आलोचना

कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनज़र 22 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर हुए जनता कर्फ्यू के दौरान सड़क पर निकले विभिन्न शहरों के लोग. (फोटो साभार: ट्विटर)

सामूहिकता के बिना मूर्खता का जीवित रहना संभव नहीं है

भारत एक सांस्कृतिक इकाई है. बावजूद भिन्न भाषाओं, पहनावों और खानपान के हम सब मूर्खता के एक सूत्र में बंधे हैं. राष्ट्रीय एकता का यह प्रदर्शन और प्रमाण दिल को तसल्ली देता है.

नामवर सिंह. (फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन/फेसबुक)

हजारी प्रसाद द्विवेदी के बाद सबसे यशस्वी आलोचक नामवर जी थे: मैनेजर पांडेय

वीडियो: लेखक और आलोचक नामवर सिंह का बीते दिनों निधन हो गया, उनसे जुड़ी यादों को साझा कर रहे हैं साहित्यकार और आलोचक मैनेजर पांडेय.

नामवर सिंह. (फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन/फेसबुक)

नामवर सिंह: एक दौर की विदाई

आलोचना को सामान्यतया एक नीरस अकादमिक काम माना जाता है और आलोचकों को रचनाकारों की तरह बड़ी संख्या में प्रशंसक पाठक नसीब नहीं होते. नामवर सिंह इसके विराट अपवाद थे.

नामवर सिंह. (फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन/फेसबुक)

नामवर सिंह को क्यों लगता था कि हिंदी समाज को अपने साहित्यकारों से लगाव नहीं है

एक साक्षात्कार में नामवर सिंह ने कहा था कि विदेश में दो लोग जब बात करते हैं तो कुछ देर के अंदर ही उनकी बातचीत में मिल्टन, शेक्सपियर, चेखव के उद्धरण आने लगते हैं, लेकिन हमारे यहां ऐसा नहीं दिखता. हिंदी में बहुत से जनकवि हैं लेकिन हिंदी जगत में उनकी रचनाएं उस रूप में प्रचारित नहीं होतीं.

(फोटो: Gandhimemorial.in)

जिन क्रांतिकारियों के सहारे संघ गांधी पर निशाना साधता है, वे आरएसएस कैंप से नहीं आये थे

आरएसएस अगर आज़ादी की लड़ाई के बारे में बात करे तो वो क्या बताएगा? अगर वो सावरकर के बारे में बताएगा तो अंग्रेजों को लिखे गए सावरकर के माफ़ीनामे सामने आ जाते हैं.

'साबरमती के संत' गाने के फिल्मांकन से महात्मा गांधी की तस्वीर.  (फोटो साभार: यूट्यूब)

‘साबरमती के संत’ पर सियासत, कवि प्रदीप की बेटी और बापू के परपोते आहत

‘नेता साबरमती के संत गीत की आलोचना कर बापू और अहिंसक आंदोलन के प्रति अपनी नफ़रत दिखा रहे हैं. अगर दिक्कत है तो इस गीत को प्रतिबंधित क्यों नहीं करा देते.’

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

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तीन साल की सबसे निचली ​वृद्धि दर के आंकड़े के बाद मोदी ने कहा अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमने कड़े फैसले लिए हैं और ऐसा करना जारी रखेंगे. कठोर सुधारों के बाद अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है.’

ahmadnagar

पीएम की आलोचना करने वाला सिपाही निलंबित, मंत्री के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने पर मामला दर्ज

अहमदनगर पुलिस के मुताबिक, सिपाही कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री बालासाहब थोराट का अंगरक्षक है.

Shatrughan Sinha

यशवंत सिन्हा के समर्थन में आए शत्रुघ्न, बोले उनके विचार राष्ट्र के हित में

कहा, यशवंत सिन्हा सच्चे अर्थों में राजनेता हैं, जिसने खुद को साबित किया है और जो देश के सबसे सफल वित्त मंत्रियों में से एक हैं.

Hindi Critics

हिंदी साहित्य: कहां गई आलोचना, कहां गए आलोचक

आलोचना जगत पर हिंदी के अध्यापकों का कब्ज़ा है लेकिन ये अध्यापक सिर्फ भाषणबाजी कर रहे हैं. दुनिया भर में अच्छी आलोचना अकादमिक संस्थानों में विकसित होती है पर हमारे विश्वविद्यालयों के हिंदी विभागों में क्या हो रहा है, ये किसी से छिपा नहीं है.