इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

journalists-Modi-PTI

जीओएम रिपोर्ट: मीडिया ‘मैनेज’ करने की मोदी सरकार की टूलकिट

पिछले दिनों सामने आई मंत्रियों के समूह की रिपोर्ट में मोदी सरकार को जवाबदेह ठहराने वाले मीडिया को चुप कराने और सरकार की नकारात्मक छवि सुधारने की रणनीति की बात की गई है. इसमें तीन बार द वायर का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि यह जनता के बीच सरकार की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नए डिजिटल मीडिया नियमों से प्रेस की आज़ादी को धक्का लगेगा, सरकार वापस ले: एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि ‘बेलगाम’ सोशल मीडिया को नियंत्रित करने के नाम पर सरकार मीडिया को मिली संवैधानिक सुरक्षा को छीन नहीं सकती है. गिल्ड ने इस बात को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की है कि इन नियमों के तहत सरकार को असीमित शक्तियां दे दी गई हैं.

विभिन्न मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित राजीव गांधी फाउंडेशन के डोनेशन संबंधी ख़बर. (फोटो साभार: संबंधित चैनल/अख़बार/वेबसाइट)

जीओएम रिपोर्ट: मंत्रियों को मिले सुझाव के बाद राष्ट्रीय ख़बर बना कांग्रेस विरोधी दावा

जीओएम रिपोर्ट के अनुसार सरकार समर्थक टिप्पणीकार कंचन गुप्ता ने जून 2020 में मंत्रियों को ‘चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा राजीव गांधी फाउंडेशन को दिए डोनेशन’ को लेकर ख़बर फैलाने का सुझाव दिया था. कई मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित ख़बरें दिखाती हैं कि भाजपा ने इस सुझाव को गंभीरता से लिया.

GOM media

जीओएम रिपोर्ट: ‘मित्र’ मीडिया ने दी हिंदुत्व प्रोपगेंडा व स्वतंत्र मीडिया को चुप कराने की सलाह

एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आए नौ मंत्रियों के समूह द्वारा तैयार 97 पन्नों के दस्तावेज़ का मक़सद मीडिया में मोदी सरकार की छवि को चमकाना और स्वतंत्र मीडिया को चुप कराना है. बताया गया है कि यह रिपोर्ट सरकार समर्थक कई संपादकों और मीडियाकर्मियों के सुझावों पर आधारित है.

(फोटो: द वायर)

संपादकीय: केंद्र के नए नियम स्वतंत्र मीडिया को नियंत्रित करने का प्रयास हैं

अनुचित तरीके से बनाए गए नए सोशल मीडिया नियम समाचार वेबसाइट्स को सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के साथ खड़ा करते हैं. इन्हें वापस लिया ही जाना चाहिए.

WhatsApp Image 2021-03-04 at 22.30.17

डिजिटल मीडिया से घबराई सरकार, पत्रकारों को क़ाबू में करने का काम शुरू

वीडियो: मीडिया में सरकार की छवि को चमकाने और स्वतंत्र पत्रकारिता का दमन करने के लिए मोदी सरकार के मंत्रियों के समूह (जीओएम) की एक रिपोर्ट का खुलासा हुआ है. इस मुद्दे पर द कारवां के पोलिटिकल एडिटर हरतोष सिंह बल से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

GOM-media

स्वतंत्र मीडिया को बेअसर करने की मंत्रियों की मंत्रणा के बाद बनाए गए नए डिजिटल मीडिया नियम

कारवां पत्रिका ने नौ मंत्रियों के एक समूह की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि 2020 के मध्य में इन सभी ने स्वतंत्र मीडिया संस्थानों को प्रभावहीन बनाने के लिए ख़ाका तैयार किया था. इसमें ऐसे लोगों को ख़ामोश करने की योजना बनाई गई थी, जो सरकार के ख़िलाफ़ ख़बरें लिख रहे हैं या उसका एजेंडा नहीं मान रहे हैं.

notice-new-code-kishorechandra

मणिपुर: विवादित डिजिटल मीडिया नियम के तहत न्यूज़ पोर्टल को जारी नोटिस वापस लिया गया

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए नए नियमों के तहत सबसे पहली नोटिस मणिपुर के न्यूज पोर्टल द फ्रंटियर मणिपुर को उसके एक कार्यक्रम को लेकर जारी किया गया है. पोर्टल को सभी संबंधित दस्तावेज़ों की प्रति मुहैया कराने को कहा गया था, जो इन नियमों के पालन को सुनिश्चित करते हों.

(फोटो साभार: nominalize/Pixabay)

सोशल, डिजिटल मीडिया और ओटीटी मंचों पर बढ़ेगी निगरानी, मोदी सरकार लाई नए नियम

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया मंचों के दुरुपयोग रोकने के लिए नए दिशा-निर्देशों की घोषणा की, जिनके तहत संबंधित कंपनियों के लिए एक पूरा शिकायत निवारण तंत्र बनाना होगा. साथ ही ख़बर प्रकाशकों, ओटीटी मंचों और डिजिटल मीडिया के लिए ‘आचार संहिता’ और त्रिस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली लागू होगी.

(फोटोः रॉयटर्स)

सोशल मीडिया मंचों के लिए नए दिशानिर्देश तैयार, समुचित परामर्श न होने को लेकर हितधारक चिंतित

सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया मध्यस्थों और नेटफ्लिक्स व अमेज़न के प्राइम वीडियो जैसे ओटीटी प्लेटफार्मों को उनके माध्यम से साझा की जाने वाली सामग्री के लिए अधिक जवाबदेह बनाने के लिए आईटी अधिनियम में कुछ हिस्सों में बदलाव करना चाहता है.

(फोटो: द वायर)

कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र और एनआईसी को आरोग्य सेतु का डेटा शेयर करने से रोका

डेटा प्राइवेसी के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकार प्राप्त समूह द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल के अनुसार प्राइवेसी पॉलिसी में ये बताया जाना चाहिए कि किस उद्देश्य के लिए यूज़र्स के डेटा को इकट्ठा किया जा रहा है, लेकिन आरोग्य सेतु ऐप की पॉलिसी में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है.

(फोटो: रॉयटर्स)

सीआईसी के सामने आरोग्य सेतु को लेकर ग़ैरज़िम्मेदाराना जवाबों के लिए केंद्र ने मांगी माफ़ी

एक आरटीआई कार्यकर्ता सीआईसी के समक्ष एक याचिका दायर की थी, क्योंकि उन्हें इसके बारे में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिला था. उन्होंने आरोग्य सेतु ऐप के निर्माण से जुड़ी पूरी फाइल और इस प्रक्रिया में शामिल कंपनियों, लोगों और सरकारी विभागों का ब्योरा मांगा था.

(फोटो: रॉयटर्स)

आरोग्य सेतु ऐप किसने बनाया सरकार को नहीं पता, सीआईसी ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

सरकार द्वारा एक याचिकाकर्ता को आरोग्य सेतु ऐप के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कहने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि जब ऐप को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा डिजाइन और विकसित बताया गया है, तब कैसे संभव है कि उनके पास कोई जानकारी ही नहीं है.

(फोटो: रॉयटर्स)

ट्विटर के शीर्ष अधिकारियों का संसदीय समिति के सामने पेश होने से इनकार

सोशल मीडिया मंचों पर नागरिक अधिकारों की रक्षा के मामले पर ट्विटर के अधिकारियों को अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली समिति के सामने पेश होना था. सूत्रों के मुताबिक कंपनी ने सुनवाई के लिए कम समय दिए जाने का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया है.