चंपारण सत्याग्रह शताब्दी महोत्सव

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मोतिहारी चीनी मिल: आत्मदाह का एक साल बीता, उम्मीदों में पथराई आंखें

ग्राउंड रिपोर्ट: पिछले साल 10 अप्रैल को बिहार के पूर्वी चंपारन जिला मुख्यालय मोतिहारी में बंद पड़ी चीनी मिल के दो मजदूरों ने सैलरी और किसानों के बकाया भुगतान के मुद्दे पर आत्मदाह कर लिया था.

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बिहार: चंपारन से निलहे चले गए मिलहे आ गए

बिहार के पूर्वी चंपारन जिला मुख्यालय मोतिहारी में बंद पड़ी चीनी मिल के मजदूर करीब 134 महीने की सैलरी और किसानों को गन्ने का बकाया भुगतान दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

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चम्पारन शताब्दी समारोह से नील की ​खेती करने वाला किसान गायब क्यों है?

चम्पारन सत्याग्रह शताब्दी समारोह के शोर के बीच मन में सवाल उठता है कि नील की खेती करने वाले हाड़-मांस के असली किसान, उनका परिवार, उनसे जुड़े लोग आज कहां हैं?

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खोखली भावनाओं की भ्रष्ट श्रद्धांजलि है ‘चंपारण सत्याग्रह’ का शताब्दी समारोह

आज़ादी के बाद किसान अपनी समस्याओं के निदान के लिए गांधी के बताए सत्याग्रह के मार्ग पर चल रहे हैं, पर सरकारों के लिए इसका कोई अर्थ नहीं रह गया है.