कांग्रेस नेताओं का पत्र

शनिवार को जम्मू कश्मीर में कांग्रेस के असंतुष्ट धड़े जी-23 के नेता राज बब्बर, गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल और भूपिंदर सिंह हुड्डा. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस ‘कमज़ोर’ हो रही, लेकिन ग़ुलाम नबी आज़ाद के अनुभव का उपयोग नहीं हो रहा: कपिल सिब्बल

कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक फेरबदल की मांग करने वाले ग़ुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ नेता जम्मू कश्मीर में एक मंच पर एकत्र हुए. उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस पार्टी को मज़बूत करने के लिए साथ आए हैं. हालांकि, पार्टी ने इन नेताओं को चुनावी राज्यों में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने और वहां प्रचार करने की सलाह दी है.

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

सोनिया गांधी ने पत्र लिखने वाले 23 नेताओं के साथ की बैठक, राहुल की वापसी के संकेत नहीं

कांग्रेस का पूर्ण अध्यक्ष चुनने के लिए चुनाव से पहले अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की. बीते अगस्त माह में लिखे गए इस पत्र में पूर्णकालिक एवं ज़मीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग की गई थी.

New Delhi: Senior Congress leader Ghulam Nabi Azad speaks during a news conference in which MLA's of various local parties in Haryana who joined Congress, in New Delhi, Sunday, Sept. 15, 2019. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI9_15_2019_000167B)

कांग्रेस नेता आम लोगों से पूरी तरह कटे हुए हैं, पार्टी में ‘फाइव-स्टार कल्चर’: ग़ुलाम नबी आज़ाद

बिहार चुनाव में कांग्रेस को मिली हार पर कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम के सवाल उठाने बाद कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि वे एक सुधारवादी के रूप में मुद्दे उठा रहे हैं, न कि विद्रोही के रूप में. इसके जवाब में सलमान खुर्शीद ने कहा कि यदि मतदाता उन उदारवादी मूल्‍यों को अहमियत नहीं दे रहे, जिनका हम संरक्षण कर रहे हैं तो लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए.

New Delhi: Senior Congress leader P Chidambaram, with his son Karti Chidambaram, leaves after meeting party President Sonia Gandhi at her residence at 10 Janpath in New Delhi, Wednesday night, Dec. 4, 2019. Chidambaram was released from Tihar jail after the Supreme Court on Wednesday granted bail to him in the INX Media money laundering case. (PTI Photo/Arun Sharma) (PTI12_4_2019_000256B)

कपिल सिब्बल के बाद कांग्रेस नेता चिदंबरम ने बिहार चुनाव में पार्टी की हार पर सवाल उठाए

बिहार विधानसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस के ख़राब प्रदर्शन के बाद कपिल सिब्बल ने कहा था कि ऐसा लग रहा है कि अब लोग कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मान रहे हैं. इस पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पार्टी के कामकाज से जो नाखुश हैं, वे सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी करने के बजाय कहीं भी जाने को स्वतंत्र हैं.

कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, विवेक तन्खा, कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद. (फोटो: पीटीआई)

मीडिया में कांग्रेस के ख़िलाफ़ बोलने पर कई पार्टी नेताओं ने कपिल सिब्बल की आलोचना की

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने एक साक्षात्कार में कहा था कि ऐसा लग रहा है कि अब लोग कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मान रहे हैं. सिब्बल का यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आया है. इस चुनाव में महागठबंधन की घटक कांग्रेस सिर्फ़ 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि उसने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था.

(फोटोः पीटीआई)

कांग्रेस बदलावों को लेकर गंभीर नहीं, पार्टी के लिए हर हार सामान्यः कपिल सिब्बल

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने एक साक्षात्कार में कहा कि ऐसा लग रहा है कि अब लोग कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मान रहे हैं. सिब्बल कांग्रेस के उन 23 नेताओं में से एक हैं ,जिन्होंने अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में बदलाव लाने, जवाबदेही तय करने और हार का उचित आकलन करने की मांग की थी.

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस में व्यापक बदलाव, ग़ुलाम नबी आज़ाद और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पांच महासचिव हटाए गए

कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के लिए पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में से कई लोगों का क़द छोटा कर दिया गया. पत्र लिखने वाले नेताओं मनीष तिवारी और शशि थरूर को भी फ़िलहाल कोई नई ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है. प्रियंका गांधी को अब पूरे उत्तर प्रदेश के प्रभारी का ज़िम्मा आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया है.

प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

यूपी कांग्रेस के निष्कासित नेताओं ने सोनिया गांधी को लिखा- परिवार के मोह से निकलकर संगठन चलाएं

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के निष्काषित नेताओं के पत्र लिखने वाले दिन ही पार्टी ने प्रदेश के लिए सात महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया है. इनमें उन नेताओं को जगह नहीं मिली है, जो कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल थे.

New Delhi: In this May 30, 2012 file photo, senior Congress leader Kapil Sibal in New Delhi. Sibal rebutted after Rahul Gandhi charged that the letter seeking leadership changes was written in cahoots with the BJP, during a CWC meeting, Monday, Aug. 24, 2020. (PTI Photo/Kamal Singh)

हमारे पत्र की किसी मांग पर चर्चा न हुई, हम पर हमला हुआ तो कोई साथ न आया: कपिल सिब्बल

पार्टी में व्यापक बदलाव लाने की मांग करते हुए सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल कपिल सिब्बल ने कहा है कांग्रेस ने हमेशा भाजपा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने संविधान का उल्लंघन किया है और लोकतंत्र की जड़ों को तबाह किया है. हम यही चाहते हैं कि हमारी पार्टी के संविधान का पालन किया जाए.

कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद. (फोटो साभार: फेसबुक/@/jitinprasada1)

नेतृत्व परिवर्तन की मंशा से नहीं लिखा पत्र, ग़लत अर्थ निकाला गया: जितिन प्रसाद

कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इसे लिखने का मक़सद नेतृत्व को कमतर दिखाना नहीं था. इसे बस यह सुझाव देने के इरादे से लिखा गया था कि कैसे पार्टी को फिर से खड़ा किया जाए और मज़बूती दी जाए.

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, जितिन प्रसाद और गुलाम नबी आजाद. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक)

कांग्रेस अगले 50 साल तक विपक्ष में रहना चाहती है तो पार्टी के भीतर चुनाव की ज़रूरत नहीं: आज़ाद

कांग्रेस में व्यापक बदलाव और पूर्णकालिक पार्टी अध्यक्ष चुनने की मांग को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखने वालों में से एक जितिन प्रसाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर लखीमपुर खीरी ज़िला इकाई ने प्रस्ताव पारित किया है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा है कि कांग्रेस को अपने लोगों पर नहीं, बल्कि भाजपा पर सर्जिकल स्ट्राइक करने की ज़रूरत है.

सोनिया गांधी और राहुल गांधी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

क्या कांग्रेस में वे बदलाव मुमकिन हैं, जिनकी मांग पार्टी के 23 नेताओं ने की है

कांग्रेस में आमूलचूल परिवर्तन की मांग के लिए पार्टी के 23 नेताओं ने पत्र लिखा, जिसके बाद कार्य समिति की बैठक में अगले छह महीने में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव करने की बात कही गई. जानकारों का कहना है कि पार्टी ने घिसा-पिटा रवैया अपनाया. उनके पास बदलाव लाने का एक बेहतरीन मौक़ा था, जिसे उन्होंने फिर गंवा दिया.

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कांग्रेस को टूटने से कौन बचाएगा?

वीडियो: बीते दिनों कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग की थी. इसके बाद कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी और अगले छह महीने में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा. इस मुद्दे पर राजनीतिक विश्लेषक प्रो. नीरा चंढोक से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

**EDS: FILE** New Delhi: In this file photo dated Saturday, Aug 10, 2019, Congress President Rahul Gandhi with senior party leader Sonia Gandhi during Congress Working Committee (CWC) meeting, at AICC HQ in New Delhi. Ahead of the Congress Working Committee meeting on Monday, Aug. 24, 2020, different voices have emerged within the party with one section comprising sitting MPs and former ministers demanding collective leadership, while another group has sought the return of Rahul Gandhi to the helm. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI23-08-2020_000092B)

अगला अध्यक्ष चुने जाने तक सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में फैसला लिया गया कि सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी और अगले छह महीने में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा. पार्टी में उस वक्त सियासी तूफान आ गया था, जब पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई थी.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी. (फाइल फोटो साभार: ट्विटर/@INCIndia)

कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा, पार्टी में व्यापक परिवर्तन की मांग की

गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, शशि थरूर समेत कई पूर्व मुख्यमंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेशाध्यक्षों द्वारा लिखे पत्र में पार्टी में व्यापक सुधार लाने, सत्ता का विकेंद्रीकरण करने, राज्य इकाइयों को सशक्त करने और एक केंद्रीय संसदीय बोर्ड के तत्काल गठन की मांग की गई है.