उत्तर पूर्व

फिल्म जोलै: द सीड का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक)

फिल्मकार ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समिति को लिखा, बोडो फिल्म को अवॉर्ड न मिलना निराशाजनक

असम की फिल्मकार रजनी बसुमतारी ने नाख़ुशी ज़ाहिर करते हुए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समिति के अध्यक्ष एन. चंद्रा को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार द्वारा छोटे सांस्कृतिक समुदायों, उनकी भाषा संस्कृति को सहेजने के वादों के बीच किसी बोडो फिल्म का ऐसी फिल्म की ही श्रेणी में न चुना जाना निर्णायक मंडल के सदस्यों की विफलता है.

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सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार पैट्रिशिया मुखीम के ख़िलाफ़ फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज केस रद्द किया

ये मामला तीन जुलाई 2020 को किए गए एक फेसबुक पोस्ट से जुड़ा हुआ है, जिसमें शिलॉन्ग टाइम्स की संपादक पैट्रिशिया मुखीम ने ग़ैर-आदिवासी युवाओं पर हुए हमले को लेकर सवाल उठाया था. राज्य सरकार का कहना था कि ऐसा करके मुखीम ने मामले को सांप्रदायिक रंग दिया है.

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त्रिपुराः जनजाति संगठन ने कहा- भाजपा नीत राज्य सरकार झूठे मामलों में सदस्यों को फंसा रही है

जनजाति संगठन इंडीजीनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ ट्विप्रा का कहना है कि उनकी पार्टी के चार कार्यकर्ताओं को पिछले साल दिसंबर में ढलाई ज़िले के गांडाचेरा से गिरफ़्तार किया गया था, उन पर बिना किसी सबूत के उग्रवादियों की मदद करने का आरोप लगाया गया है.

Baksa: Voters wait in a queue to cast their votes for Bodoland Territorial Regions (BTR) elections 2020, at a polling station at Uttarpara in Baksa district, Monday, Dec. 7, 2020. (PTI Photo) (PTI07-12-2020 000006B)

असम: बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद चुनाव के पहले चरण में 77 प्रतिशत मतदान

असम में 40 सदस्यीय बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद चुनावों के लिए दूसरे चरण का मतदान 10 दिसंबर को होगा. यह चुनाव केंद्र, राज्य और बोडो समूहों के बीच इस साल जनवरी में लंबे समय से चले आ रहे बोडो मुद्दे को लेकर हुए समझौतों के बाद हुआ है. असम में कुछ आदिवासी क्षेत्रों को स्वायत्तता प्रदान की गई है.

मणिपुर प्रेस क्लब पर विरोध प्रदर्शन करते पत्रकार. (फाइल फोटो: ट्विटर/@ImphalFreePress)

मणिपुर: उग्रवादी समू​ह के दबाव के ख़िलाफ़ मीडियाकर्मियों का प्रदर्शन, प्रकाशन रोका

ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन और एडिटर्स गिल्ड मणिपुर की अगुवाई में मणिपुर प्रेस क्लब में विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने फ्रीडम ऑफ प्रेस की मांग की. उग्रवादी संगठन का नाम बताने से इनकार करते हुए मीडिया समूहों ने कहा कि यह उनके आंतरिक संघर्ष का नतीजा है.

द शिलॉन्ग टाइम्स की संपादक पैट्रिसिया मुखीम (फोटो साभारः फेसबुक)

वरिष्ठ पत्रकार पैट्रिशिया मुखीम ने साथ न देने का आरोप लगाते हुए एडिटर्स गिल्ड की सदस्यता छोड़ी

द शिलॉन्ग टाइम्स की संपादक पैट्रिशिया मुखीम पर एक फेसबुक पोस्ट के ज़रिये सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने के आरोप में हुई एफआईआर को हाईकोर्ट ने रद्द करने से इनकार कर दिया है. मुखीम का कहना है कि एडिटर्स गिल्ड सिर्फ सेलिब्रिटी पत्रकारों का ही बचाव करती है, उनके मामले पर उसने चुप्पी साध रखी है.

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मेघालय: अख़बार की संपादक पर फेसबुक पोस्ट के लिए हुई एफआईआर रद्द करने से अदालत का इनकार

द शिलॉन्ग टाइम्स की संपादक पैट्रीशिया मुखीम ने राज्य में ग़ैर-आदिवासी छात्रों पर हुए हमले को लेकर एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी, जिसके लिए उन पर सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी.

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक/सीएमओ मणिपुर)

मणिपुर: मीडिया में टिप्पणी करने से पहले शिक्षकों को प्रशासन से अनुमति लेने को कहा गया

विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति ऐसा बयान नहीं देगा, जो केंद्र/राज्य सरकार की किसी भी वर्तमान या हालिया नीति या कार्रवाई की आलोचना हो. आदेश का पालन नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.

(फोटो: पीटीआई)

असम को इनर लाइन परमिट से बाहर रखने के फ़ैसले पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

असम के दो छात्र संगठनों ने राज्य को नागरिकता संशोधन क़ानून के प्रभाव से बचाने के लिए राष्ट्रपति द्वारा बीते दिसंबर में बंगाल पूर्वी सीमांत नियमन, 1873 में किए गए संशोधनों को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है. अदालत का कहना है कि इस बारे में केंद्र का पक्ष सुने बिना कोई रोक नहीं लगाई जा सकती.

मिजोरम भाजपा अध्यक्ष वनलालमुआका. (फोटो साभार: फेसबुक)

मिज़ोरम भाजपा ने केंद्र से पूर्वोत्तर के फंसे प्रवासियों को लाने के लिए ट्रेन चलाने की मांग की

मिज़ोरम भाजपा अध्यक्ष वनलालमुआका ने कहा है कि हमने केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से पूर्वोत्तर के फंसे लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाने का अनुरोध किया है, जैसा कि सरकार ने अन्य राज्यों के लिए किया है.

मणिपुरी युवती के कपड़ों पर पड़े थूक के निशान. (फोटो: फेसबुक)

दिल्ली के बाद मुंबई में बाइक सवार ने मणिपुर की युवती पर थूका, केस दर्ज

मुंबई के कलीना इलाके का मामला. पुलिस ने एपिडेमिक डिज़ीज़ एक्ट के तहत अज्ञात बाइकर के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया. दिल्ली में बीते मार्च महीने में मणिपुर की ही एक अन्य युवती को कोरोना कहकर उस पर एक युवक ने पान थूक दिया था.

Guwahati: Members of Sanmilata Sangram Parishad take part in a torch light rally in protest against Citizenship Amendment Act (CAA) in Guwahati, Friday, Dec. 20, 2019. (PTI Photo)(PTI12_20_2019_000179B)

सीएए के ख़िलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय द्वारा संशोधित नागरिकता कानून पर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर करने पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीएए भारत का आंतरिक मामला है और यह कानून बनाने वाली भारतीय संसद के संप्रभुता के अधिकार से संबंधित है.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar addressing a press conference at his residence in Patna on Monday. PTI Photo  (PTI11_6_2017_000095B)

बिहार विधानसभा में एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पास

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि एनआरसी को बिहार में लागू नहीं किया जा रहा है और एनपीआर का 2010 में किए गए तरीके से ही अपडेटेशन किया जाएगा.

New Delhi: President Ram Nath Kovind speaks during the inauguration of the 20th National Technology Day 2018 function in New Delhi on Friday. (PTI Photo / Kamal Singh)(PTI5_11_2018_000050B)

विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा से लोकतंत्र कमजोर होता है: रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बजट सत्र के पहले दिन अपने अभिभाषण में कहा कि संसद ने नागरिकता संशोधन कानून बनाकर महात्मा गांधी के विचारों का सम्मान किया है. हालांकि इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने हंगामा करते हुए इसका कड़ा विरोध किया.

आशीष नंदी, अमिताव घोष, मीरा नायर और नसीरुद्दीन शाह. (फोटो साभार: विकिपीडिया/फेसबुक)

नसीरुद्दीन शाह, मीरा नायर समेत 300 हस्तियों ने नागरिकता कानून के खिलाफ खुला बयान जारी किया

बयान में कहा गया है, ‘हम सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले और बोलने वालों के साथ खड़े हैं. संविधान के बहुलवाद और विविध समाज के वादे के साथ भारतीय संविधान के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए उनके सामूहिक विरोध को सलाम करते हैं.’