कश्मीरी पंडित

श्रीनगर महापौर स​मेत 60 पार्षद भूख हड़ताल पर बैठे, सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी को हटाने की मांग

श्रीनगर नगर निगम के महापौर समेत निर्वाचित सदस्यों ने आरोप लगाया है कि संयुक्त आयुक्त (योजना) गुलाम हसन मीर वास्तविक ग़रीब आवेदकों को छोड़कर सिर्फ़ अमीरों को ही भवन निर्माण की अनुमति दे रहे हैं. उन्होंने मांग की कि मीर ‘भ्रष्ट और अक्षम’ हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए. इन लोगों ने गुजरात कैडर के निगम आयुक्त आमिर अथर ख़ान के ख़िलाफ़ भी नारेबाज़ी की और कहा कि वे वापस अपने राज्य चले जाएं.

कश्मीरी पंडितों ने 31वें ‘विस्थापन दिवस’ पर जम्मू में प्रदर्शन किया

विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने घाटी में वापसी, पुनर्वास और घाटी में बसने के लिए एक स्थान देने की अपनी मांगों के समर्थन में जम्मू स्थित संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. उन्होंने मांग की कि 1990 में उन लोगों को घाटी से बाहर करने के पीछे ज़िम्मेदार लोगों को दंडित करने के लिए एक ‘नरसंहार आयोग’ का गठन किया जाए.

श्रीनगर: घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर क्यों हैं

1990 के बाद घाटी से बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित पलायन कर गए थे, लेकिन कुछ परिवार यहीं रह गए. केंद्र सरकार द्वारा ऐसे आठ सौ से अधिक कश्मीरी पंडित परिवारों में किसी एक को नौकरी देने का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ.

जम्मू कश्मीर: फारूक अब्दुल्ला ने की कश्मीरी पंडितों के पलायन की जांच कराने की मांग

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उनका मानना है कि कश्मीरी पंडितों के बिना कश्मीर अपूर्ण है और वे उन्हें ससम्मान वापस लाने की किसी भी प्रक्रिया का समर्थन करेंगे.

‘कश्मीरी पंडितों का क्या… सही सवाल पूछें, खिलवाड़ न करें…’

वीडियो: ‘कश्मीर पंडितों का क्या?’ यह एक ऐसा सवाल है जो कई सालों से राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इस सवाल ने सिर्फ़ कश्मीरी पंडितों के ज़ख़्म हरे किए और मुसलमानों की ख़राब छवि को पेश किया. इस मुद्दे पर शिक्षक अनमोल टिक्कू से सृष्टि श्रीवास्तव की बातचीत.

भारतीय राजनयिक के इज़राइल की तरह कश्मीरी पंडितों को घाटी में बसाने वाले बयान पर विवाद

अमेरिका में भारत के शीर्ष राजयनिक संदीप चक्रवर्ती ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कश्मीरी पंडित जल्द ही घाटी लौट सकते हैं, क्योंकि अगर इज़राइली लोग यह कर सकते हैं तो हम भी यह कर सकते हैं.

जम्मू कश्मीर में 50,000 जर्जर मंदिरों का जीर्णोद्धार कर दोबारा खोला जाएगा: केंद्रीय गृहराज्य मंत्री

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि सरकार ऐसे स्कूल, सिनेमाघरों, मंदिरों और अन्य बंद पड़ी जगहों का एक सर्वे करवाएगी, जो फिलहाल बंद पड़े हुए हैं. उन्हें दोबारा खोलने के बारे में सोचा जा रहा है.

मध्य प्रदेश: अनुच्छेद 370 हटाने पर लिखी किताब बेचने वाले माकपा नेता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

यह मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर का है. माकपा नेता शेख अब्दुल गनी ‘धारा 370- सेतु या सुरंग’ नाम की किताब को बेच रहे थे, जिसके लेखक मध्य प्रदेश की माकपा इकाई के प्रमुख जसविंदर सिंह हैं.

मतदान के लिए प्रोत्साहित करने वाले कश्मीरी वकील विरोध प्रदर्शन के डर से हिरासत में

कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष नजीर अहमद रोंगा को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म करने से एक दिन पहले 4 अगस्त को पीएसए के तहत गिरफ़्तार किया गया था. आरोप है कि वे इस निर्णय को लेकर लोगों को प्रभावित कर सकते थे.

अनुच्छेद 370: सरकार ने कश्मीरियों के घाव पर मरहम की जगह नमक रगड़ दिया है

श्रीनगर से ग्राउंड रिपोर्ट: मुख्यधारा के मीडिया में आ रही कश्मीर की ख़बरों में से 90 प्रतिशत झूठी हैं. कश्मीर के हालात मामूली प्रदर्शनों तक सीमित नहीं हैं और न ही यहां कोई सड़कों पर साथ मिलकर बिरयानी खा रहा है.

चित्रकथा: जम्मू कश्मीर में बीते तीन हफ़्तों का सूरत-ए-हाल बयां करतीं तस्वीरें

बीते पांच अगस्त को केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के निर्णय लिया गया था.

जम्मू कश्मीर: यह ख़ामोशी ही इस वक़्त की सबसे ऊंची आवाज़ है

सूचना के इस युग में किसी सरकार का इतनी आसानी से एक पूरी आबादी को बाकी दुनिया से काट देना दिखाता है कि हम किस ओर बढ़ रहे हैं.

जम्मू कश्मीर: मोदी-शाह ने अनुच्छेद 370 से लेकर अनुच्छेद 3 तक संविधान का गला घोंट दिया है

मोदी सरकार के इस कदम ने सात दशकों की आधिकारिक नीति को ख़त्म करते हुए देश को अनजान क़ानूनी और राजनीतिक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है.

जम्मू कश्मीर से बाहर रह रहे छात्रों और लोगों ने कहा, अनुच्छेद 370 ख़त्म करना तानाशाही

कश्मीर घाटी में रह रहे अपने परिवार से बात न होने पाने की वजह से लोग चिंतित. लोगों का कहना है कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने ऐसा फैसला किया है जिससे शांति स्थापित होने की जगह आक्रोश और भड़केगा.

कश्मीरी पंडितों ने कहा: अब हम अपने मूल स्थान पर वापसी कर सकेंगे

देशभर के कश्मीरी पंडितों ने उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में शांति का माहौल स्थापित होगा और मूल स्थान पर सम्मान एवं गरिमा के साथ उनकी वापसी का मार्ग प्रशस्त होगा.