अर्थव्यवस्था

वंदे भारत एक्सप्रेस का निरीक्षकण करते केंद्रीय रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी. (फोटो: @SureshAngadi_)

कोई आर्थिक संकट नहीं क्योंकि लोग शादी कर रहे और ट्रेनें भर कर जा रहीं: केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी ने कहा कि लोग आर्थिक संकट का दावा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब कर रहे हैं. हर तीन साल में अर्थव्यवस्था में मांग में गिरावट होती है. यह एक चक्र है. इसके बाद अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर आ जाती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)

ग्रामीण मांग में कमी के कारण 40 साल में पहली बार उपभोक्ताओं की खर्च सीमा घटी: रिपोर्ट

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की एक लीक रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भारतीय द्वारा एक महीने में खर्च की जाने वाली औसत राशि साल 2017-18 में 3.7 फीसदी कम होकर 1446 रुपये रह गई है, जो कि साल 2011-12 में 1501 रुपये थी.

A worker operates a hydraulic press machine at a workshop manufacturing flanges for automobiles in Mumbai, India, May 29, 2017. REUTERS/Shailesh Andrade/File Photo

सितंबर महीने में 4.3 फीसदी की कम हो गया औद्योगिक उत्पादन, आठ साल की सबसे बड़ी गिरावट

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 20.7 प्रतिशत घटा जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. वहीं, विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 3.9 प्रतिशत, बिजली क्षेत्र का उत्पादन 2.6 प्रतिशत घट गया.

Coal Blocks PTI

सितंबर में प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में 5.2 फीसदी की गिरावट

कोयला उत्पादन में 20.5 फीसदी, कच्चे तेल में 5.4 फीसदी और प्राकृतिक गैस में 4.9 फीसदी तक की कमी आई. विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़ें आर्थिक मंदी की गंभीरता के संकेत हैं.

Mumbai: Congress senior leader and former prime minister Manmohan Singh addresses a press conference, in Mumbai, Thursday, Oct. 17, 2019. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad)(PTI10_17_2019_000069)

अर्थव्यवस्था की समस्या दूर करने से पहले उसकी जानकारी होनी ज़रूरी है: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि निर्मला सीतारमण के बयानों को देखा जाए तो पता चलता है कि भाजपा सरकार लोक आधारित नीतियों को अपनाने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार पर विपक्ष के सिर दोष मढ़ने का जुनून सवार है, इसलिए वह उस समस्या का हल नहीं ढूंढ पा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था की हालत सुधर सके.

(फोटो: रॉयटर्स)

एक साल में देश में 9.62 फीसदी बढ़ गई अमीरों की संपत्ति: रिपोर्ट

कार्वी वेल्थ मैनेजमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, इन अमीरों के पास 2017 में 392 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जो कि 2018 में 430 लाख करोड़ रुपये हो गई.

Abhijeet-Banerjee-ANI

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा, डगमगाती स्थिति में है भारतीय अर्थव्यवस्था

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा कि भारत में एक बहस चल रही है कि कौन सा आंकड़ा सही है और सरकार का खासतौर से यह मानना है कि वो सभी आंकड़े गलत हैं, जो असुविधाजनक हैं.

Guwahati: Union IT Minister Ravi Shanker Prasad addresses the programme 'Digital Northeast: Vision Northeast 2022' in Guwahati on Saturday, Aug 11, 2018. (PTI Photo) (PTI8_11_2018_000173B)

एक दिन में तीन फिल्मों की 120 करोड़ की कमाई अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत: रविशंकर प्रसाद

देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अपने बयान की आलोचना होने पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुझे दुख है कि मेरे बयान के एक हिस्से को संदर्भों से काटकर दिखाया गया. एक संवेदनशील व्यक्ति होने के नाते मैं अपना बयान वापस लेता हूं.

A man repairs gear parts used in automobiles inside a workshop at an industrial area in Mumbai, India. Small businesses have been struggling with the new tax. (Photo: Danish Siddiqui/Reuters)

अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 1.1 प्रतिशत घटा, सात साल का सबसे ख़राब प्रदर्शन

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 1.2 प्रतिशत घट गया. बिजली क्षेत्र का उत्पादन 0.9 प्रतिशत नीचे आया. टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन भी 9.1 प्रतिशत घट गया.

New Delhi: Finance Minister Nirmala Sitharaman addresses a press conference after presenting the Union Budget 2019-20, in New Delhi, Friday, July 5, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI7_5_2019_000138B)

कुछ ख़ामियां होंगी लेकिन आलोचना न करें, जीएसटी अब देश का क़ानून है: निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि टैक्स प्रोफेशनल्स जीएसटी को कोसना छोड़कर बेहतर बनाने के बारे में सुझाव दें.

(फोटो: रॉयटर्स)

विश्व आर्थिक मंच की प्रतिस्पर्धिता सूचकांक में 10 स्थान फिसला भारत

विश्व आर्थिक मंच के सालाना वैश्विक प्रतिस्पर्धिता सूचकांक में भारत इस साल ब्रिक्स देशों में सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा, जबकि चीन की स्थिति सबसे अच्छी रही. वहीं, स्वस्थ जीवन की संभावना के मामले में भारत का स्थान अफ्रीकी महाद्वीप के देशों को छोड़कर सबसे ख़राब रहा.

New Delhi: Finance Minister Nirmala Sitharaman addresses a press conference after presenting the Union Budget 2019-20, in New Delhi, Friday, July 5, 2019. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI7_5_2019_000138B)

वित्त आयोग ने जीएसटी परिषद को एक या दो दरें रखने का सुझाव दिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बीते शुक्रवार को हुई जीएसटी परिषद की 37वीं बैठक में 15वं वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने परिषद को जीएसटी के तहत चार से अधिक दरें रखे जाने के बजाय एक या ज्यादा से ज्यादा दो दरें रखने पर विचार करने का सुझाव दिया.

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती. (फोटो: पीटीआई)

सांसों की तरह अर्थव्यवस्था भी ऊपर-नीचे होती रहती हैः उमा भारती

देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने कहा कि जहां तक मंदी के दौर की बात है, ये सांसों के आरोह और अवरोह की तरह होता है. सांस नीचे-ऊपर होती है लेकिन शरीर पूरा चल रहा होता है.

हरीश साल्वे (फोटो साभार: बार एंड बेंच)

आर्थिक मंदी के लिए सुप्रीम कोर्ट ज़िम्मेदार: हरीश साल्वे

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने एक हालिया साक्षात्कार में कहा कि 2जी घोटाले, कोल ब्लॉक आवंटन और वोडाफोन मामले में दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया है.

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (फोटो: पीटीआई)

पहली तिमाही में पांच फीसदी जीडीपी वृद्धि दर चौंकाने वाली: आरबीआई गवर्नर

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि हर किसी ने आर्थिक वृद्धि का जो अनुमान जताया था, वह 5.5 प्रतिशत से कम नहीं था.

(फोटो: रॉयटर्स)

कपड़ा उद्योग में हो रही छंटनी की वजह क्या है?

वीडियो: अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में आई मंदी के बीच रोज़गार को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हरियाणा के उद्योग विहार फेज़-1 के कपड़ा उद्योग में काम करने वाले मज़दूरों का कहना है कि मांग और निर्माण में आई कमी के चलते उनकी नौकरियां गई हैं.

राहुल गांधी. (फोटो साभार: ट्विटर/@INCIndia)

अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए दुष्प्रचार नहीं, ठोस नीति की ज़रूरत: राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि इस समय दुष्प्रचार, मनगढ़ंत ख़बरों और युवाओं के बारे में मूर्खतापूर्ण बातें करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि भारत को एक ठोस नीति की ज़रूरत है ताकि अर्थव्यवस्था की स्थिति को ठीक किया जा सके.

New Delhi: Former prime minister Manmohan Singh addresses after 'Indira Gandhi Prize for Peace, Disarmament for 2017, and Development' was conferred upon him, in New Delhi, Monday, Nov. 19, 2018. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI11_19_2018_000202B)

मनमोहन सिंह ने कहा, लंबे समय तक आजादी का छिन जाना कोई छोटी-मोटी कीमत नहीं होती

जयपुर में एक निजी विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत को पांच हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए हमें एक अच्छी तरह से सोची समझी रणनीति की जरूरत है.

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मीडिया बोल: मंदी के दौर में सत्ता का मोदी मंत्र कब तक?

वीडियो: मीडिया बोल के इस अंक में भारतीय अर्थव्यवस्था के गिरते स्तर पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश आर्थिक मामलों की विशेषज्ञ पत्रकार पूजा मेहरा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की छात्रा आकृति भाटिया और द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु के साथ चर्चा कर रहे हैं.

Bengaluru: Chairman of the State Finance Ministers Group and Bihar Deputy Chief Minister Sushil Kumar Modi speaks during a press conference after meeting with the group of ministers constituted to monitor and remove IT challenges faced in implementation of GST, in Bengaluru on Saturday, July 14, 2018. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)(PTI7_14_2018_000148B)

बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी ने कहा, सावन-भादो के महीने में हर साल रहती है मंदी

बिहार के उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सुशील मोदी ने कहा कि वैसे तो हर साल सावन-भादो में मंदी रहती है, लेकिन इस बार मंदी का ज्यादा शोर मचा कर कुछ लोग चुनावी पराजय की खीझ उतार रहे हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: रॉयटर्स)

अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए प्रतिशोध की राजनीति छोड़ विशेषज्ञों की राय ले सरकार: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछली तिमाही में जीडीपी केवल 5 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो इस ओर इशारा करती है कि हम एक लंबी मंदी के दौर में हैं. भारत में ज्यादा तेजी से वृद्धि करने की क्षमता है, लेकिन मोदी सरकार के चौतरफा कुप्रबंधन के चलते अर्थव्यवस्था में मंदी छा गई है.

A worker operates a hydraulic press machine at a workshop manufacturing flanges for automobiles in Mumbai, India, May 29, 2017. REUTERS/Shailesh Andrade/File Photo

2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर पांच फीसदी रही, पिछले छह सालों में सबसे कम

इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर इतनी कम थी. उस समय ये दर 4.9 फीसदी पर थी.

(फोटो: पीटीआई)

भारत का संप्रभु बॉन्ड से पैसा जुटाने का फैसला काफी जोख़िम भरा है

अगर केंद्र की मोदी सरकार को विदेशों से डॉलर में क़र्ज़ लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है तो इसके पीछे पिछले पांच वर्षों के दौरान पनपने वाले आर्थिक संकट का हाथ है.

New Delhi: Chief Economic Advisor Arvind Subramanian addresses a press conference, in New Delhi, on Wednesday, June 20, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI6_20_2018_000134B)

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने जीडीपी पर अरविंद सुब्रमण्यम के दावे को ख़ारिज किया

देश के पूर्व मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा था कि साल 2011-12 से 2016-17 के दौरान देश के जीडीपी आंकड़े को काफी बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया. इस दौरान जीडीपी सात फीसदी नहीं, बल्कि 4.5 फीसदी बढ़ी है.

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2011-12 से 2016-17 के बीच में जीडीपी 7 फीसदी नहीं, बल्कि 4.5 फीसदी दर से बढ़ी: अरविंद सुब्रमण्यम

देश के पूर्व मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम का कहना है कि साल 2011-12 से 2016-17 के दौरान देश के जीडीपी आंकड़े को काफी बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया. इस दौरान जीडीपी सात फीसदी नहीं, बल्कि 4.5 फीसदी की दर से बढ़ी है.

नरेंद्र मोदी. (फोटो: रॉयटर्स)

अर्थव्यवस्था में जान फूंकना मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी

देश की कमज़ोर अर्थव्यवस्था के बीच प्रचंड जनादेश हासिल करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष कई बड़ी आर्थिक चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

पांच साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंची जीडीपी वृद्धि दर, चीन से पिछड़ा भारत

वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही जो चीन की जनवरी-मार्च 2019 को समाप्त तिमाही में 6.4 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले कम है. राष्ट्रीय आय पर सीएसओ के आंकड़े के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में पूरे साल के दौरान जीडीपी की वृद्धि दर भी घटकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 6.8 प्रतिशत रही है.

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नोटबंदी के बाद से देश में 50 लाख लोगों की नौकरियां गईंः रिपोर्ट

रिपोर्ट में बताया गया है कि नौकरी खोने वाले इन 50 लाख लोगों में शहरी और ग्रामीण इलाकों के कम शिक्षित पुरुषों की संख्या अधिक है. पुरूषों की तुलना में महिला इससे अधिक प्रभावित हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

आर्थिक असमानता लोगों को मजबूर कर रही है कि वे बीमार तो हों पर इलाज न करा पाएं

सबसे ग़रीब तबकों में बाल मृत्यु दर और कुपोषण के स्तर को देखते हुए यह समझ लेना होगा कि लोक सेवाओं और अधिकारों के संरक्षण के बिना न तो ग़ैर-बराबरी ख़त्म की जा सकेगी, न ही भुखमरी, कुपोषण और बाल मृत्यु को सीमित करने के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

उदारीकरण के बाद बनीं आर्थिक नीतियों से ग़रीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ती गई

जब से नई आर्थिक नीतियां आईं, चुनिंदा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए खुलेआम जनविरोधी नीतियां बनाई जाने लगीं, तभी से देश राष्ट्र में तब्दील किया गया. इन नीतियों से भुखमरी, कुपोषण और ग़रीबी का चेहरा और विद्रूप होने लगा तो देश के सामने राष्ट्र को खड़ा कर दिया गया. खेती, खेत, बारिश और तापमान के बजाय मंदिर और मस्जिद ज़्यादा बड़े मुद्दे बना दिए गए.

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विपक्ष को मोदी के उग्र एजेंडा के जाल से बचना होगा

भाजपा ने आम चुनाव में राष्ट्रवाद और पाकिस्तान से ख़तरे को मुद्दा बनाने का मंच सजा दिया है. वो चाहती है कि विपक्ष उनके उग्रता के जाल में फंसे, क्योंकि विपक्षी दल उसकी उग्रता को मात नहीं दे सकते. विपक्ष को यह समझना होगा कि जनता में रोजगार, कृषि संकट, दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार जैसे मुद्दों को लेकर काफी बेचैनी है और वे इनका हल चाहते हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the function to mark one-year of Himachal Pradesh Government, in Dharamshala, Himachal Pradesh on December 27, 2018.

क्या मोदी सरकार का आख़िरी बजट वास्तव में भारत की तरक्की की कहानी बयां करता है?

3000 करोड़ रुपये की मूर्ति, 1 लाख करोड़ रुपये की बुलेट ट्रेन उस देश की सबसे पहली ज़रूरतें हैं, जहां छह करोड़ बच्चे कुपोषित हैं, शिक्षकों के दस लाख पद ख़ाली हैं, सवा तीन लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं और 20 करोड़ लोग रोज़ भूखे सोते हैं.

एस्सेल समूह और ज़ी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा. (फोटो साभार: फेसबुक)

वित्तीय संकट में फंसे ज़ी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा, पत्र लिखकर कहा- सबका क़र्ज़ चुकाऊंगा

एस्सेल और ज़ी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने वित्तीय संकट के लिए बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर आक्रामक तरीके से दांव लगाने और वीडियोकॉन का डी2एच कारोबार ख़रीदने के निर्णय को ज़िम्मेदार बताया.

सुभाष चंद्रा.

ज़ी न्यूज़ के संस्थापक और मालिक सुभाष चंद्रा ने क्यों सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है

सुभाष चंद्रा के एक पत्र से ज़ाहिर है कि उनकी कंपनी ​पर वित्तीय संकट मंडरा रहा है. सरकार के इतने क़रीब होने के बाद भी सुभाष चंद्रा लोन नहीं दे पा रहे हैं तो समझ सकते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था कितनी नाज़ुक हालत में है. इनके चैनलों पर मोदी के बिज़नेस मंत्रों की कितनी तारीफ़ें हुई हैं और उन्हीं तारीफ़ों के बीच उनका बिज़नेस लड़खड़ा गया.

(फोटो: रॉयटर्स)

भारत के 9 अमीरों के पास है 50 फीसदी आबादी के बराबर संपत्ति: रिपोर्ट

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2018 में देश के शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों की संपत्ति में 39 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि पचास प्रतिशत ग़रीब आबादी की संपत्ति में महज़ 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

New Delhi: Reserve Bank of India Governor Shaktikanta Das interacts with the media at the RBI office, in New Delhi, Monday, Jan. 7, 2019.(PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI1_7_2019_000090B)

आर्थिक वृद्धि तो ठीक लेकिन महंगाई चिंता की बात: आरबीआई गवर्नर

आरबीआई गवर्नर का पद संभालने के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में शक्तिकांत दास ने कहा कि तेल, खाद्य-पदार्थ और तमाम वस्तुओं की कीमतों में अनिश्चितता की स्थिति महंगाई के मूल्यांकन में बाधक हैं. कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने विकास दर के आंकड़ों को बोगस बताया.

A worker operates a hydraulic press machine at a workshop manufacturing flanges for automobiles in Mumbai, India, May 29, 2017. REUTERS/Shailesh Andrade/File Photo

17 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा औद्योगिक विकास

विनिर्माण क्षेत्र की धीमी रफ़्तार के कारण औद्योगिक विकास नवंबर महीने में सिर्फ़ 0.5 प्रतिशत दर्ज की गई. इससे पहले जून 2017 में यह 0.3 प्रतिशत पर पहुंच गया था.