विज्ञान

Srinagar: A doctor collects samples for immunoglobulin (Ig) blood test against coronavirus disease, at Barzulla Bone and Joint Hospital in Srinagar, Monday, June 15, 2020. Authorities organised testing among health care workers as positive cases and deaths increase day-by-day in the Jammu and Kashmir. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI15-06-2020_000102B)

आईसीएमआर को कोरोना हॉटस्पॉट का सीरो-प्रीवलेंस डेटा प्रकाशित करने से रोका गया: रिपोर्ट

मीडिया में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कोविड-19 की व्यापकता का अनुमान लगाने के लिए भारत के पहले राष्ट्रीय सीरो-प्रीवलेंस सर्वेक्षण के शोधकर्ताओं से 11 मई और 4 जून के बीच 10 शहरों के हॉटस्पॉट से एकत्र किए गए डेटा को शोध-पत्र से हटाने के लिए कहा था.

Kolkata: Kolkata Municipal Corporation (KMC) health workers prepare before collecting swab samples of residents for COVID-19 test, at a residential society in Kolkata, Sunday, Aug. 23, 2020. (PTI Photo/Ashok Bhaumik)(PTI23-08-2020 000042B)

प्लाज़्मा थेरेपी कोविड-19 मृत्यु दर को कम करने में कारगर साबित नहीं हो रही है: आईसीएमआर अध्ययन

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा वित्त पोषित एक अध्ययन के लिए कुल 464 मरीज़ों को शामिल किया गया था. इस दौरान प्लाज़्मा थेरेपी वाले 235 मरीज़ों में से 34 और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट लेने वाले 229 मरीज़ों में से 31 की मौत हुई थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

भारत में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के दूसरे चरण का मानव परीक्षण शुरू

महाराष्ट्र के पुणे स्थित भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कोरोना वैक्सीन का इंसानों पर दूसरे चरण का परीक्षण शुरू हुआ है. कोविड-19 और एंटीबॉडी परीक्षण की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद दो लोगों को वैक्सीन की खुराक दी गई है, उन पर निगरानी रखी जा रही है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और चीन में विकसित कोविड वैक्सीन के सफल ट्रायल का दावा

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और चीन में बनाए गए वैक्सीन के अब तक किए गए मानव परीक्षणों में इम्यून सिस्टम के बेहतर होने के संकेत मिले हैं. अब अगले ट्रायल में ये पता लगाया जाएगा कि इससे कोरोना वायरस को रोका जा सकता है या नहीं.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

एम्स के पैनल ने कोरोना वायरस वैक्सीन के मानव परीक्षण की मंज़ूरी दी

एम्स की एथिक्स कमेटी ने स्वदेशी तौर पर विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ के मानव परीक्षण की अनुमति दी है. इसके लिए 20 जुलाई से रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

विशेषज्ञों ने संसदीय समिति से कहा, 2021 से पहले कोविड-19 की वैक्सीन बनना मुमकिन नहीं

शुक्रवार को संसद में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश की अध्यक्षता वाले पैनल की बैठक में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने में भारत की अहम भूमिका रहेगी, पर अगले साल से पहले इसके बनने की संभावना बहुत कम है.

गगनदीप कांग. (फोटो साभार: द रॉयल सोसाइटी)

सरकारी शोध संस्थान के निदेशक पद से प्रख्यात वैज्ञानिक गगनदीप कांग ने दिया इस्तीफ़ा

डॉ. गगनदीप कांग पहली भारतीय महिला हैं, जिन्हें रॉयल सोसायटी लंदन का फेलो बनाया गया. उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब दो महीने पहले ही उनके नेतृत्व में कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम कर रही समिति को भंग कर दिया गया था.

REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

15 अगस्त तक वैक्सीन लॉन्च करने की घोषणा अव्यावहारिक: भारतीय विज्ञान अकादमी

आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराने की समयसीमा पर देश की सबसे बड़ी विज्ञान अकादमी ने कहा है कि संक्रमण से लड़ने के लिए मानव शरीर में एंटीबॉडी बनने, उसके असर, डाटा रिपोर्टिंग आदि के लिए एक लंबा समय चाहिए होता है. अगर इसमें किसी तरह की कोताही बरती गई तो बड़ा नुकसान हो सकता है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या कोरोना वायरस का टीका विकसित करने में आईसीएमआर जल्दबाज़ी दिखा रहा है?

आईसीएमआर की ओर से कहा गया है कि कोरोना वायरस का टीका तेजी से बनाने का उद्देश्य अनावश्यक लालफीताशाही कम करना है. हालांकि आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक वैक्सीन बनाने के दावों पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं. यहां तक कि टीका विकसित कर रही कंपनी भी अक्टूबर से पहले इसका ट्रायल पूरा करने से इनकार कर रही है.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

आईसीएमआर की कोविड-19 वैक्सीन लॉन्च करने की समयसीमा को लेकर वैज्ञानिक क्यों चिंतित हैं?

आईसीएमआर ने कोविड-19 की स्वदेशी वैक्सीन के लॉन्च के लिए 15 अगस्त की समयसीमा निर्धारित की है, जिसे लेकर डॉक्टर्स और वैज्ञानिक संशय में हैं. वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक का भी मानना है कि ट्रायल पूरे होने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

देश की पहली कोविड-19 वैक्सीन को मानव परीक्षण की अनुमति मिली

‘कोवैक्सिन’ नामक टीके को भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर विकसित किया है.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स/ Jorge Royan/ CC BY-SA 3.0)

होम्योपैथी के ज़रिये कोविड-19 से बचाव का दावा राहत नहीं चिंता की बात है

देश में कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में आयुष मंत्रालय द्वारा जारी एक परामर्श में आर्सेनिकम एल्बम 30 C नाम की होम्योपैथिक दवा को दिन में तीन बार लेने की सलाह दी गई थी. लेकिन शोध बताते हैं कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि होम्योपैथी कोविड या किसी भी अन्य मर्ज़ के ख़िलाफ़ कोई सुरक्षा प्रदान करती है.

(फोटो:पीटीआई)

कोरोना को काबू में करने के लिए सभी राज्य परीक्षण क्षमता में इज़ाफ़ा करें: आईसीएमआर

आईसीएमआर की ओर से कहा गया है कि राज्य परीक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक क़दम उठाएं, ताकि लक्षण वाले हर व्यक्ति की जांच संभव हो पाए. इससे संक्रमण का जल्द पता लगाने और इसे रोकने में मदद मिलेगी और लोगों की ज़िंदगी बच पाएगी.

REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

क्या वजह है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाना मुश्किल साबित हो रहा है

अमूमन वायरस का डीएनए ऐसा होता है कि अनेक वायरस बनाते समय उनके ब्लू-प्रिंट में कोई ग़लती नहीं होती, इसीलिए वे ज़्यादा स्थिर रहते हैं और ब्लू प्रिंट में आसानी से बदलाव नहीं आते. पर कोरोना वायरस का ब्लू-प्रिंट डीएनए नहीं आरएनए है. बावजूद इसके ये अपने ब्लू-प्रिंट में कुछ हद तक ग़लतियां रोकने में सक्षम है, इसी कारण से हम नहीं जानते कि अगर कोई एक वैक्सीन विकसित की जाए, तो वह सब तरह के कोविड-19 वायरस पर असर करेगी या नहीं?

(फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना: हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर मेडिकल पत्रिका- लांसेट और एनईजेएम ने अध्ययन वापस लिए

विश्व के क़रीब 100 से अधिक वैज्ञानिकों ने दोनों पत्रिकाओं के संपादकों को लिखे गए खुले पत्र में दोनों अध्ययनों में इस्तेमाल डेटा की गुणवत्ता में विसंगति का मुद्दा उठाया था. पत्र में डेटा की सत्यता और अध्ययन में इससे जिस तरह का विश्लेषण किया गया, उन सबको लेकर चिंता जताई गई थी.