आदिवासी

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छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षा के ज़रिये गोंडी भाषा को सहेजने का प्रयास

आदिवासी बहुल इलाकों में वृहद रूप से बोली जाने वाली गोंडी भाषा का कोई लिखित साहित्य न होने के चलते यह अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है. ऐसे में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के दो स्कूलों में इस भाषा में प्राथमिक शिक्षा देकर इसे सहेजने की कोशिश की जा रही है.

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छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा के एक गांव में पुलिस कैंप लगाने के ख़िलाफ़ उतरे ग्रामीण

दंतेवाड़ा ज़िले के पोटाली गांव में खोले जा रहे नए पुलिस कैंप को लेकर नाराज़ स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इससे गांव वालों को फ़र्ज़ी मामलों में फंसाने के प्रकरण बढ़ेंगे. वहीं पुलिस के अनुसार ग्रामीण नक्सली दबाव में कैंप का विरोध कर रहे हैं.

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छत्तीसगढ़: कॉरपोरेट से जंगल और ज़मीन बचाने के लिए आदिवासियों की जद्दोजहद

बीते 14 अक्टूबर से राज्य के सरगुजा, सूरजपुर और कोरबा ज़िले के बीस से ज़्यादा गांवों के आदिवासी हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदान खोले जाने के ख़िलाफ़ धरना दे रहे हैं. उनका आरोप है कि कोल ब्लॉक के लिए पेसा क़ानून और पांचवी अनुसूची के प्रावधानों की अनदेखी की गई है.

रांची का नदी दीप टोले में बनी बांस की पुलिया. (सभी फोटो: मो. असगर खान)

झारखंड: रांची का एक आदिवासी टोला, जहां राज्य बनने के 19 साल बाद भी ‘विकास’ नहीं पहुंचा

झारखंड राज्य के निर्माण को 19 साल हो गए हैं. रांची नगर निगम के वार्ड 50 में आने वाले नदी दीपा टोला के लोग एक अदद पुल के निर्माण के लिए पिछले कई सालों से सरकार से गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी. (फोटो: पीटीआई)

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास स्थित हमारे पुरखों की ज़मीन छीन रही है सरकार: आदिवासी

गुजरात के आदिवासी कल्याण मंत्री गणपत वसावा ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि कुछ नेता और एनजीओ आदिवासियों का इस्तेमाल करते हुए अपनी राजनीति कर रहे हैं और नर्मदा परियोजना को बदनाम कर रहे हैं.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों की काट के लिए गुजरात के ‘खाम’ को दोहराना होगा

गुजरात का विकास मॉडल एक भ्रम था. गुजरात दंगों के बाद मुस्लिम को अलग-थलग करने का जो प्रयोग शुरू हुआ, मोदी-शाह उसी के सहारे केंद्र में सत्ता में आए. आज यही गुजरात मॉडल सारे देश में अपनाया जा रहा है. 370 का मुद्दा उसी प्रयोग की अगली कड़ी है, जिसे मोदी शाह महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव में भुनाने जा रहे हैं.

(फोटो साभार: ILO in Asia and the Pacific, CC BY-NC-ND 2.0)

हिंदी बनाम अन्य भाषाओं की लड़ाई में क्या हम प्रतिभाओं का गला घोंट रहे हैं?

जिस देश में यह कहावत हो कि ‘कोस-कोस पर बदले पानी और चार कोस पर वाणी’, वहां हिंदी बनाम तमिल या अन्य प्रांतीय भाषाओं का विवाद ही ग़लत है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

रोहित वेमुला, पायल तड़वी की माताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा

2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय के शोधार्थी रोहित वेमुला और इस साल मई में मुंबई के एक अस्पताल में कार्यरत डॉ. पायल तड़वी ने कथित तौर पर जातिगत भेदभाव के चलते आत्महत्या कर ली थी. दोनों की माताओं ने शीर्ष अदालत से विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसे भेदभाव को ख़त्म किए जाने का अनुरोध किया है.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी. (फोटो: पीटीआई)

फ़र्ज़ी जाति प्रमाण पत्र मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी के ख़िलाफ़ केस दर्ज

अजीत जोगी को गुरुवार देर रात सांस लेने में तकलीफ के बाद नई दिल्ली के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अजीत जोगी ख़ुद को कंवर आदिवासी समुदाय का बताते रहे हैं. पिछले महीने उनके इस दावे को एक उच्चस्तरीय समिति ने ख़ारिज कर दिया था.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

संस्थानों में जातिगत भेदभाव के ख़िलाफ़ अदालत पहुंचीं रोहित वेमुला-पायल तड़वी की मांएं

कथित तौर पर जातिगत भेदभाव को ज़िम्मेदार बताते हुए हैदराबाद विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे रोहित वेमुला ने साल 2016 में और इस साल मई में मुंबई के एक अस्पताल में कार्यरत डॉ. पायल तड़वी ने आत्महत्या कर ली थी.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी. (फोटो साभार: फेसबुक/अजीत जोगी)

छत्तीसगढ़: उच्च स्तरीय समिति का फैसला, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी नहीं हैं आदिवासी

छत्तीसगढ़ सरकार की समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कंवर आदिवासी होने के प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया है. जोगी ने इस आदेश को न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया है.

नवंबर 2018 में घोषणापत्र जारी करती मध्य प्रदेश कांग्रेस. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्या कांग्रेस के लिए उसका ‘वचन-पत्र’ अब गले की हड्डी बन गया है?

एक ओर कमलनाथ सरकार विधानसभा चुनावों से पहले जारी किए अपने ‘वचन-पत्र’ को ही सरकार चलाने का रोडमैप और वचनों के पूरे होने के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर उन वचनों से सरोकार रखने वाले वर्ग अब सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने लगे हैं.

Indian tribal people sit at a relief camp in Dharbaguda in Chhattisgarh. File Photo Reuters

लोकतंत्र और आज़ादी के असल मायने आदिवासी समाज से सीखने होंगे

विश्व आदिवासी दिवस: आदिवासियों की अपनी बोलचाल की भाषा और आम चर्चा में लोकतंत्र या आज़ादी शब्द का कोई स्थान नहीं है. किसी आदिवासी से इन शब्दों के बारे में पूछें तो वो शायद चुप रहे, लेकिन इसके असली मायने का एहसास उन्हें स्वाभाविक रूप से है.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

वन भूमि से आदिवासियों को बेदखल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को फटकारा

लगभग 11.8 लाख आदिवासियों और वनवासियों को वन भूमि से बेदखल करने के मामले की सुनवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौ राज्यों ने आदिवासियों के दावे ख़ारिज करते समय तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया है.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

देश की अखंडता ब्रह्मचर्य-सी पवित्र है, इधर-उधर सोचने भर से भंग होने का ख़तरा रहता है

मैं प्रधानमंत्री के समर्थन में पत्र लिखने वाले 62 दिग्गजों का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगा. ये अगर चाहते तो देश की छवि खराब करने वाले उन 49 लोगों की लिंचिंग भी कर सकते थे. मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, बजाय इसके चिट्ठी लिखकर उन्होंने देश के बाकी लट्ठधारी राष्ट्रवादियों के सामने बहुत बड़ा आदर्श पेश किया है.

बीते 17 जुलाई को जमीन विवाद में सोनभद्र के उम्भा गांव में 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी. (फोटो साभार: वीडियोग्रैब)

कब तक भूख और गोली से मारे जाएंगे आदिवासी?

सोनभद्र में किसी ने उन आदिवासियों की भुखमरी के हालात की तह में जाने की कोशिश तक नहीं की, यह सवाल नहीं पूछा कि मौत का ख़तरा होते हुए भी वे इस अनउपजाऊ क्षेत्र में ज़मीन से क्यों चिपके हुए थे?

झारखंड के चतरा ज़िले के लावालौंग प्रखंड के इन किसानों की जमीन वन विभाग द्वारा छीन ली गई है. अपनी जमीन का कागजात दिखाते किसान. (सभी फोटो: मोहम्मद असगर ख़ान)

क्यों झारखंड के आदिवासी किसानों को अपना खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

ग्राउंड रिपोर्ट: सूखे की मार झेल रहे हैं झारखंड के चतरा ज़िले के किसानों पर वन विभाग की सख़्ती ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है. बीते एक साल में चतरा के हज़ारों किसानों की ज़मीन और खेत को वन विभाग ने वनभूमि बताकर उन्हें वहां से बेदख़ल कर दिया है.

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दलित युवक से प्रेम संबंध पर आदिवासी युवती से मारपीट, सात के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

घटना मध्य प्रदेश के धार ज़िले के आदिवासी बहुल बाग थाना क्षेत्र की है, जहां 21 वर्षीय आदिवासी युवती के दलित युवक के साथ संबंध से नाराज़ परिजनों द्वारा उसे लाठियों से पीटे जाने का वीडियो सामने आया था. पुलिस ने मामले में चार लोगों को गिरफ़्तार किया है.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (फोटो: पीटीआई)

गुजरात: 3000 करोड़ की लागत से बने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की दर्शक दीर्घा में पानी घुसा

गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया में 182 मीटर ऊंची सरदार पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया में अपनी तरह की सबसे ऊंची प्रतिमा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 31 अक्टूबर को उसका उद्घाटन किया था.

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल थाना क्षेत्र स्थित नेशनल मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के सामने प्रदर्शन कर रहे आदिवासी. (सभी फोटो: तामेश्वर सिन्हा)

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आदिवासी क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा ज़िले के किरंदुल क्षेत्र के तहत बैलाडीला की एक पहाड़ी को बचाने के लिए तकरीबन 20 हज़ार आदिवासी पिछले चार-पांच दिनों से प्रदर्शन कर रह हैं. सरकार ने इस पहाड़ी को लौह अयस्क के खनन के लिए अडाणी समूह को दे दिया है.

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छत्तीसगढ़: बैलाडीला की पहाड़ी पर खनन का विरोध कर रहे आदिवासी, पहाड़ी अडाणी को देने का आरोप

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले के किरंदुल क्षेत्र के अंतर्गत बैलाडीला की एक पहाड़ी पर लौह अयस्क का भंडार है. आदिवासियों ने दावा किया कि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ने इस पहाड़ी को अडानी समूह को सौंप दिया है.

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अबूझमाड़ में ‘एनकाउंटर’ में मारे गए 10 आदिवासी और कुछ तथ्य

7 फरवरी को अबूझमाड़ के ताड़बल्ला में हुए एक कथित एनकाउंटर को ग्रामीण एक सुनियोजित हमला बता रहे हैं. उन्होंने मारे गए 10 युवाओं के शवों के क्षत-विक्षत होने और मृतक लड़कियों के साथ संभावित यौन शोषण की बात कही है.

जीतराई हांसदा. (फोटो साभार: ट्विटर/@JharkhandJanad1)

झारखंड: बीफ़ खाने के अधिकार पर कथित पोस्ट लिखने वाले आदिवासी प्रोफेसर गिरफ़्तार

आदिवासी प्रोफेसर जीतराई हांसदा के वकील ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ जून, 2017 में मामला दर्ज किया गया था. वकील ने आशंका जताई कि यह गिरफ़्तारी जानबूझकर चुनावों के बाद की गई है. चुनाव से पहले गिरफ़्तारी करके भाजपा आदिवासियों को नाराज़ करके चुनावों में उनका वोट गंवाना नहीं चाहती थी.

JangalMahal Education West Bengal

क्यों पश्चिम बंगाल के जंगलमहल में राष्ट्रवाद से बड़ा चुनावी मुद्दा शिक्षा है

सड़क से संसद: तमाम सरकारों का मानना है कि नक्सलियों को सेना से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के झारग्राम के जंगलमहल ने इसे गलत साबित किया है. यहां शिक्षा सभी चुनावी मुद्दों पर भारी है.

Santhali Actress Politician Birbaha Hansada

बड़े दलों ने संथा​ली लोगों पर ध्यान नहीं दिया: संथाली सिनेमा की सुपरस्टार बीरबाहा हंसदा

सड़क से संसद: पश्चिम बंगाल के झारग्राम में संथाली सिनेमा की सुपरस्टार रहीं ​बीरबाहा हंसदा से बातचीत. बीरबाहा अब राजनीति में हैं. उनका कहना है कि बड़े राजनीतिक दल संथाली लोगों के अलावा दूसरे आदिवासी समूहों और उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया.

Jhargram Loksabha West Bengal

पश्चिम बंगाल: झारग्राम में आदिवासियों की आवाज़ संसद तक पहुंचाने की लड़ाई

सड़क से संसद: पश्चिम बंगाल की आदिवासी बहुल झारग्राम लोकसभा सीट पर बहुत सारे आदिवासी संगठन संसद में अपना प्रतिनिधि चाहते हैं, ताकि वे अपनी आवाज़ मज़बूती के साथ रख सकें.

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‘जब तक यहां से वेदांता रिफाइनरी नहीं हटती, नियमगिरी की लड़ाई जारी रहेगी’

ओडिशा के नियमगिरी क्षेत्र के लोग त्रिलोचनपुर गांव में बनी सीआरपीएफ छावनी और नियमगिरी सुरक्षा समिति के नेता लिंगराज आज़ाद की हालिया गिरफ़्तारी को वेदांता की वापसी से जोड़कर देख रहे हैं.

झारखंड के खूंटी ज़िले के कोचांग गांव में स्थित मिशन स्कूल जहां युवतियां नुक्कड़ नाटक करने गई थीं.

झारखंड: सामाजिक कार्यकर्ताओं से गैंगरेप मामले में मिशनरी स्कूल के प्रमुख सहित छह दोषी क़रार

पिछले साल जून में विस्थापन एवं मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के अभियान के तहत पांच महिलाएं खूंटी ज़िले के कोचांग गांव गई थीं. उनका आरसी मिशन स्कूल से कथित तौर पर अपहरण कर सामूहिक बलात्कार किया गया था. मामले में 15 मई को सज़ा सुनाई जाएगी.

भीड़ के हमले में घायल पीटर केरकेट्टा. (फोटो साभार: ट्विटर)

झारखंड आदिवासी लिंचिंग के पीड़ितों ने कहा, हमें पीटने वाली भीड़ जय श्रीराम के नारे लगा रही थी

झारखंड के गुमला ज़िले में बीते 10 अप्रैल को गोहत्या के शक में भीड़ ने कुछ आदिवासियों पर हमला कर दिया था. इसमें एक आदिवासी की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य घायल हो गए थे.

अपने बच्चों के साथ गोपी भील. (फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान के आदिवासी भील किसी भी दल की प्राथमिकता में क्यों नहीं हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में रहने वाले आदिवासी भील समुदाय के लोग भूख, ग़रीबी, बीमारी का शिकार होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

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महाराष्ट्र: हॉस्टल में दो नाबालिग आदिवासी छात्राओं से बलात्कार, अधीक्षक और उप-अधीक्षक गिरफ़्तार

महाराष्ट्र के चंद्रपुर ज़िले का मामला. हॉस्टल के अधीक्षक को निलंबित किया गया. पुलिस ने ब​ताया कि गिरफ़्तार अधीक्षक के दफ़्तर से आपत्तिजनक वस्तुएं जब्त की गई हैं.

भीड़ के हमले में घायल पीटर केरकेट्टा. (फोटो साभार: ट्विटर)

झारखंडः गोहत्या के शक़ में भीड़ के हमले में घायल तीनों आदिवासियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज

झारखंड के गुमला ज़िले में गोहत्या के संदेह में भीड़ ने आदिवासियों पर हमला कर दिया था. इससे एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी और तीन लोग घायल हो गए थे.

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झारखंड: गोहत्या के शक़ में भीड़ ने की आदिवासियों की पिटाई, एक की मौत

घटना गुमला ज़िले के जुरमू गांव में हुई, जहां आदिवासी समुदाय के कुछ लोग एक मृत बैल का मांस निकाल रहे थे, जब पड़ोस के गांव के कुछ लोगों ने उन्हें देखा और गोहत्या के संदेह में उन पर हमला कर दिया. इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन घायल अस्पताल में भर्ती हैं.

Tribals Protest Delhi

आदिवासी और वन निवासियों को जंगलों से बेदख़ल करना उनका संहार करने जैसा है

वन अधिकार क़ानून 2006 के तहत ख़ारिज दावा-पत्रों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासियों को जंगल से बेदख़ल करने का आदेश दिया था, जिस पर बाद में रोक लगा दी गई. पर दावा-पत्र खारिज क्यों हुए? केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि दावा-पत्र सही से नहीं भरे गए, जबकि हक़ीक़त यह है कि सरकारों की मिलीभगत से इन्हें ख़ारिज किया गया है ताकि जंगलों में खनिज संपदा के दोहन के लिए लीज़ देने में किसी तरह की परेशानी न हो.

Indian Prime Minister Narendra Modi (C), chief of India's ruling Bharatiya Janata Party (BJP) Amit Shah (2-R), India's Home Minister Rajnath Singh (2-L) India's Foreign Minister Sushma Swaraj (L) and India's Finance Minister Arun Jaitley display copies of their party's election manifesto for the April/May general election, in New Delhi, India, April 8, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

भाजपा के संकल्प पत्र में आदिवासियों की अनदेखी

अपने संकल्प पत्र में भारतीय जनता पार्टी ने आदिवासियों और परंपरागत वन निवासियों को लेकर जिस कदर बेरुखी दिखाई है उससे यह साबित हो रहा है कि पार्टी को देश के इन नागरिकों की कोई चिंता नहीं है.

पेन को लेकर नृत्य करते एक ही गोत्र के वंशज. (फोटो: जसिंता केरकेट्टा)

अपने धर्म का बाज़ार नहीं चलाते आदिवासी

आदिवासी अपनी आस्था, अपने विश्वास, अपने धर्म का बाज़ार कभी नहीं चलाते. संगठित धर्मों और आदिवासियों की आस्था के बीच यह बड़ा फर्क है.

(फोटो: रॉयटर्स)

क्यों निर्दोष नागरिकों को सालों-साल क़ैद में रखना चुनावी मुद्दा बनना चाहिए

बड़ी संख्या में नागरिकों, विशेष रूप से हाशिये के समुदायों से आने वालों को बेक़सूर होने के बावजूद एक लंबा समय जेल में बिताना पड़ा है. फिर भी कोई प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे को उठाना नहीं चाहता.

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में आदिवासियों द्वारा निकाली गई रैली. (फोटो: अनुराग मोदी)

मध्य प्रदेश: आदिवासियों के लिए लोकसभा चुनाव में जंगल पर अधिकार प्रमुख मुद्दा है

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में हाल ही में प्रदर्शन कर आदिवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा कि सुप्रीम कोर्ट में वन अधिकार क़ानून पर सुनवाई के दौरान उनकी सरकार मौन क्यों थी?

धर्म कोड के लिए धरना दे रहे आदिवासी प्रतिनिधि
(फोटो संतोषी)

क्यों अलग धर्म की मांग कर रहे हैं आदिवासी?

आदिवासियों की मांग है कि उनके धर्म को मान्यता दी जानी चाहिए और धर्म के कॉलम में उन्हें ट्राइबल या अबॉरिजिनल रिलीजन चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए.

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विपक्ष को मोदी के उग्र एजेंडा के जाल से बचना होगा

भाजपा ने आम चुनाव में राष्ट्रवाद और पाकिस्तान से ख़तरे को मुद्दा बनाने का मंच सजा दिया है. वो चाहती है कि विपक्ष उनके उग्रता के जाल में फंसे, क्योंकि विपक्षी दल उसकी उग्रता को मात नहीं दे सकते. विपक्ष को यह समझना होगा कि जनता में रोजगार, कृषि संकट, दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार जैसे मुद्दों को लेकर काफी बेचैनी है और वे इनका हल चाहते हैं.