इंदिरा गांधी

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अपूर्वानंद की मास्टरक्लास, एपिसोड 01: सिख विरोधी दंगा मामले में सज्जन कुमार को उम्रक़ैद

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में 34 साल बाद कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है. इस विषय पर अपूर्वानंद की पहली मास्टरक्लास.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

चौरासी के दंगों पर दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला महान भारत के नागरिकों की निर्ममता के ख़िलाफ़ आया है

2002 की बात को कमज़ोर करने के लिए 1984 की बात का ज़िक्र होता है, अब 1984 की बात चली है तो अदालत ने 2013 तक के मुज़फ़्फ़रनगर के दंगों तक का ज़िक्र कर दिया है.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी. (फोटो: पीटीआई)

1984 को लेकर राहुल गांधी को सच स्वीकार करने का साहस दिखाना चाहिए

‘अगर आप एक नेता हैं और आपकी नज़रों के सामने बड़ी संख्या में लोगों का क़त्ल किया जाता है, तब आप लोगों की ज़िंदगी बचा पाने में नाकाम रहने की जवाबदेही से मुकर नहीं सकते.’

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1984, 1993, 2002 के दंगों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया, नेता-पुलिस का था सहयोग: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकै़द की सज़ा देते हुए कहा कि मानवता के ख़िलाफ़ अपराध और नरसंहार हमारे घरेलू क़ानून का हिस्सा नहीं हैं. इन कमियों को ख़त्म करने की जल्द से जल्द ज़रूरत है.

सज्जन कुमार (फोटो: पीटीआई)

1984 सिख विरोधी दंगे: कांग्रेस नेता सज्जन कुमार दोषी क़रार, उम्रक़ैद की सज़ा

मामला दक्षिण पश्चिम दिल्ली की पालम कॉलोनी में एक सिख परिवार के पांच सदस्यों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आगे लगाने से जुड़ा है. दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़ित को यह एहसास कराना ज़रूरी है कि कितनी भी चुनौती आए, लेकिन सत्य की जीत होगी.

(फोटो: रॉयटर्स)

1984 सिख विरोधी दंगे: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 88 लोगों की दोषसिद्धि को बरक़रार रखा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1984 सिख विरोधी दंगों मामले में एक निचली अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ की गई दोषियों की 22 वर्ष पुरानी अपीलों को ख़ारिज कर दिया और सज़ा काटने के लिए आत्मसमर्पण करने को कहा.

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सीएनएन ट्रंप के सामने खड़ा हो सकता है, तो भारतीय मीडिया सत्ता से सवाल क्यों नहीं कर सकता?

भारत के ज़्यादातर पत्रकार आज़ाद नहीं हैं बल्कि मालिक के अंगूठे के नीचे दबे हैं. वह मालिक, जो राजनेताओं के सामने दंडवत रहता है.

New Delhi: Former Union minister and Congress leader Jairam Ramesh addresses a press conference at AICC headquarters in New Delhi on Saturday, Aug 11, 2018. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI8_11_2018_000055B)

पर्यावरण से जुड़े क़ानूनों और मंत्रालय को कमज़ोर कर रही मोदी सरकार: जयराम रमेश

पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और ख़ुद को पर्यावरण संरक्षण के चैंपियन के तौर पर पेश करते हैं, लेकिन जब निर्णय लेने का वक़्त आता है तो कुछ नहीं करते.

अरुण शौरी. (फोटो: पीटीआई)

मोदी सरकार में स्थितियां आपातकाल से भी बदतर: अरुण शौरी

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा, ‘1975 में बेहतर और निश्चित विपक्ष था. लेकिन आज विपक्ष बिखरा हुआ है. मैं कह सकता हूं कि इंदिरा और नरेंद्र मोदी के बीच अंतर यह है कि इंदिरा को अपने किए का पछतावा था.’

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी. (फोटो: रॉयटर्स)

‘आपातकाल’ और ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ इंदिरा गांधी की दो गंभीर गलतियां थीं: नटवर सिंह

अपनी नई किताब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नटवर सिंह ने लिखा है कि अक्सर इंदिरा गांधी को गंभीर और क्रूर बताया जाता है. कभी-कभार ही यह कहा गया कि वह सुंदर, गरिमामयी और शानदार इंसान के साथ एक विचारशील मानवतावादी एवं अध्ययन करने वाली महिला थीं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Nation on the occasion of 72nd Independence Day, in Delhi on August 15, 2018.

देश में संविधान लागू है और क़ानून अपना काम कर रहा है

रोजगार नहीं है. उत्पादन घट गया है. किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नसीब नहीं हो रहा है. हेल्थ सर्विस चौपट हो चली है. शिक्षा-व्यवस्था डांवाडोल है. मुस्लिम ख़ामोश हो गया है. दलित चुपचाप है लेकिन आवाज़ नहीं उठनी चाहिए क्योंकि देश में क़ानून अपना काम कर रहा है.

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​​​जन गण मन की बात, एपिसोड 295: भीमा कोरेगांव मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और राहुल गांधी

जन गण मन की बात की 295वीं कड़ी में विनोद दुआ भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ़्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं और राहुल गांधी के 1984 के दंगों को लेकर दिए गए बयान पर चर्चा कर रहे हैं.​

फोटो: पीटीआई

न चौरासी के दंगों में कांग्रेस का हाथ था, न 2002 में भाजपा का!

राहुल गांधी की कांग्रेस को सिख दंगों से अलग करने की कोशिश वैसी ही है, जैसी मोदी ने विकास के नारे में गुजरात के दाग़ छुपाकर की थी.

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जो आज दूसरों को ‘एंटी नेशनल’ बता रहे हैं, कभी वे भी ‘देशद्रोही’ हुआ करते थे

एंटी-नेशनल, भारत विरोधी जैसे शब्द आपातकाल के सत्ताधारियों की शब्दावली का हिस्सा थे. आज कोई और सत्ता में है और अपने आलोचकों को देश का दुश्मन बताते हुए इसी भाषा का इस्तेमाल कर रहा है.

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अपने अवसान के दिन तक संभावनाओं से भरे हुए थे राजीव गांधी

जयंती विशेष: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के सातवें और अब तक के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अपने आत्मीय रिश्ते को याद करते हुए एक बार बताया था कि कैसे राजीव ने उनकी जान बचाई थी.

New Delhi: A woman sells the Indian national flag on a roadside ahead of Republic Day, in New Delhi on Wednesday. (PTI Photo by Ravi Choudhary)(PTI1_24_2018_000293B)

स्वतंत्रता के सात दशक बाद मिली भीख मांगकर भूख मिटाने की ‘आज़ादी’ का ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा था कि ऐसे देश में भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है जहां सरकार भोजन या नौकरियां प्रदान करने में असमर्थ है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addressing the nation from the ramparts of the historic Red Fort on the occasion of the 71st Independence Day, in New Delhi on Tuesday. PTI Photo / PIB (PTI8_15_2017_000059B) *** Local Caption ***

15 अगस्त 1975 ​के लाल क़िले और 15 अगस्त 2018 के लाल क़िले का फ़र्क़

इमरजेंसी लगाकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘नए भारत’ का उद्घोष किया था. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘न्यू इंडिया’ का ऐलान करेंगे.

Nagaon: People wait to check their names on the final draft of the state's National Register of Citizens after it was released, at an NRC Seva Kendra in Nagaon on Monday, July 30, 2018. (PTI Photo) (PTI7_30_2018_000127B)

एनआरसी की जड़ें असम के इतिहास से जुड़ी हुई हैं

असम देश का इकलौता राज्य है, जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी बनाया जा रहा है. एनआरसी क्या है? असम में ही इसे क्यों लागू किया गया है और इसे लेकर विवाद क्यों है?

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1978 में इंदिरा ने जो किया, क्या उसे फिर दोहराया जा सकता है?

अगर 1977 भारत की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार के सत्ता में आने के कारण भारतीय राजनीति का एक बड़ा पड़ाव है तो 1978 को इंदिरा गांधी के उस जुझारूपन के कारण याद रखा जाना चाहिए, जिसके बल पर उन्होंने अपनी वापसी की इबारत लिखी.

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सरकार चाहती है देश का युवा समझे कि प्रतिरोध करना राष्ट्रद्रोह और ग़ैर-लोकतांत्रिक है

हमारी राष्ट्रीय राजनीति और भाजपा कांग्रेस विरोधी आंदोलन यानी प्रतिरोध का ही नतीजा हैं, लेकिन इसके बारे में कोई बात नहीं करता. ख़ुद भाजपा भी नहीं. वे चाहते हैं कि हम इमरजेंसी के बारे में जानें लेकिन उतना, जितने से उन्हें नुकसान न पहुंचे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘आपातकाल’ इतना प्रिय क्यों है?

राजनीतिक विमर्श में आपातकाल नरेंद्र मोदी का प्रिय विषय रहता है. यह और बात है कि मोदी आपातकाल के दौरान एक दिन के लिए भी जेल तो दूर, पुलिस थाने तक भी नहीं ले जाए गए थे. भूमिगत रहकर उन्होंने आपातकाल विरोधी संघर्ष में कोई हिस्सेदारी की हो, इसकी भी कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं मिलती.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi visiting the Terracota Warriors Museum, in Xi'an, Shaanxi, China on May 14, 2015.

क्या आपातकाल को दोहराने का ख़तरा अब भी बना हुआ है?

आपातकाल कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि सत्ता के अतिकेंद्रीकरण, निरंकुशता, व्यक्ति-पूजा और चाटुकारिता की निरंतर बढ़ती गई प्रवृत्ति का ही परिणाम थी. आज फिर वैसा ही नज़ारा दिख रहा है. सारे अहम फ़ैसले संसदीय दल तो क्या, केंद्रीय मंत्रिपरिषद की भी आम राय से नहीं किए जाते, सिर्फ़ और सिर्फ़ प्रधानमंत्री कार्यालय और प्रधानमंत्री की चलती है.

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क्यों कोई भी क्षेत्रीय दल मोदी और शाह पर भरोसा करने को तैयार नहीं है?

ख़रीद-फरोख़्त की राजनीति में भी एक न्यूनतम विश्वास और सामंजस्य की ज़रूरत होती है. कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद जो हुआ, वो बताता है कि मोदी-शाह की जोड़ी काफ़ी तेज़ी से यह विश्वास भी खो रही है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the Indian Community, at the ‘Bharat Ki Baat, Sabke Saath’ programme, at Westminster, London on April 18, 2018.

कहीं प्रधानमंत्री मोदी ने ख़ुद को ही तो भारत नहीं मान लिया है?

लंदन में वेस्टमिंस्टर के सेंट्रल हाल में हुए दो घंटों से ज़्यादा के कार्यक्रम ‘भारत की बात, सबके साथ’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से लेकर अंत तक अपनी ही बात करते रह गए.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फोटो: पीटीआई)

राजनीति में आप बुरी ताक़तों से लड़ते हैं और अच्छाई के लिए खड़े होते हैं तो मरना होगा: राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनके पिता और दादी की हत्या इसलिए हुई कि वे राजनीति में थे और बदलाव लाना चाहते थे.

जयराम रमेश. (फाइल फोटो: पीटीआई)

उद्योगों के पक्ष में पर्यावरण क़ानूनों को कमज़ोर कर रहा है केंद्र: जयराम रमेश

पूर्व पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि नरेंद्र मोदी पर्यावरण संरक्षण के बारे में जो उपदेश देते हैं, उसका पालन नहीं करते.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ​​(फाइल फोटो)

कांग्रेस देश को 21वीं सदी में लेकर आई, मोदी जी आज इसे मध्यकाल में ले जा रहे हैं: राहुल गांधी

राहुल ने थामी पार्टी की कमान. कहा भले ही हम सहमत न हो लेकिन भाजपा को अपना भाई-बहन मानते हैं. वे बदनाम करते हैं, हम सम्मान देते हैं.

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‘राहुल के सवालों का ही नतीजा है कि मोदी केवल हिंदू-मुस्लिम एवं पाकिस्तान की बात कर रहे हैं’

विपक्षी नेताओं को उम्मीद, गुजरात चुनाव के नतीजे अनुकूल हुए तो विपक्षी एकता में नई जान फूंक सकेंगे राहुल गांधी.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

मोदी सरकार ने अपने अहंकार में लोकतंत्र पर काली छाया डाल दी है: सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मोदी सरकार संसद सत्र में पैदा कर रही व्यवधान, आधुनिक भारत का इतिहास बदलने के प्रयास का आरोप लगाया.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh  (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

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‘भाजपा पटेल जैसे नेताओं को अपना रही क्योंकि आज़ादी आंदोलन में उसकी अपनी कोई भागीदारी नहीं थी’

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया इतिहास के पुनर्लेखन का आरोप, सोनिया गांधी ने कहा, हम पर थोपी जा रही एकपक्षीय, भेदभावकारी भारतीयता.

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आज अगर लोहिया होते तो गैर-भाजपावाद का आह्वान करते

पुण्यतिथि विशेष: लोहिया ने नेहरू जैसे प्रधानमंत्री को यह कहकर निरुत्तर कर दिया था कि आम आदमी तीन आने रोज़ पर गुज़र करता है, जबकि प्रधानमंत्री पर रोज़ाना 25 हज़ार रुपये ख़र्च होते हैं.

साभार: competitionzenith.blogspot.in

जब जेपी के जीवित रहते हुए संसद ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी थी…

गैरकांग्रेसवाद का सिद्धांत भले ही डाॅ. राममनोहर लोहिया ने दिया था लेकिन उसकी बिना पर कांग्रेस की केंद्र की सत्ता से पहली बेदखली 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तत्वावधान में ही संभव हुई.

जयप्रकाश नारायण. (जन्म: 11 अक्टूबर 1902  मृत्यु: 08 October 1979)

कहते हैं उनको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है…

पुण्यतिथि विशेष: आपातकाल की चर्चा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की चर्चा न की जाए.

Gujrat Riot Reuters

वह चुनाव अभियान जिसने सांप्रदायिक राजनीति को बदल दिया

वर्ष 2002 में नरेंद्र मोदी के पहले राजनीतिक चुनाव प्रचार ने सबकुछ बदल दिया. पहली बार किसी पार्टी के नेता और उसके मुख्य चुनाव प्रचारक ने मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरा प्रचार अभियान चलाया.

Indira Gandi Book Sagrika Ghosh

‘इंदिरा गांधी ने महाराजाओं के विशेषाधिकार तो ख़त्म किए लेकिन राजनीति में नए महाराजा बना दिए’

साक्षात्कार: वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष से उनकी नई क़िताब ‘इंदिरा: इंडियाज़ मोस्ट पावरफुल प्राइम मिनिस्टर’ पर मीनाक्षी तिवारी से बातचीत.

Kamarajar The King Maker - Very Rare Photo Collection Part III (13)

‘वो नेता जो मानता था जिसे हिंदी और अंग्रेज़ी न आती हो, उसे इस देश का पीएम नहीं बनना चाहिए’

जन्मदिन विशेष: स्वतंत्रता सेनानी, गांधीवादी, तीन बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष रहे के. कामराज को स्वतंत्र भारत की राजनीति का पहला ‘किंगमेकर’ माना जाता है.

Nitish Kumar reuters

नीतीश कुमार को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए: रामचंद्र गुहा

नीतीश को अध्यक्ष बनाने का सुझाव देते हुए गुहा ने बताया कि वे ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कांग्रेस बगैर नेता वाली पार्टी है और नीतीश बगैर पार्टी वाले नेता हैं.

Indira Collage

आपातकाल: नसबंदी से मौत की ख़बरें न छापी जाएं

आपातकाल के 43 साल बाद इन सेंसर-आदेशों को पढ़ने पर उस डरावने माहौल का अंदाज़ा लगता है जिसमें पत्रकारों को काम करना पड़ा था, अख़बारों पर कैसा अंकुश था और कैसी-कैसी ख़बरें रोकी जाती थीं.