एनकाउंटर

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अबूझमाड़ में ‘एनकाउंटर’ में मारे गए 10 आदिवासी और कुछ तथ्य

7 फरवरी को अबूझमाड़ के ताड़बल्ला में हुए एक कथित एनकाउंटर को ग्रामीण एक सुनियोजित हमला बता रहे हैं. उन्होंने मारे गए 10 युवाओं के शवों के क्षत-विक्षत होने और मृतक लड़कियों के साथ संभावित यौन शोषण की बात कही है.

एसआरपी कल्लूरी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: एसआरपी कल्लूरी का तबादला, बनाया गया परिवहन आयुक्त

विवादित पुलिस अधिकारी आईजी कल्लूरी को बीते दिनों आर्थिक अपराध विभाग और भ्रष्टाचार विरोधी विभाग की ज़िम्मेदारी देने पर भूपेश बघेल सरकार को ख़ासी आलोचना झेलनी पड़ी थी. 15 सांसदों ने कल्लूरी के ख़िलाफ़ जांच के लिए लिखा था सीएम को पत्र.

एसआरपी कल्लूरी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

छत्तीसगढ़: 15 सांसदों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की आईजी कल्लूरी के ख़िलाफ़ जांच की मांग

केरल, असम, तमिलनाडु और त्रिपुरा के 15 सांसदों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया है कि आईजी कल्लूरी के बीते पांच सालों के कार्यकाल की जांच करवाकर उनके किए ग़लत कामों की सज़ा दी जाए.

New Delhi: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath addresses on the second day of the two-day BJP National Convention, at Ramlila Ground in New Delhi, Saturday, Jan 12, 2019. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI1_12_2019_000162B)

सुप्रीम कोर्ट यूपी में कथित मुठभेड़ के दौरान मारे गए लोगों को लेकर दायर याचिका पर विचार करेगा

सामाजिक संस्था पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ ने जनहित याचिका दायर कर मांग की है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा किए गए एनकाउंटर और उसमें मारे गए लोगों की सीबीआई और एसआईटी द्वारा जांच कराई जानी चाहिए. कोर्ट ने योगी सरकार को नोटिस जारी किया.

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कल तक कांग्रेस जिस कल्लूरी को ‘अपराधी’ बताती थी, वो आज उन्हें महत्वपूर्ण पद से क्यों नवाज़ रही है?

क्या सत्ता के चरित्र में ही कुछ ऐसा है कि वह आपको अधर्म की ओर ले जाती है? वो भूपेश बघेल जो एसआरपी कल्लूरी को जेल भेजना चाहते थे, वही उन्हें अब महत्वपूर्ण पद सौंप रहे हैं. बघेल कह सकते हैं कि तब वे विपक्ष में थे और उसका कर्तव्य निभा रहे थे और अब उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे यह काम करवा रही है.

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मीडिया बोल, एपिसोड 69:  उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर और सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न

मीडिया बोल की 69वीं कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उत्तर प्रदेश में जारी एनकाउंटर और सर्जिकल स्ट्राइक दिवस का जश्न मनाने पर सामाजिक कार्यकर्ता नदीम ख़ान और वरिष्ठ पत्रकार नीना व्यास से चर्चा कर रहे हैं.

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क्या उत्तर प्रदेश में रासुका का इस्तेमाल बतौर सियासी हथियार मुस्लिमों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है?

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के शुरुआती 10 महीने में तकरीबन 160 लोग रासुका के तहत गिरफ़्तार किए गए. इनमें शामिल पीड़ित मुस्लिम परिवारों का कहना है कि सांप्रदायिक कारणों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

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जांच आयोग ने भोपाल जेल से भागे सिमी के आठ सदस्यों के एनकाउंटर को सही ठहराया

प्रतिबंधित संगठन सिमी के आठ विचाराधीन क़ैदी 30 अक्टूबर की रात भोपाल केंद्रीय जेल से एक सुरक्षाकर्मी की हत्या करने के बाद फ़रार हो गए थे. इसके बाद पुलिस ने 31 अक्टूबर की सुबह आठों क़ैदियों को मार गिराया था.

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गढ़चिरौली: गांववालों का आरोप, लापता बच्चों को माओवादी बताने के लिए पुलिस करा रही जबरन दस्तख़त

ग्राउंड रिपोर्ट: गट्टेपल्ली के पास अप्रैल के आखिरी हफ्ते में हुए कथित नक्सल एनकाउंटर के बाद गांव के लापता बच्चों में से एक के पिता ने कहा, ‘पुलिस हमारे बच्चों की हत्याओं को जायज़ ठहराने के लिए हमारा ही इस्तेमाल कर रही है.’

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

क्या गढ़चिरौली ‘एनकाउंटर’ में नक्सलियों के साथ आम लोग भी मारे गए हैं?

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) द्वारा कथित रूप से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि गढ़चिरौली की इंद्रावती नदी में ‘एनकाउंटर’ के बाद मिले 40 शवों में से केवल 22 शव इस समूह के लोगों के हैं.

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गढ़चिरौली से ग्राउंड रिपोर्ट: नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष में गांववाले पिस रहे हैं

गढ़चिरौली में बीते दिनों हुए ‘एनकाउंटर’ में कसनसुर गांव के लोग बच तो गए लेकिन उनके चेहरों पर चिंता साफ़ दिखती है. वे दशकों से जिस भंवरजाल में फंसे हैं, वहां हमेशा एक तरफ पुलिस का ख़तरा बना रहता है तो दूसरी ओर नक्सलियों का.

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40 कथित नक्सलियों का पुलिस ‘एनकाउंटर’ और गांव से ग़ायब बच्चे

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में सी-60 कमांडो और नक्सलियों के बीच कथित मुठभेड़ में 40 लोगों की मौत हो जाने के बाद, एक गांव अपने मृतकों की पहचान करने का इंतज़ार कर रहा है.

एनकाउंटर करने के बाद मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए सुरक्षा बल (फोटो: पीटीआई)

गढ़चिरौली में 40 कथित नक्सलियों के मारे जाने की घटना की जांच का कलेक्टर ने दिया आदेश

प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा बलों ने उनके काडरों को ज़हर देकर मारा है. संगठन ने इसकी न्यायिक जांच की मांग की है.

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उत्तर प्रदेश में ‘एनकाउंटर राज’ पर उठते सवाल

बीते दस महीनों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने औसतन प्रतिदिन 4 एनकाउंटर किए हैं. द वायर ने ऐसे 14 परिवारों से मुलाक़ात की, जिनका कोई सदस्य इस दौरान पुलिस एनकाउंटर में मारा गया.

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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में चल रहा है फ़र्ज़ी आत्मसमर्पण का खेल

2003 में महाराष्ट्र सरकार ने नक्सल-विरोधी अभियान के तहत गांवों को ‘नक्सल-मुक्त’ बनाने के लिए इनाम देना शुरू किया. इस प्रक्रिया में आम गांव वालों को नक्सली बताकर फ़र्ज़ी आत्मसमर्पण करवाया जा रहा है.

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अपराधियों को मारना राम राज्य की शुरुआत: केशव प्रसाद मौर्य

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद बढ़े एनकाउंटरों पर उपमुख्यमंत्री का कहना है कि यूपी अकेला ऐसा राज्य है जहां क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर क़दम उठाए जा रहे हैं.

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कथित नक्सली का एनकाउंटर और न्याय के लिए भटकती आदिवासी महिला का संघर्ष

झारखंड के गिरिडीह ज़िले में पुलिस द्वारा नक्सली बताकर मारे गए मोतीलाल बास्के की पत्नी पार्वती मुर्मू इंसाफ़ के लिए संघर्ष कर रही हैं.

The Union Home Minister, Shri Rajnath Singh paying tributes to the martyred CRPF personnel, in Raipur, Chhattisgarh on April 25, 2017.
The Chief Minister of Chhattisgarh, Dr. Raman Singh and the Minister of State for Home Affairs, Shri Hansraj Gangaram Ahir are also seen.

माओवादियों की 50 साल की हिंसक राजनीति से क्या हासिल हुआ?

बस्तर में चलने वाले नक्सल राज की खूनी कहानी हर गांव में आपको सुनने को मिलेगी. बंदूक और हिंसा की राजनीति का नतीजा यह हुआ है कि शांतिपूर्ण जीवन के आदी आदिवासियों का जीवन बिखर चुका है.

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यूपी पुलिस ने तेलंगाना एटीएस के अधिकारियों को समझा आतंकी, रात भर की धुनाई

तेलंगाना एटीएस के अधिकारी आतंकवादियों को पकड़ने आए थे, लेकिन यूपी पुलिस ने उन्हें ही आतंकी समझ लिया और लॉकअप में बंद करके पिटाई की.

Soni Sori

बस्तर के आईने में भारतीय लोकतंत्र का चेहरा बेहद डरावना नज़र आता है

क्या बस्तर में भी भारतीय संविधान लागू है? क्या माओवाद से लड़ाई के नाम पर ग्रामीणों के फ़र्ज़ी एनकाउंटर, महिलाओं के बलात्कार, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर हमले और जेल आदि सब जायज़ हैं, जबकि माओवाद तो ख़त्म होने की जगह बढ़ रहा है?