उपन्यासकार

प्रेमचंद. (जन्म: 31 जुलाई 1880 – अवसान: 08 अक्टूबर 1936) (फोटो साभार: रेख्ता डॉट ओआरजी)

प्रेमचंद के विचारों को उनके जन्म के सौ साल बाद याद करने की ज़रूरत क्यों है…

विशेष: प्रेमचंद अगर आज के हालात, ख़ासकर तथाकथित संस्कृति बचाने वालों को देखते, तो शायद अवसाद में चले जाते. उन्हें संस्कृति राजनीतिक स्वार्थ-सिद्धि के लिए इस्तेमाल होने वाला महज़ साधन लगती थी और उनके अनुसार यही तथाकथित संस्कृति, सांप्रदायिकता को भी स्वार्थ पूरे करने के अवसर देती थी.

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पद्मश्री से सम्मानित साहित्यकार गिरिराज किशोर का निधन

गिरिराज किशोर द्वारा लिखा गया ‘पहला गिरमिटिया’ नामक उपन्यास महात्मा गांधी के अफ्रीका प्रवास पर आधारित था, जिसने इन्हें विशेष पहचान दिलाई.

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पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार नवनीता देव सेन का निधन

कवि, उपन्यासकार, स्तंभकार और लघु कथाओं और यात्रा वृतांतों की लेखिका नवनीता देव सेन को रामायण पर उनके शोध के लिए भी जाना जाता था.

लेखक वीएस नायपॉल. (फोटो साभार: फेसबुक)

नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक वीएस नायपॉल का निधन

भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक वीएस नायपॉल को 1990 में ‘नाइटहुड’ का सम्मान मिला था और 2001 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से उन्हें नवाज़ा गया था.

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प्रेमचंद को क्यों पढ़ें

प्रेमचंद की प्रासंगिकता का सवाल बेमानी जान पड़ता है, लेकिन हर दौर में उठता रहा है. अक्सर कहा जाता है कि अब भी भारत में किसान मर रहे हैं, शोषण है, इसलिए प्रेमचंद प्रासंगिक हैं. प्रेमचंद शायद ऐसी प्रासंगिकता अपनी मृत्यु के 80 साल बाद न चाहते.

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‘वर्दी वाला ग़ुंडा’ के लेखक वेद प्रकाश शर्मा नहीं रहे

वर्दी वाला गुंडा, दुल्हन मांगे दहेज, दहेज में रिवॉल्वर जैसे उपन्यासों के रचयिता वेद प्रकाश शर्मा ने शुक्रवार देर रात दुनिया को अलविदा कह दिया.