केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री

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भारत में दलितों की परवाह किसे है?

अनेक ‘शुभचिंतक’ दलों के बावजूद भेदभावों के ख़िलाफ़ दलितों की लड़ाई अभी लंबी ही है. ये ‘शुभचिंतक’ दल दलितों के वोट तो पाना चाहते हैं लेकिन उन पर हो रहे अत्याचारों के लिए जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं.

बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो : पीटीआई)

मीडिया ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल न करे, निर्देश जारी करने पर विचार करे सरकार: बॉम्बे हाईकोर्ट

याचिकाकर्ता ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी उस परिपत्र का हवाला दिया था जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी गई थी.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

‘दलित’ शब्दावली का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि संविधान में इसका उल्लेख नहीं: सरकार

केंद्र ने राज्य और केंद्र सरकार के विभागों से सरकारी कामकाज और दस्तावेजों में अनुसूचित जाति से जुड़े सभी लोगों के लिए ‘दलित’ शब्द का इस्तेमाल करने से बचने का निर्देश दिया है.

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ. (फोटो: पीआईबी)

दलित ख़ुद पर अत्याचार रोकने के लिए हिंदू धर्म छोड़ बौद्ध धर्म अपना लें: अठावले

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ने कहा, बाबासाहब अंबेडकर ने बौद्ध धर्म तब अपनाया जब उन्हें भरोसा हो गया कि दलितों को हिंदू धर्म में न्याय नहीं मिलेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रामदास अठावले. (फोटो साभार: फेसबुक)

दलितों पर अत्याचार रोकना है तो सवर्ण ग़रीबों को भी आरक्षण दिया जाए: अठावले

केंद्रीय मंत्री अठावले का सुझाव, ‘सवर्ण ग़रीबों को शिक्षा एवं रोज़गार में आरक्षण देने से दलितों पर अत्याचार रुक जाएगा और जाति व्यवस्था ख़त्म होने में मदद मिलेगी.’