कुपोषण

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

मुज़फ़्फ़रपुर में बच्चों की मौत के बाद जायजा लेने गए सीएम नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी

इंसेफलाइटिस की चपेट में आकर बच्चों की मौत के मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री के ख़िलाफ़ परिवाद दायर. बिहार में अब तक तकरीबन 120 बच्चों की मौत इंसेफलाइटिस से हो चुकी है.

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क्या है चमकी बुखार, जिसने बिहार में ली सैकड़ों बच्चों की जान

एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम या दिमागी बुख़ार का दायरा बहुत विस्तृत है, जिसमें अनेक संक्रमण शामिल होते हैं और यह बच्चों को प्रभावित करता है. बिहार में पिछले 20 दिनों में इसके 350 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें क़रीब 120 बच्चों की मौत हो चुकी है.

(फोटो: पीटीआई)

बिहार में बच्चों की मौत पर मानवाधिकार आयोग का स्वास्थ्य मंत्रालय, बिहार सरकार को नोटिस

आयोग ने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जापानी इंसेफलाइटिस वायरस, एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम पर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम को लागू करने की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी है.

एईएस बीमारी से अब तक करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है.

बिहार में ‘अज्ञात बुखार’ से करीब 120 बच्चों की मौत, कटघरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2014 में इस बीमारी के कारण 86 बच्चों की मौत हुई थी. जबकि 2015 में 11, साल 2016 में चार, साल 2017 में चार और साल 2018 में 11 बच्चों की मौत हुई थी.

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बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर में दिमागी बुखार सहित अज्ञात बीमारी से अब तक 84 बच्चों की मौत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

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बिहार: बीते पंद्रह दिनों में हुई तक़रीबन 60 बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के मुज़फ्फरपुर में अब तक ‘अज्ञात बुखार’ के चलते करीब 60 बच्चों की मौत हो चुकी है और सैंकड़ों बच्चे इससे पीड़ित हैं.

Hum Bhi Bharat Bahraich

हम भी भारत: बहराइच लोकसभा क्षेत्र में कुपोषण और बेरोज़गारी पर भारी सांप्रदायिकता

हम भी भारत की इस कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी बहराइच लोकसभा क्षेत्र में बच्चों के कुपोषण, ग़रीबी और बेरोज़गारी के मुद्दों पर ग़ैर सरकारी संगठन देहात एनजीओ के कार्यकारी अधिकारी जितेंद्र चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार सलीम सिद्दीक़ी, शिक्षिका डॉ. अनुपमा झा और वरिष्ठ पत्रकार अज़ीम मिर्ज़ा से चर्चा कर रही हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

आर्थिक असमानता लोगों को मजबूर कर रही है कि वे बीमार तो हों पर इलाज न करा पाएं

सबसे ग़रीब तबकों में बाल मृत्यु दर और कुपोषण के स्तर को देखते हुए यह समझ लेना होगा कि लोक सेवाओं और अधिकारों के संरक्षण के बिना न तो ग़ैर-बराबरी ख़त्म की जा सकेगी, न ही भुखमरी, कुपोषण और बाल मृत्यु को सीमित करने के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा.

प्रतीकात्मक फोटो रॉयटर्स

कई सारे रिपोर्ट्स के बावजूद केंद्र सरकार ने कहा, भूख से मौतों के बारे में कोई जानकारी नहीं

बीते मंगलवार को लोकसभा में सरकार ने कहा कि किसी भी राज्य ने भूख से मौत की जानकारी नहीं दी है. कई मीडिया रिपोर्टों में भूख से मौत का दावा किया गया है लेकिन जांच में ये सही नहीं पाया गया.

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास. (फोटो साभार: फेसबुक)

झारखंड: क्या भूख से होने वाली मौतें 2019 के चुनावों में मुद्दा बनेंगी?

झारखंड सरकार ने तो भुखमरी के मुद्दे से अपना मुंह ही फेर लिया है. उल्टा, जो लोग भुखमरी की स्थिति को उजागर कर रहे हैं, सरकार उनकी मंशा पर लगातार सवाल कर रही है.

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दिल्ली में तीन बच्चियों की मौत भुखमरी से ही हुई थी: विसरा रिपोर्ट

दिल्ली के मंडावली में बीते जुलाई महीने में तीन बच्चियों की मौत हो गई थी. तीनों बच्चियां सगी बहनें थीं और विसरा रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि उन्हें कई दिनों से खाना नहीं मिला था. जांच के दौरान लड़कियों के शरीर में कोई ज़हर नहीं मिला.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

हर दिन 92 बच्चों की मौत के बावजूद मध्य प्रदेश में कुपोषण चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है?

ग्राउंड रिपोर्ट: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 से जनवरी 2018 के बीच राज्य में 57,000 बच्चों ने कुपोषण के कारण दम तोड़ दिया था. कुपोषण की वजह से ही श्योपुर ज़िले को भारत का इथोपिया कहा जाता है.

आंगनबाड़ी सेविका पिंकी देवी (बीच में). (फोटो: नीरज सिन्हा/द वायर)

झारखंड सरकार पोषण महीना मनाने में व्यस्त, आंगनबाड़ियों में चार महीने से नहीं पहुंचा पोषाहार

झारखंड की रघुबर दास सरकार पोषण पर ज़ोर दे रही है. पूरा सितंबर पोषण महीने के तौर पर मनाया गया. कार्यक्रमों की होड़ रही, मंत्री और अधिकारी जुटे रहे, लेकिन चार महीने से आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पोषाहार नहीं मिल पा रहा है.

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भूख से बच्चियों की मौत मामला: मजिस्ट्रेट जांच के अनुसार पिता ने दी थी अज्ञात दवा

पूर्वी दिल्ली के मंडावली क्षेत्र में तीन बहनें मंगलवार को मृत मिली थीं और उस समय से उनका पिता लापता है.

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दिल्ली: भूख से तीन बहनों की मौत, आठ दिन से नहीं मिला था खाना

पूर्वी दिल्ली के मंडावली क्षेत्र में भूख से मरने वाली लड़कियों की उम्र दो, चार और आठ साल थी. मज़दूर पिता दो दिन से लापता है. मां मानसिक रूप से बीमार है. पीएम रिपोर्ट के मुताबिक वे आठ दिनों से भूखी थीं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

मध्य प्रदेश: ‘भारत का इथोपिया’ कहे जाने वाले श्योपुर में कुपोषण से पांच बच्चों की मौत

ज़िले के विजयपुर विकासखंड की इकलौद पंचायत के झाड़बड़ौदा गांव में दो हफ्तों के भीतर पांच बच्चों की मौत हो चुकी है. प्रशासन कुपोषण की बात से इनकार कर रहा है और मौतों को बुखार से होना बता रहा है.

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कुपोषण से लड़ने के हॉर्लिक्स के दावे का अमिताभ बच्चन द्वारा प्रचार आंख में धूल झोंकना है

सेहत के लिए हानिकारक होने के चलते अमिताभ बच्चन ने साल 2014 में पेप्सी के साथ अपना क़रार रद्द कर दिया था. स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि अमिताभ हॉर्लिक्स के साथ भी ऐसा ही करेंगे.

गुजरात के भुज स्थित जीके जनरल हॉस्पीटल (फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमंस)

गुजरात: अडानी के अस्पताल को 111 नवजातों की मौत के मामले में मिली क्लीनचिट

वर्ष 2018 के शुरुआती पांच महीनों में अस्पताल में जन्मे या जन्म के बाद भर्ती कराए गए 777 नवजातों में से 111 की मौत हो गई थी. सरकार ने एक समिति बनाकर जांच के आदेश दिए थे.

गुजरात के भुज स्थित जीके जनरल हॉस्पीटल (फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमंस)

गुजरात: अडानी के अस्पताल में पांच महीनों में 111 शिशुओं की मौत

अस्पताल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 के शुरुआती पांच महीनों में अस्पताल में जन्मे या जन्म के बाद भर्ती कराए गए 777 नवजातों में से 111 की मौत हो गई. सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं.

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बाल विवाह के पक्ष में होना महज़ एक विचार नहीं, बल्कि एक घातक विचारधारा है

इस विचारधारा में स्त्रियों, बच्चों, क़ानून, समाज में बराबरी, सहिष्णुता और सुरक्षा के प्रति कोई सम्मान नहीं है. बाल विवाह केवल लड़कियों के जीवन को संकुचित और दुरूह नहीं बनाता है, लड़कों के जीवन को भी उतना ही प्रताड़ित करता है.

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मध्य प्रदेश में कुपोषण से हर दिन 92 बच्चों की मौत: राज्य सरकार

मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में जनवरी 2016 से जनवरी 2018 के बीच करीब 57,000 बच्चों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया.

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पौराणिक काल में दो मामा कंस और शकुनि थे, वर्तमान में एक ‘मामा’ मध्य प्रदेश में हैं: कांग्रेस

कांग्रेस के मीडिया प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने मध्य प्रदेश में बलात्कार, कुपोषण, बाल मृत्यु दर, किसान आत्महत्या और भ्रष्टाचार में बढ़ोत्तरी से संबंधित आंकड़े पेश करते हुए शिवराज सरकार पर निशाना साधा है.

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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की शर्तें उसे महिला विरोधी बनाती हैं

बेस्ट ऑफ 2018: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत दी गई पात्रता शर्तें इसका उद्देश्य पूरा करने की राह में रोड़ा हैं.

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मध्य प्रदेश में 3 बच्चियां जलकर नहीं मरीं, व्यवस्था ने उनकी हत्या की है

यदि सरकारों ने बच्चों की प्रारंभिक देखरेख और सुरक्षा पर ध्यान दिया होता, तो आज राखी, मीनू और सीता ज़िंदा होतीं.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

कुपोषण, बिजली आपूर्ति के मुद्दे पर भाजपा विधायकों ने अपनी ही सरकार को घेरा

विदिशा जिले में कुपोषण की स्थिति बहुत ही भयंकर हो गई है, जबकि यह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का लोकसभा क्षेत्र है.

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कुल भारतीय संपत्ति का 58 प्रतिशत हिस्सा एक प्रतिशत लोगों के पास है: येचुरी

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, पिछले तीन साल में देश में अमीर और ग़रीब के बीच आर्थिक असमानता तेज़ी से बढ़ी है.

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विश्व खाद्य दिवस: दुनिया में भूखे लोगों की क़रीब 23 फ़ीसदी आबादी भारत में रहती है

तमाम योजनाओं के ऐलान और बहुत सारे वादों के बावजूद देश में भूख व कुपोषण से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ रही है.

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ग्राउंड रिपोर्ट: ‘भारत के इथोपिया’ का दर्जा पा चुके मध्य प्रदेश के श्योपुर में कुपोषण का कहर

मध्य प्रदेश में 2009 से 2015 के बीच 1 करोड़ 10 लाख बच्चे कुपोषित पाए गए. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट कहती है कि इनमें से 9.3 प्रतिशत गंभीर रूप से कुपोषित हैं.

Mob Violence Blush Me

लोगों का भीड़ में बदलना और क़ातिल हो जाना विकास का कैसा मुक़ाम है?

भीड़ को राजनीति और सत्ता मिलकर पैदा करते हैं. उन्हें निर्देशित करते हैं. फिर भीड़ उनके नियंत्रण से भी बाहर निकल जाती है. वह किसी की नहीं सुनती.

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46 फ़ीसदी कुपोषित बच्चों वाले उत्तर प्रदेश में सरकार मंदिरों में गाय के दूध का प्रसाद बांटेगी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, एक साल तक के बच्चों की मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश पूरे देश में टॉप पर है. बिहार के बाद सबसे ज़्यादा ठिगने बच्चे उत्तर प्रदेश में ही हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रायटर्स)

मुंबई: बीएमसी स्कूलों में हर तीन में से एक बच्चा कुपोषण का शिकार

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के स्कूलों में कुपोषण की शिकार बच्चों की संख्या सबसे ज़्यादा गोवंडी, ख़ार और कुर्ला में है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

गाय के लिए एम्बुलेंस के दौर में क़रीब 3,700 बच्चे रोज़ डायरिया और कुपोषण से मरते हैं

वर्तमान सरकार गाय को लेकर आवश्यकता से ज़्यादा चिंतित होने का दिखावा कर रही है, लेकिन वहीं हर साल डायरिया-कुपोषण से मरने वाले लाखों बच्चों को लेकर सरकार आपराधिक रूप से निष्क्रिय है.

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देश में 93 लाख से ज़्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण के शिकार

स्वास्थ्य राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने एक सवाल के जवाब में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे पर आधारित आंकड़ों की जानकारी राज्यसभा में दी.