एनआरसी

असम की पूर्व मुख्यमंत्री सैयदा अनवरा तैमूर (फोटो साभारः ट्विटर)

असम की पहली और एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रहीं सैयदा अनवरा तैमूर का निधन

असम की पूर्व मुख्यमंत्री सैयदा अनवरा तैमूर दिसंबर 1980 से लेकर जून 1981 तक असम की मुख्यमंत्री रही थीं. चार बार विधायक रहने के साथ ही वह राज्यसभा सदस्य भी थीं. पूर्व मुख्यमंत्री बीते कुछ सालों से अपने बेटे के साथ ऑस्ट्रेलिया में रह रही थीं.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

असम में 86 हज़ार से अधिक लोगों को बीते पांच वर्षों में विदेशी घोषित किया गया: केंद्र

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को बताया कि असम में विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों का निस्तारण करने वाले न्यायाधिकरण के समक्ष ‘डाउटफुल वोटर्स’ के 83,008 मामले लंबित हैं.

फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल, धुबरी. (फोटो: मसूद ज़मान)

असम: सीमाई ज़िले के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में मुस्लिम अधिवक्ताओं को हटाकर हिंदुओं की नियुक्ति

धर्म के आधार पर फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के शासकीय अधिवक्ताओं को नियुक्त करने से पहले राज्य सरकार सीमाई ज़िलों में एनआरसी से बाहर रहने वाले लोगों की दर को लेकर कई बार नाख़ुशी ज़ाहिर कर चुकी है.

Morigaon: People stand in a queue to check their names on the final list of the National Register of Citizens (NRC) outside a Gaon Panchayat office in Pavakati village, Morigoan, Saturday, Aug 31, 2019. (PTI Photo) (PTI8_31_2019_000075B)

असम एनआरसी का एक साल: अंतिम सूची से बाहर रहे 19 लाख लोगों के साथ क्या हुआ

एनआरसी की अंतिम सूची के प्रकाशन के एक साल बाद भी इसमें शामिल नहीं हुए लोगों को आगे की कार्रवाई के लिए ज़रूरी रिजेक्शन स्लिप का इंतज़ार है. प्रक्रिया में हुई देरी के लिए तकनीकी गड़बड़ियों से लेकर कोरोना जैसे कई कारण दिए जा रहे हैं, लेकिन जानकारों की मानें तो वजह केवल यही नहीं है.

मथुरा जेल से रिहा होने के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान. (फोटो: पीटीआई)

क्या रिहाई के बाद और बढ़ सकती हैं डॉ. कफ़ील ख़ान की मुश्किलें

बीते साल ऑक्सीजन हादसे की विभागीय जांच में दो आरोपों में मिली क्लीनचिट के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान की बहाली की संभावनाएं बनी थीं, लेकिन सरकार ने नए आरोप जोड़ते हुए दोबारा जांच शुरू कर दी. मथुरा जेल में रिहाई के समय हुई हुज्जत यह इशारा है कि इस बार भी हुकूमत का रुख़ उनकी तरफ नर्म होने वाला नहीं है.

मथुरा जेल से रिहा होने के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान. (फोटो: पीटीआई)

योगी सरकार के आगे नहीं झुकूंगा, अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहूंगा: डॉ. कफ़ील ख़ान

एएमयू में सीएए के ख़िलाफ़ कथित ‘भड़काऊ भाषण’ देने के आरोप में जनवरी से मथुरा जेल में बंद डॉ. कफ़ील ख़ान को हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार देर रात रिहा कर दिया गया. उनका कहना है कि उन्हें इतने दिन जेल में इसलिए रखा गया क्योंकि वे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर करते रहते हैं.

Guwahati: An official checks the documents submitted by people at an National Register of Citizens (NRC) Seva Kendra in Guwahati, Friday, Aug 30, 2019. The NRC with the final list of citizens will be published tomorrow on August 31, 2019. Chief Minister of Assam Sarbananda Sonowal has asked people not to panic, and has directed all Government agencies of Assam to cooperate with people. (PTI Photo)(PTI8_30_2019_000055B)

असम: एनआरसी सूची आने के साल भर बाद भी दोबारा वेरिफिकेशन की मांग पर अड़ी राज्य सरकार

असम में भारतीयों की पहचान के लिए हुई एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित हुई थी, जिसमें 3.3 करोड़ आवेदकों में से 19 लाख से अधिक लोगों को जगह नहीं मिली थी. सत्तारूढ़ भाजपा और एनआरसी मूल याचिकाकर्ता तभी से इसे दोषपूर्ण मानते हुए दोबारा सत्यापन की मांग करते रहे हैं.

डॉ. कफील. (फोटो साभार: फेसबुक/drkafeelkhanofficial)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ रासुका के आरोप हटाने और तुरंत रिहाई का आदेश दिया

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पिछले साल दिसंबर में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में 29 जनवरी को डॉ. कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद रिहा करने के बजाय उन पर रासुका लगा दिया गया था.

Kolkata: Suspended doctor Kafeel Khan speaks during a press conference in Kolkata, Monday, July 8, 2019. Khan is accused in Gorakhpur's Baba Raghav Das (BRD) Medical College case involving the death of many children. (PTI Photo) (PTI7_8_2019_000154B)

डॉ. कफ़ील की रासुका अवधि फिर तीन महीने के लिए बढ़ाई गई

बीती 29 जनवरी को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में बीते साल दिसंबर में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के मामले में डॉ. कफ़ील ख़ान को मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ़्तार किया था. तब से वह जेल में हैं.

डॉ. कफील खान. (फाइल फोटो: पीटीआई)

15 दिन में तय करें कि डॉ. कफ़ील को रिहा कर सकते हैं या नहीं: सुप्रीम कोर्ट

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पिछले साल दिसंबर में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 29 जनवरी को डॉ. कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद रिहा करने के बजाय उन पर रासुका लगा दिया गया था.

डॉ. कफील. (फोटो साभार: फेसबुक/drkafeelkhanofficial)

क्या ऑक्सीजन कांड में चुप न रहने की सज़ा काट रहे हैं डॉ. कफील ख़ान

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हुए ऑक्सीजन कांड के तीन बरस पूरे हो गए. लेकिन इस दौरान हादसे में ‘विलेन’ बना दिए गए डॉ. कफील ख़ान के अलावा नौ आरोपियों में से कोई इस प्रकरण पर बोलने के लिए सामने नहीं आया. शायद यही वजह है कि इन तीन बरसों में डॉ. कफील ने अधिकतर समय जेल में बिताया है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली दंगा: एलजी के आदेश पर पैरवी के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता समेत छह वकील नियुक्त

दिल्ली सरकार ने इससे पहले दिल्ली पुलिस द्वारा सुझाए गए वकीलों के नामों को स्वीकार करने से मना कर दिया था. उपराज्यपाल अनिल बैजल ने सरकार के आदेश को ख़ारिज करते हुए पुलिस द्वारा भेजे गए वकीलों के नाम स्वीकार करने को कहा.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: वकीलों की नियुक्ति के संबंध में दिल्ली सरकार ने पुलिस का प्रस्ताव ख़ारिज किया

दिल्ली मंत्रिमंडल की बैठक में वकीलों की नियुक्ति के संबंध में दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव को नामंज़ूर करते हुए कहा कि दंगा मामले में पुलिस की जांच को अदालत ने निष्पक्ष नहीं पाया है, इसलिए पुलिस के पैनल को मंज़ूरी दी गई, तो मामलों की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी.

New Delhi: Security personnel conduct patrolling as they walk past Bhagirathi Vihar area of the riot-affected north east Delhi, Wednesday, Feb. 26, 2020. At least 22 people have lost their lives in the communal violence over the amended citizenship law as police struggled to check the rioters who ran amok on streets, burning and looting shops, pelting stones and thrashing people. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI2_26_2020_000141B)

दिल्ली चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं के भड़काऊ भाषण के बाद दंगे हुए: अल्पसंख्यक आयोग रिपोर्ट

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा के भाषण के बाद दंगे शुरू हुए थे लेकिन अब तक उनके ख़िलाफ़ कोई केस दर्ज नहीं किया गया है.

कपिल मिश्रा. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: दो शिकायतों में कपिल मिश्रा का नाम, अदालत ने पुलिस से जवाब मांगा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली निवासी दो शिकायतकर्ताओं ने कड़कड़डूमा कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है उनके क्षेत्र की शांति एवं सौहार्द भंग करने तथा दंगा कराने में सहयोग करने के लिए भाजपा नेता कपिल मिश्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की जाए.