असमिया

Photo: Kinshuk Kashyap/Flickr (CC BY 2.0)

पहचान और हक़ के लिए लड़ती ‘मिया कविता’

मिया कविता, मिया समुदाय की अस्मिता की लड़ाई है, अपनी भाषा-संस्कृति, अपनी पहचान की लड़ाई है. वे अपनी कविताओं के माध्यम से इस भूखंड पर अपनी पहचान, अपने अस्तित्व और अपने हक़ की मांग कर रहे हैं.

Barak_River_in_Silchar Wikimedia Commons

​‘मैं बंजर पड़ी ज़मीनों को हरे लहलहाते धान के खेतों में बदलता हूं, लिखो मैं एक मिया हूं’

असम में मिया कविता पर बना एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाले जाने के बाद इस कविता के रचनाकार हाफ़िज़ अहमद समेत 10 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया. आरोप है कि इन कविता में एनआरसी और असमिया लोगों के प्रति पूर्वाग्रह झलकता है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

हिंदी सहित छह क्षेत्रीय भाषाओं में अपने फैसले का अनुवाद उपलब्ध कराएगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट हिंदी के अलावा जिन भाषाओं में अपने फैसलों का अनुवाद उपलब्ध कराएगा उनमें असमिया, कन्नड़, मराठी, उड़िया और तेलुगू शामिल हैं.

Nagaon: People wait to check their names on the final draft of the state's National Register of Citizens after it was released, at an NRC Seva Kendra in Nagaon on Monday, July 30, 2018. (PTI Photo) (PTI7_30_2018_000127B)

एनआरसी की जड़ें असम के इतिहास से जुड़ी हुई हैं

असम देश का इकलौता राज्य है, जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी बनाया जा रहा है. एनआरसी क्या है? असम में ही इसे क्यों लागू किया गया है और इसे लेकर विवाद क्यों है?