गांधी

रामधारी सिंह दिनकर. (जन्म: 23 सितंबर 1908, अवसान: 24 अप्रैल 1974)

दिनकर: कोप से आकुल जनता का कवि

पिछले पांच-छह सालों में दिनकर का कीर्तन वैसे लोगों ने किया है, जिन्हें शायद वे अपनी चौखट न लांघने देते. उनकी ओजस्विता से इस भ्रम में नहीं पड़ जाना चाहिए कि वे हुंकारवादी राष्ट्रवाद के प्रवक्ता थे. वे राष्ट्रवादी थे, लेकिन ऐसा राष्ट्रवादी जो अपने राष्ट्र को नित नया हासिल करता था और कृतज्ञ होता था.

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मैं बोलूं क्या और आप सुनें कैसे?

बात कैसे करें कि सब सुन सकें और वह जो कहा जा रहा है, वही सुनें? सुनने का अर्थ क्या है? बोलने में उम्मीद है कि जो कहा जा रहा है, उसे सुना जाएगा, ऐसा होता नहीं. गले के साथ कानों का पर्याप्त प्रशिक्षण हुआ नहीं. सुनना भी बोलने की तरह ही आपकी नैतिक मान्यताओं से जुड़ा है.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

दक्षिणपंथियों को ‘समाजवादी’ शब्द से इतनी चिढ़ क्यों है?

भाजपा और शिवसेना की ओर से कई बार संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी शब्द हटाने की मांग उठ चुकी है. बीते दिनों संघ के विचारक और राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने इसे हटाने के लिए सदन में प्राइवेट मेंबर बिल लाने की बात कही है.

Tushar Gandhi Twitter Photo

पुणेः दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के बाद कॉलेज में तुषार गांधी का व्याख्यान रद्द

पुणे के मॉर्डन कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स के एक कार्यक्रम में महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी व्याख्यान होना था. कॉलेज का कहना है कि इस बारे में कई दक्षिणपंथी संगठनों से प्रदर्शनों की चेतावनी देते पत्र मिलने के बाद उन्होंने इसे रद्द कर दिया.

New Delihi: An elderly protestor holds a picture of Mahatma Gandhi during a protest against the new Citizenship Act, outside the Jamia Millia Islamia University in New Delhi, Friday, Jan. 3, 2020. (PTI Photo) (PTI1 3 2020 000190B)

‘बापू! आज की सरकार जिन्ना को सच्चा और आपकी धारणाओं को मिथ्या क़रार देने पर आमादा है’

भारत जैसे समृद्ध देश में जहां सभी धर्मों के लोग सम्मान से रहते हैं और आपके द्वारा प्रेरित हमारा संविधान सबको बराबरी का हक़ देता हैं. यहां धर्म के आधार पर शरणार्थियों में विभेद हो रहा है और नागरिकता प्रदान करने में संकीर्ण दायरे से धार्मिक आधार को देखा जाने लगा है बापू! इस नए क़ानून के बाद आपके सहयात्रियों द्वारा गढ़ी गई संविधान की प्रस्तावना बेगानी सी लग रही है.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh (PTI7_16_2017_000260A)

सुप्रीम कोर्ट का महात्मा गांधी को भारत रत्न देने को लेकर दायर याचिका पर विचार करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की अपील से सहमति जताते हुए कहा कि देश की जनता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को किसी औपचारिक सम्मान से परे उच्च सम्मान देती है. सुनवाई से इनकार करते हुए अदालत ने यह भी कहा कि वह इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रतिवेदन दे सकते हैं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi offers flower petals at Mahatma Gandhi bust, at the Sabarmati Ashram, in Ahmedabad, Gujarat on June 29, 2017.

क्या प्रधानमंत्री मोदी गांधी के विचारों की हत्या कर रहे हैं?

गांधी के विचार उनकी मृत्यु के बाद भी संघ की कट्टरता की विचारधारा के आड़े आते रहे, इसलिए अपने पहले कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी के सारे मूल्यों को ताक में रखकर उनके चश्मे को स्वच्छता अभियान का प्रतीक बनाकर उन्हें स्वच्छता तक सीमित करने का अभियान शुरू कर दिया था.

प्रतीकात्मक फोटो (साभार: https://dpsbdn.org)

सड़कों पर नाम-पता पूछने वाला ‘जय श्रीराम’ अब भेस बदलकर स्कूलों में पांव पसार रहा है

मुल्क की सियासत अब ज़्यादा शिद्दत से पहचान की राजनीति के गिर्द नाच रही है. राम को इमाम-ए-हिंद कहने वाले इक़बाल की दुआ को मदरसे की दुआ कहकर सीमित किया जा रहा है, लेकिन देश के बच्चे शायद इक़बाल की दुआ के सबक़ के माने समझ रहे हैं.

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

यह प्रार्थना पर नहीं बल्कि हिंदू समाज के दिलो-दिमाग के सिकुड़ने पर दुख मनाने का वक़्त है

विश्व हिंदू परिषद ने पीलीभीत के एक प्राथमिक विद्यालय के हेडमास्टर पर राष्ट्रगान की जगह इक़बाल की प्रार्थना गवाने का आरोप लगाया. उनसे शिकायत नहीं पर जिलाधीश से है. उन्होंने जिस प्रार्थना के लिए हेडमास्टर को दंडित किया, क्या उसके बारे में उन्हें कुछ मालूम नहीं? क्या अब हम ऐसे प्रशासकों की मेहरबानी पर हैं जो विश्व हिंदू परिषद का हुक्म बजाने के अलावा अपने दिल और दिमाग का इस्तेमाल भूल चुके हैं?

भगत सिंह (फोटो: द वायर)

भगत सिंह को गांधी या नेहरू का विकल्प बताना भगत सिंह के साथ अन्याय करना है

ऐसा लगता है कि भगत सिंह के प्रति श्रद्धा वास्तव में गांधी-नेहरू से घृणा का दूसरा नाम है. जिनके वैचारिक पूर्वज ख़ुद को बचाते हुए अपने अनुयाइयों को भगत सिंह से दूर रहने की सलाह देते हुए दिन गुज़ारते रहे, उन्होंने अपनी कायर हिंसा को उचित ठहराने के लिए आज भगत सिंह को एक ढाल बना लिया है.

Not In My Name PTI Photo

क्या हिंदुत्ववादियों का भारतीय मुसलमानों को लेकर फैलाया गया झूठ हक़ीक़त में बदल सकता है

2014 के बाद से बिना किसी प्रमाण के देश के मुसलमानों को हिंदू-विरोधी और धार्मिक रूप से कट्टरपंथी बताया जा रहा है. लेकिन डर है कि अगले पांच सालों में उनमें से कुछ ऐसे चुनाव कर सकते हैं, जो उनके समुदाय के बारे में गढ़े गए झूठ को वास्तविकता में बदल देंगे.

गुजरात के दांडी में महात्मा गांधी की प्रतिमा. (फोटो साभार: ट्विटर/नरेंद्र मोदी)

बदहवास भारत में भाषा का भसान

जो गांधी के विचारों के समर्थक और शांति के पैरोकार हैं, ख़ुद एक दिमाग़ी बुखार में गिरफ़्तार हैं. हिंसा हमारा स्वभाव हो गई है. हम हमला करने का पहला मौका छोड़ना नहीं चाहते. पढ़ने-सुनने के लिए जो समय और धीरज चाहिए, हमने वह जानबूझकर गंवा दिया है.

(प्रती​कात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कांग्रेस की मौत की कामना करना कितना उचित है?

पिछले पांच साल से देश को कांग्रेसमुक्त करने का आह्वान भाजपा नेताओं के द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन न सिर्फ यह कि वह अप्रासंगिक नहीं हुई, बल्कि इस चुनाव में भी भाजपा के लिए वही संदर्भ बिंदु बनी रही. जनतंत्र की सबसे अधिक दुहाई देनेवाले समाजवादियों को जनसंघ या भाजपा के साथ कभी वैचारिक या नैतिक संकट हुआ हो, इसका प्रमाण नहीं मिलता.

Jallianwala Bagh Manto Wiki

जब मंटो जलियांवाला बाग़ में घंटों बैठकर अंग्रेज़ी हुकूमत के तख़्तापलट के सपने देखा करते थे

जलियांवाला बाग़ नरसंहार ने मंटो को बदल दिया था. मंटो तब सात साल के थे, जब बाग़ का ख़ूनी दृश्य देखा और उसको कहीं अपने भीतर महसूस किया. बचपन की ये कैफ़ियत उनके परिपक्व होने तक भी नहीं निकल पाई. इसके बहुत बाद में जब वे अपने साहित्यिक जीवन की पहली कहानी ‘तमाशा’ लिख रहे थे, तब शायद उसी यातना से गुज़र रहे थे.