समाज

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‘हम ज़बान की ख़िदमत कर रहे हैं, इसका सियासत और मज़हब से कोई लेना-देना नहीं’

पिछले कुछ ​सालों में उर्दू की दुनिया में रेख़्ता ने अलग मक़ाम हासिल किया है, उर्दू की हज़ारों क़िताबें, लाखों शेर और शायरों के काम को संजोया है. रेख़्ता फाउंडेशन के संस्थापक संजीव सराफ से बातचीत

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कभी प्रतापगढ़ की पहचान रूसी नेता स्टालिन की बेटी और एक राजकुमार की प्रेम कहानी से थी

रूस के तानाशाह स्टालिन की बेटी स्वेतलाना और कालाकांकर (प्रतापगढ़) के राजकुमार बृजेश सिंह की प्रेम कहानी ने साठ के दशक में भारत, सोवियत संघ और अमेरिका के संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था.

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इस बार के बीएमसी चुनाव में, सफ़ाई कामगार भी मैदान में

मुंबई के सफाई कामगारों की तमाम समस्याएं हैं लेकिन इन्हें सुलझाने वाला कोई नहीं. इसलिए इनमें से कई कामगार इस बार बीएमसी के चुनाव लड़ रहे हैं.

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भारत की सांस्कृतिक कल्पना में श्मशान सदैव शामिल रहे हैं

श्मशान पुरातत्व के जानकारों और मानवशास्त्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण जगह रहे हैं. इसके अध्ययन के द्वारा वे अतीत के मनुष्यों की संस्कृति, धर्म और जीवन के अन्य पक्षों के बारे में अपनी समझ बनाते हैं.

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वेद प्रकाश शर्मा ने न साहित्य के सामंतों के लिए लिखा, न उनके प्रमाण पत्र की ज़रूरत समझी

लाखों प्रतियों में बिकने वाले वेद प्रकाश ही तो हमारे रोल मॉडल हैं जो यकीं दिलाते हैं कि हिंदी में लिख के भी पेट और पॉकेट दोनों भरा जा सकता है.

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‘वर्दी वाला ग़ुंडा’ के लेखक वेद प्रकाश शर्मा नहीं रहे

वर्दी वाला गुंडा, दुल्हन मांगे दहेज, दहेज में रिवॉल्वर जैसे उपन्यासों के रचयिता वेद प्रकाश शर्मा ने शुक्रवार देर रात दुनिया को अलविदा कह दिया.

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‘सलमा आपा ने उतना लिखा नहीं जितना वे लिख सकती थीं’

सलमा सिद्दीक़ी को अधिकतर लोग कृश्न चंदर की हमसफ़र के रूप में ही जानते हैं, पर उनकी एक अलग पहचान भी थी..एक लेखक की. सलमा 13 फरवरी को इस दुनिया से रुख़सत हो गईं. सलमा आपा, सब उन्हें इसी नाम से जानते थे…अक्सर ही लोग उनकी ख़ूबसूरती के […]

Muslim brides wait for start of mass marriage ceremony in Mumbai

शादियों में फिज़ूलखर्ची रोकने के लिए लोकसभा में निजी विधेयक

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश करने वाली हैं, जो शादियों में फिज़ूलखर्च रोकने के अलावा गरीब परिवार की लड़कियों की शादी में योगदान से संबंधित है.

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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़: जैसे बीमार को बेवजह क़रार आ जाए…

फ़ैज़ ऐसे शायर हैं जो सीमाओं का अतिक्रमण करके न सिर्फ़ भारत-पाकिस्तान, बल्कि पूरी दुनिया के काव्य-प्रेमियों को जोड़ते हैं. वे प्रेम, इंसानियत, संघर्ष, पीड़ा और क्रांति को एक सूत्र में पिरोने वाले अनूठे शायर हैं.

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क्या आपको पता है कि मेरठ में एक फिल्म इंडस्ट्री भी है?

राजधानी दिल्ली से लगे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की अपनी फिल्म इंडस्ट्री है जिसे यहां के लोगों ने ‘मॉलीवुड’ नाम दिया हुआ है.

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दर्शक कृपया ध्यान दें! एनएसडी के कर्ता-धर्ता पर्दे के पीछे दूसरे ही नाटक में लगे हैं

जिस भारंगम को अंतर्राष्ट्रीय नाट्य समारोह के रूप में पेश किया जाता है , उसका इस्तेमाल नाट्य विद्यालय के पदाधिकारी निजी फायदे के लिए कर रहे हैं.

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एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने से रुके शिक्षा और मानवाधिकार के काम

विदेशी मुद्रा नियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत एनजीओ को मिलने वाले विदेशी चंदे पर लगने के बाद सामाजिक मुद्दों और मानवाधिकार से जुड़े काम प्रभावित हुए हैं.

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‘ये लेखन की परिपक्व उम्र नहीं, अभी थोड़ा और पकिए’

किस दिन, किस मुहूर्त में लेखक बना, याद नहीं न इसका जरा भी भान हुआ. बस याद रही इस यात्रा की वो सारी बातें जो खुद में एक उपन्यास है.

ससुरा बड़ा पइसावाला का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक)

भोजपुरी फिल्म फेस्टिवल : अपने ही जाल में उलझा भोजपुरी सिनेमा

बदलते दौर के भौतिक चमक-दमक को तो भोजपुरी सिनेमा खूब दिखाता है, पर सामाजिक -सांस्कृतिक मूल्यों की जड़ता से नहीं भिड़ता. वह एक बड़े विभ्रम का शिकार है.