते छह जुलाई को मौत हो गई. एम्स प्रशासन ने दावा किया था कि उन्होंने अस्पताल की चौथी मंज़िल से कूदकर जान दे दी. उनकी मौत की जांच किए जाने की मांग के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एक जांच समिति का गठन किया है.

हिंदू राव अस्पताल. (फोटो साभार: फेसबुक)

नॉर्थ एमसीडी के दो अस्पतालों के डॉक्टरों को तीन महीनों से नहीं मिला वेतन, इस्तीफ़े की धमकी दी

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले अस्पतालों में काम करने वाले क़रीब 3,000 डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को तीन महीने से अधिक समय से वेतन नहीं मिला है. डॉक्टरों के विभिन्न संगठन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपराज्यपाल अनिल बैजल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को पत्र लिख चुके हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

यूपी: 13 घंटे तक आठ अस्पतालों द्वारा भर्ती से कथित तौर पर इनकार के बाद गर्भवती की मौत

उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद शहर का मामला. आरोप है कि आठ माह की गर्भवती पत्नी को लेकर युवक सुबह से शाम तक ग़ाज़ियाबाद से लेकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक के अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा, लेकिन कहीं बेड न होने और कहीं पत्नी में कोरोना वायरस के लक्षण होने की बात कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया.

अपनी नवजात बच्ची सहित अपने चार बच्चों के साथ रेशमा. (फोटो: द वायर)

सात दिन के बच्चे की मां को लॉकडाउन में फंसे पति का इंतजार

वीडियो: बीते 24 मार्च को हुए देशव्यापी लॉकडाउन में गुड़गांव में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले नानबाबू फंस गए. इस दौरान कालिंदी कुंज में रहने वाले पड़ोसियों ने चंदा इकट्ठा कर उनकी पत्नी रेशमा की डिलीवरी कराई और खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं. विशाल जायसवाल की रिपोर्ट.

अपनी नवजात बच्ची सहित अपने चार बच्चों के साथ रेशमा. (फोटो: द वायर)

दिल्ली: लॉकडाउन में फंसे पति के इंतज़ार में एक मां का संघर्ष

दिल्ली के कालिंदी कुंज के श्रम विहार इलाके में बसे एक कैंप में रहने वाली 23 वर्षीय रेशमा के पति दिहाड़ी मज़दूर हैं, जो लॉकडाउन के चलते गुड़गांव में फंस गए हैं. रेशमा ने दस दिन पहले बेटी को जन्म दिया है. बिना पैसे और खाने के वह पड़ोसियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद के सहारे रह रही हैं.

Kalindi Kunj Video

‘एक टाइम खाना मिलता है, भूख लगती है तो सो जाते हैं’

वीडियो: दिल्ली के कालिंदी कुंज के श्रम विहार इलाके में बसे शरणार्थी कैंप में रहने वाले करीब 400 परिवार लॉकडाउन में सरकारी मदद न मिलने से निराश हैं. पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश के साथ म्यांमार से आकर यहां बसे रोहिंग्या शरणार्थियों से विशाल जायसवाल की बातचीत.

Migrants wait to board a bus to their native villages, during a nationwide lockdown imposed in the wake of coronavirus pandemic, at Kaushambi in Ghaziabad, Saturday, March 28, 2020.
(Photo: PTI)

पलायन कर रहे मज़दूरों ने कहा, बीमारी से भी मरना है और भूख से भी

वीडियो: कोरोना वायरस के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन के बाद दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले दिहाड़ी मज़दूर अपने-अपने घर जाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गईं बसों में जगह पाने के लिए देर रात भटकते रहे. गाजियाबाद के कौशाम्बी बस अड्डे पर मज़दूरों से विशाल जायसवाल की बातचीत.

Dainik Bhaskar Sana Marine Interview

फिनलैंड की पीएम का फ़र्ज़ी इंटरव्यू छापने पर दैनिक भास्कर को प्रेस काउंसिल ने भेजा नोटिस

द वायर से बातचीत में दैनिक भास्कर की ओर से कहा गया, ‘हम अपने फ्रीलांस पत्रकार सिद्धार्थ राजहंस के धोख़े का शिकार हुए हैं. उन्होंने हमसे जालसाज़ी की है. हम उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी क़दम उठा रहे हैं. साथ ही फिनलैंड के प्रधानमंत्री कार्यालय और दूतावास को माफ़ीनामा भी भेज रहे हैं.

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‘सरकार में बैठे लोगों ने सांप्रदायिक माहौल बनाकर कराए दंगे’

साक्षात्कार: बीते रविवार से दिल्ली में शुरू हुए दंगे की आग में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय से लेकर दिल्ली पुलिस तक पूरा प्रशासनिक महकमा मूकदर्शक बना रहा. दंगा रोकने में नाकाम रही दिल्ली पुलिस पिछले कुछ समय से अपनी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवालों के घेरे में है. सांप्रदायिकता, दंगा और पुलिस की भूमिका पर पूर्व आईपीएस अधिकारी और ‘शहर में कर्फ्यू’ के लेखक विभूति नारायण राय से विशाल जायसवाल की बातचीत.

Delhi Violence

दिल्ली दंगों के दौरान पुलिस को देखकर लगा मानो उसे लकवा मार गया हो: पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह

साक्षात्कार: बीते रविवार से दिल्ली में शुरू हुए दंगे की आग में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 300 से अधिक लोग घायल हैं. इस दौरान दिल्ली पुलिस की भूमिका पर लगातार उठ रहे सवालों पर पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह से विशाल जायसवाल की बातचीत.

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‘राजनीतिक दबाव के चलते दंगा रोकने में नाकाम हुई दिल्ली पुलिस’

वीडियो: बीते रविवार से दिल्ली में शुरू हुए दंगे की आग में अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय से लेकर दिल्ली पुलिस तक पूरा प्रशासनिक महकमा मूकदर्शक बना रहा. दंगा रोकने में नाकाम रही दिल्ली पुलिस पिछले कुछ समय से अपनी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवालों के घेरे में है. सांप्रदायिकता, दंगा और पुलिस की भूमिका पर पूर्व आईपीएस अधिकारी और ‘शहर में कर्फ्यू’ के लेखक विभूति नारायण राय से विशाल जायसवाल की बातचीत.

स्थानीय लोगों से बात करते नागरिक सत्याग्रह के सदस्य. (फोटो: द वायर)

नागरिकता क़ानून: यूपी में नागरिक सत्याग्रह निकाल रहे छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता गिरफ़्तार

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी पर गाजीपुर स्थित सदर के एसडीएम प्रभास कुमार ने कहा कि इस समूह को किसी भी जुलूस की अनुमति नहीं थी और उनके पास से जो पर्चे मिले उसमें सीएए-एनआरसी के विरुद्ध भी कुछ बातें थीं. उनकी गिरफ़्तारी केवल अव्यवस्था फैलाने की आशंकाओं पर की गई है.

(फोटो: द वायर)

जेएनयू हिंसा: एक महीने बाद भी कार्रवाई न होने पर शिक्षकों का पुलिस हेडक्वार्टर पर प्रदर्शन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को एक पत्र लिखकर जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है. शिक्षक संघ के अध्यक्ष डीके लोबियाल ने कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषी पकड़े नहीं जाएंगे तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

शाहीन बाग. (फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को कितना प्रभावित करेगा शाहीन बाग़?

दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर हमला करने के लिए शाहीन बाग़ में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ क़रीब दो महीने से चल रहे प्रदर्शन का इस्तेमाल कर रही है. यह मुद्दा न सिर्फ भाजपा के स्थानीय नेता उठा रहे हैं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत हर भाजपा नेता शाहीन बाग़ के प्रदर्शन के नाम पर दिल्ली के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करते दिखे हैं.

गांधीनगर मार्केट. (फोटो: द वायर)

दिल्ली चुनाव: गांधीनगर सीट पर आप, कांग्रेस और भाजपा में किसका पलड़ा भारी?

एशिया के कपड़ों का सबसे बड़ा मार्केट कहा जाने वाला पूर्वी दिल्ली का गांधीनगर व्यापारियों का इलाका है. गांधीनगर सीट लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रही है. साल 1993 में भाजपा ने यह सीट जीती थी जिसके बाद लगातार चार बार कांग्रेस नेता अरविंदर सिंह लवली ने यहां से जीत दर्ज की. हालांकि साल 2015 में आम आदमी पार्टी की लहर में कांग्रेस का यह किला भी ढह गया.