समाज

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बाज़ार वीडियो गेम्स के ज़रिये कब बच्चों की ज़िंदगी से खेलने लगा, पता ही नहीं चला

रूस में बने ‘द ब्लू व्हेल चैलेंज’ सुसाइड गेम ने दुनियाभर में लगभग 300 जानें ली हैं और अब भारत में भी इसका असर दिखने लगा है.

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तीन तलाक़ के अलावा इस्लाम में अलग होने के और भी तरीके हैं

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीन तलाक़ को असंवैधानिक घोषित कर दिया है. इस्लाम में तीन तलाक़ केे अलावा संबंध विच्छेद के और भी तरीके प्रचलन में हैं.

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आठ सालों में देश में पांच साल की उम्र से पहले ही हुई 1.13 करोड़ बच्चों की मौत

वर्ष 2008 से 15 के बीच हर घंटे औसतन 89 नवजात शिशुओं की मृत्यु होती रही है. 62.40 लाख नवजात शिशुओं की मृत्यु जन्म के 28 दिनों के भीतर हुई.

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‘जेल की स्थिति समाज से भी बदतर है इसलिए वहां से निकला हुआ व्यक्ति और बड़ा अपराधी बन जाता है’

हिरासत में होने वाली हिंसा और जेलों की स्थिति पर सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा और वर्णन गोंसाल्विस से बातचीत.

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साढ़े चार आखर मनुष्यता का, पढ़े सो पंडित होय…

हजारी प्रसाद द्विवेदी सही मायने में पंडित थे. वैसे पंडित नहीं, जो शास्त्र और वेद को पढ़कर जड़ और हिंसक हो जाता है, बल्कि वैसे, जो कबीर की तरह प्रेम या मनुष्यता का ढाई आखर पढ़कर पंडित होता है.

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कैसा है बरेली की बर्फी का स्वाद?

फिल्म बरेली की बर्फी प्रेम त्रिकोण पर आधारित एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें कृति सेनॉन, राजकुमार राव और आयुष्मान खुराना मुख्य भूमिकाओं में हैं.

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क्यों कुछ लोग मानते हैं कि अयोध्या में रहने वाले गुमनामी बाबा ही सुभाष चंद्र बोस थे

असाधारण जीवन की तरह असाधारण मृत्यु ने नेताजी के इर्द-गिर्द रहस्यों का जाल-सा बुन दिया है. दुखद यह है कि जांच आयोगों के भंवरजाल में नेताजी किसी जासूसी कथा के नायक बन गए हैं.

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गोरखपुर में पिछले तीन दिन में इंसेफलाइटिस से 39 और बच्चों की मौत

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 67 बच्चों की मौत पर एक तरफ हंगामा जारी है, दूसरी ओर पिछले तीन दिनों में 39 और बच्चों की मौत हो चुकी है.

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चंद्रकांत देवताले की कविताएं इंसानी तमीज़ की कविताएं हैं

भक्तिकालीन कवियों के बारे में कहा जाता है कि उनकी कविताएं कालजयी इसीलिए हो पाईं क्योंकि वे जीवन के प्राथमिक सच प्यार और मौत के बारे में बात करती हैं. यह आप देवताले की भी कविताओं में देख सकते हैं.

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‘गोरक्षा के चक्कर में पशुधन ही किसानों का दुश्मन हो गया है’

अब खेती में बैलों का उपयोग नहीं होता. बूचड़खाने बंद होने के बाद उन्हें ख़रीदने वाला भी कोई नहीं. बड़ी संख्या में आवारा जानवर खेतों को तबाह कर रहे हैं.

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हमें राजनीतिक आज़ादी तो मिल गई, लेकिन सामाजिक और आर्थिक आज़ादी कब मिलेगी?

सरकार यह महसूस नहीं करती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण पर किया गया ख़र्च वास्तव में बट्टे-खाते का ख़र्च नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए किया गया निवेश है.

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बंटवारे के बाद हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत हमेशा के लिए बदल गया

आज़ादी के 70 साल: जब सत्ता यह तय करती है कि जनता क्या सुन सकती है, क्या गा सकती है, तब संगीत और संगीतकारों को अपना रास्ता बदलना पड़ता है या ख़त्म हो जाना पड़ता है.

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जब गांधी ने ज़रूरत पड़ने पर ‘हिंसक साधनों’ का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी

स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी की भूमिका के बारे में काफी लिखा गया है, मगर उत्तर-पूर्व को आज़ाद भारत से जोड़ने में उन्होंने जो नेतृत्व किया, इस बारे में कम ही लिखा गया है.

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हिंदी साहित्य ने विभाजन को कैसे देखा

जहां हिंदी लेखकों ने विभाजन पर बार-बार लिखा, हिंदी कवि इस पर तटस्थ बने रहे. कईयों ने आज़ादी मिलने के जश्न की कवितायें तो लिखीं, लेकिन देश बंटने के पीड़ादायी अनुभव पर उनकी चुप्पी बनी रही.

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बुनियाद: वो धारावाहिक जिसने विभाजन की विभीषिका को बखूबी बयां किया

रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिकों का भारत के सामाजिक पर कहीं व्यापक असर पड़ा, मगर जो मानक बुनियाद ने बनाया, उसे फिर नहीं बनाया जा सका.

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नकली इतिहास भारत पर प्रेतात्मा बन कर छाया हुआ है

स्मृति के रूप में जीवित विभाजन एक मौखिक संसार है, जो चुप्पियों में दबा हुआ है, नाउम्मीदी की भाषा में फंसा हुआ है. 70 सालों के बाद भी जिसके जख़्म भरने का नाम नहीं लेते.

A group of Indian tribes sit in open at a camp in Dornapal in the central state of Chhattisgarh, India March 8, 2006. More than 45,000 people have left their homes to live in camps run by the Salwa Judum, but have just bows and arrows to defend themselves against the rebels' guns and explosives.  Picture taken March 8, 2006.  REUTERS/Kamal Kishore

आदिवासियों के लिए इस आज़ादी का क्या मतलब है?

आदिवासी तो दुनिया बनने से लेकर आज़ाद ही हैं. बस्तर के इन जंगलों में तो अंग्रेेज़ भी नहीं आए. इसलिए इन आदिवासियों ने अपनी ज़िंदगी में न ग़ुलामी देखी है, न ग़ुलामी के बारे में सुना है.

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पाकिस्तानी फिल्मों ने विभाजन को किस ​तरह दिखाया

आज़ादी के 70 साल: विभाजन के बाद पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री को बनाने में न सिर्फ सीमित संसाधनों की समस्या का सामना करना पड़ा, बल्कि भारत से आने वाली तकनीकी रूप से श्रेष्ठ हिंदी फिल्मों को सीमित करने के लिए ताकतवर डिस्ट्रीब्यूटर लॉबी से भी लड़ाई लड़नी पड़ी.

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‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 70 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है.

Lucknow:  Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Aditiyanath addressing a press conference in Lucknow on Saturday. Union Minister Anupriya Patel and Uttar Pradesh Health Minister Siddharth Nath Singh are also seen.  PTI Photo by Nand Kumar (PTI8_12_2017_000138B)

अगर इंसेफलाइटिस ख़त्म हो गया तो धर्म ख़तरे में पड़ जाएगा

मृत्यु तो संसार का एकमात्र शाश्वत सत्य है. योगी जी उत्तर प्रदेश को इसी सत्य का साक्षात्कार कराना चाहते हैं जो धर्म का मर्म है. लेकिन लोग उनके पीछे पड़ गए हैं.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh  (PTI7_16_2017_000260A)

क्या देश बनाने का काम स्थगित चल रहा है?

समाज में विचारों की, अाचारों की अौर समझ की नई खिड़कियां खोलते रहने की जरूरत पड़ती है. जो समाज ऐसा करना बंद कर देता है, जो अतीत के गुणगान में लग जाता है, वह अंतत: अपनी ही चोटी में उलझ कर, उसे काट डालता है. हम उसी दौर से गुजर रहे हैं.

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निहलानी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाए गए, प्रसून जोशी बने नए अध्यक्ष

पहलाज निहलानी 2015 में हुई अपनी नियुक्ति के समय से ही विभिन्न विवादास्पद कदमों और बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहे हैं.

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मेधा पाटकर का आंदोलन, अमित शाह का आगमन और लोकप्रिय मामा

मध्य प्रदेश के मीडिया में सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में आए निसरपुर के विस्थापन का शोर 2004 के हरसूद जैसा नहीं है, जबकि चैनल और अख़बार पहले से कहीं ज़्यादा हैं.

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विकास यही है, कुछ को उजाड़ देना और कुछ को उजाला देना

उत्तराखंड में बन रहे पंचेश्वर बांध से 122 गांव डूब जाएंगे. यहां रहने वाले लोगों को सरकारों की चाहत से ही उजड़ना है और सरकारों के कहे पर ही कहीं और बस जाना है.

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‘उसे देखकर ऐसा लगता नहीं कि उसके साथ बलात्कार हुआ है’

दिल्ली हाईकोर्ट की वरिष्ठ वक़ील रेबेका जॉन ने वो बातें साझा की हैं, जो उन्होंने बलात्कार के मामलों की अदालती कार्यवाही के दौरान सुनीं.

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क्या स्कूल में फेल करने से बच्चे ज़िंदगी में ‘पास’ हो जाएंगे?

शिक्षा के अधिकार अधिनियम को पिछले सात साल में ठीक ढंग से लागू किया गया या नहीं, इसका आकलन किसी ने नहीं किया. सभी ने अपनी नाकामी को बच्चों पर थोप दिया और बच्चों की किसी ने पैरवी तक नहीं की.

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कश्मीर से ग्राउंड रिपोर्ट: ‘अगर दोषी सैनिकों को छोड़ा गया तो लोकतंत्र से भरोसा उठ जाएगा’

2010 के माछिल फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में दोषी पाए गए पांच जवानों की आजीवन कारावास की सज़ा पर रोक लगाते हुए सैन्य बल न्यायाधिकरण ने उन्हें ज़मानत दे दी ​है.

Vinod Dua EP 96

जन गण मन की बात, ​एपिसोड 96: चंडीगढ़ छेड़छाड़ मामला और किताबों से गायब मुगल

जन गण मन की बात की 96वीं कड़ी में विनोद दुआ चंडीगढ़ में छेड़छाड़ की​ शिकार वर्णिका कुंडू और महाराष्ट्र में इतिहास की किताबों से मुगलों के बारे में जानकारी हटाने पर चर्चा कर रहे हैं.

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भोपाल सेंट्रल जेल: कैदियों के बच्चों के चेहरे पर लगाई मुहर, राज्य मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

राज्य मानवाधिकार आयोग का कहना है कि बच्चे और लड़की के चेहरे पर जेल प्रशासन द्वारा मुहर लगाना मानवाधिकारों और बाल अधिकारों का उल्लंघन है.

Varnika and Viaks barala

बेटी बचाओ का नारा देने वाले ‘बेटी’ को इंसाफ दिलाने की जगह उसके चरित्र हनन में क्यों लग गए हैं?

चंडीगढ़ में भाजपा नेता के बेटे द्वारा बदतमीज़ी मामले में युवती की शिकायत के बाद भाजपा नेता-समर्थक और आरोपी के परिजन सोशल मीडिया पर युवती के चरित्र पर सवाल उठा रहे हैं.