अनुराधा भसीन

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स. (फोटो: ट्विटर)

जम्मू कश्मीर: शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने भारत से राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की अपील की

भारत सरकार द्वारा आयोजित रायसीना वार्ता में भाग लेने के बाद वापस लौटकर दक्षिण और मध्य एशिया की कार्यवाहक सहायक सचिव एलिस वेल्स ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर राष्ट्रव्यापी विरोध पर कहा कि एक जोरदार लोकतांत्रिक समीक्षा होनी चाहिए चाहे वह सड़कों पर हो, चाहे राजनीतिक विपक्ष, मीडिया या अदालतों द्वारा हो.

पिछले साल नवंबर में जम्मू कश्मीर में इंटरनेट पाबंदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते पत्रकार. (फोटो: पीटीआई)

जम्मू कश्मीर में आज से 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल

जम्मू कश्मीर प्रशासन के गृह विभाग की एक अधिसूचना के मुताबिक मोबाइल फोन पर 2जी स्पीड के साथ इंटरनेट सुविधा 25 जनवरी से चालू हो जाएगी. सोशल मीडिया साइटों तक घाटी के लोगों की पहुंच नहीं होगी और तय वेबसाइटों तक ही उनकी पहुंच हो सकेगी.

नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत. (फोटो: ट्विटर/@VKSaraswat1949)

जम्मू कश्मीर में इंटरनेट का इस्तेमाल गंदी फिल्में देखने के लिए होता है: नीति आयोग सदस्य

नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं. वहां जारी विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि जेएनयू एक राजनीतिक युद्ध का मैदान बन गया है. यह 10 रुपये से लेकर 300 रुपये तक फीस वृद्धि का मुद्दा नहीं है. हर कोई लड़ाई जीतने की कोशिश कर रहा था. मैं राजनीतिक दलों का नाम नहीं लूंगा.

Srinagar: A woman talks to her son, in Srinagar, Monday, Oct. 14, 2019. Mobile phone services on postpaid connections were restored in Kashmir after remaining suspended for 70 days following abrogation of Article 370 and bifurcation of Jammu and Kashmir into two union territories.(PTI Photo/S. Irfan)(PTI10_14_2019_000186A)

जम्मू कश्मीर में बहाल हुई प्रीपेड मोबाइल सेवाएं

जम्मू कश्मीर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में सभी स्थानीय प्रीपेड मोबाइल फोन पर कॉल करने और एसएमएस भेजने की सुविधा बहाल कर दी गई है. इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से जम्मू क्षेत्र के सभी दस जिलों और उत्तरी कश्मीर के दो जिलों कुपवाड़ा और बांदीपोरा में फिक्स लाइन इंटरनेट संचार सेवा प्रदान करने को कहा गया है.

Jammu: Security personnel stand guard near Civil Secretariat ahead of presidential decree giving assent to the bifurcation of Jammu and Kashmir into two Union Territories, in Jammu, Wednesday, Oct. 30, 2019. (PTI Photo)(PTI10_30_2019_000087B)

जम्मू कश्मीर: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ब्रॉडबैंड, 2जी इंटरनेट सेवा आंशिक रूप से बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते अपने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में जम्मू कश्मीर प्रशासन को आदेश दिया था कि वे एक हफ्ते के भीतर सभी प्रतिबंध आदेशों पर पुनर्विचार करें. ये प्रतिबंध पिछले साल पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद से लगाए गए थे.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने 26 लोगों पर लगा पीएसए हटाया

जिन 26 लोगों पर से जन सुरक्षा कानून हटाया गया है उनमें से कुछ केंद्र शासित प्रदेश से बाहर उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में बंद हैं. इनमें जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नजीर अहमद रोंगा भी शामिल हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद सेंट्रल जेल में हिरासत में रखा गया है.

(फोटो: पीटीआई)

अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट बैन की इजाजत नहीं, कश्मीर प्रशासन सभी प्रतिबंधों पर पुनर्विचार करे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि इंटरनेट का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत बोलने एवं अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है. इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने का कोई भी आदेश न्यायिक जांच के दायरे में होगा.

Kashmiri journalists display laptops and placards during a protest demanding restoration of internet service, in Srinagar, November 12, 2019. REUTERS/Danish Ismail - RC2O9D9L2D29

मीडिया का काम बुरी तरह प्रभावित, अविलंब इंटरनेट बहाल करे सरकार: कश्मीर प्रेस क्लब

कश्मीर प्रेस क्लब ने मीडिया के लिए इंटरनेट सेवाओं को तुरंत बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार ने जानबूझकर ऐसी रोक लगाई है, ताकि सूचना के प्रवाह पर रोक लगाई जा सके.

A deserted road in Srinagar on Monday. Restrictions were in force across Kashmir and in several parts of Jammu. (REUTERS/Danish Ismail)

जम्मू कश्मीर मानवाधिकार संगठन ने कहा- 2019 में 600 से अधिक लोगों पर लगाया गया पीएसए

वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट कहती है कि 662 लोगों ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की और अपने खिलाफ लगाए गए पीएसए को रद्द करने की मांग की.

Jammu: Security personnel stand guard along a road in Jammu, Thursday, Oct. 31, 2019. Security has been tightened across Jammu region ahead of bifurcation of Jammu and Kashmir into two union territories which came into existence after midnight. (PTI Photo)  (PTI10_31_2019_000186B)

जम्मू कश्मीर: हिरासत में चार महीने तक रखे जाने के बाद पांच कश्मीरी राजनीतिक नेता रिहा

जम्मू कश्मीर के अधिकारियों ने बताया कि रिहा किए गए पांचों नेता नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के हैं, जिन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया था. 5 अगस्त से पूर्ववर्ती राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के साथ मुख्यधारा और अलगाववादी खेमे दोनों के सैकड़ों नेताओं को एहतियातन हिरासत में रखा है.

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

जम्मू कश्मीर: हाईकोर्ट ने पीएसए के तहत हिरासत में लिए जाने के तीन आदेश रद्द किए

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने अगले साल के लिए घोषित सरकारी अवकाश की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला की जयंती और शहीद दिवस को हटा दिया है, लेकिन 26 अक्टूबर जिसे ‘विलय दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है, उसे इस सूची में जगह दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर में पाबंदियों के ख़िलाफ़ याचिकाओं पर सुनवाई पूरी, फ़ैसला सुरक्षित

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने के साथ ही वहां संचार माध्यमों पर लगी पाबंदियों को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद, कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन और अन्य लोगों ने याचिकाएं दायर की थीं.

A deserted road in Srinagar on Monday. Restrictions were in force across Kashmir and in several parts of Jammu. (REUTERS/Danish Ismail)

कश्मीर में लगी पाबंदियों पर उठे हर सवाल का जवाब दे प्रशासन: सुप्रीम कोर्ट

कश्मीर में लगी पाबंदी पर याचिका दाखिल करने वालों की ओर से पेश एक वकील ने प्रतिदिन हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बावजूद हांगकांग हाईकोर्ट द्वारा प्रदर्शनकारियों पर से सरकारी प्रतिबंध हटा लेने का उदाहरण दिया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों को बनाए रखने में भारत का सर्वोच्च न्यायालय कहीं अधिक श्रेष्ठ है.

**EDS: FILE PHOTO** Srinagar: In this file photo dated Aug. 4, 2019, are National Conference President Farooq Abdullah and PDP President Mehbooba Mufti during an all party meeting, in Srinagar. The Supreme Court on Monday, Sept. 16, 2019, has sought response from the Centre and the Jammu and Kashmir administration on a plea seeking to produce before court Abdullah, who is allegedly under detention following the scrapping of the state's special status. (PTI Photo) (PTI9_16_2019_000042B)

कश्मीर में हालात सामान्य होने के अमित शाह के दावे को नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने पाखंड बताया

संसद सत्र में फारूक अब्दुल्ला को हिस्सा लेने की इजाजत देने की विपक्ष की मांग पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल के दौरान 30 सांसदों को हिरासत में रखा था. इस पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि रेड्डी की टिप्पणी इस बात की स्वीकार्यता है कि जम्मू कश्मीर आपातकाल के बुरे दौर से गुजर रहा है.

Srinagar: Security personnel keep vigil at Lal Chowk after bifurcation of the Jammu and Kashmir state came into existence, in Srinagar, Thursday, Oct. 31, 2019. (PTI Photo/S. Irfan) (PTI10_31_2019_000132B)

जम्मू कश्मीर में 4 अगस्त से अब तक 5000 लोग गिरफ्तार: गृहमंत्री अमित शाह

गृह मंत्रालय ने लोकसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है. हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से 4 अगस्त तक औसतन हर महीने पत्थरबाजी की 50 घटनाएं हुईं. वहीं, 5 अगस्त के बाद ऐसे मामले औसतन हर महीने बढ़कर 55 हो गए.

(फोटो: पीटीआई)

जम्मू कश्मीर में और कितने दिन लागू रहेगी पाबंदी, साफ-साफ जवाब दें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट जम्मू कश्मीर में नाबालिगों को हिरासत में लेने, संचार माध्यमों पाबंदी लगाने जैसे कई मामलों पर दायर याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

संचार व्यवस्था पर प्रतिबंध लागू करने संबंधी आदेश पेश करे जम्मू कश्मीर प्रशासन: सुप्रीम कोर्ट

जम्मू कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राष्ट्रहित में लिए गए प्रशासनिक फैसलों की अपील पर कोई नहीं बैठ सकता. केवल न्यायालय ही इसे देख सकती है और याचिकाकर्ता इसे नहीं देख सकते.

A view of Srinagar's Lal Chowk on Wednesday October 9th 2019. Photo: PTI

जम्मू कश्मीर: पर्यटकों का स्वागत, पर प्रेस काउंसिल को मनाही

जम्मू कश्मीर सरकार ने पर्यटकों को राज्य में आने की अनुमति देने के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से कहा है कि उनकी फैक्ट-फाइंडिंग टीम 4 नवंबर के बाद ही राज्य में आ सकती है.

A Kashmiri woman walks on a deserted road during restrictions, after scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 25, 2019. Picture taken on August 25, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

कश्मीर में इंटरनेट, मोबाइल सेवा बाधित होने से मुश्किलों का सामना कर रहे पत्रकार

जम्मू कश्मीर में चार अगस्त की शाम से पाबंदियां लागू हैं. परेशान पत्रकारों ने अब मांग की है कि सरकार को कम से कम मीडिया संस्थानों के ब्रॉडबैंड कनेक्शन बहाल करने चाहिए.

(फोटो: द वायर)

राष्ट्रीय हित ध्यान में रखकर जम्मू कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करे केंद्र: सुप्रीम कोर्ट

कश्मीर टाइम्स अख़बार की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की ओर से जम्मू कश्मीर में संचार माध्यमों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग करने वाली याचिका पर न्यायालय ने ये टिप्पणी की.

फोटो: द वायर

जब पत्रकार सत्ता की भाषा बोलने लगें…

सरकार के हस्तक्षेप या प्रबंधन के दबाव का आरोप लगाना एक कमज़ोर बहाना है- मीडिया पेशेवरों ने स्वयं ही ख़ुद को अपने आदर्शों से दूर कर लिया है. वे बेआवाज़ को आवाज़ देने या सत्ताधारी वर्ग से जवाबदेही की मांग करने वाले के तौर पर अपनी भूमिका नहीं देखते हैं. अगर वे खुद व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, तो वे व्यवस्था से सवाल कैसे पूछेंगे?

प्रतीकात्मक तस्वीर.

कश्मीर: मीडिया प्रतिबंध का समर्थन करने के प्रेस काउंसिल के कदम की पत्रकार संगठन ने की आलोचना

प्रेस काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए जम्मू कश्मीर में मीडिया पर लगे प्रतिबंधों का समर्थन किया था.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

जम्मू कश्मीर में पाबंदी पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- सरकार के सिर पर बंदूक रखना सही नहीं

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की राज्य में संचार माध्यमों से पाबंदी हटाने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जहां केंद्र ने अदालत से कहा कि राज्य में किसी भी प्रकाशन पर कोई रोक नहीं है.

कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन. (फोटो: द लीफलेट)

‘जम्मू कश्मीर की मीडिया को खुद नहीं पता कि राज्य में क्या हो रहा है’

साक्षात्कार: जम्मू कश्मीर में मीडिया की स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन से विशाल जायसवाल की बातचीत.

फोटो साभार: पिक्साबे

जम्मू कश्मीर: मीडिया पर लगे प्रतिबंध को हटाने की याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध

‘कश्मीर टाइम्स’ की संपादक अनुराधा भसीन ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य में मीडिया पर लगी पाबंदी हटाने की मांग करते हुए कहा है कि घाटी में बंद होने के चलते पत्रकार काम नहीं कर पा रहे हैं.