आज़ादी

जस्टिस दीपक गुप्ता. (फोटो: विकिपीडिया)

असहमति का अधिकार लोकतंत्र के लिए आवश्यक है: जस्टिस दीपक गुप्ता

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र और असहमति’ पर एक व्याख्यान देते हुए जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा कि अगर यह भी मान लिया जाए कि सत्ता में रहने वाले 50 फीसदी से अधिक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं तब क्या यह कहा जा सकता है कि बाकी की 49 फीसदी आबादी का देश चलाने में कोई योगदान नहीं है?

Lucknow: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath addresses during the 36-hour special session in the UP Assembly to mark the 150th anniversary of Mahatma Gandhi, in Lucknow, Thursday, Oct. 3, 2019. (PTI Photo)(PTI10_3_2019_000151B)

सीएए प्रदर्शनों में हुई मौतों पर बोले आदित्यनाथ, अगर कोई मरने ही आ रहा है तो ज़िंदा कैसे हो जाएगा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बयान विधानसभा में विपक्ष के उन आरोपों के जवाब में दिया, जिनमें कहा गया था कि सीएए विरोधी हिंसा में मारे गए सभी लोग पुलिस की गोली से ही मारे गए हैं. आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि जो मरे हैं, वे उपद्रवियों की गोली से ही मरे हैं.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़. (फोटो: पीटीआई)

असहमति या विरोध को एंटी नेशनल बताना लोकतंत्र के मूल विचार पर चोट: जस्टिस चंद्रचूड़

अहमदाबाद में हुए एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि असहमति पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल डर की भावना पैदा करता है जो क़ानून के शासन का उल्लंघन है.

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योगी-राज में ‘आज़ादी’ अब ‘राजद्रोह’

वीडियो: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदर्शन के नाम पर आज़ादी का नारा लगाना राजद्रोह की तरह है. सरकार सख़्त कार्रवाई करेगी. इस मुद्दे द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

Moradabad: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath attends a function at Dr BR Ambedkar Police Academy, in Moradabad on Monday, July 9, 2018. (PTI Photo) (PTI7_9_2018_000114B)

आज़ादी के नारे लगाना देशद्रोह, करेंगे सख़्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में हुई रैली के दौरान कहा अब तो इन लोगों में इतनी भी हिम्मत नहीं रही कि स्वयं आंदोलन करने की स्थिति में हो इसलिए अपने घर की महिलाओं को चौराहे-चौराहे पर बिठाना शुरू कर दिया है.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का ‘हम देखेंगे’ मज़हब का नहीं अवामी इंक़लाब का तराना है…

जो लोग ‘हम देखेंगे’ को हिंदू विरोधी कह रहे हैं, वो ईश्वर की पूजा करने वाले ‘बुत-परस्त’ नहीं, सियासत को पूजने वाले ‘बुत-परस्त’ हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जनरल बिपिन रावत. (फोटो: पीटीआई)

जनरल बिपिन रावत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त

सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पिछले मंगलवार को सीडीएस का पद बनाए जाने को मंजूरी दी थी जो तीनों सेनाओं से जुड़े सभी मामलों में रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करेगा. सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with Union Ministers Nitin Gadkari, Rajnath Singh, Amit Shah and others during the first cabinet meeting, at the Prime Minister’s Office, in South Block, New Delhi, May 31, 2019. (PTI Photo)(PTI5_31_2019_000248B)

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति को मंज़ूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन, विभिन्न संवर्गों के विलय, दिवाला कानून, शस्त्र संशोधन विधेयक, बंगाल पूर्वी सीमांत नियामक, भारत-बांग्लादेश के बीच युवा मामलों में सहयोग के लिए अध्यादेश को भी मंज़ूरी दी.

(फोटो: रॉयटर्स)

आरटीआई एक्ट के दायरे में होगा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैन्य सुधार के तहत बीते 15 अगस्त को घोषणा की थी कि भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित किया जाएगा, जो तीनों सेनाओं का प्रमुख होगा.

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

Indian Flag Flickr

आज़ादी के 72वें साल में लोकतंत्र पर भीड़तंत्र हावी हो गया

एक सोची-समझी साज़िश के तहत जनता को एक बिना सोच-समझ वाली भीड़ में बदल दिया गया है. अब ऐसी भीड़ देश के हर क़स्बे -गांव में घूम रही है, जो एक इशारे पर किसी को भी पीट-पीटकर मार डालने को तैयार है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: एएनआई)

प्रधानमंत्री ने की ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ’ पद सृजित करने की घोषणा

73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छोटा परिवार रखना भी देशभक्ति है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 71st Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2017.

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जो झंडे गाड़े हैं, तिरंगा उनका रूप नहीं लगता

क्या भगवा झंडे के समर्थक संघ और संघ से जुड़े किसी भी व्यक्ति या दल की तिरंगे के प्रति ईमानदारी पर विश्वास किया जा सकता है?

(फाइल फोटो: पीटीआई)

अगर तिरंगा फहराना ही देशभक्ति है तो संघ पंद्रह साल पहले ही देशभक्त हुआ है

आज़ादी के 72 साल: क्या 2002 के पहले तिरंगा भारतीय राष्ट्र का राष्ट्रध्वज नहीं था या फिर आरएसएस खुद अपनी आज की कसौटी पर कहें तो देशभक्त नहीं था?

(फोटो: पीटीआई)

‘हमें आज़ादी तो मिल गई है पर पता नहीं कि उसका करना क्या है’

आज़ादी के 72 साल: हमारी हालत अब भी उस पक्षी जैसी है, जो लंबी कैद के बाद पिंजरे में से आज़ाद तो हो गया हो, पर उसे नहीं पता कि इस आज़ादी का करना क्या है. उसके पास पंख हैं पर ये सिर्फ उस सीमा में ही रहना चाहता है जो उसके लिए निर्धारित की गई है.

Indian tribal people sit at a relief camp in Dharbaguda in Chhattisgarh. File Photo Reuters

लोकतंत्र और आज़ादी के असल मायने आदिवासी समाज से सीखने होंगे

विश्व आदिवासी दिवस: आदिवासियों की अपनी बोलचाल की भाषा और आम चर्चा में लोकतंत्र या आज़ादी शब्द का कोई स्थान नहीं है. किसी आदिवासी से इन शब्दों के बारे में पूछें तो वो शायद चुप रहे, लेकिन इसके असली मायने का एहसास उन्हें स्वाभाविक रूप से है.

Narendra Modi Reuters featured

आम चुनावों में पहली बार कश्मीर मुद्दे का पूरी तरह राजनीतिकरण होगा

पुलवामा हमले के बाद हालात ऐसे हैं कि भाजपा इसका राजनीतिक लाभ लेने के लोभ से बच ही नहीं सकती. नरेंद्र मोदी के लिए इससे बेहतर और क्या होगा कि नौकरियों की कमी और कृषि संकट से ध्यान हटाकर चुनावी बहस इस बात पर ले आएं कि देश की रक्षा के लिए सर्वाधिक योग्य कौन है?

Mumbai: Students wave the Indian tricolor flag while celebrating the 71st Independence Day in Mumbai on Tuesday. PTI Photo by Santosh Hirlekar(PTI8_15_2017_000183B)

भारत जैसे देश में सिर्फ़ संविधान की सीमाओं में रहकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं

आज़ादी के इतिहास को देखने पर यह पता चलता है कि तत्कालीन नेताओं ने आज़ादी को प्राप्त करने हेतु अपने-अपने मार्गों पर चलने का कार्य किया परंतु एक मार्ग पर चलने वाले ने दूसरे मार्ग पर चलने वाले नेताओं को कभी भी राष्ट्रद्रोही नहीं कहा.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

सरकार के खिलाफ बोलना देशद्रोह नहीं: विधि आयोग

आयोग ने कहा कि देशभक्ति का कोई एक पैमाना नहीं है. लोगों को अपने तरीके से देश के प्रति स्नेह प्रकट करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.

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हमें राजनीतिक आज़ादी तो मिल गई, लेकिन सामाजिक और आर्थिक आज़ादी कब मिलेगी?

आज़ादी के 71 साल: सरकार यह महसूस नहीं करती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा पर किया गया सरकारी ख़र्च वास्तव में बट्टे-खाते का ख़र्च नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए किया गया निवेश है.

New Delhi: A woman sells the Indian national flag on a roadside ahead of Republic Day, in New Delhi on Wednesday. (PTI Photo by Ravi Choudhary)(PTI1_24_2018_000293B)

स्वतंत्रता के सात दशक बाद मिली भीख मांगकर भूख मिटाने की ‘आज़ादी’ का ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा था कि ऐसे देश में भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है जहां सरकार भोजन या नौकरियां प्रदान करने में असमर्थ है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 71st Independence Day from the ramparts of Red Fort, in Delhi on August 15, 2017.

मोदी यह कहना बंद करें कि सवा सौ करोड़ जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाया है

जनता से सलाह मांगना एक अच्छा विचार है, लेकिन प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में क्या बोलना है, इसके लिए जनता से सलाह मांगना, 15 अगस्त के भाषण के गंभीर काम को लोकप्रिय फरमाइशी कार्यक्रम में तब्दील कर देता है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addressing the nation from the ramparts of the historic Red Fort on the occasion of the 71st Independence Day, in New Delhi on Tuesday. PTI Photo / PIB (PTI8_15_2017_000059B) *** Local Caption ***

15 अगस्त 1975 ​के लाल क़िले और 15 अगस्त 2018 के लाल क़िले का फ़र्क़

इमरजेंसी लगाकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘नए भारत’ का उद्घोष किया था. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘न्यू इंडिया’ का ऐलान करेंगे.

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उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान: भारतीय संगीत का संत कबीर

पुण्यतिथि विशेष: उस्ताद ऐसे बनारसी थे जो गंगा में वज़ू करके नमाज़ पढ़ते थे और सरस्वती को याद कर शहनाई की तान छेड़ते थे. इस्लाम में संगीत के हराम होने के सवाल पर हंसकर कहते थे, ‘क्या हुआ इस्लाम में संगीत की मनाही है, क़ुरान की शुरुआत तो ‘बिस्मिल्लाह’ से ही होती है.’

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गांधी का वो उपवास, जो उनके लिए आख़िरी साबित हुआ

वीडियो: आज़ादी के बाद भारत में ख़ूनखराबे का सिलसिला जारी था. इसके विरोध में गांधीजी ने अपना आख़िरी उपवास 13 जनवरी 1948 को शुरू किया था. इस घटना पर इतिहासकार दिलीप सिमीओन से चर्चा कर रहे हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद.

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आज के दिन शुरू हुआ वो उपवास जो गांधीजी के लिए आख़िरी साबित हुआ

आज़ादी के बाद दिल्ली में ख़ूनखराबे का सिलसिला जारी था. इसके विरोध में गांधीजी ने 12 जनवरी 1948 को घोषणा की कि वह अगले दिन यानी 13 जनवरी से उपवास शुरू करेंगे.

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लोकसभा में 245 पुराने एवं अप्रसांगिक क़ानूनों को निष्प्रभावी बनाने वाले दो विधेयकों को मंज़ूरी दी

क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया, मोदी सरकार ने पिछले तीन सालों में 1183 अप्रासंगिक हो चुके क़ानूनों को समाप्त कर दिया है.

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संसद में उठी सरदार भगत सिंह को शहीद घोषित करने की मांग

राज्यसभा में सदस्य ने कहा, भारत को आज़ाद हुए करीब 70 साल हो रहे हैं, लेकिन सरदार भगत सिंह को अब तक शहीद का दर्जा नहीं दिया गया है.

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सरदार पटेल ने ‘हिंदू राज’ के विचार को ‘पागलपन’ कहा था

मोदी अगर सरदार पटेल को अपना नेता मानते हैं तो फिर उन्हें पटेल की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता पर अमल करते हुए हिंदू राष्ट्र के लिए हथियार उठाने का आह्वान करने वाले सिरफिरे पर कार्रवाई करनी चाहिए.

नेशनल कॉन्फेंस अध्यक्ष फ़ारूक अब्दुल्ला. फोटो: पीटीआई

केंद्र सांप्रदायिकता रोकने में नाकाम, देश का धर्मनिरपेक्ष तानाबाना तबाह हो जाएगा: अब्दुल्ला

भाजपा बोली- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग, इसे नहीं मानने वालों को पाकिस्तान में शरण लेनी होगी.

'साबरमती के संत' गाने के फिल्मांकन से महात्मा गांधी की तस्वीर.  (फोटो साभार: यूट्यूब)

‘साबरमती के संत’ पर सियासत, कवि प्रदीप की बेटी और बापू के परपोते आहत

‘नेता साबरमती के संत गीत की आलोचना कर बापू और अहिंसक आंदोलन के प्रति अपनी नफ़रत दिखा रहे हैं. अगर दिक्कत है तो इस गीत को प्रतिबंधित क्यों नहीं करा देते.’

(फोटो साभार: फ़ेसबुक)

मैंने आज़ादी के बाद जैसा हिंदुस्तान देखा था, उसी हिंदुस्तान में मरना चाहता हूं: मुनव्वर राना

जन्मदिन विशेष: इस सियासी उथल-पुथल में एक बुजुर्ग की हैसियत से मुझे ख़ौफ़ लगता है कि कहीं हिंदुस्तान में ज़बान, तहज़ीब और मज़हब के आधार पर कई हिंदुस्तान बन जाएं. यह बहुत अफ़सोसनाक होगा.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

ताजमहल से नफ़रत ऐसे बर्बर युग में ले जाएगी जहां से हम बहुत पहले निकल चुके हैं

ताजमहल को कलंक बताने वालों को समझ नहीं आता कि इतिहास के 800 साल हटाने पर हिंदुस्तान में जो बचेगा, वह अखंड नहीं बल्कि खंडित भारत होगा.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

आजकल भारत में जो हो रहा है, वह ढर्रा पाकिस्तान का है

ऐसी पीढ़ी तैयार करने की कोशिश हो रही है जो नफ़रत पर आधारित हो. पहले इतिहास में दुश्मन पैदा करें फिर उससे लड़ें. ऐसे इतिहास का असर हम पाकिस्तान को देखकर समझ सकते हैं.

(रामजस कॉलेज में इस साल फरवरी में एक सेमिनार को लेकर हिंसक झड़प हो गई थी. इसके बाद छात्रों ने कई दिनों तक प्रदर्शन किया था. (फोटो: पीटीआई)

रामजस विवाद: अदालत ने कहा, विश्वविद्यालय में नारेबाज़ी करना अभिव्यक्ति की आज़ादी में आता है

दिल्ली की तीस हज़ारी अदालत ने कहा छात्रों का इकट्ठा होकर नारेबाज़ी करना अभिव्यक्ति की आज़ादी में आता है और इससे ये साफ़ नहीं होता कि उनका मक़सद फ़साद फैलाना था.

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सरकारी अफ़सरान हों या मुंसिफ़, ख़ुद को सामाजिक नैतिकता का प्रहरी मान बैठते हैं

व्यक्ति कुछ मौलिक अधिकारों से संपन्न है. संविधान इन अधिकारों की निशानदेही कर राज्य को बताता है कि वह व्यक्ति के जीवन में कहां हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

(रामजस कॉलेज में इस साल फरवरी में एक सेमिनार को लेकर हिंसक झड़प हो गई थी. इसके बाद छात्रों ने कई दिनों तक प्रदर्शन किया था. (फोटो: पीटीआई)

क्या रामजस विवाद के बाद डीयू के विभिन्न कॉलेजों में अघोषित सेंसरशिप लागू है?

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में सभा, वाद-विवाद और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए प्रबंधन की अनुमति मिलने में विद्यार्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.