राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह (फोटो: रॉयटर्स)

मोदी-शाह को मिली क्लीनचिट को चुनौती देने के लिए नई याचिका दायर करें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव की याचिका पर कोई आदेश पास करने से इनकार करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन के बारे में शिकायतों पर फैसला कर लिया है. ऐसी स्थिति में इन आदेशों को चुनौती देने के लिए नई याचिका दायर करनी होगी.

आईएएस अधिकारी अवनि लवासा. (फोटोः फेसबुक)

प्रेस को रिश्वत: लेह चुनाव अधिकारी ने कहा, भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ आरोप प्रथम दृष्टया सही

जम्मू कश्मीर के लेह में दो मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर मीडियाकर्मियों को रिश्वत देने का आरोप है. इस मामले में जांच का आदेश देने वाली लेह जिले की चुनाव अधिकारी अवनि लवासा चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की बेटी हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

चुनाव आयोग को भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ मिलीं सबसे अधिक आचार संहिता उल्लंघन की शिकायतें

इस लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की कुल 46 शिकायतें मिलीं. इनमें से 29 भाजपा, 13 कांग्रेस, दो समाजवादी पार्टी और एक-एक टीआरएस और बसपा नेताओं के ख़िलाफ़ थीं.

Forbesganj: Prime Minister Narendra Modi addresses an election rally at Araria lok sabha constituency, in Forbesganj, Saturday, April 20, 2019. (PTI Photo) (PTI4_20_2019_000038B)

राजीव गांधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर वन’ कहने वाले बयान पर भी चुनाव आयोग ने मोदी को क्लीनचिट दी

चुनाव आयोग अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आचार संहिता उल्लंघन के नौ मामलों में क्लीनचिट दे चुका है.

केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की मुरैना लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो साभार: फेसबुक)

मध्य प्रदेश: मोदी सरकार में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को क्यों अपनी सीट बदलनी पड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्रों में से एक केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मध्य प्रदेश की ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद हैं, लेकिन इस बार वे ग्वालियर के बजाय मुरैना संसदीय क्षेत्र से मैदान में हैं.

Yogi Adityanath Model Village

जिस गांव को योगी आदित्यनाथ ने गोद लिया, वो किस हाल में है?

ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोरखपुर के जंगल औराही गांव को गोद लिया है.

Shopian: Security personnel stand guard outside a polling station during the fifth phase of Lok Sabha elections, in Shopian district, Monday, May 6, 2019. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI5_6_2019_000219B)

जम्मू कश्मीर: बुरहान वानी के गांव और पुलवामा-शोपियां ज़िले के 320 केंद्रों पर एक भी वोट नहीं पड़ा

जम्मू कश्मीर के पुलवामा और शोपियां ज़िले में सड़कें सुनसान रहीं, मतदान केंद्र लगभग ख़ाली पड़े रहे. पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने वाले आतंकी के गांव में सिर्फ़ 15 वोट डाले गए.

(फोटो: द वायर)

मोदी सरकार के पांच सालों में कितना स्वतंत्र रह पाया सुप्रीम कोर्ट

मोदी सरकार के पांच सालों के बाद सुप्रीम कोर्ट डरा हुआ, बंटा हुआ और कमज़ोर नज़र आता है, जो एक ताकतवर केंद्र सरकार को चोट पहुंचाने से बचता हुआ दिखता है.

बिहार के मुख्यमंत्री नी​तीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

पांच साल में बिहार की नीतीश सरकार ने विज्ञापन पर ख़र्च किए तक़रीबन पांच अरब रुपये

विशेष रिपोर्ट: सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार बिहार में राबड़ी देवी सरकार ने साल 2000 से 2005 के दौरान 23 करोड़ 48 लाख रुपये विज्ञापन पर ख़र्च किए थे. वहीं ​नीतीश कुमार सरकार ने पिछले पांच साल में विज्ञापन पर 4.98 अरब रुपये ख़र्च किए हैं.

नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पर 8 अप्रैल 2019 को भाजपा का घोषणापत्र जारी करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह. (फोटो: रॉयटर्स)

क्या मोदी-शाह ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ को चरितार्थ कर रहे हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण उनके समर्थकों में हिट हो सकते हैं मगर तटस्थ, विरोधी और नए मतदाताओं को लुभाने वाले कतई नहीं हैं.

किरोड़ी लाल मीणा. (फोटो साभार: फेसबुक)

राजस्थान: क्या किरोड़ी लाल मीणा अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं?

राजस्थान में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता किरोड़ी लाल मी​णा ने 17 टिकट अपने चहेतों को दिलवाए थे, इन सभी को हार का सामना करना पड़ा था. इस बार लोकसभा चुनाव में मीणा की पसंद के किसी भी प्रत्याशी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया.

Narendra-Modi-Manmohan-Singh PTI

मोदी सरकार को बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि 2014 में मोदी अच्छे दिन के वादे के साथ सत्ता में आए थे. उनका पांच साल का कार्यकाल भारत के युवाओं, किसानों, व्यापारियों और हर लोकतांत्रिक संस्था के लिए सर्वाधिक त्रासदीपूर्ण और विनाशकारी रहा है.