कार्यपालिका

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दागी उम्मीदवारों की जानकारी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर डालें राजनीतिक दल: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार के चयन के 48 घंटे के भीतर या नामांकन के दो हफ्ते के अंदर, जो भी पहले हो, ये जानकारी प्रकाशित कर दी जानी चाहिए.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए एक सप्ताह के भीतर रूपरेखा पेश करे चुनाव आयोग: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह निर्देश तब दिया जब शुक्रवार को चुनाव आयोग ने कहा कि उम्मीदवारों से उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि की मीडिया में घोषणा करने के बारे में कहने के बजाए राजनीतिक दलों से कहा जाना चाहिए कि वे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट ही न दें.

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देश की अदालतों में दो लाख से अधिक मामले 25 साल से लंबित: सीजेआई रंजन गोगोई

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने एक कार्यक्रम में कहा कि बड़ी संख्या में मामलों के लंबित होने को लेकर न्यायपालिका की आलोचना होती है, लेकिन देरी के लिए केवल न्यायपालिका ही नहीं, बल्कि न्याय प्रदान करने वाली व्यवस्था में कार्यपालिका की भी कुछ ज़िम्मेदारी बनती है.

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील कुमार अरोड़ा (बीच में) चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (बाएं) और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा. (फोटो: पीटीआई)

लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा नुकसान चुनाव आयोग की साख को हुआ है

इस लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग में मतदाताओं का भरोसा कम हुआ है. ऐसा होना किसी लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है.

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अपने उम्मीदवारों से जुड़ी आपराधिक जानकारी वेबसाइट पर डालें राजनीतिक दल: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों से जुड़े उम्मीदवारों की जानकारी का प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से गहन प्रचार किया जाना चाहिए.

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आपराधिक मामलों के आरोप पर उम्मीदवार को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

कोर्ट ने चुनाव लड़ने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार को अपना आपराधिक रिकॉर्ड निर्वाचन आयोग के सामने घोषित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने ये भी कहा है कि राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के संबंध में सभी जानकारी अपनी वेबसाइटों पर डालेंगे.

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मतदाताओं को उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि जानने का अधिकार है: सुप्रीम कोर्ट

गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों को चुनावी राजनीति में आने की इजाजत नहीं देने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर कोर्ट सुनवाई कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

चुनाव आयोग राजनीतिक दलों से पूछ सकता है कि पार्टी में कितने ‘कथित बदमाश’ हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों को चुनावी राजनीति में आने की इजाजत नहीं देने की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

(फोटो: रॉयटर्स)

न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ख़तरा महाभियोग से नहीं, सत्तापक्ष के दख़ल से है

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ महाभियोग लाया गया तो ऐसा माहौल बना जैसे ऐसा करने से जनता का न्याय से विश्वास उठ जाएगा और लोकतंत्र ख़तरे में पड़ जाएगा.

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कभी भाजपा की नज़र में लोकतंत्र बचाने वाले आज उसकी आंख की किरकिरी क्यों बन गए हैं?

आज जिन लोगों को अरुण जेटली ‘संस्थानिक बाधा’ बता रहे हैं, उन्हें यूपीए-2 के शासनकाल के समय भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने पर भाजपा ने सिर-आंखों पर बिठाया था.

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कार्यपालिका हमें ‘बेवक़ूफ़’ बना रही है: उच्चतम न्यायालय

पर्यावरण और जनता के लाभ लिए जमा क़रीब एक लाख करोड़ रुपये की राशि किसी और मद में ख़र्च होने ने नाराज़ न्यायालय ने कहा कि यह धन जनता की भलाई के लिए है, सरकार की भलाई के लिए नहीं.

पिछले दिनों चार वरिष्ठ जजों ने सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक से न चलने को लेकर देश के इतिहास में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

क्या आम आदमी की आख़िरी उम्मीद न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार के ​कीटाणु प्रवेश कर चुके हैं?

ऐसा नहीं है कि न्यायपालिका में जारी गड़बड़ियों से आम आदमी बेख़बर हो, लेकिन न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार आमतौर पर अवमानना के डर से कभी भी सार्वजनिक बहस का मुद्दा नहीं बन सका.

(L-R) Justices Kurian Joseph, Jasti Chelameswar, Ranjan Gogoi and Madan Lokur address the media at a news conference in New Delhi, India January 12, 2018. PTI

बार काउंसिल ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में संकट नहीं, जबकि अटॉर्नी जनरल को संकट जल्द सुलझने उम्मीद

सूत्रों ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों से की भेंट. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी मामले के एक हफ़्ते में सुलझने की उम्मीद जताई.

(फोटो: रॉयटर्स)​​​

न्यायपालिका में दख़लअंदाज़ी के लिए बार काउंसिल ने दलों और नेताओं को चेताया

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत की पूर्ण पीठ को तत्काल विचार करना चाहिए.