गोरखपुर

(फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: क्यों परेशान हैं पूर्वांचल के गन्ना किसान

यूपी के बड़े गन्ना उत्पादक ज़िलों में से एक कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश से हुए जलजमाव के चलते गन्ने की फसल सूखने की ख़बरें आ रही हैं. सरकारी सर्वेक्षण भी बड़े पैमाने पर फसल के नुक़सान की तस्दीक कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक किसानों को किसी तरह की मदद देने की बात नहीं कही है.

मथुरा जेल से रिहा होने के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान. (फोटो: पीटीआई)

क्या रिहाई के बाद और बढ़ सकती हैं डॉ. कफ़ील ख़ान की मुश्किलें

बीते साल ऑक्सीजन हादसे की विभागीय जांच में दो आरोपों में मिली क्लीनचिट के बाद डॉ. कफ़ील ख़ान की बहाली की संभावनाएं बनी थीं, लेकिन सरकार ने नए आरोप जोड़ते हुए दोबारा जांच शुरू कर दी. मथुरा जेल में रिहाई के समय हुई हुज्जत यह इशारा है कि इस बार भी हुकूमत का रुख़ उनकी तरफ नर्म होने वाला नहीं है.

गोरखपुर के सांसद रवि किशन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल. (फोटो: पीटीआई/फेसबुक)

यूपी: गोरखपुर में भाजपा के सांसद और विधायकों के बीच घमासान क्यों मचा हुआ है

बीते दिनों गोरखपुर के एक सहायक अभियंता के तबादले को लेकर गोरखपुर नगर के भाजपा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल और सांसद रवि किशन के बीच खींचतान शुरू हुई थी, जिसमें क्षेत्र के कुछ और विधायक भी शामिल हो गए. लेकिन क्या इस ज़बानी जंग की वजह केवल यह तबादला है?

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

यूपी: मज़दूर की नाबालिग बेटी से बलात्कार, सिगरेट से दागने का आरोप

घटना गोरखपुर के गोला बाज़ार में 14 अगस्त की शाम को हुई. ईंट भट्ठे पर काम करने वाले एक मज़दूर की नाबालिग बेटी हैंडपंप से पानी लेने बाहर गई थी, जब बाइक पर आए दो लोग उसे जबरन उठाकर ले गए और कथित तौर पर उसका बलात्कार किया.

डॉ. कफील खान. (फाइल फोटो: पीटीआई)

15 दिन में तय करें कि डॉ. कफ़ील को रिहा कर सकते हैं या नहीं: सुप्रीम कोर्ट

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पिछले साल दिसंबर में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में 29 जनवरी को डॉ. कफ़ील ख़ान को गिरफ़्तार किया गया था. 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद रिहा करने के बजाय उन पर रासुका लगा दिया गया था.

Gorakhpur Oxygen tragedy Jahid Photo Manoj Singh

‘बेटी को खोए हुए तीन साल हो गए लेकिन अब भी अगस्त आते ही डर लगने लगता है’

विशेष: साल 2017 में 10 से 11 अगस्त के बीच गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से क़रीब 34 बच्चों की मौत हुई थी. जान गंवाने वाले बच्चों में शहर के जाहिद की पांच साल की बेटी ख़ुशी भी थी.

डॉ. कफील. (फोटो साभार: फेसबुक/drkafeelkhanofficial)

क्या ऑक्सीजन कांड में चुप न रहने की सज़ा काट रहे हैं डॉ. कफील ख़ान

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हुए ऑक्सीजन कांड के तीन बरस पूरे हो गए. लेकिन इस दौरान हादसे में ‘विलेन’ बना दिए गए डॉ. कफील ख़ान के अलावा नौ आरोपियों में से कोई इस प्रकरण पर बोलने के लिए सामने नहीं आया. शायद यही वजह है कि इन तीन बरसों में डॉ. कफील ने अधिकतर समय जेल में बिताया है.

(फोटोः पीटीआई)

कोविड-19: उत्तर प्रदेश में लक्ष्य से कम हो पा रही जांच, तेज़ी से बढ़ रहे मामले

उत्तर प्रदेश में बृहस्पतिवार की सुबह तक कोविड-19 के कुल केस 104,388 हो चुके थे. अभी भी एक्टिव केस 41,973 हैं और अब तक 1,857 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है.

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योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण मामले में याचिकाकर्ता को उम्रकैद की सज़ा

गोरखपुर की ज़िला अदालत ने एक गैंगरेप मामले में योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण पर याचिका डालने वाले कार्यकर्ता परवेज परवाज़ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. उनके साथियों का कहना है कि भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ याचिका डालने के चलते उन्हें फ़र्ज़ी मामले में फंसाया जा रहा है.

कानपुर के बिकरू गांव में पुलिसकर्मियों पर हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के हमले के बाद वहां जांच के लिए पहुंचे पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

पुलिस पर विकास दुबे के हमले की जड़ें अपराध की राजनीतिक जुगलबंदी से जुड़ी हैं

कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गए पुलिसकर्मियों की बर्बर हत्या को एक अपराधी के दुस्साहस और पुलिस की रणनीति में कमी तक सीमित करना अपराध-राजनीति के गठजोड़ की अनदेखी करना है. बिना राजनीतिक संरक्षण के किसी अपराधी में इतनी हिम्मत नहीं आ सकती कि वह पुलिस टीम को घेरकर मार डाले और आराम से फ़रार हो जाए.

Kanpur: Police personnel hits a civilian during their protest against the Citizenship (Amendment) Act that turned violent, at Babu Purwa in Kanpur, Friday, Dec. 20, 2019. (PTI Photo) (PTI12_20_2019_000262B)

बिजनौर: सीएए प्रदर्शन के दौरान हुई मौत के मामले में छह पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में 20 दिसंबर 2019 को हुए सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 21 साल के सुलेमान की मौत हो गई थी. एसआईटी ने पुलिसकर्मियों को दोषमुक्त करते हुए सुलेमान को आरोपी ठहराया है और कहा है कि वे प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में शामिल थे.

अचलगढ़ में रह रहा फ्रेंच परिवार. (फोटो: करुणानिधि मिश्र)

दुनिया की सैर पर निकला था फ्रेंच परिवार, लॉकडाउन के चलते यूपी के एक गांव में दो महीने से फंसा है

दुनिया घूमने निकला फ्रांस का एक परिवार मार्च में भारत के रास्ते नेपाल जा रहा था, जब दोनों ही देशों में कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन के कारण वे भारत की सीमा में ही रह गया. बीते दो महीने से वे लोग महराजगंज ज़िले के अचलगढ़ गांव में रह रहे हैं.

(फोटो: पीटीआई)

‘हैदराबाद से गोरखपुर के लिए 73 हजार रुपये में एम्बुलेंस ली थी, पर भाई पहुंचने से पहले ही चल बसे’

गोरखपुर ज़िले के भटहट क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले राजेंद्र और धर्मेंद्र निषाद हैदराबाद में काम करते थे, जहां लॉकडाउन के दौरान राजेंद्र की तबियत बिगड़ी और डॉक्टरों ने जवाब दे दिया. गांव की ज़मीन गिरवी रख और क़र्ज़ लेकर किसी तरह उन्हें घर लाया जा रहा था, जब उन्होंने गांव के रास्ते में दम तोड़ दिया.

A weaver arranges yarn in Phulia, about 80 km north of Kolkata, February 6, 2010. Credit: Reuters/Parth Sanyal

उत्तर प्रदेश: लॉकडाउन में तार-तार हो रही बुनकरों की ज़िंदगी

कुछ दशक पहले तक गोरखपुर और इसके आस-पास के क्षेत्र की पहचान बुनकरों के बनाए कपड़ों से होती थी, लेकिन हथकरघों के बंद होने के बाद पावरलूम के ख़र्च न उठा सकने के चलते कइयों ने यह काम छोड़ दिया. अब लॉकडाउन के दौरान हाल यह है कि पावरलूमों पर पूरी तरह ताला लगा हुआ है और दिहाड़ी कारीगर फ़ाक़ाकशी को मजबूर हैं.

प्राथमिक विद्यालय नगरौली (गौरीबाजार) देवरिया में रह रहे कामगार. (फोटो: धीरज )

उत्तर प्रदेश: सफ़र की तकलीफों के बाद क्वारंटाइन सेंटर की बदहाल व्यवस्थाओं से बेहाल मज़दूर

देश के विभिन्न शहरों से तमाम परेशानियों के बाद अपने गांव पहुंचे मज़दूरों को गांव के स्कूलों में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटरों में रखा गया है. अधिकांश स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय आदि से जुड़ी अव्यवस्थाओं के चलते मज़दूरों का यह ‘एकांतवास’ नए संघर्ष में बदल गया है.