अखलाक

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क्या पुलिस ने अख़लाक़ हत्याकांड मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है?

दादरी में पीट-पीटकर मार दिए गए अख़लाक़ के भाई का कहना है कि उनके परिवार पर लगे गोहत्या के आरोप के बाद पुलिस ने अब तक किसी परिजन का बयान तक नहीं लिया है.

Baduria: A burnt vehicle seen at a road after a communal riot  at Baduria in North 24 Pargana district of West Bengal on Wednesday. PTI Photo  (PTI7_5_2017_000228B)

अगर ये भीड़ दादरी में ही दफ़न कर दी जाती तो इसकी आंच बंगाल तक कभी नहीं आती

जिस पैगम्बर के व्यवहार ने उनपर रोज़ कूड़ा फेंकने वाली औरत को बदलने पर मजबूर कर दिया, उन्हीं के कुछ अनुयायी एक फेसबुक पोस्ट मात्र पर हिंसक हो जाते हैं.

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गांव वही था, लोग भी वही थे, मगर ईद वह नहीं थी

अपने हिंदू दोस्तों को ईद की दावत दी. सबने चिकन-मटन खाने से मना कर दिया. ये वही दोस्त थे जो इसके पहले सिर्फ़ इस शर्त पर आते थे कि चिकन-मटन खाने को मिलेगा.

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दूसरे देशों की घटनाओं पर ट्वीट करने वाले पीएम पीट-पीटकर हो रही हत्याओं पर मौन क्यों हैं?

ऊपर से शांत दिखने वाली भीड़ का हिंसक बन जाना अब हमारे वक्त़ की पहचान बन रहा है. विडंबना यही है कि ऐसी घटनाएं इस क़दर आम हो चली हैं कि किसी को कोई हैरानी नहीं होती.

mohan bhagwat reuters

गोरक्षा के लिए राष्ट्रीय कानून बनाने की भागवत की मांग डरावनी है

उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत की व्याख्या आरएसएस ने गोरक्षा और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण जैसे अपने पुराने वैचारिक मुद्दों को उठाने के लिए मिली हरी झंडी के तौर पर की है.