ऑक्सीजन की कमी

मथुरा जेल से रिहा होने के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान. (फोटो: पीटीआई)

क्या रिहाई के बाद और बढ़ सकती हैं डॉ. कफ़ील ख़ान की मुश्किलें

बीते साल ऑक्सीजन हादसे की विभागीय जांच में दो आरोपों में मिली क्लीनचिट के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान की बहाली की संभावनाएं बनी थीं, लेकिन सरकार ने नए आरोप जोड़ते हुए दोबारा जांच शुरू कर दी. मथुरा जेल में रिहाई के समय हुई हुज्जत यह इशारा है कि इस बार भी हुकूमत का रुख़ उनकी तरफ नर्म होने वाला नहीं है.

डॉ. कफील खान. (फाइल फोटो: पीटीआई)

15 दिन में तय करें कि डॉ. कफ़ील को रिहा कर सकते हैं या नहीं: सुप्रीम कोर्ट

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पिछले साल दिसंबर में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 29 जनवरी को डॉ. कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद रिहा करने के बजाय उन पर रासुका लगा दिया गया था.

Gorakhpur Oxygen tragedy Jahid Photo Manoj Singh

‘बेटी को खोए हुए तीन साल हो गए लेकिन अब भी अगस्त आते ही डर लगने लगता है’

विशेष: साल 2017 में 10 से 11 अगस्त के बीच गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से क़रीब 34 बच्चों की मौत हुई थी. जान गंवाने वाले बच्चों में शहर के जाहिद की पांच साल की बेटी ख़ुशी भी थी.

डॉ. कफील. (फोटो साभार: फेसबुक/drkafeelkhanofficial)

क्या ऑक्सीजन कांड में चुप न रहने की सज़ा काट रहे हैं डॉ. कफील ख़ान

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हुए ऑक्सीजन कांड के तीन बरस पूरे हो गए. लेकिन इस दौरान हादसे में ‘विलेन’ बना दिए गए डॉ. कफील ख़ान के अलावा नौ आरोपियों में से कोई इस प्रकरण पर बोलने के लिए सामने नहीं आया. शायद यही वजह है कि इन तीन बरसों में डॉ. कफील ने अधिकतर समय जेल में बिताया है.

Gorakhpur Edit

क्या उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पूर्वांचल में बच्चों की मौत पर लगाम लगा पाएगी?

वीडियो: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और उससे लगे ज़िलों में विभिन्न बीमारियों से होने वाली बच्चों की मौत पर वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा की ग्राउंड रिपोर्ट.

Adityanath BRD Medical PTI

गोरखपुर अस्पताल में दो दिन में 30 बच्चों की मौत, योगी बोले- हर ज़िले में बनेगी ‘गौशाला’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, गोसेवा करने वालों के लिए टैक्स में छूट का प्रावधान होगा.

Nashik Civil Hospital Royal Heritage

अगस्त के महीने में महाराष्ट्र के अस्पताल में 55 बच्चों की मौत

अस्पताल ने कहा, इनमें से अधिकतर मौतें शिशुओं को अंतिम स्थिति में लाए जाने के कारण हुईं, उनके बचने की गुंजाइश बहुत कम थी.