कोविड-19 की दूसरी लहर

कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया तो 6-8 सप्ताह में आ सकती है तीसरी लहर: एम्स प्रमुख

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जब तक बड़ी संख्या में आबादी का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोविड-उपयुक्त व्यवहार का आक्रामक तरीके से पालन करने की आवश्यकता है. उन्होंने संक्रमण के मामलों में बड़ी वृद्धि होने पर कड़ी निगरानी और क्षेत्र-विशेष में लॉकडाउन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.

टूलकिट मामला: ‘मैनिपुलेटेड’ टैग पर ट्विटर इंडिया के एमडी से दिल्ली पुलिस ने की थी पूछताछ

बीते महीने ट्विटर ने भाजपा नेता संबित पात्रा के एक ट्वीट पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगा दिया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने कोविड-19 महामारी से निपटने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब करने के लिए एक ‘टूलकिट’ बनाया है. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने ट्विटर के दिल्ली और गुड़गांव स्थित दफ़्तरों पर छापा मारा था. उस वक़्त सरकार पर ट्विटर को डराने-धमकाने के आरोप भी लगे थे.

छ्त्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रमन सिंह और संबित पात्रा के ख़िलाफ़ टूलकिट मामले की जांच पर रोक लगाई

पिछले महीने भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया था. इस पर कांग्रेस ने भाजपा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बचाने के लिए ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ तैयार करने का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और संबित पात्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

केंद्र को इस समय राजनीति नहीं करनी चाहिए, कोविड से मिलकर निपटने की ज़रूरत: हेमंत सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र ने न तो उचित टीकाकरण मुहिम शुरू करने, न ही ऑक्सीजन वितरण और न ही किसी अन्य चीज़ के लिए प्रबंध किए. ये संदेश दिया कि हमने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जीत ली है. अब इसका ख़ामियाज़ा लोग भुगत रहे हैं. यदि उचित तैयारी होती, तो ऐसे हालात कभी पैदा नहीं होते.

ट्विटर का केंद्र पर डराने-धमकाने का आरोप, सरकार ने कहा- बयान आधारहीन और देश की छवि बिगाड़ने वाला

ट्विटर ने दिल्ली पुलिस के ‘टूलकिट’ जांच मामले में उसके दफ़्तरों में आने को ‘डराने-धमकाने की चाल’ बताया था. इसे लेकर मोदी सरकार ने कहा है कि ट्विटर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर अपनी शर्तें थोपने का प्रयास कर रहा है. वहीं दिल्ली पुलिस ने कंपनी के बयान को सच्चाई से परे बताया है.

टूलकिट विवाद: भाजपा नेताओं के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड’ बताने पर ट्विटर के दफ़्तरों पर छापा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की दो टीमें राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके दिल्ली के लाडो सराय और गुड़गांव में स्थित ट्विटर इंडिया कार्यालयों में गई थीं. स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि ट्विटर के पास टूलकिट के बारे में क्या जानकारी है और उसने कांग्रेस के कथित टूलकिट से संबंधित भाजपा के मुख्य प्रवक्ता संबित पात्रा के एक ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ की श्रेणी का टैग देना क्यों चुना.

‘कांग्रेस टूलकिट’ मामले में भाजपा नेताओं रमन सिंह और संबित पात्रा के ख़िलाफ़ केस दर्ज

बीते भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस संकट काल में विपक्षी दल की ‘गिद्धों की राजनीति’ उजागर हुई है. इस पर कांग्रेस ने भाजपा पर महामारी के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बचाने एवं लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ तैयार करने का आरोप लगाया था.

केंद्र ने ट्विटर से संबित पात्रा के ‘कांग्रेस टूलकिट’ ट्वीट से ‘मैनिपुलेटेड’ टैग हटाने को कहा

बीते साल ट्रंप प्रशासन द्वारा ट्विटर के ख़िलाफ़ इस्तेमाल की गई धमकाने वाली समान भाषा में केंद्र सरकार ने कहा कि अगर ट्विटर आधिकारिक मांगों को नहीं मानता है तो एक ‘मध्यस्थ’ के बतौर उसकी क़ानूनी स्थिति पर सवाल उठ सकता है. सरकार ने यह भी कहा कि ट्विटर ने एकतरफा तरीके से मामले में निष्कर्ष निकाल कर भाजपा नेता के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ की श्रेणी में डाल दिया.

‘कांग्रेस टूलकिट’ संबंधी संबित के ट्वीट को ट्विटर ने ‘तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया’ क़रार दिया

बीते 18 मई को एक कथित टूलकिट के माध्यम से भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया था. कांग्रेस ने इस टूलकिट को फ़र्ज़ी बताते हुए ट्विटर से कहा था कि वह भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी समेत कई भाजपा नेताओं के अकाउंट स्थायी रूप से निलंबित कर दे. कांग्रेस ने इस संबंध में दिल्ली पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी.

कोविड संकट: जब सोशल मीडिया पर लोग मदद मांग रहे थे, तब केंद्रीय मंत्री सरकार के गुणगान में लगे थे

दैनिक भास्कर ने नरेंद्र मोदी सरकार के कैबिनेट के दस मंत्रियों के ग्यारह सौ से अधिक ट्वीट्स का विश्लेषण किया है, जिसके अनुसार कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान इन मंत्रियों ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के ज़रिये एक भी कोविड पीड़ित को ऑक्सीजन सिलेंडर या अस्पताल बेड दिलाने में मदद नहीं की.

कांग्रेस ने ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ को लेकर नड्डा समेत कई भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई

भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस संकट काल में विपक्षी दल की ‘गिद्धों की राजनीति’ उजागर हुई है. वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर कोरोना महामारी के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बचाने एवं लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ तैयार करने का आरोप लगाया है.

गुजरात सरकार ने डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन को मृत्यु प्रमाण पत्र और मौत के आंकड़ों में फ़र्क़ की वजह बताया

गुजराती दैनिक दिव्य भास्कर ने एक रिपोर्ट में बताया है कि राज्य में 1 मार्च से 10 मई के बीच 1.23 लाख मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, लेकिन इस बीच सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 4,218 कोरोना मौतें दर्ज हैं. इस पर गृह राज्यमंत्री प्रदीपसिंह जडेजा ने कहा है कि सर्टिफिकेट के आधार पर मौतों की संख्या बताना सही नहीं है.

संपादकीय: कोविड संकट में सरकार के नाकाम प्रबंधन की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग की ज़रूरत है

कोविड-19 की दूसरी लहर ने जिस राष्ट्रीय आपदा को जन्म दिया है, वैसी आपदा भारत ने आजादी के बाद से अब तक नहीं देखी थी. इस बात के तमात सबूत सामने हैं कि इसे टाला जा सकता था और इसके प्राणघातक प्रभाव को कम करने के लिए उचित क़दम उठाए जा सकते थे.

गुजरात: कथित तौर पर कोविड के ख़ात्मे के लिए दो धार्मिक जुलूस निकाले गए, क़रीब 70 लोग गिरफ़्तार

बीते चार दिनों में गुजरात के दो गांवों में ‘कोविड-19 ख़त्म करने’ के लिए धार्मिक जुलूस निकालने के आरोप में पुलिस ने 69 लोगों को गिरफ़्तार किया है. पुलिस ने कहा कि गांव के लोगों के एक वर्ग का मानना था कि उनके स्थानीय देवता के मंदिर पर पानी डालने से कोविड-19 का ख़ात्मा हो सकता है.

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा- कोविड संक्रमण को रोकने के लिए उठाए गए क़दम ‘पर्याप्त नहीं’

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि यह सच है कि राज्य सरकार द्वारा क़दम उठाए गए हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह पर्याप्त नहीं है और वायरस के प्रसार को रोकने के लिए आगे भी जनता को महामारी के गंभीर प्रभाव के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है. वर्तमान परिस्थितियों में और अधिक प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचा जा सकता है.