आरक्षण

मनोहर लाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला. (फोटोः पीटीआई)

हरियाणा: निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय युवकों को 75 फीसदी आरक्षण को राज्यपाल की मंज़ूरी

हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों को रोजगार विधेयक में निजी क्षेत्र की ऐसी नौकरियों में स्थानीय युवाओं के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया, जिनमें वेतन प्रति माह 50,000 रुपये से कम है. इस विधेयक के प्रावधान निजी कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों और साझेदारी वाली कंपनियों पर भी लागू होंगे.

केंद्रीय सचिवायल का साउथ ब्लॉक. (फोटो साभार: Wikimedia Commons/Matthew T Rader)

केंद्र सरकार लैटरल एंट्री के ज़रिये संयुक्त सचिव और निदेशक पद पर नियुक्तियां करेगा

लैटरल एंट्री के तहत विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव पद पर तीन और निदेशक स्तर के पदों पर 27 नियुक्तियां होनी हैं. लैटरल एंट्री सरकारी विभागों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की नियुक्ति से संबंधित है. इसके तहत ऐसे लोगों को आवेदन करने योग्य माना गया है, जिन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा पास नहीं की है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

मनु का क़ानून और हिंदू राष्ट्र के नागरिकों के लिए उसके मायने

हिंदू राष्ट्र का ढांचा और उसकी दिशा मनुस्मृति में बताए क़ानूनी ढांचे के अंतर्गत ही तैयार होंगे और ये क़ानून जन्म-आधारित असमानता के हर पहलू- सामाजिक, आर्थिक और लैंगिक, सभी को मज़बूत करने वाले हैं.

मनोहर लाल खट्टर. (फोटो: पीटीआई)

निजी क्षेत्र में स्थानीय युवकों को 75 फ़ीसदी आरक्षण संबंधी विधेयक हरियाणा विधानसभा में पारित

हरियाणा के ‘रोज़गार विधेयक, 2020’ में निजी क्षेत्र की ऐसी नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया, जिनमें वेतन प्रति माह 50,000 रुपये से कम है. इस विधेयक के प्रावधान निजी कंपनियों, सोसाइटियों, ट्रस्टों और साझेदारी वाली कंपनियों पर भी लागू होंगे.

(फोटो: पीटीआई)

पदोन्नति में एससी/एसटी आरक्षण पर संसदीय समिति ने बीएसएनएल और दूरसंचार विभाग को फटकारा

लोकसभा में पेश रिपोर्ट में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण संबंधी संसदीय समिति ने बताया कि 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बीएसएनएल में एससी/एसटी कर्मचारियों की पदोन्नति रोकी गई है.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

कंगना रनौत को फेमिनिज़्म के बारे में अभी बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है

कंगना रनौत का एक साथी महिला कलाकार के काम को नकारते हुए उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास और घर गिराए जाने की तुलना बलात्कार से करना दिखाता है कि फेमिनिज़्म को लेकर उनकी समझ बहुत खोखली है.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

अगर मॉडर्न इंडिया ने जातिवाद को नकार दिया है, तो ऊंचे पदों पर दलित क्यों नहीं हैं

बीते रविवार को अभिनेत्री कंगना रनौत ने ट्विटर पर भारत में जाति-व्यवस्था, आरक्षण और भेदभाव को लेकर टिप्पणियां की थीं.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट को यह समझ लेना चाहिए कि आरक्षण एक मौलिक अधिकार है

बराबरी न केवल अनुच्छेद 14 के तहत मिला मौलिक अधिकार है, बल्कि संविधान की प्रस्तावना में लिखित एक उद्देश्य तथा संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा भी है. समता का सिद्धांत यह है कि समान व्यक्तियों के साथ समान बर्ताव तथा अलग के साथ अलग बर्ताव किया जाए.

(फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा, आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं

तमिलनाडु के विभिन्न राजनीतिक दलों ने 2020-21 में अंडरग्रेजुएट, पोस्ट-ग्रेजुएट चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय कोटा में तमिलनाडु द्वारा छोड़ी गईं सीटों में अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

क्या सुप्रीम कोर्ट अनुसूचित जनजातियों को मिले अधिकारों को बोझ समझता है?

बीते महीने चेबरोलू लीला प्रसाद और अन्य बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ का फैसला एक बार फिर यह दिखाता है कि भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची, जिस पर आदिवासी अधिकारों की रक्षा करने का दायित्व है, को कितना कम समझा गया है.

(फोटो: पीटीआई)

ओबीसी, एससी/एसटी के संपन्न लोग जरूरतमंदों को आरक्षण का लाभ नहीं लेने दे रहे: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि सरकार की ये जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर इसकी समीक्षा करें ताकि जरूरतमंद लोगों को आरक्षण का लाभ मिले और संपन्न या सक्षम लोग इस पर अधिकार जमाए न बैठे रहें.

(फोटो: पीटीआई)

आंध्र प्रदेश: आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षकों की नौकरी में 100 फीसदी आरक्षण का आदेश रद्द

साल 2000 में अविभाजित आंध्र प्रदेश ने आदिवासी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों के 100 फीसदी पद अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट इसे रद्द करते हुए पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जिसे तेलंगाना और आंध्र प्रदेश बराबर-बराबर भरेंगे.

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मीडिया बोल: आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट, सत्ता और मीडिया

वीडियो: शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि पदोन्नति में आरक्षण वैकल्पिक है, अनिवार्य नहीं. राज्य इस बारे में अपने विवेक से तय कर सकते हैं, उन्हें आरक्षण देना है या नहीं. मीडिया बोल की इस कड़ी में उर्मिलेश इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के वकील केएस चौहान, वरिष्ठ पत्रकार अशोक दास और वरिष्ठ पत्रकार बिराज स्वैन के साथ चर्चा कर रहे हैं.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with Union Ministers Nitin Gadkari, Rajnath Singh, Amit Shah, Nirmala Sitharaman and others during the first cabinet meeting, at the Prime Minister’s Office, in South Block, New Delhi, May 31, 2019. (PTI Photo)(PTI5_31_2019_000249B)

कैबिनेट ने लोकसभा, विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण की अवधि और 10 साल के लिए बढ़ाई

इन श्रेणियों के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण की अवधि 25 जनवरी 2020 को समाप्त होने वाली थी. सरकार आरक्षण की मियाद बढ़ाने के लिए इस सत्र में एक विधेयक लाएगी.