ईसाई

ISRAEL-PALESTIN Flag-Reuters

फिलिस्तीनियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाना हिंसा के प्रति दुनिया की बेपरवाही का सबूत है

फिलीस्तीन के ज़ख़्म से ख़ून धीरे-धीरे रिस रहा है, लेकिन वह हमारी आत्माओं को नहीं छूता. जिस तरह दुनिया का हर मुल्क इस्राइल के साथ गलबहियां करने में एक दूसरे से प्रतियोगिता कर रहा है, उससे यह साबित होता है कि फिलिस्तीनियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है.

धर्म कोड के लिए धरना दे रहे आदिवासी प्रतिनिधि
(फोटो संतोषी)

क्यों अलग धर्म की मांग कर रहे हैं आदिवासी?

आदिवासियों की मांग है कि उनके धर्म को मान्यता दी जानी चाहिए और धर्म के कॉलम में उन्हें ट्राइबल या अबॉरिजिनल रिलीजन चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए.

New Delhi: A view of the Supreme Court, in New Delhi, on Thursday. (PTI Photo / Vijay Verma)(PTI5_17_2018_000040B)

अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करने में संविधान विशेषज्ञों की राय लेगा आयोग

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका में दायर कर कहा गया है कि हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आंकड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, पूर्वोत्तर के कई राज्यों और जम्मू कश्मीर में अल्पसंख्यक है. कोर्ट ने अल्पसंख्यक आयोग को परिभाषा तय करने के लिए तीन महीने का समय दिया है.

(फोटो: पीटीआई)

तीन महीने के भीतर अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग: सुप्रीम कोर्ट

भाजपा नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने एक जनहित याचिका दायर कर कहा है कि हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आंकड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, पूर्वोत्तर के कई राज्यों और जम्मू कश्मीर में अल्पसंख्यक है. हिंदू समुदाय उन लाभों से वंचित है जो कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए मौजूद हैं. अल्पसंख्यक आयोग को इस संदर्भ में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द की परिभाषा पर पुन: विचार करना चाहिए.

बाबा राम देव और मदर टेरेसा (फोटो: पीटीआई और रॉयटर्स)

रामदेव ने कहा, ‘मदर टेरेसा ईसाई थीं, इसलिए उन्हें भारत रत्न दिया गया’

रामदेव ने भारत रत्न सम्मान में किसी भी हिंदू संत को शामिल नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एक भगवाधारी सन्यासी को भी शीर्ष सम्मान से नवाज़ा जाना चाहिए.

Mahatma Gandhi-photo by pixabay

क्या गांधी नस्लवादी थे?

उम्र के दूसरे दशक में गांधी निस्संदेह एक नस्लवादी थे. वे सभ्यताओं के पदानुक्रम यानी ऊंच-नीच में यक़ीन करते थे, जिसमें यूरोपीय शीर्ष पर थे, भारतीय उनके नीचे और अफ्रीकी सबसे निचले स्थान पर. लेकिन उम्र के तीसरे दशक तक पहुंचते-पहुंचते उनकी टिप्पणियों में अफ्रीकियों के भारतीयों से हीन होने का भाव ख़त्म होता गया.

Datia: Congress President Rahul Gandhi offers prayers at Pitambara Peeth in Datia, Monday, Oct 15, 2018. MP Congress chief Kamal Nath and party leader Jyotiraditya Scindia are also seen. (PTI Photo) (PTI10_15_2018_000042B)

क्या इस देश में अब बहस सिर्फ़ अच्छे हिंदू और बुरे हिंदू के बीच रह गई है?

कांग्रेस ने धर्मनिरपेक्षता का नाम लेना छोड़ दिया है. वह विचार जो उस पार्टी का विशेष योगदान था, भारत को ही नहीं, पूरी दुनिया को, उसमें उसे इतना विश्वास नहीं रह गया है कि चुनाव के वक़्त उसका उच्चारण भी किया जा सके.

(फोटो: रॉयटर्स)

हमें वाजपेयी के बिना ‘मुखौटे’ वाले असली चेहरे को नहीं भूलना चाहिए

1984 के राजीव गांधी और 1993 के नरसिम्हा राव की तरह वाजपेयी इतिहास में एक ऐसे प्रधानमंत्री के तौर पर भी याद किए जाएंगे, जिन्होंने पाठ तो सहिष्णुता का पढ़ाया, मगर बेगुनाह नागरिकों के क़त्लेआम की तरफ़ से आंखें मूंद लीं.

फोटो: रॉयटर्स

मुस्लिमों को अपनी लोकतांत्रिक पहचान बताने के लिए बुरक़ा और टोपी हटाने की ज़रूरत नहीं है

बुरक़ा और टोपी को मुसलमानों की प्रगति की राह में रोड़ा बताने वालों को अपने पूर्वाग्रहों के परदे हटाने की ज़रूरत है.

Modi In Meghalaya Rally

भाजपा धर्म आधारित राजनीति में विश्वास नहीं करती: नरेंद्र मोदी

मेघालय में चुनाव प्रचार के दौरान मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने इराक में आईएसआईएस द्वारा बंदी बनाई गई 46 नर्सों को छुड़वाया था. वे सभी ईसाई थीं.

St Mary's College Vidisha ANI

विदिशा: मिशनरी कॉलेज में भारत माता की आरती गाने जा रहे दक्षिणपंथी संस्था के 29 सदस्य गिरफ़्तार

पुलिस के मुताबिक जिला प्रशासन के आदेश का उल्लंघन करते हुए विश्व सनातन संघ के कार्यकर्ता मिशनरी संचालित कॉलेज में ग़ैर क़ानूनी तरीके से भारत माता की आरती करने जा रहे थे.

St Mary's College Vidisha ANI

मध्य प्रदेश: एबीवीपी से बचाने की गुहार लेकर हाईकोर्ट पहुंचा कैथोलिक स्कूल एसोसिएशन

कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संस्थान लगातार एबीवीपी के निशाने पर हैं.

इलस्ट्रेशन: एलिजा बख़्त

कम से कम हमारे हिंदुस्तान में तो ऐसा कुछ नहीं होता…

अफ़राज़ुल हत्याकांड: ये तीन लोगों की कहानी है. भगवान, अल्लाह, गॉड, इलाही जिसको भी आप मानते हो, वो कहता है, साउंड, कैमरा, एक्शन और एक सीन शुरू होता है.

इलस्ट्रेशन: एलिजा बख़्त

अफ़राज़ुल की हत्या हमारे सामाजिक पतन की दास्तान है

सिर्फ ये कहना कि ये किसी पार्टी विशेष की सरकार के कारण हुआ, समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों से बचना है. सरकार की ज़िम्मेदारी है पर यह समझना भी ज़रूरी है कि हम ख़ुद अपने घरों में क्या बात कर रहे हैं.

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सरकारी अफ़सरान हों या मुंसिफ़, ख़ुद को सामाजिक नैतिकता का प्रहरी मान बैठते हैं

व्यक्ति कुछ मौलिक अधिकारों से संपन्न है. संविधान इन अधिकारों की निशानदेही कर राज्य को बताता है कि वह व्यक्ति के जीवन में कहां हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

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झारखंड सरकार गांधी की छवि और जनता का पैसा ईसाईयों के ख़िलाफ़ नफरत फैलाने में इस्तेमाल कर रही है

11 अगस्त को झारखंड के अधिकतर हिंदी अख़बारों में छपे एक सरकारी विज्ञापन में गांधी के नाम से धर्मांतरण के संबंध में वो बातें लिखी गईं, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं थीं.