चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा

(फोटो: रॉयटर्स)

पदोन्नति में आरक्षण: क्यों सुप्रीम कोर्ट को एम नागराज फ़ैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण देने संबंधित मामले की सुनवाई कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो: पीटीआई)

चीफ जस्टिस ही मास्टर ऑफ रोस्टर, इसमें कोई संदेह नहीं: सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस द्वारा मामलों के आवंटन पर पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की याचिका पर जवाब देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि सीजेआई की भूमिका समकक्षों के बीच प्रमुख की होती है, उन्हें विभिन्न पीठों को मामले को आवंटित करने का विशेषाधिकार होता है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi with the Chief Justice of India, Justice Shri Dipak Misra at the valedictory function of the National Law Day celebrations, in New Delhi on November 26, 2017.

क्या सरकार को हुज़ूर नहीं जी हुज़ूर जज चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट के चार मुख्य न्यायाधीशों और चार पूर्व जजों ने जजों की नियुक्ति पर सरकार के हस्तक्षेप को लेकर चिंता जताई है. ये सभी जज कांग्रेस के महाभियोग के प्रस्ताव को भी ख़ारिज कर चुके हैं. इनका सवाल है कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कॉलेजियम के प्रस्ताव को ठुकराने की अनुमति सरकार को कैसे दे दी?

(L-R) Justices Kurian Joseph, Jasti Chelameswar, Ranjan Gogoi and Madan Lokur address the media at a news conference in New Delhi, India January 12, 2018. PTI

सुप्रीम कोर्ट के भविष्य पर चर्चा के लिए बैठक बुलाएं चीफ जस्टिस, दो वरिष्ठ न्यायाधीशों ने लिखा पत्र

जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखा पत्र.

CJI Dipak Misra

सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के कार्यरत जज को उसके पद से हटाना आसान नहीं है

संविधान में किसी कार्यरत जज को उसके पद से हटाए जाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है. संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर राष्ट्रपति ही उन्हें हटा सकते हैं.

Episode 230_RAW

​जन गण मन की बात, एपिसोड 230: चीफ जस्टिस के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव और नरोदा पाटिया

जन गण मन की बात की 230वीं कड़ी में विनोद दुआ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के ख़िलाफ़ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव और नरोदा पाटिया हिंसा मामले में भाजपा की पूर्व मंत्री माया कोडनानी के बरी होने पर चर्चा कर रहे हैं.

Supreme Court Modi PTI

क्या न्यायपालिका की स्वतंत्रता छीन रही है मोदी सरकार?

केंद्र सरकार पर न्यायिक नियुक्तियों को प्रभावित करने के आरोप लग रहे हैं. बीते कुछ सालों में हुई नियुक्तियों पर गौर करें तो ऐसे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं जो भविष्य की एक ख़तरनाक तस्वीर बनाते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

कुछ शर्तों के साथ ‘इच्छामृत्यु’ की सुप्रीम कोर्ट ने दी इज़ाज़त

पैसिव यूथेनेशिया या निष्क्रिय इच्छामृत्यु वह स्थिति है जब किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित इंसान को मौत की तरफ बढ़ाने की मंशा से उसे इलाज देना बंद कर दिया जाता है.

​​(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश विवाद की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई तभी होगी, जब शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री याचिका दर्ज करके सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी.

Episode 17 (1)

हम भी भारत, एपिसोड 17: जज लोया और न्यायपालिका का संकट काल

हम भी भारत की 17वीं कड़ी में आरफ़ा ख़ानम शेरवानी, जज लोया की मौत और न्यायपालिका में संकट पर वरिष्ठ अधिवक्ता उदय गवारे और सुप्रीम कोर्ट की वकील अवनि बंसल से चर्चा कर रही हैं.

TN PLAIN

जन गण मन की बात, एपिसोड 181: जज लोया और न्यायपालिका में संकट

जन गण मन की बात की 181वीं कड़ी में विनोद दुआ जज लोया की मौत और सुप्रीम के चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से न्यायपालिका में उभरे संकट पर चर्चा कर रहे हैं.

(L-R) Justices Kurian Joseph, Jasti Chelameswar, Ranjan Gogoi and Madan Lokur address the media at a news conference in New Delhi, India January 12, 2018. PTI

बार काउंसिल ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में संकट नहीं, जबकि अटॉर्नी जनरल को संकट जल्द सुलझने उम्मीद

सूत्रों ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों से की भेंट. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी मामले के एक हफ़्ते में सुलझने की उम्मीद जताई.

(फोटो: रॉयटर्स)​​​

न्यायपालिका में दख़लअंदाज़ी के लिए बार काउंसिल ने दलों और नेताओं को चेताया

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत की पूर्ण पीठ को तत्काल विचार करना चाहिए.

(L-R) Justices Kurian Joseph, Jasti Chelameswar, Ranjan Gogoi and Madan Lokur address the media at a news conference in New Delhi, India January 12, 2018. PTI

‘विधिशास्त्र में स्थापित है कि प्रधान न्यायाधीश अन्य न्यायाधीशों के ही बराबर होते हैं’

प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले न्यायाधीशों में से एक जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा कि न्याय और न्यापालिका के हित में यह क़दम उठाया.

Episode 180_RAW

जन गण मन की बात, एपिसोड 180: जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और न्यायपालिका की चुनौतियां

जन गण मन की बात की 180वीं कड़ी में विनोद दुआ सुप्रीम के चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस और न्यायपालिका की चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

न्यायाधीशों की ओर से उठाए गए मुद्दे, न्यायपालिका का आंतरिक मामला: सरकारी सूत्र

उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा शीर्ष न्यायालय में स्थिति ठीक नहीं बताए जाने के बयान पर कांग्रेस ने कहा कि लोकतंत्र ख़तरे में है.

बीते 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने इतिहास में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था कि उच्चतम न्यायालय में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. (फोटोः पीटीआई)

‘जजों का इस तरह मीडिया के सामने आना गंभीर है, इससे चीफ जस्टिस की छवि पर सवाल उठते हैं’

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों के मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाने पर पूर्व न्यायाधीशों और न्यायपालिका से जुड़े विभिन्न लोगों ने अपनी राय साझा की है.

Supreme-Court-Letter-CJI-

पढ़ें: चार सुप्रीम कोर्ट जजों द्वारा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को भेजा गया पत्र

सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने शुक्रवार सुबह मीडिया से बात करते हुए शीर्ष अदालत के काम पर सवाल उठाए हैं, साथ ही उन्होंने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को एक पत्र भेजा है. पढ़ें ये पत्र.

(L-R) Justices Kurian Joseph, Jasti Chelameswar, Ranjan Gogoi and Madan Lokur address the media at a news conference in New Delhi, India January 12, 2018. PTI

इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस, चीफ जस्टिस पर उठाए सवाल

जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को नहीं बचाया गया तो लोकतंत्र नाकाम हो जाएगा.

kancha book

कांचा इलैया की किताब बैन करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

इलैया की किताब बैन करने की याचिका ख़ारिज करते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि हम किताबों पर प्रतिबंध लगाने के लिए यहां नहीं बैठे हैं. किसी किताब को सिर्फ इसलिए बैन नहीं किया जा सकता क्योंकि वो विवादित है.