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क्या एबीपी न्यूज़ ने मोदी सरकार के समर्थन में फ़र्ज़ी शो चलाया?

एबीपी न्यूज़ ने आईआईटी बॉम्बे कैंपस से ‘2019 के जोशीले’ नाम के एक कार्यक्रम को प्रसारित करते हुए ‘आईआईटी बॉम्बे सपोर्ट्स मोदी’ लिखा था. आईआईटी छात्रों का कहना है कि इस शो के 50 प्रतिभागियों में से 11 बाहरी लोग थे, जो मोदी सरकार के समर्थन में बोलने के लिए चैनल द्वारा लाए गए थे.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi gestures during the CSIR's Shanti Swarup Bhatnagar Prize for Science and Technology 2016-2018 ceremony in New Delhi, Thursday, Feb 28, 2019. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI2_28_2019_000105B)

मोदी पर डिस्लेक्सिया पीड़ितों का मज़ाक उड़ाने का आरोप

विशेष रूप से सक्षम लोगों के लिए काम करने वाले संगठन ‘नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ द डिसेबल्ड’ ने डिस्लेक्सिया पीड़ितों के लिए असंवेदनशील शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की है.

आईआईटी मद्रास. (फोटो साभार: फेसबुक)

आरटीआई से खुलासा, देश के आठ प्रमुख आईआईटी में शिक्षकों के 36 फीसद पद खाली

शिक्षकों की कमी के मामले में सबसे गंभीर स्थिति वाराणसी के आईआईटी बीएचयू की है. यहां पर शिक्षकों के लिए 548 स्वीकृत पद हैं लेकिन इस समय सिर्फ 265 शिक्षक काम कर रहे हैं.

विक्रांत वत्सल (फोटो: फेसबुक)

‘मैं भाजपा से सहानुभूति रखता था लेकिन सरकार की नीतियों को देखकर मेरा भरोसा उठ गया’

साक्षात्कार: आईआईटी के 50 पूर्व और मौजूदा छात्रों द्वारा बनाए गए बहुजन आज़ाद पार्टी के संस्थापक सदस्य विक्रांत वत्सल से प्रशांत कनौजिया की बातचीत.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing a public meeting, at Kedarnath, in Uttarakhand on October 20, 2017.

हमारे मुल्क में ऐसे लोग सत्ता पर क़ाबिज़ हैं जो विज्ञान को आस्था का विषय मानते हैं

किसी भी देश या समाज का यह रवैया कि उसकी धार्मिक पुस्तक या मान्यताएं थियरी आॅफ एव्रीथिंग हैं और इनमें ही भूत, वर्तमान, भविष्य का सारा ज्ञान और विज्ञान निहित है, बहुत ही आत्मघाती है.

Kolkata: Former President Pranab Mukherjee addresses a special session on 'Prospects for Economic Growth and the Policy Imperatives for India' in Kolkata on Wednesday evening. PTI Photo by Swapan Mahapatra (PTI2_28_2018_000219B)

भारतीय प्रतिभाएं दुनिया को आकर्षित करती हैं, लेकिन गिने-चुने ही मानवता के काम आ सके: प्रणब

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, मेडिकल के क्षेत्र में तैयार प्रतिभाएं बड़ी-बड़ी कंपनियों में चली जाती हैं. लेकिन सीवी रमण के बाद किसी भारतीय को नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है.

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बजट 2018: वादों और दावों की भूलभुलैया

दो हज़ार करोड़ के फंड के साथ पचास करोड़ लोगों को बीमा देने की करामात भारत में ही हो सकती है. यहां के लोग ठगे जाने में माहिर हैं. दो बजट पहले एक लाख बीमा देने का ऐलान हुआ था, आज तक उसका पता नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

अतार्किकता और अवैज्ञानिकता के मामले में क्या हम पाकिस्तान बनने की ओर अग्रसर हैं?

भारत में बंददिमागी एवं अतार्किकता को जिस किस्म की शह मिल रही है और असहमति की आवाज़ों को सुनियोजित ढंग से कुचला जा रहा है, उसे रोकने की ज़रूरत है ताकि संविधान को बचाया जा सके.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

आईआईटी से निकले पेशेवर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ‘सेल्समैन’ बनकर रह जाते हैं: प्रणब मुखर्जी

बांग्लादेश में चटगांव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विश्वविद्यालयों से अपने लक्ष्य की समीक्षा करने पर ज़ोर दिया.

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‘बीएचयू को जेएनयू नहीं बनने देंगे’ का क्या मतलब है?

बीते कई दशकों से एक साधन-संपन्न और बड़ा केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के बावजूद बीएचयू पूर्वांचल में ज्ञान और स्वतंत्रता की संस्कृति का केंद्र क्यों नहीं बन सका!