कोरोना

Ghaziabad: A woman reaps wheat crops during the harvest season amid the nationwide COVID-19 lockdown, near Raispur village in Ghaziabad district of Uttar Pradesh, Monday, April 20, 2020. (PTI Photo/Arun Sharma)   (PTI20-04-2020_000236B)

बिहार: किसानों की मदद के दावे के बीच सरकार ने ख़रीद लक्ष्य का एक फीसदी गेहूं भी नहीं खरीदा

इस बार बिहार सरकार द्वारा किसानों से सात लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इसकी तुलना में सरकार ने महज़ 0.71 फीसदी गेहूं खरीदा है.

Raebareli: Farmers sort wheat crops after reaping, during the nationwide lockdown to curb the spread of coronavirus, on the outskirts of Raebareli, Thursday, April 23, 2020. (PTI Photo)(PTI23-04-2020_000205B)

केंद्र ने रबी फसलों के लिए एमएसपी घोषित की, पिछले 10 सालों में गेहूं के दाम में न्यूनतम बढ़ोतरी

विपक्षी दलों के सदन में हंगामे और किसानों के प्रदर्शन के बीच तीनों विवादित कृषि विधेयकों को राज्यसभा से मंज़ूरी मिल गई है. शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने गेहूं के एमएसपी में सिर्फ़ 50 रुपये की वृद्धि पर कहा कि इससे तो डीज़ल समेत अन्य लागत के बढ़े हुए दाम की भरपाई भी नहीं हो पाएगी.

Chennai: Migrants arrive at Central Railway Station to board a Shramik Special train for West Bengal, during ongoing COVID-19 lockdown, in Chennai, Wednesday, June 3, 2020. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI03-06-2020_000261B)

लॉकडाउन में श्रमिकों के मौत का आंकड़ा सरकार ने इकट्ठा किया, फ़िर भी संसद को बताने से इनकार

द वायर द्वारा भारतीय रेल के 18 ज़ोन में दायर आरटीआई आवेदनों के तहत पता चला है कि श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले कम से कम 80 प्रवासी मज़दूरों की मौत हुई है. केंद्र सरकार के रिकॉर्ड में ये जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसने संसद में इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया.

मोहाली एयरपोर्ट पर सुरक्षाकर्मियों से घिरी अभिनेत्री कंगना रनौत. (फोटो: पीटीआई)

सुशांत-कंगना का सुर्ख़ियों में बने रहना मीडिया की छद्म जनमत निर्माण की बढ़ती ताक़त की बानगी है

मीडिया के पास कुछ हद तक जनमत निर्माण की ताक़त हमेशा से थी, मगर उसकी एक सीमा थी, उनके द्वारा उठाए मुद्दे में कुछ दम होना ज़रूरी होता था. आज हाल यह है कि मीडिया में भारत-चीन सीमा विवाद से ज़्यादा तवज्जो कंगना रनौत विवाद को दी जा रही है.

मुख्यमंत्री बिप्लब देब. (फोटो: पीटीआई)

त्रिपुरा: मुख्यमंत्री के मीडिया को कथित तौर पर धमकाने से नाराज़ पत्रकार, कहा- वापस लें बयान

मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने शुक्रवार को कहा था कि ‘कुछ अति उत्साहित अख़बार’ राज्य में कोविड-19 की स्थिति के बारे में जनता में भ्रम फैला रहे हैं, जिन्हें मैं कभी माफ़ नहीं करूंगा. मीडिया संगठनों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि राज्य सरकार मीडिया को अपना ग़ुलाम बनाने की कोशिश कर रही है.

(फोटो साभार: ट्विटर)

बिहार: 15 साल सरकार में रह चुकी भाजपा के लिए सुशांत सिंह राजपूत की मौत चुनावी मुद्दा क्यों है?

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जांच सीबीआई, ईडी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो कर रहे हैं और तीनों ही केंद्र सरकार के अधीन हैं. केंद्र और बिहार में एनडीए की ही सरकार है. ऐसे में सवाल है कि ‘जस्टिस फॉर सुशांत सिंह राजपूत’ हैशटैग चलाकर बिहार में भाजपा जस्टिस किससे मांग रही है?

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

केरलः कोरोना संक्रमित महिला से अस्पताल के रास्ते में बलात्कार, एंबुलेंस ड्राइवर गिरफ़्तार

घटना पथनमथिट्टा ज़िले में शनिवार रात को हुई. आरोप है कि राज्य के स्वास्थ्य विभाग की 108 एंबुलेंस सर्विस का ड्राइवर कोरोना संक्रमित महिला को अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस एक सुनसान जगह ले गया और बलात्कार किया.

विशेष श्रमिक ट्रेन. (फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए रेलवे ने श्रमिकों से वसूला करोड़ों रुपये किराया

सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को दिए एक आदेश में कहा था कि ट्रेन या बस से यात्रा करने वाले किसी भी प्रवासी मज़दूर से किराया नहीं लिया जाएगा. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार शीर्ष अदालत के निर्देशों के बावजूद रेलवे द्वारा श्रमिक ट्रेनों के यात्रियों से किराया लिया गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली: तबलीग़ी जमात के 8 विदेशी सदस्य आरोपमुक्त, अदालत ने कहा- मरकज़ में होने के सबूत नहीं

दिल्ली पुलिस ने वीज़ा शर्तों के कथित उल्लंघन, धार्मिक प्रचार गतिविधियों में शामिल होने समेत कई आरोपों में क़रीब 955 विदेशियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की थी, जिनमें से 44 ने दिल्ली में केस लड़ा. साकेत अदालत ने इनमें से आठ को बरी किया और बाकी 36 पर से कई आरोप हटा दिए हैं.

एमपीएसडी के बाहर प्रदर्शन करते छात्र. (सभी फोटो: Special Arrangement)

‘हम अभिनय के छात्र हैं और बिना प्रैक्टिकल किए हमारी पढ़ाई पूरी नहीं हो सकती’

भोपाल में मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा के एक वर्षीय अभिनय प्रशिक्षण कोर्स के 2019-20 सत्र के विद्यार्थी बीते दो सप्ताह से अधिक समय से प्रबंधन के ख़िलाफ़ आंदोलनरत हैं. उनका कहना है कि कोरोना के चलते उनके बैच को प्रमोशन देकर नया सत्र शुरू किया जा रहा है जबकि उनका प्रशिक्षण अभी तक पूरा नहीं हुआ है.

New Delhi: Members of the Tablighi Jamaat show victory sign as they leave in a bus from LNJP hospital for the quarantine centre during the nationwide lockdown, in wake of the coronavirus pandemic, in New Delhi, Tuesday, April 21, 2020.

संभावना है कि तबलीग़ी जमात के विदेशी सदस्यों को बलि का बकरा बनाया गया: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने तबलीग़ी जमात के 29 विदेशी सदस्यों के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर रद्द करते हुए कहा कि दिल्ली में जमात के कार्यक्रम में शामिल होने आए विदेशियों के ख़िलाफ़ मीडिया में दुष्प्रचार किया गया और ऐसी छवि बनाने की कोशिश की गई कि ये ही भारत में कोविड-19 फ़ैलाने के ज़िम्मेदार थे.

ग्वालियर शहर में लगे होर्डिंग. (फोटो: दीपक गोस्वामी)

क्या कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लगाए नियम आम जनता और भाजपा के लिए अलग-अलग हैं

पार्टी बदलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पहली बार ग्वालियर पहुंचने पर भाजपा तीन दिवसीय ‘सदस्यता ग्रहण समारोह’ आयोजित कर रही है, जिसमें ग्वालियर-चंबल अंचल के सभी ज़िलों के हज़ारों कार्यकर्ता शामिल होने वाले हैं. कोरोना संक्रमण के प्रसार के मामले में ग्वालियर प्रदेश में तीसरे स्थान पर है.

भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और बांग्लादेश के विदेश सचिव मसूद बिन मोमेन. (फोटो: पीटीआई)

सीमा पर बीएसएफ और भारतीयों द्वारा कथित तौर पर बढ़ती हत्याओं पर बांग्लादेश ने चिंता जताई

भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से मुलाकात के दौरान बांग्लादेश के विदेश सचिव मसूद बिन मोमेन ने लॉकडाउन के कारण प्रभावित बांग्लादेश के तबलीग सदस्यों और 25 बांग्लादेशी मछुआरों की जल्द वापसी का अनुरोध किया.

New Delhi: Migrants take refuge in a school while waiting for transport to reach their native places in different states, during the fifth phase of nationwide lockdown, in New Delhi, Saturday, June 6, 2020. (PTI Photo/Kamal Kishore)(PTI06-06-2020_000124B)

भारत बीते 50 सालों की सबसे भयावह मानवीय त्रासदी के दौर में प्रवेश कर चुका है

अब जब देश में सारी व्यवस्थाएं धीरे-धीरे खुलने लगी हैं, तब ऐसा दिखाने की कोशिश हो रही है कि भूख और रोजी-रोटी की समस्या ख़त्म हो गई है. जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है.