मीडिया

पत्रकार कमल शुक्ला (फोटो: ट्विटर/तामेश्वर सिंह)

छत्तीसगढ़: कांग्रेस नेताओं ने कथित तौर पर पत्रकार पर हमला किया, एफआईआर दर्ज

छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले का मामला. पत्रकार कमल शुक्ला ने कांग्रेस नेताओं पर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है. वहीं एक कांग्रेस नेता ने कमल शुक्ला पर जान से मारने की धमकी देने की शिकायत पुलिस से की है. पुलिस इसे आपसी रंज़िश का मामला बता रही है.

AKi 22 September.00_24_42_14.Still005

डिजिटल मीडिया से मोदी सरकार को क्यों डर लगता है?

वीडियो: सुदर्शन टीवी के विवादित कार्यक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में मीडिया नियमन के प्रस्ताव पर केंद्र ने कहा है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की जगह ऐसा पहले डिजिटल मीडिया के लिए किया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

2307 Gondi.00_10_50_19.Still091

मीडिया बोल: बॉलीवुड की जगह नए ‘चलचित्रपुरम्’ की तैयारी!

वीडियो: सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या-हत्या के लंबे चले विवाद के बाद अब सत्ताधारियों और टीवी चैनलों के निशाने पर सीधे बॉलीवुड है. इसी विषय पर फिल्म समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज और टीवी पत्रकार डॉ. मुकेश कुमार से वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश की बातचीत.

पत्रकार शांतनु भौमिक. (फोटो साभार: फेसबुक/शांतनु भौमिक)

त्रिपुराः पत्रकार की हत्या के तीन साल बाद भी परिवार को इंसाफ़ का इंतज़ार

त्रिपुरा में एक राजनीतिक पार्टी के प्रदर्शन को कवर करने गए स्थानीय टीवी चैनल के पत्रकार शांतनु भौमिक की 20 सितंबर 2017 को हत्या कर दी गई थी. जून 2018 में मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने मामला सीबीआई को सौंपा था. अब पत्रकारों ने जांच की धीमी रफ्तार को लेकर नाराज़गी जताई है.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: रॉयटर्स)

अभिव्यक्ति की आज़ादी और मानवीय गरिमा में संतुलन को लेकर चिंतित: सुप्रीम कोर्ट

सुदर्शन टीवी के विवादित कार्यक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में अदालत के मीडिया नियमन के प्रस्ताव पर केंद्र ने एक हलफनामे में कहा है कि अगर वे इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के लिए दिशानिर्देश देना ज़रूरी समझते हैं, तो समय की दरकार है कि ऐसा पहले डिजिटल मीडिया के लिए किया जाना चाहिए.

फ्रीलांस पत्रकार प्रशांत कनौजिया.

यूपी: महीने भर से जेल में बंद पत्रकार प्रशांत कनौजिया की ज़मानत पर 4 हफ़्ते बाद सुनवाई होगी

पत्रकार प्रशांत कनौजिया को एक ट्वीट के चलते 18 अगस्त को यूपी पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. सोमवार को यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में दायर उनकी ज़मानत याचिका पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है, जिसके लिए अदालत ने अनुमति दे दी है.

fake-news_pixabay-1200x600

पश्चिम बंगाल: चुनाव क़रीब आने के साथ आई प्रोपेगेंडा चैनल और समाचार वेबसाइट की बाढ़

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. एक पड़ताल में साल 2018 से अब तक 30 से अधिक ऐसी वेबसाइट और चैनल्स सामने आए हैं, जो असत्यापित और पक्षपाती सामग्री के साथ फ़ेक न्यूज़ चलाते हैं.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब/Increasing Diversity by Increasing Access)

मीडिया में संदेश जाना चाहिए कि समुदाय विशेष को निशाना नहीं बनाया जा सकता: जस्टिस चंद्रचूड़

सुदर्शन न्यूज़ के एक कार्यक्रम के विवादित एपिसोड के प्रसारण की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का किसी पर रोक लगाना न्यूक्लियर मिसाइल की तरह है, लेकिन हमें आगे आना पड़ा क्योंकि किसी और द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी.

पत्रकार राजीव शर्मा. (फोटो: यूट्यूब)

दिल्ली: चीन की इंटेलिजेंस को संवेदनशील जानकारी देने के आरोप में पत्रकार गिरफ़्तार

दिल्ली पुलिस ने रणनीतिक मामलों के विश्लेषक और स्तंभकार राजीव शर्मा को आधिकारिक गोपनीयता क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया है. पुलिस का कहना है कि उनके पास से रक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेज़ मिले हैं. शर्मा ने हाल ही में चीन के अख़बार ग्लोबल टाइम्स के लिए एक लेख लिखा था.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: रॉयटर्स)

प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए पर्याप्त नियमन मौजूद, डिजिटल मीडिया का नियमन पहले हो: केंद्र

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि डिजिटल मीडिया के नियमन संबंध में फ़ैसला लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह बहुत तेज़ी से लोगों के बीच पहुंचता है और वॉट्सएप, ट्विटर तथा फेसबुक जैसी ऐप के चलते किसी भी जानकारी के वायरल होने की संभावना रहती है.

AKI 27 August 2020.00_32_15_04.Still010

मीडिया बोल: रेडियो रवांडा के नक़्शेक़दम पर भारतीय न्यूज़ चैनल

वीडियो: ख़बरें देने के नाम पर भारतीय टीवी चैनलों पर कोई ‘यूपीएससी ज़िहाद’ दिखा रहा है, तो कोई पढ़े-लिखों को किसी झूठे केस में फंसाने की सियासी साज़िश में जुटा है. मीडिया बोल की इस कड़ी में इन्हीं मुद्दों पर सत्य हिंदी के संपादक शीतल सिंह और वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता से चर्चा कर रहे हैं उर्मिलेश.

(फोटो: ट्विटर/@kamranyousuf_)

जम्मू कश्मीर: दो पत्रकारों ने मुठभेड़ कवर करने के दौरान पुलिस पर पिटाई का आरोप लगाया

दोनों फोटो पत्रकारों दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के मारवाल गांव में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच गोलीबारी की घटना को कवर करने गए थे.

(फोटो साभार: फेसबुक)

अमरावती ज़मीन घोटाला मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर पाबंदी लगाई

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का यह आदेश भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो द्वारा एक पूर्व क़ानून अधिकारी और अन्य आरोपियों पर दर्ज एफआईआर के संदर्भ में है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ब्यूरो उनके ख़िलाफ़ ग़लत इरादे से काम कर रहा है और पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने के साथ मीडिया ट्रायल में बदला जा रहा है.

(फोटो साभार: ट्विटर/@@SureshChavhank)

सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम को मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश कहा, लगाई रोक

सुदर्शन न्यूज़ के बिंदास बोल कार्यक्रम के ‘नौकरशाही जिहाद’ एपिसोड के प्रसारण को रोकते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की शीर्ष अदालत होने के नाते यह कहने की इजाज़त नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं. और यह नहीं कहा जा सकता कि पत्रकार को ऐसा करने की पूरी आज़ादी है.

मोहाली एयरपोर्ट पर सुरक्षाकर्मियों से घिरी अभिनेत्री कंगना रनौत. (फोटो: पीटीआई)

सुशांत-कंगना का सुर्ख़ियों में बने रहना मीडिया की छद्म जनमत निर्माण की बढ़ती ताक़त की बानगी है

मीडिया के पास कुछ हद तक जनमत निर्माण की ताक़त हमेशा से थी, मगर उसकी एक सीमा थी, उनके द्वारा उठाए मुद्दे में कुछ दम होना ज़रूरी होता था. आज हाल यह है कि मीडिया में भारत-चीन सीमा विवाद से ज़्यादा तवज्जो कंगना रनौत विवाद को दी जा रही है.