समाज

Noida: UP Roadways buses parked at DND toll plaza to carry migrants to their native places, during the ongoing nationwide COVID-19 lockdown, in Noida, Wednesday, May 20, 2020. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI20-05-2020 000128B)

उत्तर प्रदेशः कोरोना संक्रमित होने के शक़ में युवती को बस से बाहर फेंकने का आरोप, मौत

घटना 15 जून की है, जब अपनी मां के साथ रोडवेज़ बस से नोएडा से शिकोहाबाद जा रही 19 वर्षीय युवती रास्ते में थकान और गर्मी से बेहोश हो गई. परिजनों का आरोप है कि बस ड्राइवर और कंडक्टर ने कोरोना संक्रमित होने के संदेह में उसे बस से बाहर फेंक दिया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई.

(फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन धीरे-धीरे ही सही, मध्य वर्ग के सरोकारों को बदल रहा है…

कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन का असर समाज के सभी वर्गों और सभी उम्र के लोगों पर पड़ रहा है. ऐसे ही एक मध्यमवर्गीय युवक की कहानी…

Bulgarian poster "Отвори очи: Кампания срещу насилието над жени" (Open Your Eyes: A campaign against gender violence) /Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0)

जून में राष्ट्रीय महिला आयोग को महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों की सर्वाधिक शिकायतें मिलीं

आंकड़ों के अनुसार पिछले साल सितंबर के बाद महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए विभिन्न अपराधों की सर्वाधिक शिकायतें इस साल जून में दर्ज की गईं. इससे पहले लॉकडाउन में घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के मामले बढ़ने की बात सामने आई थी, जिसे केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने ग़लत बताया था.

New Delhi: Protestors vandalize a car during a clash between a group of anti-Citizenship Amendment Act protestors and supporters of the new citizenship act, at Maujpur crossing, in northeast Delhi, Monday, Feb. 24, 2020. (PTI Photi) (PTI2_24_2020_000165B)

दिल्ली हिंसाः पिंजरा तोड़ कार्यकर्ताओं के ‘नाम’ बताने वाले ने कहा कि उन्हें नहीं जानता

दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ जाफराबाद हिंसा के एक आरोपी शाहरुख ने अपने बयान में पिंजरा तोड़ कार्यकर्ता देवांगना कलीता और नताशा नरवाल का नाम लिया था. शाहरुख ने कहा कि हिंसा में आंखों की रोशनी लगभग खो देने के कारण उसे नहीं पता कि पुलिस ने उससे जिस बयान पर दस्तख़त कराए, उसमें क्या लिखा था.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (फोटो: पीटीआई)

गुजरात: फिर विवादों में क्यों है स्टैच्यू ऑफ यूनिटी?

केवड़िया के पास नर्मदा नदी के पास बनी 182 मीटर ऊंची इस प्रतिमा के आस-पास रहने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि राज्य सरकार ने उनके पूर्वजों से ज़मीन बांध बनाने के लिए ली थी, लेकिन अब इसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है. इसलिए या तो उन्हें उचित मुआवज़ा दिया जाए या फिर उनकी ज़मीन लौटाई जाए.

सरोज ख़ान. (फोटो साभार:​ ट्विटर/@MsKajalAggarwal)

बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज ख़ान का निधन

तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकीं 71 वर्षीय सरोज ख़ान ने 80 से 90 के दशक में अपना सर्वश्रेष्ठ काम अभिनेत्री श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित के साथ किया. श्रीदेवी के साथ उन्होंने ‘हवा हवाई’ और माधुरी के लिए उन्होंने ‘एक दो तीन’, ‘तम्मा-तम्मा लोगे’, ‘धक-धक करने लगा’, ‘डोला रे डोला’ जैसे कई हिट गीतों की कोरियोग्राफी की थी.

मार्च महीने में इटली के मिलान में मालपेंसा एयरपोर्ट पर क्यूबाई डॉक्टर्स का दल. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविड-19 संकट के दौरान मिसाल बनकर उभरा क्यूबा

एक ऐसे समय में जब विकसित कहे जाने वाले देशों में कोरोना संक्रमितों की तादाद बढ़ती जा रही है, अस्पतालों से महज़ मरीज़ों की ही नहीं बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के गुजरने ख़बर आना अपवाद नहीं रहा, क्यूबा सरीखे छोटे-से मुल्क़ ने इससे निपटने में अपनी गहरी छाप छोड़ी है.

पुझल सेंट्रल जेल. (फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

तमिलनाडु: कोविड-19 के दौर में ‘डिटेंशन कैंप’ में रहने को मजबूर हैं 129 विदेशी नागरिक

तमिलनाडु सरकार ने मार्च महीने में तबलीग़ी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए एशिया, यूरोप और अफ्रीकी देशों के कुल 129 विदेशी नागरिकों को एक केंद्रीय जेल में रखा है. उनके परिजनों के अनुसार उनके साथ अमानवीय व्यवहार हो रहा है, वहीं वकीलों का मानना है कि यह कार्रवाई ग़ैरक़ानूनी है.

राम लाल मार्कंडा. (फोटो: ट्विटर/@DMarkanda)

हिमाचल: क्वारंटीन नियम न मानने वाले मंत्री के ख़िलाफ़ प्रदर्शन पर 200 महिलाओं पर केस

मामला स्पीति ज़िले के काजा गांव का है, जहां स्थानीय समिति ने यहां आने वालों के लिए अनिवार्य क्वारंटीन का नियम बनाया है. बीते दिनों प्रदेश के कृषि मंत्री रामलाल मार्कंडा यहां पहुंचे थे और इस नियम को न मानने पर आदिवासी महिलाओं के समूह ने उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.

प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई

पश्चिम बंगाल: प्रशासनिक मदद न मिलने पर परिजनों ने 48 घंटों तक फ्रीज़र में रखा कोरोना संदिग्ध का शव

मामला कोलकाता का है, जहां 29 जून को एक 71 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिन्हें कोरोना होने का संदेह था. परिजनों का कहना है कि इसी कारण उन्होंने अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए पुलिस, स्थानीय पार्षद और स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया, लेकिन किसी ने मदद नहीं की.

Ishwori Sapkota arranges books at her book store in Kathmandu December 18, 2011. She has been selling and buying second hand books for the past eighteen years. REUTERS/Navesh Chitrakar

अंजुमनुल इस्लाह: जब एक क़स्बे में उर्दू को सहेजने की कोशिश हुई

देशभर में लाइब्रेरी के घटते चलन के बीच उस लाइब्रेरी को याद करना बेहद अहम हो जाता है, जिसे आम लोगों ने उन्नीसवीं सदी के आख़िर में बिहार के एक छोटे-से क़स्बे में शुरू किया था.

Kanpur: Police personnel hits a civilian during their protest against the Citizenship (Amendment) Act that turned violent, at Babu Purwa in Kanpur, Friday, Dec. 20, 2019. (PTI Photo) (PTI12_20_2019_000262B)

बिजनौर: सीएए प्रदर्शन के दौरान हुई मौत के मामले में छह पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में 20 दिसंबर 2019 को हुए सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 21 साल के सुलेमान की मौत हो गई थी. एसआईटी ने पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त करते हुए सुलेमान को आरोपी ठहराया है और कहा है कि वे प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल थे.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

कर्नाटक: 36 घंटे में 50 अस्पतालों ने किया भर्ती करने से इनकार, अस्पताल के गेट पर मरीज़ की मौत

मामला बेंगलुरु का है, जहां 52 वर्षीय कपड़ा व्यापारी को तेज़ बुखार और सांस लेने में समस्या हुई थी. उनके भतीजे ने बताया कि वे उन्हें दो दिन एंबुलेंस से 18 अस्पतालों में लेकर गए, 30-32 अस्पतालों में फोन किया लेकिन सभी जगह उन्हें भर्ती करने से मना कर दिया गया.

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बिहार: शादी के दो दिन बाद कोरोना संक्रमण से दूल्हे की मौत, 100 से अधिक लोग संक्रमित

मामला पटना ज़िले के पालीगंज का है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दूल्हे की मौत के बाद कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से 350 से अधिक लोगों का कोरोना परीक्षण किया जा चुका है जिसमें से 100 से अधिक लोग संक्रमित पाए गए हैं.

(फोटो साभार: ट्विटर/GEMReport)

स्कूल की पाठ्य पुस्तकों में महिलाओं को कम आंका गया: रिपोर्ट

ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग रिपोर्ट 2020 के मुताबिक स्कूल की टेक्स्टबुक में शामिल महिला छवियों की संख्या न सिर्फ पुरुषों की तुलना में कम होती हैं बल्कि महिलाओं को कम प्रतिष्ठित पेशों में अंतर्मुखी एवं दब्बू लोगों की तरह दर्शाया गया है.