आरटीआई एक्ट

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आरटीआई के तहत मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आने से जुड़े मामले का घटनाक्रम

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने एकमत होकर ये फैसला दिया और साल 2010 के दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें कोर्ट ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई एक्ट के दायरे में है.

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मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के दायरे में: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का चौतरफा स्वागत

आरटीआई कार्यकर्ताओं ने शीर्ष न्यायालय के इस फैसले की सराहना की और साथ ही कहा कि ‘कानून से ऊपर कोई नहीं है.’

जस्टिस डीवी चंद्रचूड़. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब/Increasing Diversity by Increasing Access)

जज कानून से ऊपर नहीं हैं, न्यायिक नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए: जस्टिस चंद्रचूड़

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ऐसा करने से नियुक्ति प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और फैसले लेने में न्यायपालिका एवं सरकार के सभी स्तरों पर उच्च स्तर की पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो सकेगी.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

आरटीआई के दायरे में आया सीजेआई कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2010 में अपने फैसले में शीर्ष अदालत की इस दलील को खारिज कर दिया था कि सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाए जाने से न्यायिक स्वतंत्रता बाधित होगी.

सुप्रीम कोर्ट. (फोटो: द वायर)

सरकार से अनुदान पाने वाले एनजीओ आरटीआई क़ानून के दायरे में आते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर अनुदान पाने वाले स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जैसे संस्थान भी आरटीआई क़ानून के तहत नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं.

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आरटीआई के तहत 20 साल पहले की निजी जानकारी दी जा सकती है या नहीं, सीआईसी करेगा फैसला

साल 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट के एक दोषी एहतेशाम सिद्दिकी ने आरटीआई एक्ट के तहत भारतीय पुलिस सेवा के 12 अधिकारियों के संघ लोक सेवा आयोग में जमा फार्मों व अन्य रिकॉर्ड की प्रतियां मांगी थी, जिसे गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया था. अब सीआईसी इस पर अंतिम निर्णय लेगा.

RTI Amendment

आरटीआई संशोधन पर पूर्व सूचना आयुक्तों ने कहा, ये गरीबों की आवाज़ है इसे मत दबाइए

वीडियो: नई दिल्ली में बैठक कर सात पूर्व सूचना आयुक्तों ने आरटीआई कानून में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन का कड़ा विरोध किया है. इनका कहना है कि सरकार का ये कदम सूचना आयुक्तों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर हमला है.

अन्ना हजारे. (फोटो: पीटीआई)

अन्ना हजारे ने आरटीआई कानून में संशोधन पर कहा, मोदी सरकार ने लोगों से धोखा किया

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है लेकिन यदि देश के लोग आरटीआई कानून की शुचिता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरें तो वह उनका साथ देने के लिए तैयार हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

लोकसभा चुनाव के दौरान खरीदे गए 76 प्रतिशत चुनावी बॉन्ड

सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, एक मार्च 2018 से 24 जनवरी 2019 के बीच कुल 1,407.09 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गए, जबकि एक मार्च से 10 मई 2019 तक कुल 4,444.32 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गए.

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चुनावी बॉन्ड को लेकर आरबीआई, सरकार की ओर से भेजे गए पत्रों को सार्वजनिक करने से एसबीआई का इनकार

सूचना के अधिकार कानून के तहत एसबीआई से 2017-2019 के बीच सरकार या आरबीआई द्वारा उसे भेजे गए सभी पत्रों, निर्देशों, अधिसूचनाओं या ईमेल की प्रति मांगी गई थी.

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सभी पंजीकृत आरडब्ल्यूए आरटीआई मानदंडों का पालन करें: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी आरडब्ल्यूए दो जुलाई तक आरटीआई एक्ट के तहत जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी की नियुक्ति करें.

New Delhi: Supreme Court lawyer Prashant Bhushan addresses the media, at Supreme Court premises in New Delhi, Thursday, Sept 6, 2018. The Supreme Court on Thursday extended till September 12, the house arrest of five rights activists in connection with the violence in Koregaon-Bhima in the west central state of Maharashtra. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI9_6_2018_000097B)

सुप्रीम कोर्ट पारदर्शिता को लेकर खड़ा रहता है लेकिन अपनी बारी पर पीछे हट जाता है: प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत और भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद आरटीआई के तहत सार्वजनिक प्राधिकार है या नहीं, इस सवाल पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

आरटीआई में जजों की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी देने से कॉलेजियम की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा यह तर्क दिया गया है कि एक न्यायाधीश की नियुक्ति से संबंधित जानकारी व्यक्तिगत होती है, इसलिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (जे) के तहत ऐसी जानकारी का खुलासा करने से छूट दी गई है.

बिहार में मार दिए गए आरटीआई कार्यकर्ता ​शशिधर मिश्रा, रामकुमार ठाकुर और वाल्मीकि यादव (बाएं से दाएं).

बिहार में क्यों निशाने पर हैं आरटीआई कार्यकर्ता?

विशेष रिपोर्ट: एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005 से लेकर अब तक देशभर में 79 आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है, जिसमें क़रीब 20 फीसदी की हत्याएं केवल बिहार में हुई हैं. साल 2018 में बिहार में पांच आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले सामने आए हैं.

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मध्य प्रदेश: आरटीआई कार्यकर्ता से जानकारी मांगने पर वसूला गया जीएसटी

केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के अनुसार आरटीआई पर जीएसटी लगाना क़ानूनी तौर पर ग़लत है. मध्य प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे ने बताया कि मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल से सूचना मांगने पर उनके द्वारा दिए गए भुगतान में सीजीएसटी व एसजीएसटी दोनों शामिल थे.