किसान

Nadia: A farmer prepares land for cultivation during Monsoon season, in Nadia district of West Bengal, Tuesday, July 9, 2019. (PTI Photo)(PTI7_9_2019_000060B)

कृषि मंत्रालय खुद ये मानता है कि एमएसपी बढ़ाने पर बाज़ार में विकृति आने का सीधा संबंध नहीं

द वायर द्वारा प्राप्त किए गए कृषि मंत्रालय के आंतरिक गोपनीय दस्तावेज़ों से पता चलता है कि सरकार ख़ुद ये स्वीकार करती है कि अधिक एमएसपी किसानों को कीमतों में उतार-चढ़ाव की स्थिति से निकालने के लिए ज़रूरी है. हालांकि इसके बावजूद केंद्र पिछले कई सालों से लागत का डेढ़ गुना दाम देने की मांग को दरकिनार करती आ रही है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

भाजपा शासित राज्यों समेत कई प्रदेशों ने की थी एमएसपी बढ़ाने की सिफ़ारिश, केंद्र ने ठुकराया

द वायर एक्सक्लूसिव: आरटीआई के तहत प्राप्त किए गए दस्तावेज़ बताते हैं कि महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों ने केंद्र द्वारा निर्धारित एमएसपी पर सहमति नहीं जताई थी. राज्यों ने अपने यहां की उत्पादन लागत के हिसाब से समर्थन मूल्य तय करने की सिफ़ारिश की थी, लेकिन केंद्र ने सभी प्रस्तावों को ख़ारिज कर दिया.

खेतों में उड़ती टिड्डियों के बीच किसान. (सभी फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान में टिड्डियों के हमले के बाद किसान सरकार की उदासीनता के शिकार

इन दिनों उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के 11 ज़िले और गुजरात के कुछ क्षेत्रों के किसान टिड्डियों के हमले से प्रभावित हैं. सरकारी अधिकारियों के अनुसार टिड्डियों के हमले से तक़रीबन 3.70 लाख हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो चुकी है.

(फोटो साभार: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया)

बजट में पारदर्शिता को लेकर कई बड़े राज्य फिसड्डी, असम पहले नंबर पर, मणिपुर सबसे नीचे: रिपोर्ट

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों की तुलना में केंद्र का बजट ज़्यादा पारदर्शी होता है. हालांकि केंद्र स्तर पर भी अभी भी कई ज़रूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जाता है.

Research has shown that LGBTQ people face a higher risk of having mental health issues such as depression, anxiety, substance abuse, suicide and self-harm than heterosexuals. ― Picture by Gift Habeshaw/Unsplash via Reuters

2018 में किसानों से ज़्यादा बेरोज़गारों और स्वरोज़गार करने वालों ने की आत्महत्या: एनसीआरबी

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 में औसतन 35 बेरोज़गारों और स्वरोज़गार से जुड़े 36 लोगों ने हर दिन ख़ुदकुशी की. इस साल 12,936 बेरोज़गारों और स्वरोज़गार से जुड़े 13,149 लोगों ने ख़ुदकुशी की.

Nagaon: A farmer ploughs his field using bullocks at Bamuni village, in Nagaon, Tuesday, July 02, 2019. (PTI Photo) (PTI7_2_2019_000076B)

देश में पिछले 10 साल में माफ़ हुआ 4.7 लाख करोड़ रुपये का कृषि क़र्ज़

हालांकि किसानों की ये क़र्ज़ माफ़ी वास्तविकता के बजाय काग़ज़ों पर ही अधिक हुई हैं. इनमें से 60 प्रतिशत से अधिक क़र्ज़ माफ़ नहीं किए जा सके हैं. सबसे ख़राब प्रदर्शन मध्य प्रदेश का रहा है. मध्य प्रदेश में महज़ 10 प्रतिशत क़र्ज़ माफ़ किए गए हैं.

A farmer shows wheat crop damaged by unseasonal rains in his wheat field at Sisola Khurd village in the northern Indian state of Uttar Pradesh, March 24, 2015. To match Insight INDIA-MODI/ Picture taken March 24, 2015. REUTERS/Anindito Mukherjee

साल 2018 में 10,349 किसानों ने आत्महत्या की, महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा: एनसीआरबी

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 में किसान आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु दूसरे, पश्चिम बंगाल तीसरे, मध्य प्रदेश चौथे और कर्नाटक पांचवें स्थान पर है. इन पांच राज्यों में ही किसान आत्महत्या के करीब 51 फीसदी मामले दर्ज किए गए.

Karad: Farmers plough their field as they sow soyabean at a field in Ghogaon village near Karad, Friday, July 5, 2019. Finance Minister Nirmala Sitharaman said the government will invest widely in agriculture infrastructure and support private entrepreneurship for value addition in farm sector. (PTI Photo) (PTI7_5_2019_000217B)

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के दो लाख रुपये तक कर्ज माफ करने की घोषणा की

इस योजना को महात्मा ज्योतिराव फुले ऋण माफी योजना कहा जाएगा. राज्य के खजाने पर इस कदम से कितना वित्तीय भार पड़ेगा, इस पर महाराष्ट्र सरकार ने अभी कुछ नहीं कहा.

Nadia: A farmer prepares land for cultivation during Monsoon season, in Nadia district of West Bengal, Tuesday, July 9, 2019. (PTI Photo)(PTI7_9_2019_000060B)

देश में प्रति कृषि परिवार की राष्ट्रीय मासिक औसत आय 6426 रुपये, हर दिन मात्र 214 रुपये

पंजाब में प्रति कृषि परिवार की मासिक औसत आय 18,059 रुपये है, जबकि हरियाणा में प्रति कृषि परिवार की मासिक औसत आय 14,434 रुपये, जम्मू कश्मीर में 12,683 रुपये और केरल में 11,888 रुपये है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को मुआवजा देने का प्रावधान नहीं: सरकार

राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कई कार्यक्रम अमल में लाए जा रहे हैं लेकिन आत्महत्या करने वाले किसानों को मुआवजा देने का प्रावधान वर्तमान में चलाई जा रही किसी नीति में नहीं है.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में प्रदर्शनकारी किसानों पर पुलिस के लाठीचार्ज का दृश्य. (फोटो: स्क्रीनग्रैब/ ट्विटर)

यूपी: जमीन मुआवजे को लेकर किसानों के धरने पर लाठीचार्ज के बाद उन्नाव में तनाव, आठ गिरफ़्तार

मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का है. किसान पिछले दो दिनों से सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान पुलिस और किसानों में झड़प हो गई जिसमें दोनों पक्षों के लोग घायल हुए हैं. इलाके में भारी संख्या में पुलिसबल तैनात कर दिया गया है.

(फोटो साभार: Nehru Memorial Library)

क्या जनता के नेहरू को दिल्ली निगल गई?

1950-60 के दशक में दिल्ली ने अपने जैसा एक नेहरू बना लिया. यह 1920-30 के दशक के नेहरू से भिन्न था. समय के साथ वो नेहरू जनता की नज़र से ओझल होते गए जिसने अवध के किसान आंदोलन में संघर्ष किया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

साल 2016 में 11,379 किसानों ने आत्महत्या की, केंद्र ने अंतत: जारी किए आंकड़े

किसान आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र लगातार पहले स्थान पर बना हुआ है. साल 2016 में इस राज्य में सर्वाधिक 3,661 किसानों ने आत्महत्या की. इससे पहले 2014 में यहां 4,004 और 2015 में 4,291 किसानों ने आत्महत्या की थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

महाराष्ट्र: बारिश से फसल बर्बाद, मराठवाड़ा में चार दिन में दस किसानों ने आत्महत्या की

मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बेमौसम बारिश के चलते सोयाबीन, ज्वार, मक्का और कपास जैसी खरीफ की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है.

साभार: competitionzenith.blogspot.in

जब जेपी के जीवित रहते हुए संसद ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी थी…

गैरकांग्रेसवाद का सिद्धांत भले ही डाॅ. राममनोहर लोहिया ने दिया था लेकिन उसकी बिना पर कांग्रेस की केंद्र की सत्ता से पहली बेदखली 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तत्वावधान में ही संभव हुई.

(फोटो: रॉयटर्स)

टाटा की नैनो कार का उत्पादन ठप, इस साल सितंबर तक केवल एक कार बिकी

टाटा नैनो को ‘आम जनता की कार’ के रूप में पेश किया गया था, लेकिन इसकी बिक्री लगातार घटती रही है. पिछले साल जनवरी-सितंबर के दौरान टाटा मोटर्स ने घरेलू बाजार में 297 कारों का उत्पादन किया जबकि 299 कारें बेचीं. मारुति सुजुकी, हुंदै, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टोयोटा और होंडा समेत सभी बड़ी वाहन कंपनियों की घरेलू बिक्री में गिरावट दर्ज की गई.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेशः किसान की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, तहसीलदार को पद से हटाया गया

उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले का मामला. ​परिजनों का आरोप है कि जेल में किसान को प्रताड़ित किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई. कथित तौर पर बिजली चोरी का जुर्माना न चुका पाने पर किसान को जेल में डाल दिया गया था.

Kisan Protest

गन्ना बकाया भुगतान, क़र्ज़ माफ़ी जैसी मांगों को लेकर दिल्ली की ओर सैकड़ों किसानों ने निकाला मार्च

किसानों की मांगों को लेकर भारतीय किसान संगठन के 11 प्रतिनिधियों को कृषि मंत्रालय ले जाया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी हो जाती हैं तो वे लौट जाएंगे, नहीं तो वे दिल्ली की ओर मार्च करेंगे.

(फोटो: रॉयटर्स)

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन: भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किसानों की 120 से अधिक याचिकाएं ख़ारिज

अदालत ने किसानों के इस दावे को ख़ारिज कर दिया कि गुजरात सरकार के पास भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं है क्योंकि परियोजना दो राज्यों- गुजरात और महाराष्ट्र के बीच बंटी हुई है.

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हरियाणा भाजपा प्रमुख ने कहा, पार्टी में कभी जाति-बिरादरी की बात नहीं होती है

वीडियो: हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर द वायर के डिप्टी एडिटर गौरव विवेक भटनागर की प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला से बातचीत.

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हरियाणा: योगेंद्र यादव ने कहा, मनोहरलाल जी को मनोहर कहानियां सुनाना बंद करना चाहिए

वीडियो: हरियाणा के 22 जिलों में से 13 जिलों में नौ दिन का जन-सरोकार अभियान पूरा करके लौटे स्वराज अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव से राज्य की पहली भाजपा सरकार, किसानों और महिलाओं की स्थिति, बेरोज़गारी समेत विभिन्न मुद्दों पर द वायर के डिप्टी एडिटर गौरव विवेक भटनागर की बातचीत.

नवंबर 2018 में घोषणापत्र जारी करती मध्य प्रदेश कांग्रेस. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: क्या कांग्रेस के लिए उसका ‘वचन-पत्र’ अब गले की हड्डी बन गया है?

एक ओर कमलनाथ सरकार विधानसभा चुनावों से पहले जारी किए अपने ‘वचन-पत्र’ को ही सरकार चलाने का रोडमैप और वचनों के पूरे होने के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर उन वचनों से सरोकार रखने वाले वर्ग अब सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने लगे हैं.

नरेंद्र मोदी और अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

देश की अखंडता ब्रह्मचर्य-सी पवित्र है, इधर-उधर सोचने भर से भंग होने का ख़तरा रहता है

मैं प्रधानमंत्री के समर्थन में पत्र लिखने वाले 62 दिग्गजों का दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगा. ये अगर चाहते तो देश की छवि खराब करने वाले उन 49 लोगों की लिंचिंग भी कर सकते थे. मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, बजाय इसके चिट्ठी लिखकर उन्होंने देश के बाकी लट्ठधारी राष्ट्रवादियों के सामने बहुत बड़ा आदर्श पेश किया है.

Karad: Farmers plough their field as they sow soyabean at a field in Ghogaon village near Karad, Friday, July 5, 2019. Finance Minister Nirmala Sitharaman said the government will invest widely in agriculture infrastructure and support private entrepreneurship for value addition in farm sector. (PTI Photo) (PTI7_5_2019_000217B)

सत्यापन किए बिना 500 करोड़ रुपये की कृषि आय को टैक्स से छूट दी गई: कैग

कैग ने इस बात को लेकर चेताया है कि अगर बिना सत्यापन के कृषि आय के तहत टैक्स छूट दी जाती रहेगी तो इसकी आड़ में बेहिसाब काला धन आने की आशंका है.

Beawar: Women carry vessels to collect drinking water on a hot summer day in Beawar, Rajasthan, Thursday, June 6, 2019. (PTI Photo)(PTI6_6_2019_000083B)

जल संकट के कगार पर राजस्थान, कभी भी ख़त्म हो सकता है भूजल

राजस्थान सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 33 ज़िलों को भूजल के हिसाब से कुल 295 ब्लॉक में बांटा गया है, जिनमें से 184 ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में आ गए हैं. इसका मतलब है कि आधे से ज़्यादा राज्य में ज़मीनी पानी कभी भी समाप्त हो सकता है.

Karad: Bullock carts loaded with sugarcane move towards a sugar mill, in Karad, Maharashtra, Monday, Nov 05, 2018. (PTI Photo)(PTI11_5_2018_000061B)

सरकार ने नहीं बढ़ाया गन्ने का न्यूनतम मूल्य, किसानों को 275 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलेगा दाम

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में विपणन वर्ष 2019-20 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य को यथावत रखने का फैसला किया गया. यह वह भाव है जो मिल मालिक किसानों को देते हैं.

Karad: Farmers plough their field as they sow soyabean at a field in Ghogaon village near Karad, Friday, July 5, 2019. Finance Minister Nirmala Sitharaman said the government will invest widely in agriculture infrastructure and support private entrepreneurship for value addition in farm sector. (PTI Photo) (PTI7_5_2019_000217B)

क्या किसानों को इस बजट से छलावे के सिवा कुछ हासिल नहीं हुआ?

साल 2019-20 का कृषि बजट करीब एक लाख 30 हज़ार करोड़ रुपये है, जो कुल बजट का केवल 4.6 फीसदी है. इसमें से 75,000 करोड़ रुपये पीएम-किसान योजना के लिए आवंटित किए गए हैं. इस तरह अन्य कृषि योजनाओं के लिए सिर्फ 55,000 करोड़ रुपये ही बचते हैं.

Media Bol

मीडिया बोल: बजट में किसानों और नौजवानों को क्या मिला?

मीडिया बोल की इस कड़ी में बजट पर वरिष्ठ पत्रकार नितिन सेठी, बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार की राजनीतिक संपादक अदिति फड़नीस और द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु से चर्चा कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश.

People walk as a telecast of India's Finance Minister Nirmala Sitharaman presenting the budget is displayed inside the Bombay Stock Exchange (BSE) building in Mumbai, July 5, 2019. Image: Reuters/Francis Mascarenhas

बजट 2019 में महत्वाकांक्षाओं की कमी साफ दिखती है

जो लोग इस बजट से भाजपा के चुनावी वादों को पूरा करने के किसी रोडमैप की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें इस बजट में एक भी बड़ा विचार या कोई बड़ी पहल दिखाई नहीं दी. रोजगार सृजन और कृषि को फायदेमंद बनाने जैसे मसले पर चुप्पी हैरत में डालने वाली है.

People watch finance minister Nirmala Sitharaman as she delivers her Union Budget 2019-20 speech, at Vashi in Navi Mumbai, on July 5. Photo: PTI

बजट में दीर्घकालिक विकास के लिए रणनीति नहीं दिखाई देती

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट काफी अच्छी-अच्छी बातें करता है, लेकिन जब एक बड़ी तस्वीर बनाने की कोशिश करते हैं, तो इसमें काफी दरारें दिखाई देती हैं.

New Delhi: Finance Minister Nirmala Sitharaman with MoS Anurag Thakur and others outside the North Block ahead of the presentation of Union Budget 2019-20 at Parliament, in New Delhi, Friday, July 05, 2019. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI7_5_2019_000014B)

वित्तमंत्री अगर ‘न्यू इंडिया’ में नई अर्थनीति का जोखिम उठा लेतीं तो बेहतर होता

जब तक भूमंडलीकरण की आर्थिक नीतियों में कोई निर्णायक परिवर्तन नहीं होता, भारत विश्वशक्ति बन जाए तो भी, सरकार का सारा बोझ ढोने वाले निचले तबके की यह नियति बनी ही रहने वाली है कि वह तलछट में रहकर विश्वपूंजीवाद के रिसाव से जीवनयापन करे.

झारखंड के चतरा ज़िले के लावालौंग प्रखंड के इन किसानों की जमीन वन विभाग द्वारा छीन ली गई है. अपनी जमीन का कागजात दिखाते किसान. (सभी फोटो: मोहम्मद असगर ख़ान)

क्यों झारखंड के आदिवासी किसानों को अपना खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

ग्राउंड रिपोर्ट: सूखे की मार झेल रहे हैं झारखंड के चतरा ज़िले के किसानों पर वन विभाग की सख़्ती ने उनकी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है. बीते एक साल में चतरा के हज़ारों किसानों की ज़मीन और खेत को वन विभाग ने वनभूमि बताकर उन्हें वहां से बेदख़ल कर दिया है.

The President, Shri Ram Nath Kovind presenting the Padma Shri Award to Shri Daitari Naik, at the Civil Investiture Ceremony-II, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on March 16, 2019.

पद्मश्री पाने के बाद नहीं मिल रहा काम, लौटाना चाहता हूं सम्मान: दैतारी नायक

दैतारी नायक का कहना है कि जब से उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला है, लोग उनकी प्रतिष्ठा का हवाला देकर उनसे कोई काम कराने को तैयार नहीं हैं. वह चींटियों के अंडे खाने को मजबूर हैं. ओडिशा के तालबैतरणी गांव के रहने वाले नायक को पहाड़ खोदकर नहर बनाने के लिए पद्मश्री सम्मान से इसी साल नवाज़ा गया था.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 18,958 करोड़ रुपये का बकाया, सबसे ज्यादा यूपी में

सरकारी आंकड़ों में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश के चीनी मिलों पर किसानों का बकाया 11,082 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. कर्नाटक में 1,704 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र में 1,338 करोड़ रुपये का बकाया है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

उत्तर प्रदेश: पूर्वांचल के गन्ना किसानों की सुध क्यों नहीं ले रही है सरकार?

उत्तर प्रदेश में अब भी गन्ना किसानों का 10,626 करोड़ रुपये बकाया है और जून के महीने में भी गन्ने की फसल खेतों में खड़ी है. उत्तर प्रदेश में 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में गन्ना किसानों की समस्याओं को भाजपा ने प्रमुखता से उठाया था, लेकिन केंद्र और प्रदेश में सरकार बनने के बाद भी उनकी समस्याएं हल नहीं हो सकी हैं.

Budgam: Farmers work in a paddy field during the harvesting season of the crop, in Budgam district of central Kashmir, Sunday, September 30, 2018. The yield of this year is better than the last year, as per reports. ( PTI Photo/S Irfan) (PTI9_30_2018_000081B)

किसानों की आय दोगुनी करना मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है

वीडियो: बीते पांच सालों में किसानों की आय के मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन हुए. द वायर के कबीर अग्रवाल बता रहे हैं कि अपने दूसरे कार्यकाल में फसलों की कीमत और किसानों की आय बढ़ाना मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है.

बीते 25 अप्रैल को वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोड शो किया. (फोटो साभार: ट्विटर)

50 किसानों के बाद, तीन तेलुगू कार्यकर्ता भी मोदी के ख़िलाफ़ वाराणसी से लड़ेंगे चुनाव

कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे इसलिए वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं ताकि फ्लोरोसिस से प्रभावित उनके ज़िले पर राष्ट्रव्यापी चर्चा हो और लोगों का इस पर ध्यान जाए.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi celebrating the Diwali with the jawans of  the Indian Army and BSF, in the Gurez Valley, near the Line of Control, in Jammu and Kashmir, on October 19, 2017.

किसानों की मौत छिपाता और सैनिकों की मौत भुनाता दिखावटी राष्ट्रवाद

भाजपा और मीडिया के कुछ वर्ग ने उन्माद का ऐसा माहौल खड़ा कर दिया है, जैसे सैनिकों की मौत पर घड़ियाली आंसू बहाना और बात-बात पर युद्ध की बात करना- देख लेना और दिखा देना ही राष्ट्रवाद की असली निशानी रह गया है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering after inaugurating and laying the foundation stone for various development projects, in Varanasi, Uttar Pradesh on July 14, 2018.

वाराणसी: प्रधानमंत्री मोदी की रैली के लिए काटी गई थी फसल, अब तक नहीं मिला मुआवज़ा

ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश में वाराणसी के कचनार गांव में जुलाई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक रैली के लिए तकरीबन 10 एकड़ की ज़मीन का इस्तेमाल किया गया था. इस ज़मीन की फसल बर्बाद होने की वजह से प्रशासन ने स्थानीय किसानों को मुआवज़ा देने की बात कहीं थी.

Chennai: Former Kolkata High Court Judgec Justice CS Karnan being taken by West Bengal police to that city at the airport in Chennai on Wednesday.  He was arrested yesterday night from Coimbatore. PTI Photo by R Senthil Kumar(PTI6_21_2017_000105B)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे जस्टिस कर्णन

सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले जस्टिस सीएस कर्णन को जून 2017 में सेवानिवृत्ति के बाद छह महीने की जेल की सज़ा काटनी पड़ी थी. वाराणसी के साथ उन्होंने मध्य चेन्नई लोकसभा सीट के लिए भी अपना नामांकन दाख़िल किया है.