कर्नाटक हाईकोर्ट

नई दिल्ली का निज़ामुद्दीन मरकज इलाका. (फोटो: पीटीआई)

तबलीग़ी जमात: अदालत ने विदेशियों को बरी किए जाने के आदेश के ख़िलाफ़ 44 याचिकाएं खारिज़ की

पुलिस ने पुनरीक्षण याचिकाएं दायर कर अनुरोध किया था कि जिन अपराधों में 36 विदेशी नागरिकों को आरोपमुक्त किया गया था, उनमें आरोप तय किए जाएं. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तबलीग़ी जमात के नौ विदेशी सदस्यों के भारत की यात्रा करने पर 10 साल के प्रतिबंध के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को अमान्य कर दिया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

आरोग्य सेतु ऐप न होने पर सुविधाएं देने से इनकार नहीं कर सकतीं सरकारें: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि किसी क़ानून की अनुपस्थिति में न तो राज्य सरकारें, न केंद्र और न ही उनकी एजेंसियां इस आधार पर नागरिकों को लाभ या सुविधाएं देने से इनकार कर सकते हैं कि उनके फोन में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड नहीं है.

कर्नाटक हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

सामाजिक दूरी का उल्लंघन कर रहे राजनीतिक लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई हो: कर्नाटक हाईकोर्ट

कोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोविड-19 नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन कर एक पूर्व मंत्री के परिवार में विवाह समारोह का आयोजन किया गया था.

(प्रतिकात्मक फोटो: पीटीआई)

कर्नाटक: ऑनलाइन क्लास पर बैन के आदेश पर रोक, हाईकोर्ट ने कहा- यह शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन

हाईकोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा जारी आदेश का कोई तार्किक आधार नहीं है. कोर्ट ने ये स्पष्ट किया कि उनके आदेश का ये मतलब नहीं कि स्कूल ऑनलाइन शिक्षा को अनिवार्य बना सकते हैं या फिर इसके लिए अतिरिक्त फीस वसूल सकते हैं.

(फोटो: पीटीआई)

बलात्कार के आरोपी को ज़मानत देते हुए कोर्ट ने कहा, महिला ने ऐसे व्यवहार नहीं किया कि रेप हुआ हो

कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण एस. दीक्षित ने बलात्कार के एक आरोपी की अग्रिम ज़मानत मंज़ूर करते हुए शिकायतकर्ता को लेकर कई ऐसी टिप्पणियां की हैं, जो उनके चरित्र पर सवाल खड़ा करती हैं.

(फोटो: पीटीआई)

आपराधिक मामले के आरोपी विदेशी नागरिकों को ज़मानत बाद डिटेंशन सेंटर में रखें: कर्नाटक हाईकोर्ट

साल 2018 में गिरफ़्तार किए गए एक कथित बांग्लादेशी नागरिक और उनकी बेटी को ज़मानत देते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे नागरिकों के बरी या रिहा होने के बाद भी प्रशासन द्वारा उचित ट्रिब्यूनल के सामने ऐसे लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

कॉलेजियम की सिफारिश के चार साल बाद कर्नाटक के न्यायिक अधिकारी को हाईकोर्ट जज बनाया गया

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने पहली बार अगस्त 2016 में न्यायिक अधिकारी पीके भट्ट के नाम की सिफारिश हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए की थी.

(फोटो साभार: फेसबुक)

रिपब्लिक टीवी पर प्रतिबंध के लिए बॉम्बे और कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर

कांग्रेस नेताओं ने रिपब्लिक टीवी प्रबंधन और इसके संपादक अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख़ किया. वहीं, बेंगलुरु के एक आरटीआई कार्यकर्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की.

(फोटो: पीटीआई)

कोरोना वायरस महामारी के दौरान बेघर हुई महिला को चार लाख रुपये दे परिवार: सुप्रीम कोर्ट

पति की साल 2017 में मौत हो जाने के बाद परिवार से अलग रह रही महिला ने शीर्ष न्यायालय का रुख़कर वित्तीय राहत और संरक्षण का निर्देश देने का अनुरोध किया है.

भारतीय सुप्रीम कोर्ट (फोटो: रायटर्स)

सीएए विरोध: 22 लोगों को जमानत देने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

पिछले साल 19 दिसंबर को सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और पुलिस पर हमले के आरोप में मैंगलोर पुलिस ने 22 लोगों को आरोपी बनाया था. बीते 17 फरवरी को कर्नाटक हाईकोर्ट ने ठोस सबूत नहीं होने की बात कहते हुए सभी 22 लोगों को जमानत दे दी थी.

New Delhi: Protestors hold placards during a  protest march from Mandi House to Jantar Mantar against the amended Citizenship Act, NRC and NPR, in New Delhi, Monday, Feb. 10, 2020. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI2_10_2020_000064B)

सीएए विरोधी शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले राष्ट्रद्रोही और गद्दार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ होने वाले एक प्रदर्शन पर धारा 144 के तहत रोक लगाने वाले आदेश को रद्द करते हुए कहा कि देश को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता विरोध प्रदर्शनों के ज़रिये ही मिली थी.

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्गी वासुदेव. (फोटो साभार: फेसबुक)

कावेरी प्रोजेक्ट के लिए जमा की गई राशि का खुलासा करे ईशा फाउंडेशन: कर्नाटक हाईकोर्ट

जग्गी वासुदेव की अध्यक्षता वाले ईशा फाउंडेशन को फटकार लगाते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा, इस धारणा में मत रहिए कि चूंकि आप एक आध्यात्मिक संस्था हैं तो आप कानून से बंधे नहीं हैं.