समाज

गंडक नदी के किनारे नाव का इंतजार करते धूमनगर गांव के लोग. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

‘नेता पुल बनवा देंगे कहकर वोट ले जाते हैं और हम वहीं के वहीं रह जाते हैं’

ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी-बिहार सीमा पर पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र के गंडक नदी के किनारे बसे आखिरी धूमनगर गांव के कुछ टोले केवल नावों के सहारे जुड़े हैं. ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से पुल बनाने की मांग उठने के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं है.

योगी आदित्यनाथ. (फोटोः पीटीआई)

मुग़लों को निशाना बनाकर आदित्यनाथ अपने ही नाथ संप्रदाय के इतिहास को मिटा रहे हैं

पूरे मुग़ल शासन के दौरान गोरखपुर समेत विभिन्न नाथों को शासकों द्वारा तोहफे और अनुदान प्राप्त हुए हैं. आधिकारिक मंदिर साहित्य भी इस बात की पुष्टि करता है.

क्यामार घाटी के माने किरी में स्थित शांगदोंग के सामने प्रतिष्ठित स्तूप और उसके सामने हवा में फहराते हुए प्रार्थना ध्वज. (फोटो: कर्मा सोनम/ एनसीएफ)

लद्दाख: हिमालयन भेड़िए के संरक्षण के लिए अनूठी कोशिश

एक समय तक लद्दाख में हिमालयन भेड़ियों से मवेशी बचाने के लिए शांगदोंग यानी एक तरह के पत्थरों के जाल बनाकर उन्हें फंसाया जाता था और इसकी मौत पर स्थानीय उत्सव मनाते थे. पर अब इसके अस्तित्व पर मंडराते ख़तरे को देखते हुए इसके संरक्षण के लिए इन शांगदोंगों को स्तूपों में बदला जा रहा है.

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उत्तर प्रदेश: ग़ाज़ियाबाद के गांव में वाल्मीकि समुदाय के लोगों ने क्यों बौद्ध धर्म अपनाया

वीडियो: उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के कथित बलात्कार और मौत के बाद प्रशासन के व्यवहार से आहत ग़ाज़ियाबाद के करहैड़ा गांव के वाल्मीकि समुदाय के 236 लोगों ने बीते 14 अक्टूबर को बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

स्त्री रक्षा करो, गोरक्षा हो जाएगी

लड़कियों को बिना दिमाग का और भावुक फिसलन की शिकार माना जाता है और इसलिए उन पर निगाह और लगाम रखने की ज़रूरत है. लड़कियां ज़िंदा बम है और उनको फटने से बचाना सबसे बड़ा धार्मिक कर्तव्य. लगता है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष इसी कर्तव्य निर्वाह के पवित्र अभियान पर निकल पड़ी हैं.

सुनीता देवी के पैर टखने के पास बेतरतीब तरीके से मुड़ गए हैं.

बिहार: फ्लोराइड से बर्बाद होती पीढ़ियां चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है

ग्राउंड रिपोर्ट: गया शहर से 8 किलोमीटर दूर चूड़ी पंचायत के चुड़ामननगर में कमोबेश हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति पानी से मिले फ्लोराइड के चलते शरीर में आई अक्षमता से प्रभावित है. बड़े-बड़े चुनावी वादों के बीच इस क्षेत्र के लोगों को साफ़ पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं है.

इस्मत चुग़ताई. [जन्म- 21 अगस्त 1915-अवसान 24 अक्टूबर 1991] (फोटो साभार: पेंगुइन इंडिया)

इस्मत चुग़ताई: परंपराओं से सवाल करने वाली ‘बोल्ड’ लेखक

इस्मत कहा करती थीं, ‘मैं रशीद जहां के किसी भी बात को बेझिझक, खुले अंदाज़ में बोलने की नकल करना चाहती थी. वो कहती थीं कि तुम जैसा भी अनुभव करो, उसके लिए शर्मिंदगी महसूस करने की ज़रूरत नहीं है, और उस अनुभव को ज़ाहिर करने में तो और भी नहीं है क्योंकि हमारे दिल हमारे होंठों से ज़्यादा पाक़ हैं…’

कोसी की कटान रोकने के लिए लगाए गए पॉर्क्यूपाइन. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

बिहार: कोसी में बाढ़ से बचने को बनाए जा रहे तटबंध सभी रहवासियों के लिए ख़ुशी का सबब नहीं हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: आज़ादी के बाद कोसी की बाढ़ से राहत दिलाने के नाम पर इसे दो पाटों में क़ैद किया गया था और अब लगातार बनते तटबंधों ने नदी को कई पाटों में बंद कर दिया है. इस बीच सुपौल, सहरसा, मधुबनी ज़िलों के नदी के कटान में आने वाले गांव तटबंध के लाभार्थी और तटबंध के पीड़ितों की श्रेणी में बंट चुके हैं.

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हाथरस मामले में मीडिया को बयान देने वाले दो एएमयू डॉक्टरों का कार्यकाल बढ़ाया गया

हाल ही में एएमयू प्रशासन ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में अस्थायी चिकित्साधिकारी के तौर पर काम कर रहे डॉक्टर मोहम्मद अज़ीमुद्दीन मलिक और डॉक्टर उबैद इम्तियाज़ हक़ की सेवाएं समाप्त कर दी थी. इन्होंने हाथरस बलात्कार मामले में पुलिस के उलट बयान दिया था.

बैजनाथपुर की बंद पड़ी पेपर मिल. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

बिहार: बैजनाथपुर की बंद पड़ी पेपर मिल राज्य में औद्योगिकीकरण की बदहाली की मिसाल है

ग्राउंड रिपोर्ट: 70 के दशक में मधेपुरा-सहरसा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैजनाथपुर में काफ़ी उम्मीदों के साथ पेपर मिल बनी थी, पर कभी काम शुरू नहीं हो सका. मिल में रोज़गार पाने की आस में उम्र गुज़ार चुके लोगों की अगली पीढ़ी विभिन्न राज्यों में मज़दूरी कर रही है और मिल खुलने का वादा केवल चुनावी मौसम का मुद्दा बनकर रह गया है.

Children sitting inside cement water pipes play on the Marina beach in the southern Indian city of Chennai October 10, 2013. REUTERS/Babu

दुनिया का हर छठा बच्चा घोर ग़रीबी में, महामारी से यह संख्या बढ़ने की आशंका: रिपोर्ट

विश्व बैंक और यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों को तुरंत बच्चों को इस संकट से उबारने की योजना बनाने की ज़रूरत है ताकि असंख्य बच्चों और उनके परिवारों को घोर ग़रीबी में जाने से रोका जा सके.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

बिहार: बेटी जन्मने के लिए मां को ज़िंदा जलाने की घटना और महिला सशक्तिकरण के सरकारी दावे

बीते 14 अक्टूबर को भागलपुर के एक अस्पताल में बुरी तरह से जली अररिया ज़िले की 22 साल की काजल ने दम तोड़ दिया. उनके माता-पिता का कहना है कि पिछले महीने बेटी पैदा होने के बाद से ही काजल को प्रताड़ित किया जा रहा था और उनके पति और ससुराल वालों ने उसे ज़िंदा जला दिया.

(फोटोः पीटीआई)

पश्चिम बंगाल: हाईकोर्ट ने एक समय में दुर्गा पूजा पंडालों में 45 लोगों के प्रवेश की अनुमति दी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने इससे पहले अपने एक आदेश में राज्य में कोरोना वायरस के डर के चलते सभी दुर्गा पूजा पंडालों में आयोजकों या पूजा समिति के सदस्यों के अलावा सभी लोगों के ही प्रवेश को रोक दिया था.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

गाज़ियाबाद: हाथरस मामले से आहत वाल्मीकि समुदाय के 236 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया

गाज़ियाबाद के करहैड़ा गांव में बौद्ध धर्म अपनाने वाले एक शख़्स ने कहा कि उन्होंने पहले भी धर्म परिवर्तन पर विचार किया था लेकिन हाथरस की घटना ने उन्हें बुरी तरह हिला दिया. इन सभी 236 लोगों ने डॉ. बीआर आंबेडकर के परपौत्र राजरत्न आंबेडकर की मौजूदगी में बौद्ध धर्म अपनाया है.

16 साल की लड़की का बलात्कार कर हत्या करने के बाद लोगों को गुस्सा भड़क गया था. लोगों ने कई दिनों तक राजधानी शिमला में प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया था. (फोटो: पीटीआई)

कोटखाई रेप-हत्या: तीन साल में दो बार मामला सुलझा, अब नए सिरे से जांच की मांग

जुलाई 2017 में शिमला के कोटखाई में स्कूल से लौट रही एक नाबालिग छात्रा की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. पहले एसआईटी और फिर सीबीआई ने मामले को सुलझाने का दावा किया था. अब पीड़ित परिवार जांच में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए दोबारा जांच शुरू करने की मांग के साथ हाईकोर्ट पहुंचा है.