आदिवासी

झारखंड के खूंटी ज़िले के कोचांग गांव में स्थित मिशन स्कूल जहां युवतियां नुक्कड़ नाटक करने गई थीं.

खूंटी में पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं से गैंगरेप की घटना पूर्व नियोजित: महिला आयोग

बीते 19 जून को पांच युवतियां विस्थापन एवं मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के अभियान के तहत झारखंड के खूंटी ज़िले के कोचांग गांव गई हुई थीं. स्कूल से अगवाकर उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था.

झारखंड के खूंटी ज़िले के कोचांग गांव में स्थित मिशन स्कूल जहां युवतियां नुक्कड़ नाटक करने गई थीं.

झारखंड सामूहिक बलात्कार: अख़बारी सच गले नहीं उतर रहा

ख़बरों के मुताबिक झारखंड पुलिस ने खूंटी ज़िले में पांच महिलाओं के साथ गैैंगरेप मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की जो प्रक्रिया बताई वो थोड़ी उलझी हुई है.

झारखंड के खूंटी ज़िले के कोचांग गांव में स्थित मिशन स्कूल जहां युवतियां नुक्कड़ नाटक करने गई थीं.

झारखंड: मानव तस्करी के ख़िलाफ़ जागरूकता फैला रहीं पांच युवतियों को अगवाकर गैंगरेप

झारखंड के खूंटी ज़िले के कोचांग गांव का मामला. गांव के मिशन स्कूल में मानव तस्करी के ख़िलाफ़ जागरूकता फैलाने के लिए नुक्कड़ नाटक करने गई थीं युवतियां.

Bhima Koregaon Collage Featured

वो पांच लोग जिन पर भीमा कोरेगांव हिंसा और मोदी की हत्या की साज़िश रचने का आरोप लगा है

भीमा कोरेगांव हिंसा के पीछे बताए जा रहे कथित नक्सल कनेक्शन के चलते ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) क़ानून के तहत गिरफ़्तार किए गए पांचों लोगों के प्रति पुलिस और प्रशासन का यह रवैया नया नहीं है.

(फोटो: रॉयटर्स)

पर्यावरण को लेकर हमारी उधार की समझ ने इसे अंतहीन क्षति पहुंचाई है

आज भी जब हम बच्चों को जंगल की कहानी सुनाते हैं तो उसमें पेड़, पौधे, घास, जानवर, शेर, शिकार, नदी, सब होता है पर जो नहीं होता वो है मनुष्य. जिसने सदियों से जंगल को उर्वर बनाए रखा, सहेजकर रखा और दोनों के बीच ऐसा तादात्म्य बनाया कि हिंदुस्तान की संस्कृति में इसे प्राथमिक स्थान मिला.

Pathalgadi The Wire featured

पत्थलगड़ी आंदोलन से भाजपा सरकारें क्यों डरी हुई हैं?

पत्थलगड़ी आंदोलन के रूप में जनता द्वारा अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी इस्तेमाल ने कई ऐसे सवाल उठाए हैं, जिनका जवाब देना सरकारों के लिए मुश्किल हो गया है.

New Delhi: Tribal community people raise slogans during a protest over their various demands in New Delhi on Sunday. PTI Photo by Ravi Choudhary   (PTI4_1_2018_000047B)

झारखंड: भाजपा पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों की स्वशासन प्रणाली को ध्वस्त कर रही है

पेसा क़ानून पारित होने के दो दशक बाद भी झारखंड में यह एक सपना मात्र है. राज्य के 24 में से 13 ज़िले पूर्ण रूप से और तीन ज़िलों का कुछ भाग अनुसूचित क्षेत्र है, लेकिन अभी तक राज्य में पेसा की नियमावली तक नहीं बनाई गई है.

Khunti: Tribals hold bows and arrows near a Patthalgarhi spot at Maoist-affected village Siladon under Khunti district of Jharkhand on Tuesday. The Patthalgarhi movement says that the “gram sabha” has more weight than either the Lok Sabha or the Vidhan Sabha in scheduled areas. PTI Photo (PTI5_1_2018_000146B)

पत्थलगड़ी आंदोलन का उभार राजभवनों की निष्क्रियता का परिणाम है

कुछेक अपवाद छोड़ दिए जाएं तो संविधान लागू होने के बाद से आज तक किसी भी राज्य के राज्यपाल ने पांचवीं अनुसूची के तहत मिले अपने अधिकारों और दायित्वों का निर्वहन आदिवासियों के पक्ष में करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है.

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छत्तीसगढ़: हर चुनावी साल में तेंदूपत्ते की नीलामी दर और उत्पादन में ​गिरावट क्यों आ जाती है?

भाजपा ने जहां इसे बाज़ार की मांग और आपूर्ति से जुड़ा मामला बताया है. वहीं, कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार से जोड़ रहे हैं. वो तेंदूपत्ता व्यापार को चुनावी फंड तैयार करने का माध्यम बनाने का आरोप लगा रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

मीडिया को अपने बयानों से ‘मसाला’ न दें, इससे पार्टी की छवि ख़राब होती है: मोदी

प्रधानमंत्री ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि हम कैमरा देखते ही बयान देने लग जाते हैं. मीडिया जो हिस्सा उपयोगी समझता है, उसका इस्तेमाल करता है. यह उसकी ग़लती नहीं है. हमें ख़ुद को रोकना होगा.

डॉ. ​हीरालाल अलावा. (फोटो साभार: फेसबुक)

‘संविधान ने आदिवासियों के संरक्षण का ज़िम्मा सरकार को सौंपा था, लेकिन वो उन्हें ख़त्म कर रही है’

आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम कर रहे जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हीरालाल अलावा से बातचीत.

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क्यों झारखंड में आदिवासी ‘पत्थलगड़ी’ आंदोलन कर रहे हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: झारखंड के कई आदिवासी इलाकों में इन दिनों पत्थलगड़ी की मुहिम छिड़ी है. ग्रामसभाओं में आदिवासी गोलबंद हो रहे हैं और पत्थलगड़ी के माध्यम से स्वशासन की मांग कर रहे हैं.

छात्र-छात्राओं ने टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान में बंद का आह्वान किया है. (फोटो साभार: फेसबुक/University Community)

‘मोदी सरकार नहीं चाहती कि उच्च शिक्षा में दलित और पिछड़े पहुंचें’

टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान में एससी/एसटी छात्रों को मिलने वाली आर्थिक मदद को संस्थान ने ख़त्म कर दिया है. इसके विरोध में मुंबई, हैदराबाद, गुवाहाटी, तुलजापुर (महाराष्ट्र) कैंपस के छात्र-छात्राओं ने बंद का ऐलान किया है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (फोटो: पीटीआई)

फ़र्ज़ी एससी/एसटी सर्टिफिकेट वाले 11,700 कर्मचारियों को हटाने पर विचार कर रही है महाराष्ट्र सरकार

महाराष्ट्र में फ़र्ज़ी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले सरकारी कर्मचारियों को हटाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर सरकार असमंजस की स्थिति में है.

Indian tribal people sit at a relief camp in Dharbaguda in Chhattisgarh. File Photo Reuters

बस्तर: जहां नागरिकों की सुध लेने वाला कोई नहीं

बस्तर के लिए लोकतंत्र क्या है? सरकार, मीडिया और कुछ एनजीओ के दावों से लगता है कि यहां विकास की ऐसी बयार आई हैं, जिसमें नागरिकों को ज़मीन पर ही मोक्ष मिल गया है.

भोपाल में आयोजित एक रैली के दौरान प्रकाश आंबेडकर और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव व अन्य. (फोटो: पीटीआई)

धर्म की बेलगाम राजनीति रोकी नहीं गई तो हिंदुओं में भी हाफ़िज़ सईद पैदा होंगे: प्रकाश आंबेडकर

बाबा साहब आंबेडकर के पोते ने भाजपा पर साधा निशाना. कहा- यह सरकार दोबारा आई तो हम जो बात कर रहे हैं, यह करने का अधिकार भी छीन लिया जाएगा.

फोटो: द वायर/कृष्णकांत

वन अधिकार कानून ने आदिवासियों को अतिक्रमणकारी होने के कलंक से मुक्त किया

ग्यारह साल पहले इस क़ानून के पारित होने के बाद से आदिवासी समुदाय इस दिन को एक उत्सव के रूप में मनाते आ रहे हैं.

गुजरात के डांग का ज़िला मुख्यालय आहवा का मुख्य द्वार. (फोटो: अमित सिंह/द वायर)

गुजरात विधानसभा चुनाव: ‘सरकार हमारे रीति-रिवाज़ों को न मानते हुए हिंदू धर्म थोप रही है’

ग्राउंड रिपोर्ट: ए​क विधानसभा सीट वाले डांग ज़िले में रोज़गार के लिए पलायन और आदिवासियों की धार्मिक पहचान अहम मुद्दा है.

गुजरात के तापी ज़िले के लिम्बी गांव के आदिवासी उकाई बांध की वजह से विस्थापित हुए. आज इनके पास अपनी ज़मीन भी नहीं है. (फोटो: अमित सिंह/द वायर)

गुजरात विधानसभा चुनाव: आदिवासी ज़िले तापी में मोदी के विकास का साइड इफेक्ट दिखता है

ग्राउंड रिपोर्ट: ज़िले के विभिन्न गांवों में रहने वाले आदिवासियों का कहना है कि उनकी ज़िंदगियों से विकास कोसों दूर है.

(फोटो साभार: ट्विटर/पीटीआई)

गुजरात विधानसभा चुनाव: ‘नर्मदा ज़िले में आईसीयू नहीं, लेकिन बन रही दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति’

ग्राउंड रिपोर्ट: आदिवासी ज़िले नर्मदा में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण का काम ज़ोर-शोर से चल रहा है लेकिन इस पूरे ज़िले ​के किसी भी अस्पताल में आईसीयू की व्यवस्था नहीं है.

तीस्ता सेटलवाड़ (फोटो: फेसबुक)

भारत में आज़ादी, शोषित वर्ग अधिकार और सुरक्षा ख़तरे में हैं: तीस्ता सीतलवाड़

सिटीज़न फॉर जस्टिस एंड पीस की संस्थापक तीस्ता सीतलवाड़ का कहना है कि उनका संगठन आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार के साथ कानूनी संसाधन प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम करेगा.

Medha Patkar The Wire/krishna kant

सरदार सरोवर बांध पुनर्वास में सारे ठेके भाजपा के लोगों को मिले: मेधा पाटकर

सरदार सरोवर बांध परियोजना में दशकों बाद विस्थापितों का पुनर्वास न होने और पुनर्वास में भ्रष्टाचार को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर से बातचीत.

Mayawati Reuters

देश के हालात आपातकाल से ज़्यादा ख़राब, भाजपा ने सोच नहीं बदली तो ​बौद्ध धर्म अपना लूंगी: मायावती

बसपा प्रमुख का आरोप, भाजपा ने राजनीतिक स्वार्थ में संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र को कमज़ोर किया, तानाशाही और मनमानी चल रही है.

Motilal Baske Parvati Murmu Jharkhand

कथित नक्सली का एनकाउंटर और न्याय के लिए भटकती आदिवासी महिला का संघर्ष

झारखंड के गिरिडीह ज़िले में पुलिस द्वारा नक्सली बताकर मारे गए मोतीलाल बास्के की पत्नी पार्वती मुर्मू इंसाफ़ के लिए संघर्ष कर रही हैं.

दलित समाजशास्त्री और लेखक कांचा इलैया (फोटो: फेसबुक)

भावनाएं आहत करने के आरोप में लेखक कांचा इलैया के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

पु​स्तक के ज़रिये कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में हैदराबाद पुलिस ने कांचा इलैया के विरुद्ध मामला दर्ज किया है.

puslia patel 1 the wire

‘सरकार ने नर्मदा घाटी के साथ बहुत बुरा किया, जनता का राज है और जनता को ही खतम ​कर दिया’

ग्राउंड रिपोर्ट: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सरदार सरोवर बांध के डूब में समा रहे भादल गांव के एक बुजुर्ग आदिवासी पुस्लिया पटेल की व्यथा.

Kancha Ilaiah

‘क्या आर्य-वैश्यों के पास कोई ऐसा अर्थशास्त्री नहीं है, जो मेरी किताब पर तर्क कर सके?’

साक्षात्कार: लेखक और चिंतक कांचा इलैया शेपहर्ड अपनी किताब ‘पोस्ट-हिंदू इंडिया’ के लिए विवादों में हैं. उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है. उनसे बातचीत.

Bhadal-Village-Badwani-The-Wire

‘इस ज़मीन पर हमारा हक़ है, हम यहीं रहेंगे, सरकार ज़मीन नहीं देगी तो यहीं पर मरेंगे’

ग्राउंड रिपोर्ट: सरदार सरोवर बांध के पानी में डूब रहे मध्य प्रदेश के भादल गांव के ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने बांध में पानी छोड़ दिया लेकिन हमें कहीं नहीं बसाया.

Ramleela Facebook

जितने मुंह, उतनी व्याख्याओं के लिए तैयार है हिंदू धर्म

हिंदू धर्म आज तक अगर प्राणवान रहा है तो राजाओं, अदालतों और पुलिस या लठैतों के बल पर नहीं. उसकी प्राणवत्ता परस्पर विरोधी स्वरों को सुनने और बोलने देने की उसकी तत्परता में रही है. उसे किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं.

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जिस महिषासुर का दुर्गा ने वध किया उन्हें आदिवासी अपना पूर्वज और भगवान क्यों मानते हैं?

ग्राउंड रिपोर्ट: महिषासुर की याद में नवरात्र की शुरुआत के साथ दशहरा यानी दस दिनों तक असुर शोक मनाते हैं. इस दौरान किसी किस्म की रीति-रस्म या परपंरा को नहीं निभाया जाता.

mahishasur final

महिषासुर भारतीय इतिहास का ऐतिहासिक नायक है

आज महिषासुर एक ऐतिहासिक चरित्र से मिथक बन चुका है. इतिहास के अति लोकप्रिय नायक मिथक हो जाया करते हैं. महिषासुर का इतिहास तो लोकमानस की यादों में जीवित है, उसे इतिहास ग्रंथों में खोजना बेईमानी है.

Ravan Mahishasur Reuters Twitter

देश का एक तबका महिषासुर और रावण वध का जश्न मनाए जाने का विरोध क्यों कर रहा है?

छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में आदिवासियों ने महिषासुर को पूर्वज बताते हुए दुर्गा पूजा समिति के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया है तो मध्य प्रदेश के बैतूल में रावण वध के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहा है.

(रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद प्रदर्शन करते हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र छात्राएं, फोटो: पीटीआई)

हैदराबाद विश्वविद्यालय: रोहित वेमुला की पार्टी को मिली छात्रसंघ चुनाव में जीत

आंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के गठबंधन वाली एलायंस फॉर सोशल जस्टिस (एएसजे) ने छात्रसंघ के सभी पदों पर जीत हासिल की है.

A group of Indian tribes sit in open at a camp in Dornapal in the central state of Chhattisgarh, India March 8, 2006. More than 45,000 people have left their homes to live in camps run by the Salwa Judum, but have just bows and arrows to defend themselves against the rebels' guns and explosives.  Picture taken March 8, 2006.  REUTERS/Kamal Kishore

आदिवासियों के लिए इस आज़ादी का क्या मतलब है?

आदिवासी तो दुनिया बनने से लेकर आज़ाद ही हैं. बस्तर के इन जंगलों में तो अंग्रेेज़ भी नहीं आए. इसलिए इन आदिवासियों ने अपनी ज़िंदगी में न ग़ुलामी देखी है, न ग़ुलामी के बारे में सुना है.

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झारखंड सरकार गांधी की छवि और जनता का पैसा ईसाईयों के ख़िलाफ़ नफरत फैलाने में इस्तेमाल कर रही है

11 अगस्त को झारखंड के अधिकतर हिंदी अख़बारों में छपे एक सरकारी विज्ञापन में गांधी के नाम से धर्मांतरण के संबंध में वो बातें लिखी गईं, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं थीं.

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हमें गिरफ़्तार करके सरकार आतंक फैलाना चाह रही है ताकि कोई विरोध करने की हिम्मत न कर सके

पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी समेत आठ लोग सोमवार को ‘दलित अत्याचार और निदान’ विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और गोष्ठी करने जा रहे थे, तभी उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.

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लखनऊ में दलित उत्पीड़न के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने जा रहे 8 लोग गिरफ़्तार, रिहा

इसी प्रदर्शन में 125 किलो का साबुन लेकर शामिल होने आ रहे गुजरात के 45 दलित कार्यकर्ताओं को झांसी स्टेशन पर रविवार शाम पुलिस ने हिरासत में लिया था.

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योगी को गुजरात से 125 किलो का साबुन देने आ रहे 45 दलित-आदिवासी हिरासत में लिए गए

गुजरात से दस ज़िलों के दलित-आदिवासी कार्यकर्ता योगी आदित्यनाथ को महात्मा बुद्ध का संदेश देने आ रहे थे, झांसी में यूपी पुलिस ने उन्हें रोक लिया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सवा क्विंटल का साबुन देने आ रहे 45 गुजराती दलित-आदिवासी कार्यकर्ताओं को यूपी पुलिस ने […]

फोटो: रॉयटर्स

भारतीय मीडिया में दलित पत्रकार क्यों नहीं हैं?

अंग्रेजी पत्रकारिता में आपको खुलेआम खुद को समलैंगिक बताने वाले लोग ज्यादा मिल जाएंगे, बनिस्बत ऐसे लोगों के जो खुल कर अपना दलित होना कुबूल करते हों.