आईपीसी

​​(फोटो: पीटीआई)

बलात्कार, यौन उत्पीड़न के पीड़ितों के नाम और पहचान का खुलासा न किया जाए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक ​मीडिया को निर्देश दिया कि मृत और मानसिक रूप से अस्वस्थ पीड़ितों की पहचान किसी भी तरह से उजागर नहीं की जा सकती है, चाहे इसमें माता-पिता की सहमति ही क्यों न हों. कोर्ट ने समाचार चैनलों से ऐसे मुद्दे को टीआरपी के लिए सनसनी बनाने से बचने को कहा.

पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीइस गिल और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रूपन देओल बजाज (फाइल फोटो: एएनआई/विकिपीडिया)

रूपन देओल बजाज: जिन्होंने केपीएस गिल द्वारा यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और जीत हासिल की

साक्षात्कार: 1988 में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रूपन देओल बजाज ने पंजाब के तत्कालीन डीजीपी केपीएस गिल पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. 17 साल चली लंबी क़ानूनी लड़ाई के बाद उन्हें जीत हासिल हुई.

Court Hammer (2)

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: व्यभिचार अब अपराध नहीं, महिला पति की संपत्ति नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुराने भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक ठहराया, कहा ये मनमाना कानून था.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं: विधि आयोग

आयोग ने कहा कि देशभक्ति का कोई एक पैमाना नहीं है. लोगों को अपने तरीके से देश के प्रति स्नेह प्रकट करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.

(फोटो: पीटीआई)

व्यभिचार पर दंडात्मक प्रावधान समानता के अधिकार का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत 158 वर्ष पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 497 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिलाओं का ख़तना संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है: सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह प्रथा आईपीसी और पॉक्सो क़ानून के तहत एक दंडनीय अपराध है. इस प्रथा पर 42 देशों में प्रतिबंध है.

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बिना जांच के दवा लिखना आपराधिक लापरवाही है: बॉम्बे हाईकोर्ट

अदालत ने कहा कि मेडिकल पेशे से लापरवाही और लापरवाह डॉक्टरों को बाहर निकालने से ऐसे डॉक्टरों का सम्मान बरकार रहेगा जो कि ईमादारी से काम करते हैं और इस पेशे के नैतिक मूल्यों का पालन करते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध मानने वाली धारा 377 के ख़िलाफ़ याचिका संविधान पीठ को सौंपी

आईपीसी की धारा 377 कहती है कि जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक यौनाचार करता है तो इस अपराध के लिए उसे उम्रक़ैद की सज़ा होगी.

मालेगांव ब्लास्ट की तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)​​​

अदालत ने एनआईए की दलील मानी, मालेगांव धमाका हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में एक क़दम था

विशेष अदालत ने कहा कि वह एनआईए का यह तर्क मानती है कि आरोपियों ने हिंदू राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से बम धमाके को अंजाम देने की साज़िश रची थी.

फोटो: पीटीआई

मैरिटल रेप को अपराध घोषित करना वैवाहिक संस्था के लिए ख़तरा: केंद्र सरकार

दिल्ली हाईकोर्ट में मैरिटल रेप पर हो रही सुनवाई में केंद्र ने कहा कि पश्चिमी देशों में इसे अपराध माने जाने का ये मतलब नहीं कि भारत भी आंख मूंदकर वही करे.