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गांधी का वो उपवास, जो उनके लिए आख़िरी साबित हुआ

वीडियो: आज़ादी के बाद भारत में ख़ूनखराबे का सिलसिला जारी था. इसके विरोध में गांधीजी ने अपना आख़िरी उपवास 13 जनवरी 1948 को शुरू किया था. इस घटना पर इतिहासकार दिलीप सिमीओन से चर्चा कर रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद.

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आज के दिन शुरू हुआ वो उपवास जो गांधीजी के लिए आख़िरी साबित हुआ

आज़ादी के बाद दिल्ली में ख़ूनखराबे का सिलसिला जारी था. इसके विरोध में गांधीजी ने 12 जनवरी 1948 को घोषणा की कि वह अगले दिन यानी 13 जनवरी से उपवास शुरू करेंगे.

साभार: competitionzenith.blogspot.in

जब जेपी के जीवित रहते हुए संसद ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी थी…

जन्मदिन विशेष: गैरकांग्रेसवाद का सिद्धांत भले ही डाॅ. राममनोहर लोहिया ने दिया था लेकिन उसकी बिना पर कांग्रेस की केंद्र की सत्ता से पहली बेदखली 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तत्वावधान में ही संभव हुई.

जयप्रकाश नारायण. (जन्म: 11 अक्टूबर 1902  मृत्यु: 08 October 1979)

कहते हैं उनको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है…

पुण्यतिथि विशेष: आपातकाल की चर्चा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की चर्चा न की जाए.

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हम गांधी के लायक कब होंगे?

गांधी गाय को माता मानते हुए भी उसकी रक्षा के लिए इंसान को मारने से इंकार करते हैं. उनके ही देश में गोरक्षकों ने पीट-पीट कर मारने का आंदोलन चला रखा है.

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हिंसा की राह पर चलने वाले किसी व्यक्ति या समूह को बख़्शा नहीं जाएगा: मोदी

आकाशवाणी पर प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी.

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रामगढ़ में पीट-पीटकर मार डालने की घटना में स्थानीय भाजपा नेता गिरफ़्तार

जिस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने गाय और गोरक्षा के नाम पर क़ानून हाथ में न लेने की अपील की थी, उसी दिन झारखंड में एक व्यक्ति को गोमांस ले जाने के संदेह में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था.

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क्या गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वाले प्रधानमंत्री की भी नहीं सुन रहे?

जिस दिन प्रधानमंत्री ने बयान दिया कि गाय और गोरक्षा के नाम पर किसी को क़ानून हाथ में लेने का हक़ नहीं है, उसी दिन झारखंड में एक और व्यक्ति की गाय के नाम पर हत्या कर दी गई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: रॉयटर्स)

गोरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या स्वीकार्य नहीं: प्रधानमंत्री

अहमदाबाद में साबरमती आश्रम के शताब्दी वर्ष समारोह में बोलते हुए मोदी ने कहा कि गाय के नाम पर किसी भी इंसान को क़ानून हाथ में लेने का हक़ नहीं है.

गुजरात के उना में दलित समुदाय के कुछ लोगों को मरी हुई गाय की खाल उतारने की वजह से सरेआम पिटाई की गई थी.

लोग गाय माता की सेवा करते-करते ख़ुद भेड़िये बन गए हैं

वह कैसी सोच है जिसे पूरी दुनिया में केवल एक गाय ही रक्षा करने योग्य लगती है. सड़क के किनारे सोया थका-हारा मज़दूर नहीं, पुल के नीचे मिट्टी में पलते दुर्बल बच्चे नहीं, अस्पतालों के बाहर बैठे रोगी नहीं.

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सभ्य समाज में मूल अधिकारों के लिए बंदूकों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए: गांधी

इतिहासकार सुधीर चंद्र ने अपनी किताब ‘गांधी: एक असंभव संभावना ‘में गांधी के विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला है.

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वीडियो: ‘गांधी एक असंभव संभावना’ के लेखक सुधीर चंद्र से बातचीत

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और उनके विचार पर इतिहासकार और ‘गांधी एक असंभव संभावना’ के लेखक सुधीर चंद्र से अजय आशीर्वाद की बातचीत.