अजीत सिंह

Bengaluru: Samajwadi Party leader Akhilesh Yadav with Bahujan Samaj Party leader Mayawati wave at the crowd during the swearing-in ceremony of JD(S)-Congress coalition government, in Bengaluru, on Wednesday. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI5_23_2018_000199B)

मुज़फ़्फ़रनगर दंगा: चुनावों की भेंट चढ़ती नैतिकता

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों पर राजनीतिक रोटियां सबने सेंक लीं पर दंगा पीड़ितों को न्याय नहीं मिला. जो लोग तब सरकार चला रहे थे वे कहते हैं कि दंगे नहीं रोक सकते थे. तो अब सवाल यह है कि इस बार उन्हें क्यों चुना जाए?

अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और मायावती. (फोटो: पीटीआई)

बसपा के साथ कम सीटों पर समझौता करना चुनाव से पहले ही सपा की हार जैसा है

2019 के लोकसभा चुनाव में सपा अपनी स्थापना के बाद से सबसे कम सीटों पर लड़ेगी. एक तरह से वह बिना लड़े करीब 60 प्रतिशत सीटें हार गई है. सपा का बसपा से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो जाना हैरान करता है.

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राजस्थान के चुनावी रण में भाजपा के मुक़ाबले में लौटने की चर्चा में कितना दम है?

विशेष रिपोर्ट: चुनावी सर्वेक्षणों के आधार पर यह कहा जा रहा था कि भाजपा की राजस्थान से विदाई तय है, लेकिन टिकट वितरण और धुंआधार प्रचार को देखकर सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि पार्टी मुक़ाबले में लौट आई है.

बीते 20 मई को नूरपुर विधानसभा के बुढ़नपुर में रालोद नेता जयंत चौधरी ने सांसद धर्मेंद्र यादव के साथ समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नईम उल हसन के समर्थन में रैली की. (फोटो साभार: ट्विटर/जयंत चौधरी)

कैराना उपचुनाव: क्या विपक्षी एकता ‘पूरब’ में मिली सफलता को ‘पश्चिम’ में दोहरा पाएगी?

उत्तर प्रदेश में कैराना सीट पर लोकसभा उपचुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है. यहां मुख्य मुक़ाबला भाजपा और राष्ट्रीय लोक दल के ​बीच है. राष्ट्रीय लोक दल को सपा, बसपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कई छोटे दलों का समर्थन प्राप्त है.

Mayawati and her brother Anand Kumar

भारतीय राजनीति और परिवारवाद

राजनीति में परिवारवाद से दूर रहने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत दलित-पिछड़े नेतृत्व को है, लेकिन दुखद यह है कि ये ताकतें सबसे पहले अपने परिवार को ही अपनी विरासत सौंपती हैं.