इतिहास

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at a function to commemorate the 75th anniversary formation of the Azad Hind Government, at Red Fort, Delhi on October 21, 2018.

मोदी को प्रधान सेवक के साथ भारत का प्रधान इतिहासकार भी घोषित कर देना चाहिए

प्रधानमंत्री इसीलिए आज के ज्वलंत सवालों के जवाब देना भूल जा रहे हैं क्योंकि वे इन दिनों नायकों के नाम, जन्मदिन और उनके दो-चार काम याद करने में लगे हैं. मेरी राय में उन्हें एक मनोहर पोथी लिखनी चाहिए, जो बस अड्डे से लेकर हवाई अड्डे पर बिके. इस किताब का नाम मोदी-मनोहर पोथी हो.

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नकली इतिहास भारत पर प्रेतात्मा बन कर छाया हुआ है

आज़ादी के 71 साल: स्मृति के रूप में जीवित विभाजन एक मौखिक संसार है, जो चुप्पियों में दबा हुआ है, नाउम्मीदी की भाषा में फंसा हुआ है. 71 सालों के बाद भी जिसके ज़ख़्म भरने का नाम नहीं लेते.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा, ताजमहल की ख़ूबसूरती को बहाल करो या फिर इसे गिरा दो

पीठ ने ताजमहल और पेरिस में एफिल टावर के बीच तुलना करते हुए कहा कि यह स्मारक संभवत: ज़्यादा ख़ूबसूरत है, लेकिन भारत वहां के ताजमहल के मौजूदा हालातों की वजह से लगातार पर्यटक और विदेशी मुद्रा गंवा रहा है.

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श्रीकांत वर्मा: क्या कहूं आज जो नहीं कही, दुख ही जीवन की कथा रही

श्रीकांत वर्मा के साहित्य में जीवन-मरण का स्मरण किसी प्रकार के रहस्यवाद से परे है. बात सीधी-सपाट है. आदमी अपने ‘रक्तचाप’ से मरता है, अपने ‘पाप’ से नहीं.

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हनुमान की नई छवि के मायने

हनुमान की यह छवि रचने वाले कलाकार करण आचार्य का कहना है कि उनके हनुमान शक्तिशाली हैं न कि दमनकारी. लेकिन जो इसे गर्व के साथ जोड़कर देख रहे हैं, वे शायद बिल्कुल ऐसा नहीं सोचते.

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मीडिया बोल, एपिसोड 49: प्रधानमंत्री का इतिहास ज्ञान, जनतंत्र और मीडिया

मीडिया बोल की 49वीं कड़ी में उर्मिलेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भाषणों में ग़लत ऐतिहासिक तथ्यों के इस्तेमाल और मीडिया की भूमिका पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद कुमार और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद सज्जाद से चर्चा कर रहे हैं.

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सहेला रे: कित गए वे लोग

कहते हैं कि इतिहास में नामों और तारीख़ों के अलावा कुछ सच नहीं होता जबकि कथा साहित्य में नामों और तारीख़ों के अलावा सब कुछ सच होता है. मृणाल पांडे के नए उपन्यास सहेला रे में तारीखें भी सच के क़रीब हैं, साथ ही किरदार भी सच्चाई के इतने नज़दीक हैं कि जानने वालों को उस ज़माने की न जाने कितनी वास्तविक छवियां यहां दिखाई देंगी.

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गोबिंदगढ़ क़िला: बाज़ार के हाथों में इतिहास का ज़िम्मा

अमृतसर के गोबिंदगढ़ क़िले में इतिहास की निशानियां सुरक्षित रहनी चाहिए, लेकिन पुरातात्विक विभाग को इमारत का ज़िम्मा देने के बजाय पंजाब सरकार ने बॉलीवुड अभिनेत्री दीपा साही को इसे वर्चुअल रियलिटी थीम पार्क में बदलने की ज़िम्मेदारी सौंपी है.

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अन्य संस्कृतियों के प्रति अज्ञानता कट्टर राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है: नोबेल पुरस्कार विजेता

भारत आए नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर डेविड जोनाथन ग्रॉस ने कहा कि कट्टर राष्ट्रवाद के माहौल में ज्ञान की ज्योति जलाने की ज़िम्मेदारी युवाओं पर है.

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भीमा-कोरेगांव युद्ध को याद करने वाले किस आधार पर ‘देशद्रोही’ सिद्ध किए जा रहे हैं?

जो लोग भीमा-कोरेगांव युद्ध की याद में आयोजित समारोह के आयोजकों को राष्ट्रद्रोही सिद्ध कर रहे हैं वो यह क्यों छुपा ले जाते हैं कि न जाने कितनी बार मराठों ने भी अंग्रेज़ों के साथ मिलकर अन्य राज्यों के ख़िलाफ़ लड़ाइयां लड़ी हैं.

भीमा-कोरेगांव में बना विजय स्तंभ. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर ईस्ट इंडिया कंपनी ने जीत दर्ज की थी. इसकी याद में कंपनी ने विजय स्तंभ का निर्माण कराया था, जो दलितों का प्रतीक बन गया. कुछ विचारक और चिंतक इस लड़ाई को पिछड़ी जातियों के उस समय की उच्च जातियों पर जीत के रूप में देखते हैं. हर साल 1 जनवरी को हजारों दलित लोग श्रद्धाजंलि देने यहां आते हैं. (फोटो साभार: विकीपीडिया)

भीमा-कोरेगांव युद्ध को सिर्फ़ जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए

जब आंबेडकर ने भीमा कोरेगांव युद्ध को पेशवाओं के उत्पीड़न के ख़िलाफ़ महारों के संघर्ष के रूप में पेश किया, तब वे असल में एक मिथक रच रहे थे.

A bird’s eye view of Rajpath, during the 66th Republic Day Parade 2015, in New Delhi on January 26, 2015.

इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना अलग तरीके का आतंक है: इतिहासकार

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और इतिहासकार केएम श्रीमाली ने आरोप लगाया कि संघ और भाजपा धार्मिक आधारों पर देश को बांटने के लिए प्रतिबद्ध है.

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‘आप इतिहास नहीं बदल सकते, तथ्यों को सृजित करेंगे तो वह इतिहास नहीं कल्पना होगी’

इतिहासकार इरफान हबीब की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब विपक्षी दल, भाजपा एवं संघ पर हिंदुत्व के एजेंडे को बढ़ाने के लिए भारतीय इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगा रहे हैं.

इतिहासकार रामचंद्र गुहा. (फोटो साभार: फेसबुक)

इतिहासकारों का राजनीतिक विचारधारा या धर्म के प्रति झुकाव नहीं होना चाहिए: गुहा

इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा, इतिहास सामाजिक विज्ञान और साहित्य का मिश्रण है और वह कभी एक आयामी नहीं हो सकता.

फोटो: पीटीआई

हिंदू वोट बैंक बचाए रखने की ख़ातिर नये-नये दुश्मन गढ़ना ज़रूरी है

विदेशी दुश्मनों को ज़रूरत से ज़्यादा निचोड़ लिया गया है. अब नये दुश्मन की ज़रूरत है. अब घर में तलाश की जा रही है. इसके लिए इतिहास को काम पर लगाया गया है.

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‘एक फिल्म ने ऐसे बादशाह की छवि बिगाड़ दी जिसने मंगोलों से हिंदुस्तान की हिफ़ाज़त की थी’

‘इतिहास के ज्ञान के नाम पर जहालत इतनी है कि फिल्मों को ही इतिहास मान लिया जाता है. हमें यह समझना होगा कि फिल्म इतिहास नहीं है.’

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

मोदी सरकार ने अपने अहंकार में लोकतंत्र पर काली छाया डाल दी है: सोनिया गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, मोदी सरकार संसद सत्र में पैदा कर रही व्यवधान, आधुनिक भारत का इतिहास बदलने के प्रयास का आरोप लगाया.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

ताजमहल से नफ़रत ऐसे बर्बर युग में ले जाएगी जहां से हम बहुत पहले निकल चुके हैं

ताजमहल को कलंक बताने वालों को समझ नहीं आता कि इतिहास के 800 साल हटाने पर हिंदुस्तान में जो बचेगा, वह अखंड नहीं बल्कि खंडित भारत होगा.

(फोटो साभार: रॉयटर्स)

आजकल भारत में जो हो रहा है, वह ढर्रा पाकिस्तान का है

ऐसी पीढ़ी तैयार करने की कोशिश हो रही है जो नफ़रत पर आधारित हो. पहले इतिहास में दुश्मन पैदा करें फिर उससे लड़ें. ऐसे इतिहास का असर हम पाकिस्तान को देखकर समझ सकते हैं.

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गांधी की हत्या का सच पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका, न्यायमित्र नियुक्त

कोर्ट ने पूछा- हम फिर से जांच क्यों शुरू करें, याचिकाकर्ता ने कहा- हो सकता है गांधी की हत्या एक संगठित संस्था ने कराई हो, सच सामने आना चाहिए.

Yogi Adityanath Dinesh Sharma PTI

मुगल शासक हमारे पूर्वज नहीं लुटेरे थे, पाठ्यक्रम से हटाए जाएंगे: दिनेश शर्मा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने कहा, अब यही इतिहास लिखा जाएगा. राज्य सरकार इसके लिए पाठ्यक्रम में बदलाव भी करेगी.

फोटो साभार: खबोर आॅनलाइन डॉट कॉम

आज़ादी की लड़ाई में संघ की भूमिका पर सवाल उठाने वाली किताब क्यों छपने नहीं देना चाहती है सरकार?

अजय आशीर्वाद बता रहे हैं कि आज़ादी की लड़ाई पर आधारित एक किताब को पिछले दो सालों से भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद प्रकाशन की अनुमति नहीं दे रहा है.

Vinod Dua EP 96

जन गण मन की बात, ​एपिसोड 96: चंडीगढ़ छेड़छाड़ मामला और किताबों से गायब मुगल

जन गण मन की बात की 96वीं कड़ी में विनोद दुआ चंडीगढ़ में छेड़छाड़ की​ शिकार वर्णिका कुंडू और महाराष्ट्र में इतिहास की किताबों से मुगलों के बारे में जानकारी हटाने पर चर्चा कर रहे हैं.

DD-Kosambi

डीडी कोसंबी: एक अनोखी प्रतिभा की ज़िद्दी धुन

डीडी कोसंबी हमारे सामने एक अनोखे रोल मॉडल के तौर पर सामने आते हैं, जिनकी गणितीय प्रतिभा उनके इतिहास ज्ञान और अटल राजनीतिक विचारों पर छा गई थी. प्रतिभाओं का ऐसा मिलान किसी सपने की तरह है.

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अब सुनने में आता है कि हर पांच मिनट में एक भारतीय लेखक का जन्म हो रहा है: अनीता देसाई

तीन बार बुकर पुरस्कार के लिए नामित और 17 से ज़्यादा किताबों की लेखक अनीता देसाई को हाल ही में इंटरनेशनल लिटरेरी ग्रैंड प्राइज़ से सम्मानित किया गया है.