किसान

Narendra Modi Reuters featured

विपक्ष को मोदी के उग्र एजेंडा के जाल से बचना होगा

भाजपा ने आम चुनाव में राष्ट्रवाद और पाकिस्तान से ख़तरे को मुद्दा बनाने का मंच सजा दिया है. वो चाहती है कि विपक्ष उनके उग्रता के जाल में फंसे, क्योंकि विपक्षी दल उसकी उग्रता को मात नहीं दे सकते. विपक्ष को यह समझना होगा कि जनता में रोजगार, कृषि संकट, दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार जैसे मुद्दों को लेकर काफी बेचैनी है और वे इनका हल चाहते हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi celebrating the Diwali with the jawans of  the Indian Army and BSF, in the Gurez Valley, near the Line of Control, in Jammu and Kashmir, on October 19, 2017.

किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे

ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ कृषि आय घटी है बल्कि इससे जुड़े काम करने वालों की मज़दूरी भी घटी है. प्रधानमंत्री मोदी कृषि आय और मज़दूरी घटने को जोशीले नारों से ढंकने की कोशिश में हैं.

New Delhi: Kerala CM Pinarayi Vijayan during a press conference in New Delhi on Saturday,June 23,2018.( PTI Photo/ Atul Yadav)(PTI6_23_2018_000063B)

नौ मौतों के बाद केरल में किसानों की क़र्ज़ अदायगी पर 31 दिसंबर तक रोक लगी

पिछले साल अगस्त में केरल में आई बाढ़ के दौरान इडुकी और त्रिशूर ज़िले सबसे अधिक प्रभावित हुए थे. पिछले दो माह में इडुकी ज़िले में आठ जबकि त्रिशूर जिले में एक किसान ने आत्महत्या कर ली.

(फोटो: रॉयटर्स)

आंकड़े बताते हैं कि खेती में आमदनी दोगुनी करने का नारा जुमला ही रहने वाला है

2015-16 से तीन साल तक 10.4 प्रतिशत की दर से प्रगति करने पर ही हम कृषि क्षेत्र में दोगुनी आमदनी के लक्ष्य को पा सकते थे. इस वक़्त यह 2.9 प्रतिशत है. मतलब साफ है लक्ष्य तो छोड़िए, लक्षण भी नज़र नहीं आ रहे हैं. अब भी अगर इसे हासिल करना होगा तो बाकी के चार साल में 15 प्रतिशत की विकास दर हासिल करनी होगी जो कि मौजूदा लक्षण के हिसाब से असंभव है.

Modi Ambani Rahul Gandhi PTI Reuters Twitter

क्यों देश की राजनीतिक और आर्थिक ताक़त कुछ परिवारों तक सिमटकर रह गई है

क्या अगले आम चुनाव में मोदी सरकार या महागठबंधन में से कोई नेता या दल अपने चुनावी घोषणा-पत्र में यह वादा कर सकता है कि वो देश की आम जनता को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधा देने की संवैधानिक जवाबदारी निभाने के लिए 2019 से देश के अरबपतियों और अमीरों पर उचित टैक्स लगाने का काम करेगा?

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

राजस्थान: बैंगन की फसल बर्बाद होने पर किसान ने की आत्महत्या

राजसमंद जिले के कांकरोली पीपली आचार्यान गांव में एक किसान लेहरुलाल कीर ने कथित रूप से फसल बर्बाद होने पर आत्महत्या कर ली. परिजनों ने बताया कि बैंक से ऋण न मिलने पर मजबूरन साहूकार से कर्ज लेना पड़ा था, इसलिए सरकार की कर्ज माफी से हमें कोई फायदा नहीं.

बारिश नहीं होने से पुनीत साहनी की धान की फसल ख़राब हो गई. उन्होंने पता नहीं है कि सरकार फसल ख़राब होने पर सब्सिडी भी दे रही है. (फोटो: उमेश कुमार राय/द वायर)

बिहार के सूखाग्रस्त किसानों को कितनी राहत देगी सरकार की सब्सिडी?

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के सूखाग्रस्त किसानों के लिए सरकार ने सब्सिडी देने की घोषणा की है, लेकिन इसके लिए ऑनलाइन आवेदन ही किया जा सकता है. वहीं अधिकांश किसानों को पता ही नहीं ऐसी कोई योजना चलाई जा रही है.

एक चुनावी सभा के दौरान जनता से मिलते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (फोटो साभार: ट्विटर/@BhupeshBaghel9)

छत्तीसगढ़: टाटा संयंत्र के लिए अधिग्रहित की गई आदिवासियों की ज़मीन वापस होगी

बस्तर ज़िले के लोहांडीगुड़ा में टाटा के इस्पात संयंत्र के लिए साल 2008 में अधिग्रहित की गई थी आदिवासी किसानों की ज़मीन. कांग्रेस ने घोषणापत्र में किया था ज़मीन वापस दिलाने का वादा.

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किसान क़र्ज़ माफ़ी के ख़िलाफ़ शोर कॉर्पोरेट जगत के इशारे पर हो रहा है: कृषि विशेषज्ञ

कृषि मामलों के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि किसान क़र्ज़ माफ़ी के हकदार हैं. इससे निश्चित तौर पर किसानों को राहत मिली है लेकिन यह थोड़ी ही है, किसानों के लिए देश में बहुत कुछ और करने की आवश्यकता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली (फोटो: पीटीआई)

किसानों की क़र्ज़ माफ़ी पर हंगामा, बैंकों को एक लाख करोड़ देने पर चुप्पी

सरकार सरकारी बैंकों में एक लाख करोड़ रुपये क्यों डाल रही है? किसान का लोन माफ़ करने पर कहा जाता है कि फिर कोई लोन नहीं चुकाएगा. यही बात उद्योगपतियों के लिए क्यों नहीं कही जाती?

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

नासिक: क़र्ज़ के कारण लगाई फांसी, आत्महत्या करने वाले किसानों का आंकड़ा 108 पर पहुंचा

महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के एक 28 वर्षीय किसान नीलेश धर्मराज हयालिज ने मौजे-वजीरखेड़े गांव में फांसी लगा ली. उनके ऊपर चार लाख रुपये का क़र्ज़ बकाया था.

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‘शिवराज सरकार उन पुलिसवालों को बचा रही है, जिनकी गोली से किसानों की जान गई’

साक्षात्कार: मध्य प्रदेश में किसानों की बदहाली किसी से छिपी नहीं. बीते साल हुआ मंदसौर गोलीकांड इसका गवाह है. राज्य में किसान आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, बावजूद इसके प्रदेश में किसानों के मुद्दों पर राजनीतिक दलों ने कोई ख़ास बात नहीं की. किसानों और कृषि के मुद्दों पर राज्य में लंबे समय से काम कर रहे किसान नेता और राष्ट्रीय किसान मज़दूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा (कक्का जी) से दीपक गोस्वामी की बातचीत.

बूंदी ज़िले के नैनवां कस्बे में यूरिया के लिए उमड़े किसानों को नियंत्रित करता पुलिसकर्मी. (फोटो: अवधेश आकोदिया/द वायर)

राजस्थान: उपज का कम दाम मिलने से परेशान हाड़ौती के किसानों के सामने खाद का संकट

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के कोटा, बूंदी, बारां व झालावाड़ ज़िले के किसानों को दिनभर कतार में लगने के बाद मुश्किल से एक कट्टा खाद नसीब हो रहा है. कई जगह तो किसानों का जमावड़ा इतना ज़्यादा है कि पुलिस के पहरे में खाद बांटना पड़ रहा है.

Mumbai: A large number of farmers and tribals take part in a protest rally to push for the their long pending demands including better price for their produce, total waiver of agricultural loans and transfer of forest rights to tribals, in Mumbai, Thursday, November 22, 2018, (PTI Photo/Shashank Parade) (PTI11_22_2018_000052)

भूमि अधिकार, क़र्ज़ माफ़ी और सूखा राहत की मांग लेकर ठाणे से मुंबई पहुंचे किसान

विभिन्न मांगों को लेकर लगभग 20,000 किसान ठाणे से मुंबई पदयात्रा कर पहुंचे हैं. ये किसान विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेंगे.

पी. साईनाथ और नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक)

राफेल से भी बड़ा घोटाला है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: पी. साईनाथ

वरिष्ठ पत्रकार और किसान कार्यकर्ता साईनाथ ने दावा किया कि महाराष्ट्र के एक ज़िले में फसल बीमा योजना के तह​त कुल 173 करोड़ रुपये रिलायंस इंश्योरेंस को दिए गए. फसल बर्बाद होने पर रिलायंस ने किसानों को सिर्फ़ 30 करोड़ रुपये का भुगतान किया और बिना एक पैसा लगाए 143 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा कमा लिया.

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न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि यूपीए सरकार के मुकाबले काफ़ी कम: आरबीआई

रिज़र्व बैंक ने कहा कि 2008-09 और 2012-13 में यूपीए सरकार द्वारा की गई एमएसपी में वृद्धि मौजूदा दाम के मुकाबले ज़्यादा थी.

Bhiwani

हरियाणा में चेक बाउंस होने के बाद जेल भेजे गए क़र्ज़ में डूबे किसान की मौत

भिवानी के किसान ने साढ़े नौ लाख का क़र्ज़ लिया था. चेक बाउंस होने के बाद दो साल की सज़ा मिली थी. उपायुक्त ने कहा कि ज़िला प्रशासन मृतक किसान का क़र्ज़ माफ़ करने के लिए राज्य सरकार को सिफ़ारिश भेजेगा.

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जन गण मन की बात, एपिसोड 311: क़र्ज़ माफ़ी पर सरकार का दोहरा रवैया

जन गण मन की बात की 311वीं कड़ी में विनोद दुआ कॉरपोरेट लोन डिफॉल्टरों और किसानों की क़र्ज़ माफ़ी पर सरकार के रवैये पर चर्चा कर रहे हैं.

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रुपया 73 पर, बेरोज़गारी आसमान पर और प्रधानमंत्री इवेंट पर

अनिल अंबानी समूह पर 45,000 करोड़ रुपये का कर्जा है. अगर आप किसान होते और पांच लाख का कर्जा होता तो सिस्टम आपको फांसी का फंदा पकड़ा देता. अनिल अंबानी राष्ट्रीय धरोहर हैं. ये लोग हमारी जीडीपी के ध्वजवाहक हैं. भारत की उद्यमिता की प्राणवायु हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at Kisan Kalyan Mela, in Sehore, Madhya Pradesh on February 18, 2016.

मोदी सरकार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी पर सच क्यों नहीं बोल रही है?

केंद्र की मोदी सरकार धान का एमएसपी 200 रुपये बढ़ाकर ऐतिहासिक मूल्य वृद्धि का दावा कर रही है लेकिन सच्चाई ये है कि ये मूल्य स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिश के मुक़ाबले 590 रुपये कम है.

Media Bol Ep 66 (1)

मीडिया बोल, एपिसोड 66: सवर्ण भारत बंद, किसान-मज़दूर रैली और समलैंगिक आज़ादी का उल्लास

मीडिया बोल की 66वीं कड़ी में उर्मिलेश एससी-एसटी एक्ट को लेकर सवर्णों द्वारा किए गए भारत बंद, दिल्ली में किसान और मज़दूर संगठनों की रैली और समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर लाने पर वरिष्ठ पत्रकार शैलेष और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतन लाल से चर्चा कर रहे हैं.

New Delhi: Workers and farmers of various unions raise slogans during 'Mazdoor Kisan Sangharsh Rally' at Parliament Street, in New Delhi on Wednesday, Sept 5, 2018. (PTI Photo/Arun Sharma) (PTI9_5_2018_000034B)

‘सरकार भाषण में तो किसान का नाम लेती है लेकिन ज़मीन पर हिंदू-मुसलमान करती है’

देशभर से आए हज़ारों की संख्या में किसानों और मज़दूरों ने दिल्ली के संसद मार्ग पर केंद्र की मोदी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को रखा.

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हमें राजनीतिक आज़ादी तो मिल गई, लेकिन सामाजिक और आर्थिक आज़ादी कब मिलेगी?

आज़ादी के 71 साल: सरकार यह महसूस नहीं करती है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सुरक्षा पर किया गया सरकारी ख़र्च वास्तव में बट्टे-खाते का ख़र्च नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए किया गया निवेश है.

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महाराष्ट्र: किसानों ने ऋण नहीं लिया, फिर भी बैंक ने क़र्ज़ वसूली का नोटिस दिया

नागपुर ज़िले की नरखेड तहसील के 11 किसानों ने पुलिस में शिकायत की है कि उनमें से हरेक को 40 से 50 लाख रुपये ऋण नहीं चुकाने का एक सरकारी बैंक ने नोटिस दिया है जबकि उन्होंने कोई ऋण नहीं लिया है.

Farmers India Reuters

गलत पूर्वानुमान के लिए मराठवाड़ा के किसानों ने मौसम विभाग के ख़िलाफ़ पुलिस में की शिकायत

किसानों का आरोप है कि पुणे और मुंबई में मौसम विभाग के अधिकारियों ने बीज और कीटनाशक विनिर्माता कंपनियों के साथ गठजोड़ कर किसानों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है क्योंकि किसान भविष्यवाणियों के आधार पर ही बुआई करते हैं.

Mumbai: Farmers of All Indian Kisan Sabha (AIKS) march from Nashik to Mumbai to gherao Vidhan Bhawan on March 12, demanding a loan waiver, in Mumbai on Sunday. PTI Photo by Mitesh Bhuvad (PTI3_11_2018_000152B)

कृषि संकट पर अखिल भारतीय किसान सभा का जेल भरो आंदोलन, एमएस स्वामीनाथन ने किया समर्थन

कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा कि किसानों के लिए सी2+50 प्रतिशत पर आधारित एमएसपी और एक अनुकूल खरीद नीति होनी चाहिए.

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राजस्थान: आत्महत्या के बाद वसुंधरा सरकार ने किया किसान का क़र्ज़ माफ़

नागौर जिले के मंगल चंद ने पंजाब नेशनल बैंक से 2.98 लाख रुपये का क़र्ज़ लिया था. 1.75 लाख रुपये जमा करवाने के बावजूद बैंक 4.59 लाख रुपये मांग रहा था. ज़मीन की नीलामी का आदेश निकलने से तनाव में आए मंगल ने फांसी लगाकर जान दे दी.

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प्रेमचंद का ‘सूरदास’ आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है

1925 में आए प्रेमचंद के उपन्यास रंगभूमि में किसान सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ़ खड़े हो जाते हैं. जो बात रंगभूमि में सूरदास ने कहने की कोशिश की थी, वही आज जब कोई किसान कह रहा है तो उसे निशाना साधकर गोली मारी जा रही है.

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प्रेमचंद को क्यों पढ़ें

प्रेमचंद की प्रासंगिकता का सवाल बेमानी जान पड़ता है, लेकिन हर दौर में उठता रहा है. अक्सर कहा जाता है कि अब भी भारत में किसान मर रहे हैं, शोषण है, इसलिए प्रेमचंद प्रासंगिक हैं. प्रेमचंद शायद ऐसी प्रासंगिकता अपनी मृत्यु के 80 साल बाद न चाहते.

श्यामसुंदर प्रसाद चौरसिया ने 4 कट्ठे में पान की खेती की थी. शीतलहर ने पान बर्बाद कर दिया. उन्हें अब तक मुआवज़ा नहीं मिला है. (फोटो: उमेश कुमार राय/द वायर)

बिहार के पान उगाने वाले किसानों को नीतीश सरकार से कोई उम्मीद क्यों नहीं है

ग्राउंड रिपोर्ट: इस साल जनवरी में मगही पान की खेती करने वाले किसानों की फसल सर्दी की वजह से बर्बाद हो गई. सरकार की ओर से मुआवज़े का आश्वासन मिलने के बाद भी इन्हें कोई मदद नहीं मिल सकी है.

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दिल्ली में हरे पेड़ों की कटाई का हल नए पौधे लगाना नहीं है

हरे पेड़ों को काटने के एवज में नए पेड़ लगाना ऐसी एजेंसियों का पसंदीदा हथियार है, जो समाज और पर्यावरण को बड़े पैमाने पर नुकसान की कीमत पर भी विकास को बढ़ावा देना चाहती हैं. उनका मानना है कि पारिस्थितिकी बदलना शहरी विकास के वर्तमान तरीकों को बदलने से ज़्यादा आसान है.

Jaipur: A farmer harvests wheat crop at a field in Chandlai village of Jaipur on Friday. PTI Photo(PTI3_23_2018_000200B)

न्यूनतम समर्थन मूल्य: मोदी सरकार का ऐतिहासिक दाम का दावा ऐतिहासिक झूठ है

वीडियो: मोदी सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में किए गए बदलाव और किसानों के मुद्दों पर स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव से कबीर अग्रवाल की बातचीत.

Ahmednagar: Swabhimani Shetkari Sanghatna activists during a demonstration demanding a subsidy of Rs 5 per litre milk, waiver of goods and services tax on butter and milk powder among others, at Shiradhon Village in Ahmednagar on Monday, July 16, 2018. (PTI Photo) (PTI7_16_2018_000176B)

अगर सरकार बुलेट ट्रेन पर करोड़ों ख़र्च कर सकती है तो दूध उत्पादकों के लिए क्यों नहीं: शिवसेना

शिवसेना ने कहा कि गोवा, कर्नाटक की सरकारें दूध किसानों को पांच रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देती हैं तो अगर महाराष्ट्र के किसान भी ऐसी ही राहत की मांग करते हैं, तो इसमें गलत क्या है.

Karad: Swabhimani Shetkari Sanghatana activists pour milk at the memorial of Maharashtra's first Chief Minister late Y B Chavan during a protest to demand direct Rs 5/- subsidy per liter and waiver of Goods and Services Tax (GST) for butter and milk powder, in Karad, Maharashtra on Monday. (PTI Photo) (PTI7_16_2018_000034B)

महाराष्ट्र में दूध की कीमत बढ़ाने को लेकर आंदोलन, मुख्यमंत्री ने कहा- सरकार बातचीत को तैयार

दूध की कीमत में पांच रुपये की वृद्धि और इससे बनने वाले पाउडर को अनुदान देने की है मांग. कई जगहों में दूध के टैंकरों का आवागमन बाधित किया. विपक्ष ने समर्थन में किया सदन से बर्हिगमन.

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अख़बारों की चिंता में किसान नहीं बल्कि उनके उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले लोग हैं

अमर्त्य सेन कह चुके हैं कि भारतीय मीडिया तेज़ी से अमीरों का पक्षधर होता जा रहा है, बीते महीने हुए किसान आंदोलन की हिंदी अख़बारों में कवरेज सेन के कथन की पुष्टि करती है. आंदोलन के दौरान अख़बारों की चिंता किसानों की समस्याएं, उनकी दयनीय हालत और हालत के लिए ज़िम्मेदार लोगों के बजाय आंदोलन के चलते उत्पादों की बढ़ी कीमतें और इससे शहरों में हुई परेशानी रही.

मृतक किसान किशोरी लाल जाटव. (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)

मध्य प्रदेश: पुलिस ने सुनवाई की होती तो दलित किसान की ज़िंदा जलाकर हत्या न हुई होती

भोपाल के बैरसिया तहसील के एक गांव में किसान की ज़मीन पर दबंगों ने क़ब्ज़ा कर लिया था. उन्होंने विरोध किया तो उन्हें केरोसिन डालकर ज़िंदा जला दिया गया. हत्या का आरोपी एक प्रभावशाली किसान होने के साथ सत्ताधारी भाजपा का पदाधिकारी भी है.

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प्रधानमंत्री मोदी का जयपुर में यह कैसा जनसंवाद? हाड़ौती के किसानों का प्रवेश निषेध

शनिवार को होने वाले ‘प्रधानमंत्री लाभार्थी जनसंवाद’ में उपज का सही दाम नहीं मिलने की वजह से आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हाड़ौती संभाग के किसानों को अपनी मन की बात कहने का मौका नहीं मिलेगा.

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​जन गण मन की बात, एपिसोड 270: सोशल मीडिया और न्यूनतम समर्थन मूल्य

जन गण मन की बात की 270वीं कड़ी में विनोद दुआ फेक न्यूज़, ट्रोलिंग और लिंचिंग की घटनाओं के लिए सोशल मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति और केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में किए गए बदलाव पर चर्चा कर रहे हैं.

Kolkata: Farmers plant paddy saplings in a field as the Boro paddy season starts, in the outskirts of Kolkata on Monday morning. PTI Photo (PTI1_29_2018_000045B)

न्यूनतम समर्थन मूल्य में इज़ाफ़ा करके वादा निभाया: मोदी, कांग्रेस ने कहा- चुनावी लॉलीपॉप

अखिल भारतीय किसान सभा ने कहा, धान के एमएसपी में 200 रुपये की वृद्धि किसानों के साथ ऐतिहासिक विश्वासघात है.