प्रासंगिक

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मेरा झारखंड बनना अब भी बाकी है

कई बार पत्र-पत्रिकाओं के लेख आपको बता सकते हैं कि हमारे सपनों का झारखंड सपने से भी आगे जा चुका है पर इस सपने की सच्चाई देखनी हो तो गांव की पगडंडी पर आइये.

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

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मशहूर गायिका गिरिजा देवी पर शास्त्रीय गायिका विद्या राव से विनोद दुआ की बातचीत

ठुमरी की मलिका कही जाने वाली प्रख्यात शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी का कोलकाता में 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

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न खाता न बही, जो चचा केसरी कहें वही सही

पुण्यतिथि विशेष: 13 वर्ष की उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने वाले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी के पास लगभग 35 वर्षों तक सांसद और तीन सरकारों में मंत्री रहने के बावजूद दिल्ली में अपना घर नहीं था.

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विश्व खाद्य दिवस: दुनिया में भूखे लोगों की क़रीब 23 फ़ीसदी आबादी भारत में रहती है

तमाम योजनाओं के ऐलान और बहुत सारे वादों के बावजूद देश में भूख व कुपोषण से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ रही है.

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आंबेडकर ने हिंदू धर्म क्यों छोड़ा?

14 अक्टूबर 1956 को आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. वे देवताओं के संजाल को तोड़कर एक ऐसे मुक्त मनुष्य की कल्पना कर रहे थे जो धार्मिक तो हो लेकिन ग़ैर-बराबरी को जीवन मूल्य न माने.

साभार: competitionzenith.blogspot.in

जब जेपी के जीवित रहते हुए संसद ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी थी…

जन्मदिन विशेष: गैरकांग्रेसवाद का सिद्धांत भले ही डाॅ. राममनोहर लोहिया ने दिया था लेकिन उसकी बिना पर कांग्रेस की केंद्र की सत्ता से पहली बेदखली 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तत्वावधान में ही संभव हुई.

जयप्रकाश नारायण. (जन्म: 11 अक्टूबर 1902  मृत्यु: 08 October 1979)

कहते हैं उनको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है…

पुण्यतिथि विशेष: आपातकाल की चर्चा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की चर्चा न की जाए.

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‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 70 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है.

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‘अनशन में चतुर खिलाड़ी नहीं मरते. वे एक आंख मेडिकल रिपोर्ट पर और दूसरी मध्यस्थ पर रखते हैं’

हरिशंकर परसाई का व्यंग्य: बाबा ने शान्ति से कहा, ‘देवी, तू तो ‘इशू’ है. ‘इशू’ से थोड़े ही पूछा जाता है. गोरक्षा आंदोलन वालों ने गाय से कहां पूछा था कि तेरी रक्षा के लिए आंदोलन करें या नहीं.’

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दूसरे देशों में गाय दूध के लिए होती है, हमारे यहां दंगा करने के लिए

जनता जब आर्थिक न्याय की मांग करती है, तब उसे किसी दूसरी चीज में उलझा देना चाहिए. क्रांति की तरफ बढ़ती जनता को हम रास्ते में ही गाय के खूंटे से बांध देते हैं.

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एक राष्ट्रपति चुनाव, जिसने ‘इंदिरा युग’ की शुरुआत की

प्रासंगिक: 1969 में हुए पांचवें राष्ट्रपति चुनाव ने इंदिरा गांधी को अबाध नियंत्रण स्थापित करने का मौका दिया, लेकिन इससे कहीं ज़्यादा इस ख़तरनाक विचार को बढ़ावा दिया कि सिर्फ़ एक नेता यह फैसला लेने में सक्षम है कि देश और उसकी जनता के लिए क्या सर्वश्रेष्ठ है.

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जब नेहरू ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर ज़ुल्म हो रहे हैं तो क्या हम भी यहां वही करें?

जन्मदिन विशेष: नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन से निकले अकेले ऐसे नायक हैं, जिनकी विचारधारा और पक्षधरता में कोई विरोधाभास नहीं है.

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1987 के मेरठ दंगों ने बाबरी विवाद की पृष्ठभूमि तैयार कर दी थी

प्रासंगिक: यह वास्तव में एक त्रासदी है कि जिन लोगों के पास यह सुनिश्चित करने की क्षमता थी कि भारत सांप्रदायिकता के बवंडर में न फंस जाए, उनमें से कोई भी मेरठ हिंसा के असली रूप को पहचान नहीं पाया.

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जब बाबरी विध्वंस के एक दिन पहले बाजपेयी ने कहा था, ज़मीन को समतल करना पड़ेगा…

अटल बिहारी बाजपेयी ने एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि वहां (अयोध्या) नुकीले पत्थर निकले हैं. उन पर तो कोई नहीं बैठ सकता तो जमीन को समतल करना पड़ेगा, बैठने लायक करना पड़ेगा.

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हिंदुस्तानियों की एकता मज़हबों के मेल पर नहीं, मज़हबों की चिता पर होगी: राहुल सांकृत्यायन

इस्लाम शक्ति और विश्व-बंधुत्व का धर्म कहलाता है, हिंदू धर्म ब्रह्मज्ञान और सहिष्णुता का धर्म बतलाया जाता है, किंतु क्या दोनों धर्मों ने इस दावे को कार्यरूप में परिणत करके दिखलाया?

On 20 May 1951, Dr. Ambedkar addressed a conference on the occasion of Buddha Jayanti organised at Ambedkar Bhawan, Delhi. The Guest of Honour was the then Ambassador of France in India. Shankaranand Shastri is seen on the right in the photograph.

जब तक हिंदू सामाजिक व्यवस्था बनी रहेगी, अस्पृश्यों के प्रति भेदभाव भी बना रहेगा: डॉ. आंबेडकर

भेदभाव का मूल हिंदुओं के हृदयों में बसे हुए उस भय में निहित है कि मुक्त समाज में अस्पृश्य अपनी निर्दिष्ट स्थिति से ऊपर उठ जाएंगे और हिंदू सामाजिक व्यवस्था के लिए ख़तरा बन जाएंगे.

New Delhi: Parliament during the first day of budget session in New Delhi on Tuesday. PTI Photo by  Kamal Kishore  (PTI2_23_2016_000104A)

आज ही के दिन 1947 में पेश हुआ हिंदू कोड बिल, ​कट्टरपंथियों ने काटा था बवाल

आज जैसे तीन तलाक़ में बदलाव की मांग को कट्टरपंथी धड़ा इस्लाम में दख़ल बताता है, कुछ वैसा ही आज़ादी के बाद हिंदू रूढ़ियों में बदलाव किए जाने पर अतिवादियों ने उसे हिंदू धर्म पर हमला बताया था.

Jyotiba

हर मनुष्य को आज़ाद होना चाहिए, यही उसकी बुनियादी ज़रूरत है: जोतिबा फुले

किसी समय ब्राह्मणों की राजसत्ता में हमारे पूर्वजों पर जो भी कुछ ज़्यादतियां हुईं, उनकी याद आते ही हमारा मन घबरा कर थरथराने लगता है.

इलाहाबाद हाइकोर्ट (फोटो: पीटीआई)

कौन क्या खाएगा, इसे सरकार तय नहीं कर सकती: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खानपान को जीने के अधिकार से जोड़ते हुए मीट की दुकानों पर लगी रोक को ग़लत बताया, व्यापारियों को लाइसेंस जारी करने का निर्देश.

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संस्कृति के नाम पर लोगों को आसानी से भड़काया और बरगलाया जा सकता है: अज्ञेय

मुस्लिम मजलिस की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मूल में भी वही दूषित, संकीर्ण और कठमुल्लई मनोवृत्ति है, और वह एक लौकिक भारतीय समाज और खरी राष्ट्रीयता के विकास में बाधक होगी.