कोरोना वैक्सीन

2307 Gondi.00_37_26_13.Still128

मीडिया बोल: बिहार चुनाव में मीडिया का किरदार और कश्मीर टाइम्स की मुसीबत

वीडियोः बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी जारी है, वहीं कश्मीर के एक प्रमुख अख़बार के दफ़्तर को प्रशासन द्वारा बिना कारण बताए सील कर दिया गया. मीडिया बोल की इस कड़ी में बिहार टाइम्स के संपादक अजय कुमार और कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन से उर्मिलेश की बातचीत.

(फोटोः पीटीआई)

भारत में कोरोना टेस्टिंग की दर दूसरे देशों की तुलना में काफी कम: डब्ल्यूएचओ वैज्ञानिक

डब्ल्यूएचओ की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन देश में कोविड टेस्टिंग की अपेक्षाकृत कम दर को लेकर कहा कि पर्याप्त संख्या में जांच किए बगैर कोरोना वायरस से निपटना आंख पर पट्टी बांधकर आग से लड़ने के समान है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और चीन में विकसित कोविड वैक्सीन के सफल ट्रायल का दावा

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और चीन में बनाए गए वैक्सीन के अब तक किए गए मानव परीक्षणों में इम्यून सिस्टम के बेहतर होने के संकेत मिले हैं. अब अगले ट्रायल में ये पता लगाया जाएगा कि इससे कोरोना वायरस को रोका जा सकता है या नहीं.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

एम्स के पैनल ने कोरोना वायरस वैक्सीन के मानव परीक्षण की मंज़ूरी दी

एम्स की एथिक्स कमेटी ने स्वदेशी तौर पर विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ के मानव परीक्षण की अनुमति दी है. इसके लिए 20 जुलाई से रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा.

New Delhi: The statue of Mahatma Gandhi in the backdrop of the Parliament House during the Monsoon Session, in New Delhi on Friday, July 20, 2018. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI7_20_2018_000250B)

कोरोना वायरस की सस्ती दवाइयों को बढ़ावा क्यों नहीं दिया जा रहा: संसदीय समिति

गृह मामलों की स्थायी समिति के सदस्यों ने दवाइयों की कालाबाज़ारी पर चिंता प्रकट की है और कहा कि कोविड-19 इलाज के लिए सस्ती दवाओं का प्रचार किया जाए.

(फोटो: रॉयटर्स)

विशेषज्ञों ने संसदीय समिति से कहा, 2021 से पहले कोविड-19 की वैक्सीन बनना मुमकिन नहीं

शुक्रवार को संसद में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश की अध्यक्षता वाले पैनल की बैठक में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने में भारत की अहम भूमिका रहेगी, पर अगले साल से पहले इसके बनने की संभावना बहुत कम है.

गगनदीप कांग. (फोटो साभार: द रॉयल सोसाइटी)

सरकारी शोध संस्थान के निदेशक पद से प्रख्यात वैज्ञानिक गगनदीप कांग ने दिया इस्तीफ़ा

डॉ. गगनदीप कांग पहली भारतीय महिला हैं, जिन्हें रॉयल सोसायटी लंदन का फेलो बनाया गया. उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब दो महीने पहले ही उनके नेतृत्व में कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम कर रही समिति को भंग कर दिया गया था.

REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

15 अगस्त तक वैक्सीन लॉन्च करने की घोषणा अव्यावहारिक: भारतीय विज्ञान अकादमी

आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराने की समयसीमा पर देश की सबसे बड़ी विज्ञान अकादमी ने कहा है कि संक्रमण से लड़ने के लिए मानव शरीर में एंटीबॉडी बनने, उसके असर, डाटा रिपोर्टिंग आदि के लिए एक लंबा समय चाहिए होता है. अगर इसमें किसी तरह की कोताही बरती गई तो बड़ा नुकसान हो सकता है.

(प्रतीकात्मक फोटो: सीडीसी/विकिमीडिया कॉमन्स)

पीआईबी ने आधिकारिक बयान से हटाई विज्ञान मंत्रालय की 2021 से पहले वैक्सीन उपलब्ध न होने की बात

भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा है कि देश में 140 वैक्सीन में से 11 मानव परीक्षण के लिए तैयार हैं लेकिन 2021 से पहले इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की गुंजाइश कम ही है. पीआईबी ने इस सूचना को जारी करते हुए 2021 से पहले वैक्सीन उपलब्ध न होने की जानकारी को इस बयान से डिलीट कर दिया.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या कोरोना वायरस का टीका विकसित करने में आईसीएमआर जल्दबाज़ी दिखा रहा है?

आईसीएमआर की ओर से कहा गया है कि कोरोना वायरस का टीका तेजी से बनाने का उद्देश्य अनावश्यक लालफीताशाही कम करना है. हालांकि आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक वैक्सीन बनाने के दावों पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं. यहां तक कि टीका विकसित कर रही कंपनी भी अक्टूबर से पहले इसका ट्रायल पूरा करने से इनकार कर रही है.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

आईसीएमआर की कोविड-19 वैक्सीन लॉन्च करने की समयसीमा को लेकर वैज्ञानिक क्यों चिंतित हैं?

आईसीएमआर ने कोविड-19 की स्वदेशी वैक्सीन के लॉन्च के लिए 15 अगस्त की समयसीमा निर्धारित की है, जिसे लेकर डॉक्टर्स और वैज्ञानिक संशय में हैं. वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक का भी मानना है कि ट्रायल पूरे होने में अक्टूबर तक का समय लग सकता है.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

देश की पहली कोविड-19 वैक्सीन को मानव परीक्षण की अनुमति मिली

‘कोवैक्सिन’ नामक टीके को भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर विकसित किया है.

Minara masjid wears a deserted look on the first day of the holy fasting month of Ramzan, amid unprecedented circumstances due to the coronavirus pandemic and a nationwide lockdown, in Mumbai. PTI

कोविड संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए मलप्पुरम ने एक नई राह दिखाई है

आज जब पूरे देश में धार्मिक स्थलों को खोला जा रहा है, तब बीते दिनों ‘सांप्रदायिक’ होने का इल्ज़ाम झेलने वाले केरल के मलप्पुरम ज़िले ने अपनी अलग राह चुनी है. कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र वहां की पांच हज़ार मस्जिदों को अनिश्चितकाल तक बंद रखने समेत कई धार्मिक स्थलों को न खोलने का फ़ैसला लिया गया है.

1896-97 में बॉम्बे में फैले प्लेग के दौरान मरीजों के लिए बना एक अस्थायी अस्पताल. (फोटो साभार: Wellcome Library, London)

कोरोना संकट का यह दौर प्लेग के ख़िलाफ़ संघर्ष का एक बिसरा दिया गया पन्ना याद दिलाता है

कोरोना संक्रमण की भयावहता के चलते इसकी वैक्सीन के मानव परीक्षणों के लिए एक अमेरिकी महिला के सामने आने के बाद कई वालंटियर्स सामने आए हैं. यह उस समय के बिल्कुल उलट है जब जीवविज्ञानी वाल्देमार हाफकिन को प्लेग के टीके का सबसे पहला प्रयोग स्वयं पर करना पड़ा था क्योंकि कोई और इसके लिए तैयार ही नहीं था.